Thursday, 24 December 2015

"सैंटा "

"सैंटा "
क्रिसमस का दिन था। छुट्टी के दिन कईं दिनों के बाद मैं आज घर पर था। अपने कमरे में बैठा लैपटॉप पर अंगुलियां चला रहा तो सहसा बाहर से कुछ आवाज़ें सुनाई दीं। अब्बा और माँ आँगन में धूप सेक रहे थे। माँ बार बार अब्बा को हलवा बनाने के लिए  कह रही थीं। माँ के बनिस्पत अब्बा का रसोई में दखल ज़्यादा रहता था। बातों से ऐसा लग रहा था मानो आज तो किसी ज़िद्दी बच्चे की तरह माँ अड़ ही गई कि हलवा ही खाएंगी। अब्बा के आगे दाल न गली तो अपनी बहु को बार -बार कहने लगीं के हलवा खाने का बहुत मन है। बहु ने लाख समझाया के आप की तबियत ख़राब है। साँस और शुगर की दिक्कत है ,इसलिए हलवा न ही खाएं तो बेहतर होगा। पर माँ तो माँ हैं कहाँ मानने लगी। खूब बहस हुई। जीत माँ की ही हुई। माँ की ये जीत पहली ना थी। दस -पंद्रह दिन में माँ कुछ नया खाने की फरमाइश कर ही देतीं। कभी खीर तो कभी हलवा। कभी चना पूरी तो कभी गुरु कृपा वाले के घी में लपा लप करते भटूरे। अपने इस खानपान में बदलाव का माँ कोई न कोई तर्क भी ज़रूर देती। गुरुपर्व , जन्माष्टमी , शिव रात्रि , दीपावली , दशहरा हो या कोई और त्यौहार ,अमावस हो या फिर पूर्णमाशी माँ को ये दिन खूब याद रहते। माँ किसी न किसी पर्व की दुहाई देतीं और ऐसे में बहु को ही पराजित होना पड़ता। कई बार कमाल तो ये होता के अगर माँ की मन पसंद चीज़ माँ को न परोसी जाती तो भूख हड़ताल की धमकी दे माँ मौन व्रत पर भी चली जातीं। माँ की ये ख़ास फरमाइश रविवार वाले दिन या फिर कभी बहू की छुट्टी वाले दिन तो ज़रूर ही होती।  अपने कमरे में बैठा दोनों के बीच इस शीत युद्ध के डायलॉग सुन मुस्कुरा रहा था। ऐसे में किसी एक का पक्ष लेने का मतलब होता युद्ध के रुख को अपनी ओऱ मोड़ना। ठण्डी के मौसम में गर्म -गर्म रजाई से लिपटे हुए मैं इस आग में थोड़ी सी फूँक मार कर आग को भड़काने का काम भी कर सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि बार बार हलवे का ज़िक्र सुनते -सुनते मेरे भी मुहँ में भी पानी आने लगा था। अंततः मैंने युद्ध में कूदने की बजाय  युद्ध विराम ही बेहतर समझा। मुझे समझ नहीं आ रहा था के माँ आज क्रिसमस पर्व को कैसे भूल गई थीं। मैने अपनी बीवी को बोला ,"भई आज christmas है ,हलवा तो बनता है। " क्रिसमस का नाम सुनते ही माँ का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। अधिकतर माँ के उल्टे पुल्टे तर्कों का मैं विरोध ही करता और मुझे माँ की गालियों का रसास्वादन करना पड़ता था।  बीवी ने रसोई की ओर जाते हुए माँ से नज़रें चुरा आँखों को तिरछा कर के गुस्से और प्यार के तड़के वाली मुस्कराहट से मेरी तरफ देखा और हलवा बनाने के लिए रसोई में जा घुसी। बीवी की ये मुस्कुराहट मेरे लिए किसी "सैंटा" के तोहफे से कम न थी !

Saturday, 24 October 2015

राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )

                                                राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )
आज देश में जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। पशु मांस को लेकर जिस तरह आदमी का आदमी दुश्मन हुए जा रहा है। पुरस्कारों को लौटने का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी को लेकर जिस तरह से पंजाब थम सा गया है। विरोध करने के चक्कर में जिस तरह काली होली खेली जा रही है। जिस तरह आम आदमी के लिए रोज़मर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।  दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों मुनासिब दाम नहीं मिल रहे। बॉर्डर पर पाकिस्तान जिस तरह गोलाबारी किए जा रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लिए जिस तरह असुरक्षा बढ़ती जा रही है। जिस तरह देश के अलग अलग कोनों से कमज़ोर वर्ग पर उत्पीड़न और अत्याचार के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। पढ़े -लिखे युवा वर्ग को जिस तरह रोज़गार या स्वरोज़गार  के लिए दर - ब -दर धूल फांकनी पड़ रही है । जहाँ शिक्षा का स्तर गिरने के समाचार हैं । जिस तरह अख़बार की सुर्खियां हत्याएं और बलात्कार बनती जा रही हैं।  हरियाणा में दलित परिवार के दो नन्हें बच्चों को जिस तरह ज़िंदा जला दिया गया है। उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
यहाँ मुझे बेर्टोल्ट ब्रेष्ट द्वारा कही वो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं जिसमें वो कहते हैं कि आज राजनीति को समझने  की ज़रुरत है , "सबसे जाहिल व्यक्ति वह है जो राजनीतिक रूप से जाहिल है। वह कुछ सुनता नहीं, कुछ देखता नहीं, राजनीतिक जीवन में कोई भाग नहीं लेता। लगता है उसे पता नहीं कि जीने का खर्च, सब्ज़ि‍यों की, आटे की, दवाओं की क़ीमत, किराया-भाड़ा, सब कुछ राजनीतिक फ़ैसलों पर निर्भर करता है। वह तो अपने राजनीतिक अज्ञान पर गर्व भी करता है, और सीना फुलाकर कहता है कि वह राजनीति से नफ़रत करता है। उस मूर्ख को पता नहीं कि राजनीति में उसकी ग़ैर-भागीदारी का ही नतीजा हैं वेश्या एँ, परित्यक्त बच्चे़, लुटेरे और इस सबसे बदतर, भ्रष्ट अफ़सर तथा शोषक बहुराष्ट्रींय कंपनियों के चाकर।"  
यदि आप बेर्टोल्ट  पर यकीन नहीं करते तो जल्दी से किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ लाओ जिसे नज़र उतारना या झाड़ फूँक आता हो । हो सकता है मेरे देश को किसी की नज़र लग गई हो ! जल्दी से इस की नज़र उतार लो भाई !

Friday, 9 October 2015

राम झूठ न बुलवाए ! (Part -4 )

                                                                राम झूठ न बुलवाए !(Part -4 )
                                                                  सब गोलमाल है ! 


  • राम झूठ न बुलवाए…! 
  • समझ नहीं आ रहा के अपनी बात कहाँ से शुरू करूं । पूरे देश में आह्कार मचा हुआ है। दिल्ली से सटे गांव दादरी में एक मुस्लिम इकल्लाहक की हत्या इस लिए कर दी गई क्यों की गांव में ये अफवाह फ़ैल गई थी के उनके घर में गौ मांस खाया जा रहा है । अफवाहें बहुत ख़तरनाक़ होती हैं ये हम सभी को समझना होगा !
  • गौ हत्या की अफवाह से गांव के ही लोगों द्वारा अपने ही गांव के मुस्लिम की हत्या ने पूरे भारत में ये असर डाला है कि हिन्दू मुस्लिम के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। उतरप्रदेश में समाज पार्टी के मुखिया के क्षेत्र मैनपुरी में गाय मांस को लेकर अहिंसा भड़क गई है। हर जगह बस गौ मांस की चर्चा है। ऐसा लगता है मानो देश के मूल मुद्दे खत्म हो गए हों ! 
  •  बिहार के चुनावों ने इस मुद्दे  के लिए आग में घी का काम किया है। बिहार में सभी नेता कपड़ों से बाहर हो रहे हैं। अपने कपड़े डालने के बजाय दूसरों के कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है। कहीं लालू के बच्चों के जन्म तो कहीं पासवान की पत्नी के नाम पर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कोई शैतान तो कोई ब्रह्म पिशाच हो गया है। देश और देश की जनता जाए भाड़ में ! सत्ता हासिल करने के लिए अपुन कुछ भी करेगा !
  • राजनीति का स्तर इतना  "Cheap" हो गया है कि सब जगह मुद्दा "बीफ़" हो गया है !
  •  हद तो देखिए जम्मू कश्मीर में एक मुस्लिम नेता ने बीफ पार्टी ही दे डाली और विधान सभा में पिटाई हो गई। ऐसा लगने लगा है जैसे विधान पालिका मसलों का हल करने के बजाय अखाड़े हो गए हैं !
  • MNC Nestle की मैग्गी बंद हो चुकी है। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने अपनी मैग्गी लॉन्च कर दी  है। बाबा जी की कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की सेल के लिए बिग बाज़ार से करार कर लिया है। "Make in India" कामयाब होता नज़र आ रहा है !
  • ग़ुलाम अली साहब के ग़ज़ल के दो प्रोग्राम (मुंबई और पुणे) cancel हो गए है। मुंबई में शिव सेना की धमकी के बाद ग़ुलाम अली के ये प्रोग्राम रद्द किए गए हैं । ख़बर है के दिसंबर में  दिल्ली में उनके शो का आयोजन किया जायगा।  कला और संस्कृति पर धार्मिक उन्माद का असर साफ़ दिखाई देने लगा है !
  • दिल्ली के मुख्य मंत्री केजरीवाल द्वारा आम पार्टी की सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान को घूस मामले में बर्खास्त कर दिया गया है । इसी सरकार का एक मंत्री अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में हवालात काट कर ज़मानत पर चंद दिन पहले ही छूटा है । किस पर विश्वास करें किस पर न करें कुछ समझ नहीं आ रहा !
  •  मैं अपने शहर करनाल की बात ज़रूर करना चाहूंगा। पुलिस सवेंदनशील हो रही है ये दावे करनाल के स्मार्ट सिटी बनने के बाद लगातार किए जा रहे हैं। हर रोज़ स्कूल जाते हुए रास्ते में लड़कियों के एक स्कूल के सामने से गुज़रना होता है। इसके समीप कुछ गुंडा किस्म के लोगों का झुण्ड जमने लगा था।  सुबह स्कूल जाती लड़कियों पर ये लड़के फब्तियां कस्ते दिखाई दिए । मुझ से रहा नहीं गया। मैंने रास्ते में खड़ी एक पुलिस वैन को जब इस बारे बताया तो वहां तैनात दोनों पुलिस वालों  ने करीब 500 मीटर की दूरी पर जाने के लिए इस लिए मना कर दिया क्योँकि वो एरिया उनके अंडर नहीं आता था। पुलिस कब स्मार्ट होगी ये समझ से परे है !
  •  ज़रा संभल के देश के नेता सधे हुए कलाकार हैं। रंगीन सपने दिखाने में ये सिद्धहस्त हैं। आप को आपस में लड़वाने की कला इन्हें खूब आती है। चुनावों के बाद ये सब एक हो जाते हैं। एक दूसरे पर ज़हर उगलने वाले इन नेताओं को किसी भी नेता के बच्चों की शादी की album में गले मिलते हुए आप जब मर्ज़ी देख सकते हैं। 
  •  ध्यान रहे सब गोलमाल है !
  •  यहाँ मैं मीर तक़ी मीर साहेब का शेर आप की नज़र करना चाहूँगा : 
               यारो मुझे मुआफ़ रखो मैं नशे में हूँ 
               अब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ ...

