Tuesday, 21 January 2014

BANTWARA...!

सर्दियों की छुट्टियों में गॉंव जाने का मौका मिला। आज भी यहाँ की ज़िन्दगी शहरों से बिल्कुल अलग है। सादगी ,शान्ति ,संतुष्टि ,सहजता,साफगोही और सच्चाई तो जैसे यहाँ के गहने हैं।सिहंपुर भी बहुत सारे ऐसे गॉंवों की तरह ही है। शहर के नज़दीक है सिहंपुर। शहर का प्रभाव भी इस गॉंव पर साफ़ नज़र आता है।अधिकतर घरों के बाहर खड़ी कारें ,हीरो होंडा मोटर साइकिल ,छतों के ऊपर सूरज की तरह चमकती गोल गोल डिश और घर के अंदर लम्बी चौड़ी एल सी डी सम्पन्नता की गवाह भी हैं।

पंजाब के इस गॉंव सिंहपुर में दो दिन बिताए।मेरे दोस्त सविंदर सिंह ने ख़ूब आवभगत की। रात को बिस्तर में देर से घुसने के बावजूद भी छिंदे ने अलसुबह उठा दिया। सविंदर को प्यार से सभी छिंदा कह कर बुलाते हैं। उठते ही छिंदा कहने लगा ,"क्यों जी चलां सैर पर।" असल में रात को बातों बातों में छिंदे ने सुबह सैर करने की आदत के बारे में मुझे बता दिया था। मैने खिड़की के बाहर झाँका कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। धुंध इतनी के बाहर कुछ नज़र नहीं आ रहा था। मैंने छिंदे को धुंध का हवाला देते हुए रहम करने की गुहार लगाई। असल में ठण्ड भी बहुत थी और मैं रजाई में ही दुबके रहना चाहता था।

 छिंदा कहाँ मानने वाला था।थोड़ी देर के बाद फिर सैर पर चलने के लिए कहने लगा। मुझे पूरा विश्वास हो चला के अब मेरी दाल नहीं गलने वाली। बिस्तर को जल्द वापिस लौटने का वायदा कर जूते बांधे और चल दिया छिंदे के साथ।खेतों के बीच में से निकलते हुए छिंदा बोला,"ये खेत भी कईं सालों के बाद आबाद हुए।" छिंदे की आधी अधूरी बात सुन कर मैंने भी वैसा ही प्रशन किया ,"क्यों ,क्या हुआ।" 

छिंदे को तो जैसे चाबी भर दी गई हो। लगा बताने आबाद हुए खेतों की कहानी ,"राम दास और गंगा राम के खेत हैं ये। पिछले १० साल से केस चल रहा था इन पर। ज़बरदस्त प्यार था दोनों में।भाइयों के प्यार के किस्से दूर-दूर के गावों में सुने और सुनाए जाते थे। न जाने क्या हुआ ,पता नहीं किस की नज़र लगी दोनों भाइयों को-------दोनों एक दूसरे के दुश्मन बन बैठे।" "ऐसा क्या हुआ दोनों के बीच ?" मैंने उत्सुकता से पूछा। "यही तो आज तक किसी को भी पता नहीं चला।" आश्चर्य भरी नज़रों से मेरी और देखते हुए छिंदा बोला। इस से पहले के छिंदा आगे कुछ बताता ,मैंने कहा ,"आम तौर पर औरतों के कारण ऐसे झगड़े होते हैं। "

"यही तो बात है-------हर आदमी ऐसा ही सोचता है। दोनों की औरतें भी भाइयों के इस निर्णय से सकते में थीं। दोनों भाइयों की बीवियों ने भी दोनों को बहुत समझाया के मुट्ठी बंद रहे तो लाख की होती है।अलग अलग हो जाऐंगे तो जग हंसाई होगी। गंगा राम पर जैसे बंटवारे का भूत सवार था।गंगा राम ने बंटवारे के लिए कोर्ट में केस ठोक दिया। कोर्ट में दस साल केस चलने के बाद ज़मीन का बंटवारा हो गया। १० सालों के बाद खेतों में लहराती सरसों को देख कर पूरे इलाके के लोग खुश हैं।" ये बात करते करते छिंदा जैसे शून्य में चला गया।

मैंने छिंदे को कहा ,"ये तो अच्छा हुआ ,सब शांति से निपट गया।" छिंदा जैसे नींद से जगा और बोला,"अच्छा क्या ख़ाक हुआ ! जिस ज़मीन के लिए दस साल लड़ते रहे दोनों भाई, उस का सुख तो नहीं भोग पाए दोनों।" इस से पहले के मैं छिंदे से कुछ पूछता ,छिंदा भरे हुए मन से बोला ,"कोर्ट के फैंसले के ६ महीने के अंदर दोनों पूरे हो गए। इसी ज़मीन में दफ़नाया गया दोनों भाइयों को। "

बात को पूरी करते करते छिंदे की आँखें भर आईं। रोते रोते कहने लगा ,"मैंने तो अपने भाई राजे को बहुत समझाया है। उस की अक्ल पर तो जैसे पत्थर पड़ गए हैं। न जाने उस को क्या हो गया है। दिन रात पीने लगा है। जब ज्यादा पी लेता है तो बंटवारे की बात करने लगता है।"

अपनी बात पूरी करने से पहले ही छिंदा फ़फ़क फ़फ़क कर रोने लगा था !

     

No comments:

Post a Comment