Tuesday, 30 September 2014

STATUE OF MAHATMA

       कल  2 अक्टूबर  को महात्मा गांधी का जन्म दिवस है।
                    झाड़ू लगने शुरू हो गए हैं। फोटोज़ अपलोड होने लगी हैं।
                  एक अरसे के बाद बुतों को साफ़ किया जा रहा है । साफ पानी से नहलाया जा रहा है।     
                  कल महात्मा के बुतों पर मालार्पण के लिए होड़ लगी रहेगी।
                   सड़कों ,बाज़ारो ,मोहल्लों और गलियों में झाड़ू लगाए जाने की प्रतिस्पर्धा सा माहौल होगा । 
                   फोटो खिंचवाए जाएंगे। देश को साफ सुथरा बनाए रखने की कसमें खाई जांएगी। 
                  अख़बारों की सुर्खियां भी यही होंगी। 
                   इस बार लोगों में जोश कुछ ज़्यादा है। देश के प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत का नारा जो दिया है।
                  लोगों को लग रहा है के महात्मा आज खुश होंगे। 
                  "महा आत्मा" आज भी दुःखी और आहत है !
                 क्योंकि सड़कों -गलियों को साफ़ करने के साथ बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ सच में
                 सफाई की ज़रुरत है।  असल में ज़रुरत है मनोवृती बदलने की। 
                 अगर मनोवृती शुद्धिकरण लोगों के " बूते" की बात नहीं है तो देश को हर रोज़ साफ़ करने के 
                कस्मे वायदे तो बरसों से सुनते आ रहे हैं !
              
             

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