एक छोटे से आंदोलन से जनलोकपाल के लिए संघर्ष करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने भी कभी सोचा नहीं होगा के वो दिल्ली के मुख्यमंत्री बन जायेंगे। केजरीवाल टीम ने जिस सादगी और साफगोही से जनता के बीच अपनी पैठ बनाई उस के नतीज़े सब के सामने हैं। दिल्ली के नतीज़ों ने ये सिद्ध कर दिया के राजनीति किसी की बपौती नहीं है।
दिल्ली की जनता ने जिस तरह कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को अंगूठा दिखाया है--------ये साफ़ और स्वस्थ राजनीति के लिए खूब बढ़िया संकेत हैं। "युद्ध और प्यार में सब कुछ सम्भव है " के जुमले को प्रयोग कर आम लोगों की भावनाओं के साथ बलात्कार करने वाली पार्टिओं को जनता ने जिस तरह से सज़ा दी है वो भविष्य़ के लिए शुभ संकेत हैं। कांग्रेस की नीतिओं का विरोध करने वाली आप पार्टी ने कांग्रेस के साथ से सरकार बनाने का जो निर्णय लिया,मेरी नज़र में तो ये भी एक सरहानीय कदम है। ये बिलकुल अपने दुश्मन के घर में घुस कर उसी के गाल पर करारा थप्पड़ जड़ने की तरह है।
बेशक़ कांग्रेस ,भारतीय जनता पार्टी, लेफ्ट , राईट के बड़े बड़े धुरंदरों और लालू,नीतीश ,मुलायम जैसे राजनीति के पंडितों ने केजरीवाल टीम को चुनाव लड़ने का न्यौता दे कर उन का मज़ाक उड़ाने और जाल में फंसाने का प्रयास किया था।लेकिन चुनावी परिणामों ने तथाकथित राजनीतिक धुरंदरों को उनके जाल में फंसा कर उन्हें ही कहीं मुहं दिखाने लायक नहीं रखा।
वायदे हर पार्टी करती है और आम पार्टी ने भी किए हैं। अब देखना ये है के आम पार्टी अपने वायदों को किस तरह पूरा करती है। वैसे असंभव शब्द मूर्खों की डिक्शनरी में होता है। मेरा ये मानना है के अगर नियत साफ़ हो तो असम्भव को भी सम्भव में तब्दील किया जा सकता है। ख़ास बात ये है के आम पार्टी ने जिस तरह अपने झाड़ू से विरोधियों का सफाया किया है वो जनतंत्र /लोकतंत्र को मजबूत ही करेगा। अब तक पार्टी ने जिस तरह से निर्णयं लिए हैं उस से केजरीवाल टीम की नियत में भी कोई खोट नज़र नहीं आता।
राजनितिक विवशता का कमाल देखिए के कांग्रेस को अपने हाथ से ही आम आदमी के लिए झाड़ू लगाना पड़ रहा है। खैर सरकार जितने भी दिन चले ,केजरीवाल को ये नहीं भूलना होगा के उन के सिर पर काँटों का ताज रखा गया है और ये कांटे भी आम जनता के हैं। उन्हें ये कांटे बड़ी संजीदगी से निकालने होंगे ,क्योंकि कांटे निकालते हुए भी कभी कभी कांटे निकलवाने वाला दर्द सहन नहीं कर पाता और गालियां निकालने लगता है।
आने वाले दिनों में क्या होगा ये तो भविष्य़ के गर्भ में छिपा है। लेकिन दिल्ली के परिणामों ने लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है और आम जनता को लोकतंत्र के मायने समझ आने लगे हैं। आम जनता को इसे समझना होगा की जो ताक़त उनके हाथों में है वो भ्रष्ट और धोखेबाज़ों पर समय आने पर झाड़ू फेर कर उन का सफाया कर सकती है।
"शुभकामनायें आम आदमी !"
"शुभकामनायें लोकतंत्र !"
दिल्ली की जनता ने जिस तरह कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी को अंगूठा दिखाया है--------ये साफ़ और स्वस्थ राजनीति के लिए खूब बढ़िया संकेत हैं। "युद्ध और प्यार में सब कुछ सम्भव है " के जुमले को प्रयोग कर आम लोगों की भावनाओं के साथ बलात्कार करने वाली पार्टिओं को जनता ने जिस तरह से सज़ा दी है वो भविष्य़ के लिए शुभ संकेत हैं। कांग्रेस की नीतिओं का विरोध करने वाली आप पार्टी ने कांग्रेस के साथ से सरकार बनाने का जो निर्णय लिया,मेरी नज़र में तो ये भी एक सरहानीय कदम है। ये बिलकुल अपने दुश्मन के घर में घुस कर उसी के गाल पर करारा थप्पड़ जड़ने की तरह है।
बेशक़ कांग्रेस ,भारतीय जनता पार्टी, लेफ्ट , राईट के बड़े बड़े धुरंदरों और लालू,नीतीश ,मुलायम जैसे राजनीति के पंडितों ने केजरीवाल टीम को चुनाव लड़ने का न्यौता दे कर उन का मज़ाक उड़ाने और जाल में फंसाने का प्रयास किया था।लेकिन चुनावी परिणामों ने तथाकथित राजनीतिक धुरंदरों को उनके जाल में फंसा कर उन्हें ही कहीं मुहं दिखाने लायक नहीं रखा।
वायदे हर पार्टी करती है और आम पार्टी ने भी किए हैं। अब देखना ये है के आम पार्टी अपने वायदों को किस तरह पूरा करती है। वैसे असंभव शब्द मूर्खों की डिक्शनरी में होता है। मेरा ये मानना है के अगर नियत साफ़ हो तो असम्भव को भी सम्भव में तब्दील किया जा सकता है। ख़ास बात ये है के आम पार्टी ने जिस तरह अपने झाड़ू से विरोधियों का सफाया किया है वो जनतंत्र /लोकतंत्र को मजबूत ही करेगा। अब तक पार्टी ने जिस तरह से निर्णयं लिए हैं उस से केजरीवाल टीम की नियत में भी कोई खोट नज़र नहीं आता।
राजनितिक विवशता का कमाल देखिए के कांग्रेस को अपने हाथ से ही आम आदमी के लिए झाड़ू लगाना पड़ रहा है। खैर सरकार जितने भी दिन चले ,केजरीवाल को ये नहीं भूलना होगा के उन के सिर पर काँटों का ताज रखा गया है और ये कांटे भी आम जनता के हैं। उन्हें ये कांटे बड़ी संजीदगी से निकालने होंगे ,क्योंकि कांटे निकालते हुए भी कभी कभी कांटे निकलवाने वाला दर्द सहन नहीं कर पाता और गालियां निकालने लगता है।
आने वाले दिनों में क्या होगा ये तो भविष्य़ के गर्भ में छिपा है। लेकिन दिल्ली के परिणामों ने लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है और आम जनता को लोकतंत्र के मायने समझ आने लगे हैं। आम जनता को इसे समझना होगा की जो ताक़त उनके हाथों में है वो भ्रष्ट और धोखेबाज़ों पर समय आने पर झाड़ू फेर कर उन का सफाया कर सकती है।
"शुभकामनायें आम आदमी !"
"शुभकामनायें लोकतंत्र !"
No comments:
Post a Comment