Tuesday, 21 January 2014

RAJNITI KA DENGUE....!

भारत में २०१४ में होने वाले आम चुनाव का बिगुल बज चुका है। देश के अलग अलग हिस्सों में अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं। कहीं कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे अध्यापक अपने आप को पक्का किए जाने की मांग कर रहे हैं तो कहीं रोडवेज वर्कर्स ने चक्का जाम कर दिया है। कहीं हेल्थ वर्कर बीमार हुई वयवस्था से नाराज़ हैं तो कहीं पानी बिजली को ले कर प्रदर्शन जारी है।कहीं धर्म जाति के नाम पर आरक्षण  की मांग हो रही है तो कहीं राजनीतिज्ञों के घपलों की जांच की।  और कमाल तो देखिए दिल्ली में तो मुख्यमंन्त्री ही हड़ताल पर बैठा है।

हाल ही में देश के चार राज्यों में इलेक्शन परिणाम क्या आए ! आम आदमी के वोट और इमोशंस पर राज करने वाली पार्टियों के तथाकथित आकाओं को जैसे जनता सुध का बुखार सा लग गया हो।ऐसे लगने लगा है जैसे डेंगू और जनता सुध बुखार एक जैसे हों। उतर से दक्षिण ,पूर्व से पश्चिम सभी जगह डेंगू और देश की राजनीति का ज़िक्र है। दिल्ली में आम आदमी ने किसी के दबाव में आए बिना अपने वोट का इस्तमाल क्या किया। सभी पार्टियों को आम आदमी का ध्यान रखना ज़रूरी लगने लगा है।

सभी राजनीतिक पार्टियों के आका अब आम आदमी के बीच जा कर इस बात की दुहाई देने लगे हैं के वो आम आदमी के दुःख दर्द को बेहतर समझते हैं। क्या सोनिया की कांग्रेस ,हिंदुओं की भारतीय जनता पार्टी ,माया रचित दलितों की बसपा ,मुसलमानों की हिमायती मुलायम की समाजवादी पार्टी या फिर अलग अलग राज्यों में रंग ,भाषा ,जाति ,धर्म और वाणिजय के आधार पर लोगों को ग़ुमराह कर सही राह दिखाने का चश्मा पहनाने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के तो जैसे सांस फूलने लगे है। आम आदमी की टोपी पहन कर दिल्ली की गद्दी पर काबिज होने वाले केजरीवाल की सत्ता लोलुपता तो देखिए अब वो लोगों को अराजकता का पाठ पढ़ाने लगे हैं।

केजरीवाल शायद ये भूल गए हैं के आम आदमी की टोपी मान सम्मान का प्रतीक होती है। अगर वो इसी तरह आम आदमी की टोपी सड़कों पर उछालने लगेंगे तो आम आदमी को दुःख होगा। आज आम आदमी अपनी मूलभूत ज़रूरतों रोटी कपडा और मकान के लिए जूझ रहा है।आप के पास सत्ता आई है ,बेहतर होता यदि केजरीवाल एंड कंपनी इस ओर ध्यान देती।मुझे तो ऐसा लगने लगा है कि आप की  सरकार अपने किए वायदों को पूरा करने में असमर्थ महसूस कर रही है।लगता अब ऐसा है के केजरीवाल एंड कंपनी इसी वजह से लोगों का ध्यान इस और से हटाना चाहती है।

ख़बरदार आप पार्टी ,आप लोगों की भावनाओं के साथ कदापि खिलवाड़ नहीं कर सकते। अब आम आदमी ही ये कहने लगा है के आप असल मुद्दों से भटक गए हैं। ऐसा न हो के जिस आम आदमी ने आप को अपना सरताज बनाया है वही आम आदमी आप पर थू -थू न करने लगे। क्योंकि आम आदमी का पेट धरनों ,प्रदर्शनों या फिर कोरे वायदों से नहीं भरता। आम आदमी को तो काम चाहिए ,रोज़गार चाहिए। आम आदमी तो आम आदमी है। आम आदमी को अगर काम के साथ थोड़ा सम्मान मिल जाए तो वो अपने आप को वैसे ही धन्य मानने लगेगा।   

आम आदमी सावधान !   

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