Monday, 5 October 2015

A LETTER- EK CHITHEE(Part-37)

 अक्टूबर महीने की शुरुआत हो गई है। मौसम में थोड़ी ठंडक शुरू हो चुकी है । घर के पीछे आँगन में बिल्ली और उसके तीन "बलूँगड़ों " को धूप में बैठना अच्छा लगने लगा है ।
 पिछली बार 6 सितमबर को चिठ्ठी लिखी थी । अगस्त महीने में राखी का त्यौहार भी था । बहन भाई के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन पूरे भारत में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।  इस त्यौहार का मुझे तो बेसब्री से इंतज़ार रहता  है।  भागम् भाग भरे इस युग में भाई बहन और दूसरे रिश्तेदारों से मिलना हो जाता है । मण्ढौर मेरा ससुराल है । वहां भी जाना होता है ।हर साल 20 से 25 लोगों का जमावड़ा वहां अपने आप एक महोत्सव जैसा माहौल बना देता है ।
इस बार मेरी पत्नी की बुआ के घर भी जाना हुआ । वो अम्बाला जिला के गोली गांव में रहती हैं । सादगी और संयम से भरपूर इस परिवार में मेरी पत्नी के फूफा ,बुआ उनके बेटे ,पुत्रवधु ,पोते राजदीप और पोतीयों नवदीप और नीरज से मिलना हुआ ।
अच्छा लगा कि गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई के प्रति सीरियस होने लगे हैं ,बड़ी बिटिया ने अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिए है और दूसरी बेटी एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग कर रही है ।

अपनी चिठ्ठी में  कर्ण पब्लिक स्कूल का ज़िक्र न करूँ तो  है तो ऐसा लगता है जैसे कि कुछ छूट सा गया है। पिछले दो महीने स्कूल में बच्चों के लिए बहुत सारी एक्टिविटीज का आयोजन किया गया । मेहंदी ,रंगोली ,भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।
हिंदी व अध्यापक दिवस के साथ -साथ छोटे बच्चों के लिए "एप्पल डे " और "बनाना डे " मनाया गया जिसमें बच्चों को फलों के महत्व के बारे में बताया गया । 
27 सितम्बर को "निफा " व  " सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट " के बैनर तले शहीद -ए - आज़म "भगत सिंह " के जीवन पर आधारित एक लाइट एंड साउंड ड्रामा " A Misunderstood Hero " को निर्देशित करने का मौका मिला। Nifaa का सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थापित नाम है। इस संस्था के ' गिनीज़ Book ऑफ़ रिकार्ड्स " में तीन रिकार्ड्स दर्ज हैं। लम्बे अर्से के बाद एक अच्छी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। इस बार मैंने नाटक को ख़ूब मस्ती से किया। कुछ अच्छे लोगों के साथ काम करने का अनुभव लम्बे अरसे तक याद रहेगा। "नोनीत " ने नाटक की बहुत बढ़िया photos  क्लिक की। Noneet निफ़ा का कर्मठ सदस्य है। निफ़ा के सभी सदस्यों की कार्यशैली ने भी प्रभावित किया।

  इस शो में भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने भी शिरकत की। Nifaa के संचालक प्रितपाल सिंह पन्नू ने बताया कि इस नाटक के shows भारत व विदेश में भी किए जाएंगे।
पिछले दिनों  शहर में आयोजित एक कार्यक्रम "राहगिरी "में जाना हुआ। बहुत दिनों के बाद किसी कार्यक्रम जाना अच्छा लगा। कोई फॉर्मेलिटी नहीं ,कोई बंधन नहीं ! समीर भाई का  राहगिरी में जाने का प्रस्ताव था। मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि मैं अकेला कैसे जाऊँगा तो मैं भी तैयार हो लिया।
राहगिरी का "चौथा" शो था। हरियाणा के मुख्य मंत्री ने भी राहगिरी की। ज़बरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद भी वो आम आदमी की तरह मस्ती करते नज़र आये।  वो सभी जगह मस्त अंदाज़ में बच्चों के साथ photos खिंचवाते नज़र आए। 
राहगिरी का "छठ पर्व " सैक्टर -12  भी  मनाया जा चुका है। खुसफ़ुस ये भी है कि पुलिस फ़ोर्स के जवान इसे बिना बात की सिरदर्दी मान रहे हैं। ऊँची आवाज़ में बजते फ़िल्मी गानों का शोर जहाँ जहाँ होता है ,वहीँ पर भीड़ ज़्यादा नज़र आती है । यदि संचालक इस प्रोग्राम की रूपरेखा को थोड़ा व्यस्थित करने में कामयाब हो जाते हैं तो उभरते कलाकारों (गीत /संगीत /अभिनय /नृत्य ) के लिए ये मंच कारगर साबित हो सकता है।
एक लम्बे समय से बीमार चल रहे हमारे पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता जी प्रभू चरणों में लीन हो गए। हंसमुख व्यक्तित्व के धनी व कभी हार न मानने वाले मेहंदीरत्ता जी की उनके बेटे अनिल व बॉबी ने खूब सेवा की। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
 डेंगू ने शहर के लगभग सभी इलाकों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। सरकार डेंगू पर कंट्रोल करने में असफल रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले चांदी कूट रहे हैं। सरकार अपने चिर परिचित अंदाज़ में ये दावे कर रही है कि,"स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंतरण में है। "
नासा की एक रिपोर्ट में कहा  गया है कि 15 नवंबर से 30 नवंबर तक दिन में भी अँधेरा छाया रहेगा। अगर ऐसा होता है तो ये देखना अपने आप में एक अजब संजोग होगा।
चिट्ठियां लिखने का सिलसिला यूं ही बना रहे। यहाँ मैं " फैज़ अहमद फैज़ " साहब का शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
हम परवरिश - ए - लौह - ओ  - क़लम करते रहेंगे 
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे। 
दोस्तों फिर मिलते हैं ! शुभकामनाएं !


Sunday, 6 September 2015

A LETTER...EK CHITHEE (PART-36) राहगिरी !

राहगिरी !

