अलविदा २०१३----------------------------
ख़ूब अदभुत रहा वर्ष २०१३।
हमेशा की तरह कईं खट्टी मीठी यादें जुड़ी इस बरस भी ।
घर में माँ बाप ,पत्नी और बच्चों का भरपूर प्रेम और सहयोग मिला।परिवार व रिश्तेदारों से बढ़िया सामजस्य बना रहा।
दोस्तों की चंडाल चौंकड़ी का भी भरपूर सहयोग बना रहा।
शंटी पहले ही साथ छोड़ गया था और बिंदा इसी वर्ष दलबदल कर शंटी की टीम में शामिल हो गया।
महफिलें साल भर जमती रहीं।
समीर बड़ी बेटी की शादी कर गंगा नहा लिया।
राहुल की ज़िन्दगी में काफी उतार चढाव रहे। कभी ट्रांसपोर्ट की चिंता तो कभी नौकरी की परेशानियां। फिर भी पार लगता रहा।
भाटिया साब उर्फ़ प्रकाश वीर उर्फ़ वीर प्रकाश अपनी स्पेयर पार्ट्स की दूकान में अपने छोटे भाई संजू और नए पार्टनर सिंधी के साथ मस्त और वयस्त रहे। डेंगू की पकड़ में भी आए पर जैसे उन की तो लॉटरी लग गई हो। दुकान से छुट्टी कर के लगभग १ महीना आराम किया।
चौधरी साब के बेटे का आई आई टी इलाहबाद दाखिला हो गया। बेटे के चककर में दो बार इलाहबाद घूम आए। सब दोस्तों ने ख़ूब दावतें उड़ाई। तबियत नासाज़ रहने लगी है चौधरी साब की आजकल।
बबलू का इस् साल चावलों का बिसनेस चल निकला। नया हीरो मोटर साइकिल खरीद लिया।
लाली कभी कभी मिलता रहा। इस बात की चर्चा पूरे वर्ष रही के "मोटी मुर्गी आण्डा छोटा देती है। "असल में जब से लाली उर्फ़ मनमोहन सिंह की लाखों रूपए की ज़मीन बिकी वो पैसे खर्च करने में कंजूसी बरतने लगा था।
मोहिंदर इस बार दीपावली पर मुम्बई से करनाल नहीं आया।
फेस बुक के ज़रिए कुछ नए पुराने दोस्तों से मुलाकात हुई। जे पी ,मल्होत्रा संजय ,उपिंदर कौशल उर्फ़ बबलू फेस बुक के ज़रिए ही मिले।
पम्मी अपने बाप की मौत के बाद बिल्कुल बदल गया। बाप लाखों रूपए, जायदाद ,शेयर और बैंक बैलेंस छोड़ गया। बाप ताउम्र पम्मी को समझाता रहा के कोई अच्छी नौकरी कर ले। पम्मी ठहरा पम्मी -----बाप की एक ना मानी। कईं बिज़नेस किए लाखों का घाटा खाया पर नौकरी नहीं की। बाप क्या गया पम्मी किसी डॉक्टर के पास नौकर हो गया।
काम्बोज ने अपनी गॉंव की ज़मीन बेच कर शहर में थोड़ी सी जगह खरीद ली। आजकल उस पर कंस्ट्रक्शन करवाने में व्यस्त है। दाड़ी ख़ूब बढ़ा रखी है जो कतई अच्छी नहीं लगती।
नवीन की प्रॉपर्टी की दुकान पर काम करने वाला रवि अपनी मेहनत और लग्न से ख़ुद प्रॉपर्टी डीलर हो गया है। नवीन माया के चक्कर में न जाने कहाँ खो गया है।
एडवोकेट भारद्वाज शराब छोड़ गया है। एक दिन दारू के नशे में गाड़ी ठोक दी और एक रात हवालात में काटनी पड़ी। वो दिन और आज का दिन पंडित जी ने दारु को छुआ तक नहीं।
टिड्डा उर्फ़ सहगल फिर यार हो गया है। दारु के नशे में एक दिन वैसे ही उलझ गया और मूँछ का सवाल बना बैठा।
पण्डत उर्फ़ सीमान्त शर्मा इक नई दुनिया में ८० गुणा १०० के चक्कर में रहता है।
डॉ डेंग ने कईं सालों से सपने संजो कर रखे थे के बेटा जब भी ऑस्ट्रेलिया से लौट कर आए गा तो धूमधाम से उस की शादी करेंगे। आज ही ख़बर आई है के आशु ने वहीँ किसी गोरी मेम से शादी कर ली है। वो बाप बनने वाला है और डॉ डेंग दादा। डॉ डेंग ख़ुशी मनाने की बजाय उदास है। नामालूम पार्टी कब होगी। सब उसकी पार्टी का इंतज़ार कर रहे हैं।
इन खट्टे मीठे संस्मरणों के बीच समीर के फ़ोन की घंटी बजने लगी है। डॉ डेंग पार्टी दे न दे नए बरस २०१४ के आगमन व स्वागत के लिए पार्टी की तैयारी है।
आप सब के लिए भी नववर्ष मंगलमय हो !
