सदियों से हम बुराई के प्रतीक "रावण "का पुतला फूंकते आ रहे हैं !
इस बार फिर तैयारी चल रही है, पुतले बनाए जा रहे हैं।
हम पुतले बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते।
क्या ऐसा नहीं हो सकता के हम पुतले बनाएं ही न ताकि हमें इन्हें फूंकने की औपचारिकता न करनी पड़े ?


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