दोस्तों चलो थोड़ी राहगिरी हो जाए। 
मेरा शहर करनाल स्मार्ट सिटी हो गया है। हाल ही में देश में कुल 98 शहरों के साथ मेरे शहर को भी स्मार्ट घोषित किया जाना सच में गर्व की बात है। शहर में दूसरे बड़े शहरों की तरह हर संडे को एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, कार्यक्रम का नाम है ----"राहगिरी ! "
नाम अच्छा है ! प्रयास अच्छा है ! कमाल तो यह है कि इस आयोजन का प्रारूप पुलिस विभाग और करनाल पुलिस मुखिया पंकज नैन द्वारा किया गया है। इस की शुरुआत 30 अगस्त 2015 को की गई । शहर से बाहर होने के कारण मैं इसकी opening में शिरकत नहीं कर पाया था। आज इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कल ही भाई समीर और राहुल के साथ तय हो गया था।
घूमते हुए जैसे ही मैं सब्ज़ी मंडी चौंक पर पहुंचा , सुबह - सुबह सड़कों पर लोगों के झुण्ड देख कर अच्छा लगा। बच्चे ,युवा ,महिलाएं व बुज़ुर्ग सभी जगह जगह पर होती activities का भरपूर लुत्फ़ उठा रहे थे। अधिकतर लोग सपरिवार बच्चों के साथ आए हुए थे। मुझे तो ये कार्यक्रम इस लिहाज़ से बहुत अच्छा लगा कि लोग sunday के दिन घर से निकल कर आए और ख़ूब मस्ती करते नज़र आए!
सब्ज़ी मंडी रोड ,कुंजपुरा रोड और Old G T Road  ब्लॉक कर दिए गए और रोज़मर्रा के कामों को बंद कर के मस्ती के लिए खोल दिए गए। कईं स्थानों पर बढ़े -बढ़े मंच बना दिए गए जहाँ डांस और गाने के कार्यक्रम चलते रहे।  सब्ज़ी मंडी के मुख्य चौंक पर गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा बैंड बजाया जा रहा था। उभरती प्रतिभाओं के लिए इस तरह के मंच कारगर हो सकते हैं !
करनाल के खेलकूद विभाग का सहयोग इस आयोजन में साफ़ नज़र आ रहा था। सड़क के बीचों बीच कहीं तलवार बाज़ी हो रही थी तो कहीं गतका खेल जा रहा था।
कुछ बच्चों ने तो सड़क के बीच में ही बैडमिंटन का नेट बाँध लिया था। नेहरू प्लेस की पार्किंग में गद्दे बिछाकर कबड्डी खेलते युवा सब को आकर्षित कर रहे थे। कहीं रस्सा कूदा जा रहा था तो कहीं एक बड़े से टेबल पर chess खेलते बच्चे इस बात से बेख़बर नज़र आ रहे थे कि उन्हें भी लोग देख रहे हैं। हाथों में तिरंगा लिए skating करते बच्चे सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।  कईं जगहों पर गानों के साथ डांस और कसरत करने का भरपूर फायदा उठाया जा रहा था। योगा class में भी लोगों की भागेदारी कोई कम नहीं थी। निःसंदेह इस से बच्चों का रुझान खेलों की और बढ़ेगा ,जोकि ज़रूरी भी है।
मानव सेवा संघ के संचालक प्रेम मूर्ति जी हमेशा की तरह लोगों को पानी पिलाने के लिए अपनी रेहड़ी पर कायम खड़े थे। मैं उनको काफी देर तक देखता रहा। गर्मी बढ़ चुकी थी लेकिन उनके पास पानी पीने वाला कोई नहीं आया।
शायद शहर के साथ लोग भी स्मार्ट हो गए हैं। सफाई और hygine के मायने समझने लगे हैं। मैं प्रेम मूर्ति जी की कार्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा बल्कि बस इतना कहना चाहता हूँ कि समय के
साथ -साथ कार्यप्रणाली और नई टेक्नोलॉजी को adopt कर लेना चाहिए। दूसरी सामाजिक संस्थाएं इस में अपना सहयोग दें तो समस्या का निपटारा हो सकता है !
"राहगिरी" में करनाल के प्रतिष्ठित समाज सेवियों ,राजनीतिज्ञों ,खिलाडियों ,कलाकारों ,रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों की भागेदारी देख कर मन गदगद हो गया। बहुत सारे पुराने मित्रों से इस बहाने मिलना भी हो गया। सोच रहा था मौज मस्ती के साथ साथ युवा क्रांति , सांस्कृतिक उत्थान , मेलजोल और सामयिक व गंभीर विषयों पर बहस के लिए भी इस मंच को  बखूबी प्रयोग किया जा सकता है। आखिरकार क्रांति इसी तरह ही तो आती हैं !
चप्पे चप्पे पर पुलिस मुस्तैद नज़र आ रही थी।
खुद करनाल पुलिस प्रमुख ने सपरिवार इस कार्यक्रम में शामिल होकर प्रोग्राम में चार चाँद लगा दिए।
मंच पर बच्चों के साथ नृत्य कर के उन्होंने जनता का मन जीत लिया। पुलिस अफसर ने जनता के बीच जाकर सेल्फ़ी और फोटो भी खिंचवाए। इस तरह जनता के मन से पुलिस का डर और खौफ तो दूर होगा ही बल्कि जनता और पुलिस के बीच की खाई को भी पाटा जा सकेगा !

यहाँ मैं आज ही के एक किस्से का ज़िक्र भी ज़रूर करना चाहूँगा। घर की तरफ वापिस चलने लगा तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति अपने बच्चों के साथ राहगिरी में शामिल होने के लिए अपनी मोटर साइकिल खड़ी कर रहा था। सहसा पीछे से एक आवाज़ आती है ," ओ ,यो आपणी मोटर साइकिल उर्रै न खड़ी कर्रै !" इस कर्कश आवाज़ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये आवाज़ एक पुलिस अफसर की थी जिसकी ड्यूटी बैरियर के तौर पर बांधी  गई रस्सी के एक कोने पर थी। मैं पुलिस वाले इस अफसर के समीप पहुँच चुका था जो एक छोर पर अपने दूसरे सहयोगी के साथ कुर्सी पर बैठा था। बात यहीं तक होती तो शायद मैं इस का ज़िक्र कतई न करता। इससे पहले कि वो आदमी संभल पाता पुलिस वाला किसी गुंडे की तरह अपने एक हवालदार की ओर इशारा करके बोला ,"यो मोटर साइकिल बाहर करवा साले की ! इन्हैं दीखता नहीं एड बड़ी रस्सी बांध कै बेठे हैं हम !" मेरी नज़र साथ खड़ी गाड़ी पर पड़ी जिस पर लिखा था ,"सुरक्षा ,सहयोग और सहायता !" 

पिछले दिनों एक आर्टिकल पढ़  रहा था। उसमें लिखा था की कोई भी शहर या देश तभी स्मार्ट बनता है जब वहां के लोग smart हो जाते हैं। जनता और कार्य पालिका आपसी सहयोग करते हैं , सौहार्द और प्रेमभाव से रहने के साथ एक दूसरे का सम्मान करते हैं !





अंत में आयोजकों को मेरी ओर से इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनायें !

Friday, 28 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE (Part-35)

                                                                     अगस्त नामा -2015  
दोस्तों जय हो !
  • सबसे पहले आप सब लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद। आप सोच रहे होंगे कि किस बात का धन्यवाद ? असल में मैं जो लिखता हूँ उसके पेज view लगभग 13000 से पर जा चुके हैं और 101  posts पब्लिश हो चुके हैं। कमाल की बात है की मेरी इन पोस्ट्स को भारत सहित अधिकतर विदेशों में पढ़ा जा रहा है। आप का प्रेम इसी तरह बना रहे और मैं अपनी डायरी इसी तरह लिखता रहूँ !

Dil-e-Dastan  ·  Posts  ›  Published (101 )