ख़ूब अदभुत रहा वर्ष २०१३।
हमेशा की तरह कईं खट्टी मीठी यादें जुड़ी इस बरस भी ।
घर में माँ बाप ,पत्नी और बच्चों का भरपूर प्रेम और सहयोग मिला।परिवार व रिश्तेदारों से बढ़िया सामजस्य बना रहा।
दोस्तों की चंडाल चौंकड़ी का भी भरपूर सहयोग बना रहा।
शंटी पहले ही साथ छोड़ गया था और बिंदा इसी वर्ष दलबदल कर शंटी की टीम में शामिल हो गया।
महफिलें साल भर जमती रहीं।
समीर बड़ी बेटी की शादी कर गंगा नहा लिया।
राहुल की ज़िन्दगी में काफी उतार चढाव रहे। कभी ट्रांसपोर्ट की चिंता तो कभी नौकरी की परेशानियां। फिर भी पार लगता रहा।
भाटिया साब उर्फ़ प्रकाश वीर उर्फ़ वीर प्रकाश अपनी स्पेयर पार्ट्स की दूकान में अपने छोटे भाई संजू और नए पार्टनर सिंधी के साथ मस्त और वयस्त रहे। डेंगू की पकड़ में भी आए पर जैसे उन की तो लॉटरी लग गई हो। दुकान से छुट्टी कर के लगभग १ महीना आराम किया।
चौधरी साब के बेटे का आई आई टी इलाहबाद दाखिला हो गया। बेटे के चककर में दो बार इलाहबाद घूम आए। सब दोस्तों ने ख़ूब दावतें उड़ाई। तबियत नासाज़ रहने लगी है चौधरी साब की आजकल।
बबलू का इस् साल चावलों का बिसनेस चल निकला। नया हीरो मोटर साइकिल खरीद लिया।
लाली कभी कभी मिलता रहा। इस बात की चर्चा पूरे वर्ष रही के "मोटी मुर्गी आण्डा छोटा देती है। "असल में जब से लाली उर्फ़ मनमोहन सिंह की लाखों रूपए की ज़मीन बिकी वो पैसे खर्च करने में कंजूसी बरतने लगा था।
मोहिंदर इस बार दीपावली पर मुम्बई से करनाल नहीं आया।
फेस बुक के ज़रिए कुछ नए पुराने दोस्तों से मुलाकात हुई। जे पी ,मल्होत्रा संजय ,उपिंदर कौशल उर्फ़ बबलू फेस बुक के ज़रिए ही मिले।
पम्मी अपने बाप की मौत के बाद बिल्कुल बदल गया। बाप लाखों रूपए, जायदाद ,शेयर और बैंक बैलेंस छोड़ गया। बाप ताउम्र पम्मी को समझाता रहा के कोई अच्छी नौकरी कर ले। पम्मी ठहरा पम्मी -----बाप की एक ना मानी। कईं बिज़नेस किए लाखों का घाटा खाया पर नौकरी नहीं की। बाप क्या गया पम्मी किसी डॉक्टर के पास नौकर हो गया।
काम्बोज ने अपनी गॉंव की ज़मीन बेच कर शहर में थोड़ी सी जगह खरीद ली। आजकल उस पर कंस्ट्रक्शन करवाने में व्यस्त है। दाड़ी ख़ूब बढ़ा रखी है जो कतई अच्छी नहीं लगती।
नवीन की प्रॉपर्टी की दुकान पर काम करने वाला रवि अपनी मेहनत और लग्न से ख़ुद प्रॉपर्टी डीलर हो गया है। नवीन माया के चक्कर में न जाने कहाँ खो गया है।
एडवोकेट भारद्वाज शराब छोड़ गया है। एक दिन दारू के नशे में गाड़ी ठोक दी और एक रात हवालात में काटनी पड़ी। वो दिन और आज का दिन पंडित जी ने दारु को छुआ तक नहीं।
टिड्डा उर्फ़ सहगल फिर यार हो गया है। दारु के नशे में एक दिन वैसे ही उलझ गया और मूँछ का सवाल बना बैठा।
पण्डत उर्फ़ सीमान्त शर्मा इक नई दुनिया में ८० गुणा १०० के चक्कर में रहता है।
डॉ डेंग ने कईं सालों से सपने संजो कर रखे थे के बेटा जब भी ऑस्ट्रेलिया से लौट कर आए गा तो धूमधाम से उस की शादी करेंगे। आज ही ख़बर आई है के आशु ने वहीँ किसी गोरी मेम से शादी कर ली है। वो बाप बनने वाला है और डॉ डेंग दादा। डॉ डेंग ख़ुशी मनाने की बजाय उदास है। नामालूम पार्टी कब होगी। सब उसकी पार्टी का इंतज़ार कर रहे हैं।
इन खट्टे मीठे संस्मरणों के बीच समीर के फ़ोन की घंटी बजने लगी है। डॉ डेंग पार्टी दे न दे नए बरस २०१४ के आगमन व स्वागत के लिए पार्टी की तैयारी है।
आप सब के लिए भी नववर्ष मंगलमय हो !
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