घर के सभी लोग टी वी पर रामायण देखने में व्यस्त थे। 7 - 8 साल का नन्हां कबीर अपनी दादी की गोद में बैठा था। वो बार बार अपनी दादी माँ का पल्लू खींच कर कोई सवाल पूछना चाह रहा था। लेकिन दादी माँ चुप करवा देती। कमर्शियल ब्रेक में दादी माँ ने कबीर की और मुखातिब होते हुए पूछा ,"हाँ अब बता क्या पूछना है तुझे ?" कबीर बोला ,"दादी माँ , वो बन्दर कौन था जो अपनी पूँछ पर आग लगा कर सब कुछ जला रहा था ?" दादी माँ झल्ला कर बोली ,"बेटा ऐसा नहीं बोलते। ये वानर राज भगवान हनुमान हैं और बाकी सभी वानर हनुमान की सेना ! इन्होंने ही मैय्या सीता को बचाने में भगवान राम की सहायता की थी।"
दादी ने आगे बताया के कल घर में हनुमान चालीसा का आयोजन किया जाएगा। अगले दिन घर में हनुमान चालीसा का पाठ चल रहा था। सभी पूजा पाठ में व्यस्त थे। अचानक बाहर शोर हुआ और सभी बाहर की ओर भागे। रसोई में बन रहे प्रसाद पर बंदरों के एक झुण्ड ने धावा बोल दिया था। कोई लाठी तो कोई बम बजा कर बंदरो को डराने लगा। सभी शोर मचाकर बंदरों को भगाने लगे।
कबीर दादी माँ के पल्लू को पकड़ कर ये सब नज़ारा देख रहा था। उसने दादी माँ का पल्लू खींचा । दादी ने कबीर की ओर देखा तो कबीर तुरंत बोला ," दादी माँ ,ये तो प्रभु राम भक्त हनुमान की सेना है न ! फिर सभी इस को भगा क्यों रहे हैं ?"
दादी माँ के पास कबीर के प्रश्न का कोई जवाब नहीं था।
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