  •    आप सब को बता दूँ कि पिछले साल एक कहानी लिखी थी "स्कूल फीस"। उस कहानी पर शिमला दूरदर्शन द्वारा टेली फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। आज ही शिमला बात हुई और पता चला कि फिल्म की editing का काम चल रहा है। इस टेली फिल्म का का प्रसारण शीघ्र ही कर दिया जाएगा।
  •     पिछले दिनों धर्मेंदर जोशी से बातचीत हुई। जोशी इंग्लिश ट्रिब्यून में कईं सालों से कार्यरत थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उन्हें ये नौकरी छोड़नी पड़ी। ईमानदारी ,कर्मठता और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता का अगर यही इनाम है तो सच में ये बहुत कड़वा सत्य है। दस वर्ष पूर्व जब मैं भी पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ा हुआ था तो धर्मेंदर और मैने पानीपत में एक साथ काम किया था। प्राइवेट companies के शोषण और insecurity की हम अक्सर बात किया करते थे।
  •       जालंधर में सुनील जोशी जी ने अपनी बिटिया की शादी कर दी है। जोशी जी ने भी इंडियन थिएटर चंडीगढ़ से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। नव दम्पति को मेरी शुभ कामनायें व शुभ आशीष ।  
  •  1985 -87 में दयाल सिंह कॉलेज में मेरे साथ पढ़ने वाले प्रवेश गोयल से 28 साल बाद मिलना एक संयोग ही था। मेरे स्कूल में उसका  किसी कंपनी की गाड़ियों की सेल के सिलसिले में आना हुआ था। खूब बातचीत हुई। 
  •  एक सप्ताह पहले कॉलेज के ही एक संगी हरिंदर संधू से भी मुलाकात हो गई। 1983 -84  में हम साथ -साथ दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ते थे। संधू ने एयर फ़ोर्स ज्वाइन कर लिया था। आजकल वो सरसावा में पोस्टेड है। संधु की माता जी से भी मिलना हुआ। खूब बातें हुईं। 
  •  पुराने दोस्तों से लम्बे अरसे के बाद मिलना अच्छा लगा।
  • करनाल , निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में आयोजित एक वर्कशॉप में जाने का मौका मिला। ये स्कूल संत अमरीक देव  द्वारा चलाया जा रहा है। स्कूल के साथ यहाँ एक वृद्ध आश्रम भी चलाया जा रहा है। ख़ास बात ये है कि यहाँ करीब 3000 बच्चे बिल्कुल फ्री पढ़ाये जाते हैं ,फीस के नाम पर उनसे एक भी पैसा नहीं लिया जाता। यहाँ रहने वाले 400 वृद्धों की भी निःशुल्क सेवा की जाती है। यही नहीं सभी बच्चों को पुस्तकों का वितरण भी बिल्कुल फ्री किया जाता है। हमारे करनाल शहर के लिए ये बहुत गर्व की बात है। संत अमरीक देव जी को मेरा नमन। एक ब्लॉग में पहले भी लिखा था कि संत अमरीक देव उड़न पारी कल्पना चावला के uncle हैं। 
  • चंडीगढ़ पुलिस सच में गुंडों की तरह लगने लगी है।चंडीगढ़ में घुसते ही लगभग सभी चौंक पर पुलिस वालों को स्निफर डॉग्स की तरह गाड़ियों के आस पास सूंघते हुए उन्हें कोई भी देखेगा तो ऐसा लगेगा की यहाँ की पुलिस बहुत अलर्ट है। असल में ये लोग शिकार को ढूंढ रहे होते हैं। दूसरी स्टेट की गाड़ियों को ये पुलिस वाले ऐसे रोकते हैं मानो  सभी चोर या उग्रवादी दूसरी स्टेट्स में हैं। रोकने के बाद ये लोग गाड़ी में या कागज़ों में कोई न कोई कमी निकाल देते हैं। परेशानी से बचने के लिए गाड़ी वाले इन की जेब गर्म कर देते हैं। सहयोग और सुरक्षा के नाम पर इन  वर्दी वाले गुण्डों ने सच में आतंक मचाया हुआ है। पिछले दिनों मेरे बेटे को दो बार चंडीगढ़ जाना पड़ा और दोनी ही बार वो इन वर्दी वाले गुंडों का शिकार हुआ। 
  • माता -पिता की आँखों का सफल ऑपरेशन हो गया है। 
  • मेरे दोस्त समीर ने 4 अगस्त को अपनी शादी की 25 वीं सालगिरह धूम धाम से मनाई। इस समारोह में नज़दीकी दोस्त और सगे सम्बन्धी शामिल हुए। मैं भी परिवार सहित इस समारोह में शामिल हुआ। नीरू व समीर को इस ख़त के ज़रिए पुनः हार्दिक शुभकामनायें। सादगी और प्रेम से भरपूर ये प्रोग्राम हमेशा के लिए यादगार बन गया। इसी दिन समीर के पापा "सुन्दर पाल "जी का जन्म दिन भी था। उनके जन्म दिन को मनाना  "सोने पे सुहागे " की तरह हो गया।
  • स्कूल में बच्चों के साथ cultural ,educational ,literary और social प्रोग्राम में मेरी उपस्थिति रहती है। बच्चों के अंदर छिपी सृजनात्मकता को एक दिशा देने की ज़रुरत होती है। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे साथी अध्यापक बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने में बखूबी अपना काम  रहे हैं। स्कूल में आज़ादी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह लड़कियों ने तिरंगा झंडा फहराया। 
  • आप को बता दूँ के बिटिया याशिका अपने कॉलेज की Vice President चुनी गई है। उसकी इस उपलब्धि से हम सभी गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं। शुभकामनायें याशिका ! 
  • आज रक्षा बंधन है। आओ सब मिलकर इस शुभ अवसर पर सभी बहनों की रक्षा और सुरक्षा का प्रण लें। 
  • फिर मिलते हैं !  जय हिन्द !





Sunday, 23 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE(34)

                                                                         मन की बात 
दोस्तों ,
जय हिन्द !
15 अगस्त को पूरा देश आज़ादी के जश्न में डूबा रहा । पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल था । देश के हर कोने में नेता अभिनेता ,समाजसेवी ,अध्यापक ,प्रध्यापक ,व्यापारी और अधिकारी राष्ट्रिय झंडा फहराने में  मशग़ूल रहे। देश के प्रधान मंत्री ने भी लाल किले की प्राचीर से देश के नाम सन्देश दिया। टीवी channel भी
अपने -अपने ढंग से समाचार दिखाते रहे हैं। एक दिन के बाद अखबारों ने भी फोटो लगा कर अपने हिसाब से ख़बरें प्रकाशित कर दी।
इसी दिन बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से सीज़ फायर का उल्लंघन करते हुए भारत की तरफ गोले दागे जाते रहे। हालांकि सभी जानते हैं की भारत अलगाववादियों की बन्दर भबकियों से कतई डरने वाला नहीं है। परन्तु इस समस्या का कोई न कोई  हल तो निकालना ही होगा। दोनों देशों के बीच होने वाली हाई प्रोफाइल वार्ता भी रद्द हो गई है।
आज़ादी के दिन भारत की क्रिकेट टीम को श्रीलंका के हाथों करारी हार से क्रिकेट प्रेमी थोड़े शर्म सार हुए। लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल  की जीत ने लाज बचाने का काम किया। फाइनल में हार के बावजूद भी सायना विश्व रैंकिंग में नंबर वन बनी हुई है।
राजनीतिज्ञों ने ऐसा मकड़ जाल बनाया रखा है के जनता बेचारी परेशान है। क्या करें और क्या न करें। प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं और 70 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रहे हैं। बाज़ार में अरहर की दाल का भाव 160 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
ऐसा लगने लगा है कि क्रिकेट मैच के खिलाडियों की तरह राजनीतिज्ञ भी बारी बारी से अपनी पारी खेलते हैं। क्रिकेट मैच की तरह राजनीती में नेताओं की हार हो या जीत अपने आप को ठगा हुआ तो आम आदमी और दर्शक ही महसूस करता है। इनकी तो चित भी अपनी पट भी अपनी। 
 देश की आज़ादी को 68 साल हो गए हैं लेकिन समस्याएं जूं की तूं अपना मुहँ बाहे खड़ी  हैं। गरीबी ,बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य,भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों में सुधार और इन समस्यायों का हल जल्द से जल्द खोजना होगा।
आज़ादी के अगले ही दिन देश के प्रधान मंत्री मोदी  दुबई में पहुँच गए। अपने भाषणों और संवाद अदायगी से एक बार फिर वो मीडिया में छाए रहे।  ध्यान रहे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान उतरी क्षेत्रों में घनघोर बादल छा तो रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इस बार मानसून 20 % कम आंकी जा रही है। ये समझना होगा कि आम आदमी का पेट भाषणों से नहीं भरता। अब तो आम आदमी कहने भी लगा है कि मोदी के भाषण कहीं मॉनसून के बादलों की तरह बिन बरसे तो नहीं निकल जाएंगे !
बेशक़  "फ़िल्म अभी बाकी है " आज कल ये डायलॉग सोशल मीडिया की भाषा में वायरल हो गया है और आम जनता भी ये समझती है के 60 साल से खोदे गए गड्ढों को भरने में समय चाहिए लेकिन ये भी नहीं भूलना होगा कि गरीबी से लड़ता आम आदमी अब थक चुका है।
फ़िल्म से याद आया के 15 अगस्त 1975 को शोले फिल्म रिलीज़ हुई थी। 40 साल हो गए लेकिन ये फिल्म आज भी लोगों के दिलों में राज करती है।
मशहूर शायर साक़ी फ़ारूक़ी की ग़ज़ल का एक शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
नज़रें मिला के देख मनाज़िर की आग में , (मनाज़िर -  scenes /views )
असरार -ए -क़ायनात से पर्दा न कर अभी । (असरार -ए -क़ायनात -  secret of universe )
चलिए फिर मिलते हैं ! अगले ख़त तक के लिए रुख़सत चाहता हूँ !



Sunday, 26 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-33)

                                                           जुलाई नामा -2015 

दोस्तों नमस्कार !
आप सब तो जानते ही हैं कि मैं करनाल में कर्ण पब्लिक स्कूल में कार्यरत हूँ। लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे जान में जान आ गई हो। स्कूल में बच्चों के साथ असल मस्ती , दुनिया से बेखबर उनका भोलापन और चुलबुली शरारतें हर पल इक नई सीख दे जाती हैं।  स्कूल का दसवीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है।  इस बार भी आशा के अनुरूप रिजल्ट अच्छा रहा। मोहित ने दसवीं में 100 % marks लेकर एक मिसाल कायम कर दी।   इस के अलावा,मानसी ने 96 % marks हासिल किए। नमन ,करणवीर और रूचि दसवीं का इम्तिहान पास नहीं कर पाए। हार जीत जीवन का हिस्सा है और उम्मीद  है कि सभी बच्चे अपने जीवन के इम्तहान में ज़रूर कामयाब होंगे। यहाँ मैं आप को ये बता देना चाहता हूँ कि हमारे स्कूल में अधिकतर मेहनतकश लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे उन की आँखों में अपने बच्चों को लेकर बुने जाने वाले सपनों को नज़दीक से महसूस करने का मौका मिलता है। मेरी सदा यही कोशिश रहती है की बच्चे पढ़ लिखकर अपनी ज़िन्दगी की किताब खुद लिख सकें और स्कूल के सभी अध्यापक एक टीम की तरह बखूबी मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलते हैं।

