Tuesday, 14 January 2014

BULBUL KA BACHHA...!

डॉ डेंग की दुकान पर आज एक व्यक्ति अपनी कार बेचने के लिए आया। बातचीत में पता चला के उसने एक बरस पहले ही ठेकेदारी का काम शुरू किया था। काम चल निकला था। काम के सिलसिले में इधर उधर जाने के लिए काफी दिक्कत होती थी। एक महीना पहले ही कार खरीदी थी। मैं ऐसे ही पूछ बैठा ,"ऐसी क्या दिक्कत आन पड़ी कार बेचने की।" बिटटू कुछ नहीं बोला। कार बेचने वाले को सभी बिटटू के नाम से ही बुला रहे थे।

बिटटू से ज्यादा मुझे डॉ डेंग जल्दी में नज़र आ रहा था। डॉ डेंग की जल्दी का कारण भी था। कार सस्ते में जो मिल रही थी। एक महीने पहले खरीदी गई कार बिटटू को ५०००० रूपए सस्ते में बेचनी पड़ रही थी। "बाज़ार का ये दस्तूर है के यदि कोई चीज़ खरीदने जायो तो मिलती नहीं और बेचने जायो तो बिकती नहीं", डॉ डेंग ने अपने पार्टनर को कहा। पार्टनर ने भी डॉ डेंग की हाँ में हाँ मिलाते हुए कहा ,"फँसी में है ससुरा वर्ना कहाँ मिलती है ऐसी साफ कार। बिल्कुल बुलबुल का बच्चा है। "

बिटटू बाहर किसी से मोबाइल पर बात कर रहा था। बिटटू अपनी साख़ नहीं खोना चाहता था। उसे अपनी लेबर को तय समय पर पेमेन्ट का भुगतान करना था। पैसे की तंगी के कारण बिटटू घाटे में कार बेच रहा था। लाख यत्न के बाद भी जब बिटटू से लेबर को पेमेन्ट करने के लिए पैसे का इन्तज़ाम नहीं हुआ तो वो कार बेचने पर राज़ी हो गया।

फाइनल डील के बाद डॉ डेंग का पार्टनर बिटटू को अपनापन जताते हुए बोला ,"भाई बिटटू अगर तेरी गाड़ी कहीं महंगी बिकती हो तो तूँ बेच सकता है। मैं तो तेरी हेल्प के वास्ते ये गाड़ी ख़रीद रहा हूँ और वो भी मार्केट रेट पर। अब वो मेरी किस्मत है के ये गाड़ी सस्ती बिको या महंगी। " असल में बिटटू डॉ डेंग के पार्टनर का परिचित था और कुछ समय के लिए पैसे माँगने आया था।

 जब बिटटू पेमेन्ट ले कर डॉ डेंग की दुकान से बाहर निकलने लगा तो भारी मन से बोला ,पिछले दो महीनों में ५०००० हज़ार कमाए थे ,उसी का घाटा हो गया पर शुक्र है के साख़ बच गई। बिटटू के दुकान से बाहर निकलते ही डॉ डेंग और उस के पार्टनर अपनी जीत पर ऐसे खुश हुए मानो उन्होंने कोई क़िला फ़तह कर लिया हो। वो दोनों खुश थे के आज ५०००० हज़ार का फ़ायदा हो गया था।

लगभग २५ साल पहले डिपार्टमेन्ट ऑफ़ इंडियन थिएटर ,चण्डीगढ़ में अलख नंदन जी के निर्देशन में किए एक नाटक "आगरा बाज़ार " में नज़ीर की ये पंक्तियाँ याद आ गई------------

"बैठे हैं सभी दुकाने लगा लगा ,कहता है कोई ले रे ले , कहता है कोई ला रे ला ! "

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