Thursday, 23 January 2014

DHUNDH...!

जैसे जैसे धुंध बढ़ती गई ,परिवार में बैठे सभी लोगों की चिंता भी बढ़ती गई। रीना टीवी के सामने बैठी बार बार चेनल बदल रही थी। लेकिन उसे मौसम की जानकारी कहीं से नहीं मिल रही थी। रिमोट को दूसरे हाथ पर मारते हुए वो बोली ,"ये धुंध को भी आज ही पड़ना था। " बगल में खिड़की के साथ बैठा रीना का छोटा भाई संजय अपने लैपटॉप पर लगातार अपनी अंगुलियां घुमा रहा था। बाहर खिड़की में से झांकते हुए संजय बोला ,"फ्लाइट तीन घंटे लेट है। "

फ्लाइट के लेट होने की खबर सुनते ही संजय के पिता सुंदर लाल अपनी अँगुलियों पर हिसाब करने में व्यस्त हो गए।जब सही हिसाब हो गया तो बोले ,"इस हिसाब से तो शाम के पांच बजे से पहले नहीं पहुंचेगा रवि। " संजय के बड़े भैया रवि पिछले तीन साल से मुम्बई में थे। सभी की चिंता बढ़ती जा रही थी।रसोई में किसी काम में व्यस्त शान्ति भी अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए कमरे  में प्रवेश कर गई और अपने हाथ पोंछते हुए बोलीं ,"अम्मा को भी अभी जाना था , कुछ दिन और रुक जाती तो ये मुसीबत तो न झेलनी पड़ती। ख़ुद तो चली गईं पर इतनी धुंध में सब जो परेशान होंगे उसके बारे में कतई नहीं सोचा !"

ये कहते कहते रीना की माँ दोबारा रसोई में चली गई।रीना ने बड़े भाई रवि को कईं बार फ़ोन पर बताया था के अम्मा की तबियत ठीक नहीं है ,आकर मिल जाता तो अच्छा होता। अम्मा सब से अधिक प्रेम भी रवि से ही करती थी। घर में सब से बड़ा जो ठहरा। अम्बाला में रहते हुए अपनी दादी की ख़ूब सेवा की थी रवि ने।


 रिश्तेदारों और पड़ोसियों का शोक प्रकट करने का सिलसिला शुरू हो चुका था।रीना के दोनों बच्चे पप्पू और बबली दुनिया से बेफ़िकर लुडो पर साँप सीढ़ी खेलने में मस्त थे। बीच बीच में आने जाने वालों को देख भर लेते थे।संजय अपने लैपटॉप पर वयस्त था। अम्मा को मरे अभी कुछ ही घंटे हुए थे। धुंध और कड़ाके की सर्दी के कारण माँ को अपने बेटे और रिश्तेदारों को आने वाली तकलीफ की चिंता थी। पड़ोस में रहने वाले तुली साहब इस बात से सतुंष्ट थे के ढंड के मौसम में लाश को कुछ नहीं होगा।

रीना धुंध के कारण देरी से आए अखबार के पन्ने पलट रही थी। मुख पृष्ठ पर धुंध के कारण एक दिन  पहले एकसिडेंट से चार लोगों की मौत वाली ख़बर से रीना विचलित हो गई थी। लैपटॉप पर व्यस्त संजय को रीना बार बार मौसम की जानकारी लेने को कह रही थी। पड़ोसियों की आवाजाही के कारण टीवी को बंद जो कर दिया गया था।रीना चिंता में थी क्योंकि उसके पति पंजाब से सड़क के रास्ते अकेले गाड़ी ड्राइव कर के आ रहे थे।

 संजय रवि भाई का बेसब्री से इन्तज़ार कर रहा था। भय्या लम्बे समय के बाद जो घर लौट रहा था। भैया संजय के लिए नया लैपटॉप  लेकर आ रहे थे। संजय ने नेट पर जैसे ही मौसम का हाल देखा उसने अपनी बहन को आवाज़ लगाई। संजय ने बिना ये सोचे के लोग घर में शोक प्रकट करने आए हुए हैं  ज़ोर से चिल्लाया ,"ये धुंध जल्द ही छट जायगी और अगले दो दिन तक मौसम साफ़ रहेगा।"

कमरे में साँप सीढ़ी खेल रहे पप्पू और बबली संजय मामा की बात सुन कर ज़ोर से चिल्लाने लगे ,मानो खेल खेल में उनको ही सांप काट गया हो। जब सब ने पप्पू और बबली से रोने का कारण पूछा तो पप्पू रोते रोते बोला ,"धुंध खत्म हो जायगी तो हमारी छुट्टियां आगे नहीं बढ़ेंगी। "

असल में पिछले तीन सालों से ढंड और धुंध की वजह से सर्दियों की छुट्टियों को बढ़ा दिया जाता था। पप्पू और बबली सर्दियों की छुट्टियां मनाने अपने नाना नानी के घर आए हुए थे !          

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