 जून में करनाल में राज्य स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कर्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी इस में शिरकत की। जून की छुट्टियों में ही करनाल के निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में जाने का मौका मिला। मेरे गुरु व मेरे दोस्त मोहिन्दर के पिता डॉ मदन गुलाटी ने सभी आगंतुकों का खूब मान -सम्मान किया।
 अपनी इन चिट्ठियों के ज़रिए लगभग दो साल पहले लिखने का सिलसिला शुरू किया था। भला हो भाई मोहिन्दर प्रताप सिंह का जिसने हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहिन्दर ख़ुद एक लेखक है और मुंबई में एडवरटाइजिंग और फिल्म क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।  उसने बताया कि वो उसने एक पंजाबी फिल्म लिखी  र है जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है । अमितोष नागपाल और मोहिन्दर दोनों आज कल मिल कर काम कर रहे हैं और  Big Magic channel के लिए एक serial टेढ़ी मेढ़ी फैमिली लिख रहे हैं ,जिसका प्रसारण शुरू हो चुका है। अमितोष भी मुंबई फ़िल्मी दुनिया में अपना भाग्य आजमा रहा है।
 डॉ अजय शर्मा का ज़िक्र चला है तो बता दूँ कि उनके द्वारा दूरदर्शन( किसान  )के लिए लिखित सीरियल "आधारशिला " प्रसारण शुरू हो चुका है । इस सीरियल में डॉ शर्मा ने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना खाता खोल लिया है। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस सीरियल में मेरा पुराना साथी दलजिंदर सिंह मुख्य पात्र अभिनीत कर रहा है। दलजिंदर ने 1988 में चंडीगढ़ से इंडियन थिएटर किया था। दलजिंदर आजकल एक पंजाबी फिल्म "कप्तान   " की शूटिंग में व्यस्त है। दलजिंदर यह फिल्म Gipy Grewal  के साथ कर रहा है।
 डॉ शर्मा मेरे पुराने मित्र हैं और लेखन क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान है। आजकल दैनिक सवेरा  जालंधर (पंजाब ) में कार्यरत हैं। उनके साथ बातचीत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ के सुबह उठते ही उनसे बातचीत न हो तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ छूट सा गया है। दैनिक सवेरा में मेरी दो कहानियां -"स्कूल फीस " और "गर्म ख़ून " (चार किश्तों में ) के अलावा एक कविता -"उदास चेहरा "प्रकाशित हो गई। इस चिठ्ठी के माध्यम से मेरा डॉ शर्मा को दिली धन्यवाद।
हरियाणा में मानसून शुरू हो चूका है। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले एक हफ्ते से लगातार बरसात के कारण मौसम ख़ुशगवार और सुहाना हो गया है !
हालांकि बीच में humidity के कारण गड़बड़ हो जाती है। सैर का सिलसिला जारी रखने की कोशिश करता हूँ और घूमते -घूमते फोटो खींचने की लत लग गई है। 
पिछले ख़त में आपको बताना भूल गया था कि मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली रेनू सास बन गई है। उसकी बेटी की शादी में शिरकत की। शादी जिस सादगी से हुई वो सच में तारीफे क़ाबिल था। यहाँ उसका ज़िक्र करना इस लिए ज़रूरी क्योंकि आजकल की चमक -धमक वाली शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बहुत होती है। रेनू ने बताया कि लड़के वालों ने शादी में शगुन  के रूप में मात्र एक रुपया लिया। इस के अलावा कुछ भी लेने से लड़के वालों ने साफ़ इंकार कर दिया। लड़के वालों को मेरा सलाम !
  अमेरिका में भतीजे सिकंदर और उसकी पत्नि सुखमन को पुत्र प्राप्ति हुई है। सांगवान परिवार को मेरी ढेरों शुभ कामनाएं।
यहाँ मुझे निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद आ रहा है:
"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
रोते हुए किसी बच्चे को हंसाया जाए " 
 जय हो दोस्तों ! फिर मिलते हैं !

Sunday, 19 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-32)

                                                                    जून -2015
दोस्तों नमस्कार !
स्कूलों में छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं । गर्मियों की इन छुट्टियों में ज़्यादातर दिनों में मौसम सुहाना ही बना रहा। बच्चों से 6 जुलाई को  मिलना हुआ  , बच्चों से दूर एक महीने भर की छुट्टियां बीताना काफी मुश्किल भरा रहा। स्कूल खुलने के साथ सच में ऐसा लगा मानो बगिया फूलों से खिल उठी हो।


बेटे कशिश ने मैकेनिकल में B.Tech कर लिया है। कईं जगह apply किया लेकिन किसी एक जगह से भी कॉल नहीं आई।  इस बात से पता चलता है की देश में रोज़गार  की कितनी समस्या है। दुनिया से बेखबर कशिश आज कल एक पुरानी गाड़ी को modify करने में मशगूल है।
उसका कहना है कि जीवन में वही काम करना चाहिए जो आप को अच्छा लगता है। कशिश का उत्साह और passion देखते बनता है ,मेरी शुभकामनायें।

लम्बे समय से जिस  इंतज़ार था वो घड़ी भी आ ही गई।  कर्ण पब्लिक स्कूल में भुजंग फिल्म का निर्माण दो साल पहले हुआ था।  इस फिल्म में रोल करने वालों ने अभी तक इस फिल्म को देखा नहीं था।  १४ जून को चंडीगढ़ के ललित कला अकादमी auditorium में इस फिल्म को दिखाया गया। फिल्म में काम करने वाले लोगों से पुनः मिलना हो गया ,अच्छा लगा।  फिल्म देखने के लिए कास्ट डायरेक्टर ज्योतिका , costume designer सुप्रीत चीमा , anchor प्रितमा , सुरेन , प्रोडक्शन इंचार्ज प्रवीन सहित करीब 250 लोगों ने फिल्म को देखा। यही नहीं फिल्म के दो मुख्य बाल कलाकारों यशित और सिद्धांत ने भी अपने -अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिरक़त की। फिल्म में मुख्य भूमिका "शंटी " का क़िरदार  निभाने वाला कलाकार ज़ुबिन गैर हाज़िर रहा।

जालंधर से दलजिंदर, मुंबई से फिल्म के लेखक/निर्देशक मोहिंदर प्रताप सिंह ने भी शिरकत की।   दोस्त अनुराग भी मुंबई काम के सिलसिले में चंडीगढ़ आया हुआ था ,रात को मोहाली अनुराग के फ्लैट में ही रुकना हुआ। रात को दलजिंदर के गीत सुनते रहे। ये रात यादगार बन गई।
जून की छुट्टियों में कसौली भी घूम आया। पहाड़ों का खुशनुमा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता मुझे हमेशा सुहाती है। हालाँकि पहाड़ों पर बढ़ता कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक खटकता है लेकिन पहाड़ों की सादगी और हरयावल हमेशा भाती है।
कसौली से २-३ किलोमीटर पहले ही गड़खल में दोस्त अमन सेठ की माता जी से भी मिल आया। कुछ दिनों पहले अमन के पिता की मृत्यु हो  गई थी। अमन के पिता कसौली और आसपास के इलाके में "सेठ साहब" के नाम से मशहूर थे और सरकारी ठेकेदार थे। मैं कईं बार उनसे मिला।  उनकी सादगी ,साफगोही और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा मेरे ज़हन में बसा रहेगा। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि !
धूप -छाँव और दुःख -सुख की तरह जीवन -मृत्यु भी अटल सत्य हैं। जो जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है। मेरे एक पुराने मित्र नवीन की माता जी भी अपनी जीवन यात्रा पूरी कर गईं। पड़ोस में रहने वाले नीटू भाई की माता जी और मन्नू भाई के पिता भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह गए। मेरे मित्र नवीन के पास सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले मेरे अजीज़ रवि के छोटे भाई ने आत्म हत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रवि ने बताया के उसका छोटा भाई कोई स्थाई रोज़गार ना मिलने के कारण परेशान रहता था। सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि !
आज सुबह ही मशहूर रूमानी शायर अहमद फ़राज़ की एक ग़ज़ल पढ़ रहा था। उस ग़ज़ल के दो अलग अलग शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
                                              "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
                                                सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

                                                सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
                                                ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं "

दोस्तों , बातों का सिलसिला इसी तरह चलता रहे। वैसे इस चिठ्ठी में कईं बातें जो छूट गई हैं , अगले ख़त के साथ उनका ज़िक्र ज़रूर करूंगा। अब आप से विदा लेता हूँ।
जय हो !

