Saturday, 4 January 2014

MEHAR HAI UPPAR WAALAY KI........!

 हरियाणा ,ज़िला अम्बाला ,गॉंव मण्डौर। ससुराल है मेरा मण्डौर। शहर से करीब २ किलोमीटर की दूरी पर है गॉंव मण्डौर। मॉडल विलेज /आदर्श गॉंव होने के कारण शहरों जैसी सभी सुविधायें हैं इस गॉंव में। पक्की सड़कें ,रात में जलने वाली स्ट्रीट लाइट्स ,व्यवस्थित सिवरेजे सिस्टम ,एक शानदार हर्बल पार्क ,पंचायत घर ,खुले- साफ सुथरे घर और गलियां ,बारात घर ,मिनी स्टेडियम, पशुओं के लिए स्विमिंग पूल की तरह शानदार जोहड़ और सुचारु जल व्यवस्था। क्या क्या नहीं है इस गॉंव में। अगर नहीं है तो शोर शराबा और प्रदूषण।

जनवरी का महीना और कड़ाके की सर्दी का दिन है आज। सर्दी के कारण सूर्य देव के दर्शन सुबह थोड़ी देर से हुए। धूप सेंकने के लिए घर के सामने हर्बल पार्क में चला गया। बिल्कुल शांत वातावरण। पार्क के दूसरे कोने पर जब मेरी नज़र गई। वहाँ दो लोग जोगेंदर और रणधीर पार्क के रखरखाव में मग्न थे। जब मैं उनके नज़दीक पहुंचा तो दोनों काम रोक कर खड़े हो गए। दोनों से दुआ सलाम के बाद मैंने उनके परिवार का हालचाल पूछा तो दोनों एक साथ बोले ,"मेहर है जी ऊपर वाले की ।" दोनों संतुष्ट नज़र आ रहे थे।

गॉंव के लोगों की ये खासियत होती है के एक बार बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ नहीं के उन्होंने सारे परिवार की जानकारी हासिल कर के ही दम लेना है। दौरे बातचीत का सिलसिला चला ही था के गॉंव का ही एक युवा सिम्मी किसी की माँ बहन एक करता हुआ हमारी टीम  में शामिल हो गया। उसने जोगेंदर रणधीर को मुख़ातिब होते हुए अपनी बात जारी रखी ,"चाचा ठेकेदार नू यू चेक दे कै अपने पीसे ले आओ। "सिम्मी की बात सुनते ही जोगेंदर बोला ,"यू ठेकेदार नै मार दिए हम तो। चार चक्कर तो पहले मार लिए। पहलां ई  दे देंदा यो पिसे। "ठेकेदार से किसी पेमेंट के बारे में बातचीत की इन लोगों ने।

दोनों के चेहरे जैसे दमक उठे। जोगेंदर और रणधीर दोनों ठेकेदार को मिलने के लिए अपने साइकिल पर बैठ कर तुरंत रवाना हो लिए। पार्क में अब मैं और सिम्मी रह गए। सिम्मी बोला ,''सरकार ने इन को पार्क के रखरखाव के लिए ठेके पर रखा हुआ है।सिर्फ ४००० हज़ार रूपए महीना मिलते हैं इनको। पिछले तीन महीने से पगार नहीं मिली है। आज अक्टूबर महीने की  तनख्वाह मिलेगी। अब आप ही बताओ कैसे गुज़ारा करते होंगे ये बेचारे !  अपने सवाल का ख़ुद जवाब देते हुए वो फिर बोला ,"ये तो गॉंव में कोई खर्चे नी हैं ,बच्चे सरकारी स्कूल में पड़ते हैं ,बस इसी लिए गुज़ारा चल जाता है। "

इसी बीच सिम्मी के मोबाइल की घण्टी बज गई ,वो फिर से गालियां निकालने लगा। जोगेंदर और रणधीर के पहुंचने से पहले ही ठेकेदार अपने किसी ज़रूरी काम से कहीं चला गया था।

मैं उन दोनों द्वारा मिलने के समय कहे शब्दों को दोहराने लगा ,''मेहर है ऊपर वाले की !"



     

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