लेकिन इस बार बात कुछ अलग है। क्योंकि ख़ुद प्रधानमंत्री झाड़ू लगाने जा रहे हैं। सभी वर्ग के लोगों में इस बात को लेकर चर्चाओं का सिलसिला शुरू हो चुका है। सभी अपने अपने ढंग से इस पर अपने विचार रख रहे हैं। लेकिन सरकारी तबके के लोगों में इस विषय को लेकर कुछ चिंता का माहौल है। सरकारी महकमों में इस बात की सुगबुगाहट है के यदि प्रधानमंत्री झाड़ू लगा रहे हैं तो उन्हें भी झाड़ू लगाने के आदेश आ सकते हैं।
नमालूम इस को लेकर सरकारी फरमान जारी हुआ या नहीं लेकिन सरकारी अवकाश रद्द किए जाने की ख़बर आग की तरह फ़ैल चुकी है। "सरकारी अवकाश" की कुर्बानी पर इस "सफाई अभियान" के मायने उन्हें समझ नहीं आ रहे हैं।
सरकारी तबका मायूस है !
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