Wednesday, 17 June 2015

A Letter...Ek Chithee (Part-31)

                                              
                                                                  यादें 
 मैं याद कर रहा हूँ उन दिनों( 1987 -88 ) को जब हम लोग पंजाब यूनिवर्सिटी में इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट में थे। जब भी समय मिलता डिपार्टमेंट के बाहर जमावड़ा जम जाता। अमरजीत ,पुनीत सहगल ,फ़्लोरा , बाठ, अरोड़ा  , कमल मलिक , दलजिंदर और रघवीर ये सभी लोग हमारे से एक बैच सीनियर थे। इस बैच में अधिकतर सभी लोग पंजाब से ही थे। साथ में ही हॉस्टल था लेकिन जब भी मौका मिलता शाम को सभी अपने -अपने घर की ओर रुखसत कर लेते। कौन कितने दिनों के बाद डिपार्टमेंट वापिस आएगा ,कुछ पता नहीं होता था। डिपार्टमेंट तो जैसे आरामगाह था। ऐसा नहीं कि सभी का यही हाल था ,इनमे से कुछ लोग सीरियस भी थे। इनमें दलजिंदर एक था जो कि सभी को कोसता रहता था। जब कभी इनके दर्शन हो जाते ,सभी ऐसे प्रोजेक्ट करते मानो दुनिया में इनसे सीरियस लोग ही न हों।
 डिपार्टमेंट के बग़ल में ही हॉस्टल कैंटीन थी। बड़े -बड़े छायादार पेड़ों के नीचे महफ़िल जम जाती और फिर    शुरू होता बातों का सिलसिला। आज कल की स्टैंडिंग कॉमेडी की तरह ये सभी दूसरों का मज़ाक करने में सिद्धहस्त थे। रघवीर ,पुनीत सहगल  ,बाठ और अमरजीत का अपना अलग ग्रुप था। पुनीत का अपना अलग अंदाज़ था।  जिस से भी मिलता ,  कुछ इस तरह से मिलता के साथ बैठे लोगों का शुगल हो जाता। अमरजीत अपने ग्रुप के सभी लोगों से बिलकुल अलग था। । लेकिन उसका व्यक्तित्व कमाल का था। शांत स्वभाव अमरजीत हमेशा किसी उधेड़ बुन में लगा रहता। शब्दों का वो ज़बरदस्त खिलाडी था। हमेशा कुछ न कुछ लिखता रहता। एक्टर तो वो कमाल का था। पुनीत ने पिछले दिनों सूचना दी कि अमरजीत इस दुनिया को  अलविदा कह कर हमेशा के लिए रुख़सत हो गया है। अमरजीत की आकस्मिक मृत्यु पर अपने फेस बुक पर पुनीत ने कुछ इस तरह लिखा ,
Serial Bhagan Waliya di shooting diya kuj yaadan .
Amarjeet Singh Rode sada sada lyi sanu Chad ke Tur gya . Bhagan Waliya , Eh kehi Rutt Ayi te horv kinne award jetu radio tv de natkan da likhari , kamaal da Director Adaakaar ate meri sajji bahn aj nhi rhi ........            








 जैसे शब्द हमेशा ज़िंदा रहते हैं , उसी तरह कलाकार कभी नहीं मरता। अमरजीत तुम हमेशा हमारे दिलों में बसे रहोगे। मेरे चचेरे भाई राजू की आकस्मिक मृत्यु ने भी अंदर तक हिला कर रख दिया । राजू भाई को नशे की लत थी और इसी कारण अपने आखिरी दिनों में वो मुफलिसी में रहा। वैसे तो जीवन में सफलता की कोई परिभाषा नहीं लेकिन बिना लक्ष्य के जीवन जीने वालों के लिए समाज की नज़रों में कोई इज़्ज़त नहीं होती। राजू जीवन भर संघर्ष करता रहा ,लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था। वो अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के पंच तत्व में विलीन हो गया। श्रद्धांजलि !

पिछले तीन  महीने (मार्च /अप्रैल/मई -2015 ) कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। पिछले 10 साल से एक स्कूल में कार्यरत हूँ। स्कूल की दूसरी ज़िम्मेदारियों के साथ -साथ इन दिनों में किसी सेल्समेन की तरह स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रहता है।शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण के कारण विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की इतनी प्रतिस्पर्धा हो गई है कि शिक्षा के मंदिर अब मार्केटिंग ऑफिस की तरह काम करने लगे हैं। बच्चों और उनके मातापिता को लुभाने के ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं कि मातापिता के लिए ये समय संकट भरा बन जाता है। महंगी होती शिक्षा , बीमार व दिशाहीन शिक्षा प्रणाली ,शिक्षा का गिरता स्तर ,कमज़ोर सरकारी नीतियां और अपंग सरकारी शिक्षा ढांचा ये कुछ ऐसे कारण हैं ,जिनकी वजह से शिक्षा के मायने बदल गए हैं। यही नहीं एक आम आदमी के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। खासतौर पर मेहनतकश माँ बाप अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा कर बढ़ने का सपना बुनते हैं ,लेकिन महंगी होती शिक्षा के कारण ऐसे अधिकतर लोगों के सपने बिखर ही जाते हैं।
आज कल गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। कई बार दिन काटना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल में दिन कैसे बीत जाते हैं इस का पता ही नहीं चलता। बच्चों की दुनिया में रहते रहते मेरा मन भी बच्चों जैसा हो गया है। एक अच्छी टीम बन गई है। सभी अपना काम जिम्मेदारी से करने लगें तो काम में आनंद की अनुभूति होना स्वाभाविक। है। नवज्योत ,सुनीता भंडारी ,मंजू , संगीता ,पूनम ,रेनू , मोना ,उमीशा व पूजा जैसे कर्ण परिवार का हिस्सा ही बन गई है।
24 अप्रैल को दिल्ली और 27 को चंडीगढ़ नीशू खन्ना के सगन और विवाह समारोह में शिरकत की। बच्चों संग विवाह समारोह में जाना अच्छा लगा। भांजे नीशू खन्ना ने प्रेम विवाह किया है।
पिछले तीन महीनों में मौसम का मिज़ाज ठंडा रहा। कभी बरसात तो कभी ठंडी हवाओं ने मौसम में ठंडक बनाए रखी। अपने जीवन में अप्रैल और मई के महीनों में इतनी ठंडक पहली बार महसूस की।
अच्छा दोस्तों फिर मिलते हैं ! मेरे अगले खत का इंतज़ार कीजिएगा !

Thursday, 23 April 2015

ख़ामोशी !

ख़ामोशी !

तेरे सुनहरे बाल,
 धधकती आँखें ,
 चमकते गाल ,
 लरजते औंठ , 
बहकी सी बातें , 
थिरकते हाथों का स्पर्श ,  
 हिरणी जैसी चाल ,
 तितली जैसी अठखेलियां
और 
 जिस्म की रूहानी गंध ,
सब कुछ कह देते हैं ,
बेशक़ तू
खामोश रहे .........!

Monday, 16 March 2015

ये ज़िंदगी के मेले !

ये ज़िंदगी के मेले !
सावधान ! अगर आप ने किसी को उधार दिया है तो वापिस कभी न माँगिएगा। जिस ने आप के पैसे देने हैं उसके आत्म सम्मान को चोट पहुँच सकती है। जो दे दिया सो दे दिया ,अब उसे भूल ही जाएं तो बेहतर होगा। इधर आप ने अपने पैसे की मांग की उधर देने वाला आग बबूला हुआ। झट से वो रिश्ता तोड़ देगा। ख्याल रहे ,अगर आप ने कहीं अपने पैसे के लिए थोड़ा दबाव बनाने की कोशिश की तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
 मुझे यहाँ मेरा एक दोस्त बिन्दा उर्फ़ बलविंदर सिंह मठारू  (जो अब इस दुनिया में नहीं है )याद आ गया।   लोहे की ग्रिल बंनाने का काम करता था। उसके हाथों  में हुन्नर था। बहुत अच्छा काम था उसका। जिसको ज़रुरत होती बिन्दे से पैसे ले जाता। क्या मज़ाल के बिंदा किसी से पैसे वापिस मांग ले। वो तो बस यही कहता ,"सर जी वाहेगुरु देता रहे ,ये सब कुछ तो उसका है।" न जाने किस की नज़र लगी बिन्दे को- उसे शराब की लत लग गई। अब बिंदा शराब में टुन रहने लगा था। दोस्तों ने भी ऐश मारी बिंदे के साथ।  क्या दिन ! क्या रात ! मयखाना हमेशा खुला रहता। धीरे धीरे काम कम होने लगा। पैसे की तंगी बढ़ने लगी। बहुत मुफलिसी के दिन देखे थे उसने। काम खत्म हो गया। घर में रोटी के लाले पड़ने लगे। दोस्त कभी कभार मदद कर देते। धीरे धीरे दोस्त भी बिंदे से छिपने लगे थे और बिंदा जहाँ दिखाई दे जाता कन्नी काट लेते। । पैसे की कमी के कारण लोगों से उधार उठाना पड़ता था उसे। देने में देर सवेर हो जाती तो माँ बहन भी सुननी पड़ती उसे। क्या मज़ाल की वो किसी को बुरा कह दे। बिंदा सब से अलग था। 
 बिन्दा अक्सर कहा करता था ,"ये दुनिया बहुत "मास्टर माइंड " (master mind ) है sir जी !  
सोचता हूँ के क्या दुनिया सच में" मास्टर माइंड " है ! 

Saturday, 28 February 2015

राम झूठ न बुलवाए…!(Part-3)

राम झूठ न बुलवाए… !
रेलवे बजट और आम बजट का पिटारा खुल चुका है। आप सब इस से वाकिफ होंगे। आम आदमी और मध्यम वर्गीय परिवार के लिए इस में ऐसा कुछ ख़ास नहीं के उस को खुशी  महसूस हो।  दुःखती नस पर हथौड़ा मारने वाली कहावत तो आप ने सुनी ही होगी। जनता अभी आम बजट को समझने की कोशिश ही कर रही थी कि  बजट के अगले ही दिन पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतों ने जैसे जनता की बची -खुची उम्मीदों पर हथोड़ा नहीं बुलडोज़र चला दिया। सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी ,इनकम टैक्स में स्लैब न बढ़ाया जाना और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए टैक्स में कटौती से ये तो साफ़ हो गया है कि आम आदमी का बोझ अभी जल्दी से कम नहीं होने वाला है।
बजट से एक दिन पूर्व देश के प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी जिस तरह दहाड़े  , उससे एक बारगी तो ऐसा लगा था कि इस बार आम बजट सच में आम आदमी के लिए ही होगा। पिछले आठ महीने के कार्यकाल का लेखा जोखा देते हुए अपनी कमाल की संवाद अदायगी से जिस तरह उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला वो सच में कर्ण प्रिय था।  उन्होंने जिस तरह पिछली सरकार में फैले भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया और विपक्ष की बखिया उधेड़ी उससे ये तो साफ़ हो गया कि वो ईमानदारी से देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते हैं। 
संसद में मनरेगा की विफलता और कोयले की खानों में बंदर बाँट पर मोदी ने जिस तरह चुटकी ली ,वो सच में कबीले तारीफ़ था। अपने  भाषण के दौरान विपक्ष की तो उन्होंने बोलती ही बंद कर दी। भूमि अधिग्रहण बिल पर संशोधन में बदलाव करने पर सहमती जता कर उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया या फिर ये अन्ना की दिल्ली में हुंकार का असर था ये आप खुद तय करें। । 
क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने पुरे योवन पर है। नित नए रिकार्ड्स बन रहे हैं। वेस्टइंडीज़ के क्रिस गेल का जिम्बावे के खिलाफ व वर्ल्ड कप का पहला दोहरा शतक , इंडिया की लगातार तीसरी जीत ,अफ़ग़ानिस्तान का मैच जीतना,इंग्लैंड की आयरलैंड से पराजय , न्यूज़ीलैंड के हाथों चार बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त लोगों में चर्चा का विषय बने रहे। एक चाय के खोखे पर चाय की चुस्की लेते हुए दो युवाओं की वार्तालाप ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया के क्या सच में क्रिकेट के अधिकतर मैच फिक्स होते हैं। अपनी बातो में वो ज़िक्र कर रहे थे कि जिम्बावे और भारत के मैच में भारत की हार फिक्स है। देखते हैं 14 मार्च शनिवार को ऑकलैंड में होने वाले इस मैच का रिजल्ट क्या होता है।
 चलते चलते आप को बता दूँ कि मध्य प्रदेश के गवर्नर राम नरेश यादव के खिलाफ व्यापम घोटाले (वन रक्षक भर्ती ) के अंतर्गत केस दर्ज हो गया है।बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी का विवाह उतर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह के पौत्र तेज प्रताप सिंह से खूब धूमधाम से हो गई है। शादी पर हुए खर्च  का हिसाब किताब तो आप को वही बता सकते हैं।
राम झूठ न बुलवाए " अच्छे दिन आने वाले हैं " के नाम पर देश की सत्ता बीजेपी को सौंपने वाली जनता का मोदी के भाषणों और वायदों से मोह भांग होने लगा है । नुक्कड़ -चौराहों पर बीजेपी के  " अच्छे दिन आने वाले हैं "वाले नारे को आम आदमी जुमले के तौर पर प्रयोग करने लगा है।
मैं यहाँ कवि दुष्यंत की ये पंक्तियाँ ज़रूर  चाहूंगा : 
" मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे|"

Thursday, 26 February 2015

A LETTER...EK CHITHEE(PART-30)

                                                                    फरवरी नामा
दोस्तों ,
आशा करता हूँ सब कुशल है।
दिल्ली की जनता ने "आप " को प्रचंड बहुमत देकर सच में एक नई राजनीति की शुरूआत कर दी है। साफ़ हो गया है कि जनता अलगवाद या नकारात्मक बातों को समझने लगी है। आज भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की ज़रुरत है। केजरीवाल का इम्तिहान शुरू हो चुका है।
पिछले महीने की तरह इस बार भी शादियों का दौर रहा। मेरे साथ स्कूल में साइंस टीचर पूजा की शादी हो गई है। फिजिकल एजुकेशन टीचर जितेंदर की शादी में भी जाना हुआ।
पड़ौस में मन्नू गर्ग की शादी भी हो गई है। गांव झंझाडी में रवि ने अपने बेटे के जन्म दिवस पर ज़बरदस्त आयोजन किया हुआ था। मैं अपने दोस्त समीर के साथ इस आयोजन में शामिल हुआ।
 मानव कल्याण मंडल की ओर  से आयोजित एक सम्मान समारोह में करनाल के प्रिंसिपलों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में शामिल होकर मैं गर्वानित महसूस कर रहा हूँ। प्रदेश मुख्य मंत्री के OSD श्री अमरेंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
  भला हो डॉ अजय शर्मा का जिन्होंने मेरी कहानी "गर्म खून " को "दैनिक सवेरा "में किश्तवार छाप दिया।। डॉ अजय दैनिक सवेरा ,जालंधर में कार्यरत हैं ,मैगज़ीन और साहित्य पेज उन्हीं की देखरेख में छपता है। लिंक सलंग्न है :   http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498280, http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498245,http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498198,http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4539840 / अजय भाई आज कल दूरदर्शन के लिए सीरियल लिखने में व्यस्त हैं।
करनाल से मुंबई में थिएटर की दुनिया में अपना लोहा मनवाने के लिए अमितोष नागपाल  नाटक "पिया बहरूपिया "के शो करने के लिए यूरोप में गया था। इटली से उसने कुछ फोटो भेजी हैं।
फोटो अच्छी खींची हैं।  उनका ग्रुप वापिस मुंबई लोट आया है।
हमारी फिल्म भुजंग के निर्देशक व् लेखक किसी कहानी के सिलसिले में इंग्लैंड पहुँच गए । मोहिन्दर ने वहां से ट्वीट किया के "दुनिया बहुत बड़ी है।"आज जिस तरह लोगों का देश विदेश में आना -जाना हो रहा है और बेतार कम्युनिकेशन का विस्तार हुआ है उससे तो दुनिया बहुत छोटी लगने लगी है।
करनाल में अमितोष के साथ ही नाटक करने वाले डिंपल शर्मा से भी कल बात हुई। वो आजकल ब्रिस्बेन (ऑस्ट्रेलिया ) में है। डिंपल से बात करके अच्छा लगा। मेरे दोस्त समीर के शमदी Mr. Dhull और दामाद मनीष से भी मुलाकात हुई। Mr. Dhull से बात करना अच्छा लगता है।
हर वर्ष की भांति इस साल भी स्कूल में दसवीं के बच्चों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया।मोहित और मानसी को  क्रमशः Mr. & मिस फेयरवेल चुना गया।



स्कूल के डायरेक्टर डॉ मदन गुलाटी ने हमेशा की तरह बच्चों का मार्ग दर्शन किया। सुखमनी साहेब का पाठ कर के बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की गई। नौवीं व दसवीं की इंचार्ज नवज्योत कौर और पूनम ने कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया।
22 फरवरी को शादी की 23 वीं सालगिरह मनाई। बच्चों व माता पिता के संग ने इस दिन को यादगार बना दिया। मेरी पत्नी ने मुझे सदा ही सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित किया।
February - 2015
February -1992
मेरी पत्नी ने सदा एक दोस्त की तरह हर दुःख -सुख में मेरा साथ दिया है। मेरा सलाम।
वर्ल्ड कप (क्रिकेट ) की शुरुआत हो चुकी है। इंडिया ने पाकिस्तान को हरा दिया है। इधर युवी के पिता योगराज सिंह अपने बेटे को इंडियन टीम में शामिल न किए जाने से खफ़ा हैं। यही नहीं दक्षिण अफ्रीका पर भी धोनी की टीम ने फतह हासिल कर ली है।
 पेट्रोल महंगा होना शुरू हो गया है। हरियाणा में 5 % वैट बढ़ने से यहाँ के लोगों को ज़्यादा झटका लगा है। इलेक्ट्रिक बिल के दाम भी लगभग 7 रूपए प्रति यूनिट तक पहुँच चुके हैं। घरों के बिलों में कुछ charges ऐसे होते हैं जिनका आम जनता को कतई पता नहीं चलता।
चाय बेचने से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री पद पर पहुँचने वाले नरेंद्र दामोदर मोदी का सूट 4 करोड़ 31 लाख का बिक गया है। इसे गुजरात के हीरा व्यपारी हिरेन पटेल ने खरीदा है। जनता अच्छे दिन के इंतज़ार में है।
 फिर मिलेंगे अगले ख़त के ज़रिये।

Saturday, 21 February 2015

राम झूठ न बुलवाए…! (Part-2)

राम झूठ न बुलवाए… !
बुज़ुर्ग पहले कहा करते थे कि प्यार और युद्ध में सब माफ़ होता है।  बिहार और जम्मू -कश्मीर में जिस तरह से राजनीतिक समीकरण बन रहे हैं। उससे तो ऐसा लगता है मानो आजकल राजनीति में सब माफ़ है। सत्ता हासिल करने के लिए दोस्त भी दुश्मन और दुश्मन - दोस्त कैसे बन जाते हैं ये हमें राजनीति ही सिखाती है।
 हरियाणा के अधिकतर इंजीनियरिंग और बीएड कॉलेजों में घटिया शिक्षण ढांचे और रोज़गार उपलब्धता न होने के कारण युवाओं का इस क्षेत्र में रुझान कम हुआ है। यही कारण है कि अधिकतर कॉलेजों में सीटें भी पूरी नहीं भर पाती। इसीलिए अधिकतर कॉलेज बंद होने के कगार पर हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के घटिया नतीज़ों ,धीमी व सुस्त कार्य प्रणाली के कारण भी युवाओं में रोष व्याप्त है। सरकार के कार्यक्रम " Make  in India पर युवा टकटकी लगाए बैठे हैं ।
आजकल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पहले खबर दिखाने के चक्कर में असल ख़बर जैसे छूट ही जाती है। पहले देश के प्रधानमंत्री नरेँदर दामोदर मोदी का कोट और दिल्ली में इलेक्शन छाये रहे।  उसके बाद मीडिया पर क्रिकेट वर्ल्ड कप का भूत सवार हो गया । आईपीएल में युवराज 16 करोड़ में क्या बिका सभी मुख्य चैनल युवराज के पीछे  भागने लगे। यही नहीं युवराज के पिता योगराज सिंह ने इंडियन टीम के सिलेक्शन और कप्तान महेंदर सिंह धोनी पर सवाल क्या खडे किए सभी उनके पीछे भागने लगे और देखते -देखते योगराज सिंह सभी मुख्य समाचार बुलेटिन्स के केंद्र बिंदु बन गए। शायद सभी भूल गए कि देश में आज भी आम आदमी बढ़ती महंगाई से जूझ रहा है। जब तक आप के पास ये पत्र पहुंचेगा उस समय टीवी चैनल कौन से समाचार को स्पेशल डिश की तरह परोस रहे होंगे ये राम ही जाने।
आधार कार्ड को मुख्य पहचान पत्र बनाए जाने पर आम जनता बहुत खुश है। लोगों को समझ आने लगा है कि सब्सिडी , सरकारी ग्रांट , गैस ,बुढ़ापा व विधवा पेंशन ,वज़ीफ़ा (स्कालरशिप ) ,लोन या सरकारी /गैर सरकारी लाभ लेने में ये पहचान पत्र काफी सहायक होगा। बहुतेरे लोगों ने अपने आधार कार्ड बनवा लिए हैं लेकिन  अभी भी बहुत लोगों को इधर उधर भटकना पड़ रहा है। लोगों को मालूम ही नहीं है कि आधार कार्ड कहाँ बनाए जा रहे हैं। यही नहीं आधार कार्ड बनाने वाले केंद्र कम होना भी परेशानी का सबब बन गया है। मैं स्वयं भुगत भोगी हूँ। परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड apply किए किन्तु आधे -अधूरे कार्ड्स बनने के कारण सकते में हूँ। नाम दर्ज़ करवाने की रसीद है , आधार कार्ड की साइट पर कई बार क्लिक किया। अभी तक कोई रिजल्ट नहीं निकल पाया है।
भगवान झूठ न बुलवाए............. वर्ल्ड कप में न्यूज़ीलैंड ने इंग्लैंड पर धमाकेदार जीत दर्ज़ कर ली है। न्यूज़ीलैंड के मैकमिलन ने इंग्लैंड के खिलाफ 18 गेंदों में अर्धशतक बना कर अपने नाम एक नया रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है।किम साउदी ने 7 विकेट झटके।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विवादस्पद सूट 4 करोड़ 31 लाख में बिक चुका है। हीरा कारोबारी हितेश पटेल ने इसे ख़रीदा है। बिहार में सत्ता परिवर्तन हो गया है।
जतिन राम मांझी की कुर्सी पर अब नीतीश कुमार गद्दी नशीं हो गए हैं। बिहार का राजनीतिक ड्रामा अभी खत्म नहीं हुआ है ,पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्तों !
बकौल मशहूर शायर फैज़ अहमद फैज़ :
 आज के दिन न पूछो मेरे दोस्तो
दूर कितने हैं ख़ुशियाँ मनाने के दिन
खुल के हँसने के दिन, गीत गाने के दिन
प्यार करने के दिन, दिल लगाने के दिन।  

Wednesday, 18 February 2015

उदास चेहरा

     
                                                      उदास चेहरा
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर 
 महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है 
सब कुछ
माला के मोती ,
वीणा के तार 
आईना 
और 
कविता के सब शब्द । 
बहुत कोशिश करता हूँ
मोतियों को जोड़ने की
के फिर से इक माला बन जाए ,
धीरे से फेरता हूँ अंगुलियां
वीणा की तारों पर
के तान सुनाए ,
जोड़ता हूँ शब्दों का ताना बाना 
के इक कविता बन पाए ,
करता हूँ इकठ्ठा 
बिखरे पड़े शीशे के टुकड़ों को 
के अक्स नज़र आए ।
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर 
महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है 
सब कुछ
मैं 
मेरे होने का अहसास 
और ये दुनिया ।









Friday, 13 February 2015

राम झूठ न बुलवाए...! (Part-1)

                                                              
                                                  राम झूठ न बुलवाए...! (Part-1)
रवरी माह की शुरूआत के साथ ही सूर्य देवता अपनी चमक दिखाने लगे हैं। ठंडी हवाऐं अपने पूरे यौवन पर हैं। फाल्गुन की शुरूआत से ही ये सर्द हवाएं मंद पड़ेंगी। लेकिन सूर्य देवता की गर्मी के आगे ढंड फाल्गुन से पहले ही फुर्र होती नज़र आ रही  है।
दिल्ली में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी  भाजपा को चुनावी दंगल में पटखनी दे चुकी है। इससे ये तो साफ़ हो गया है कि जनता जनार्दन की अनदेखी करना किसी भी पार्टी के लिए ख़तरनाक हो सकता है। बेशक़ वो कांग्रेस हो या फिर भाजपा।
आज जनता की मांग है कि कागज़ों पर बनने वाली योजनाओं  -परियोजनाओं को तुरंत प्रभाव से किर्यान्वित करना होगा ताकि सरकार जो कर रही हैं उसका रिजल्ट भी साथ -साथ आता रहे । अच्छे दिन आने वाले हैं के नारे पर भाजपा को अर्श से फर्श पर पहुंचाने वाली जनता हरारत महसूस करने लगी है। आम आदमी कहने लगा है के उद्घाटन और घोषणाएं नहीं बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम करने की ज़रुरत है।  टूटी सड़कें , बंद पड़ी सैनिटेशन व्यवस्था , अव्यवस्थित यातायात , पार्किंग व्यवस्था ,बस अड्डे का स्थानांतरण ,सुस्त और पेचीदा प्रशासनिक कार्य प्रणाली , बाजार में दुकानदारों द्वारा सड़कों पर कब्ज़ा करनाल की जनता के लिए कुछ ऐसे मुद्दे हैँ जिनका वो तुरंत हल चाहती है।
करनाल जब से सी एम सिटी बना है तब से सभी अफसर अपनी ट्रांसफर करवाने के चक्कर में हैं। हरियाणा में नौकरी करने वालों के लिए सब से बढ़िया कहे जाने वाले शहर करनाल में अब कोई अफसर रहना नहीं चाहता। पुलिस वाले तो कतई नहीं। कर्ण नगरी करनाल को ऐसा क्या हुआ कि अफसरों को करनाल में पोस्टिंग से डर लगने लगा है। बेशक़ ये "गुड गवर्नेंस " का असर हो परन्तु स्थानीय लोगों को सरकारी मशीनरी के ढीलेपन का कारण समझ नहीं आ रहा है। आम आदमी को अभी भी छोटे -छोटे कामों  लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। 
करनाल के एम पी साहेब एक बड़े अख़बार के मालिक भी हैं। पिछले दिनों अख़बार में अमेरिकी राष्ट्रपति बोराक ओबामा के साथ अपनी तस्वीर को दूसरी अखबारों में विज्ञापन के रूप में छपवा कर वो शायद ये सिद्ध करना चाहते थे के उनके हाथ अलाद्दीन का चिराग हाथ लग गया है। चिराग के साथ हाथ मिलाते फोटो खिंचवा कर उन्हें क्या हासिल हुआ ये तो मैं नहीं जानता पर इस प्रकरण से थोड़ी किरकिरी तो ज़रूर हुई है।जिन अपना कमाल दिखा वापिस अमेरिका लौट चुका है। हलके में एम पी साहेब की नदारदगी से स्थानीय लोग नाख़ुश हैं। 
स्कूलों में नया सैशन शुरू होने वाला है। शिक्षा संसद शुरू हो चुकी हैं। सरकार और स्कूल मालिकों के बीच बैठकों का दौर जारी हैं। कुछ अभिवावक संघ भी सक्रिय हो चुके हैं। फ्री एजुकेशन को ले कर बहस छिड़ चुकी है। मां -बाप महंगी होती शिक्षा से दुःखी हैं तो शिक्षा संस्थानों के मालिक बढ़ते खर्चों से परेशान हैं। इस शीत युद्ध में बच्चों के मर्म से सब बेफिक्र हैं। शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है।
 देश में पेट्रोल और डीज़ल के दाम पिछले दिनों कम हुए। लेकिन समाचार है के हरियाणा में ५% वैट के कारण पेट्रोल के दाम दो रूपये 50 पैसे प्रति लीटर बढ़  गए हैं । विश्व बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में जिस तरह गिरावट आई है उसके मुकाबले पेट्रोल और डीज़ल के दाम में जितनी कटौती होनी चाहिए थी उतनी कटौती नहीं हुई । बेशक भाजपाई इस का क्रेडिट अपनी सरकार को देते रहें और  देश के प्रधानमंत्री आम सभा में कहते रहें नसीब का अच्छा होना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन देश की आम जनता का नसीब कब बुहरेगा इसका सभी को इंतज़ार है। 
राम झूठ न बुलवाए .......... हुकमरान को ये समझना होगा कि आज की जनता कंप्यूटर युग में जी रही है जहाँ बटन दबाते ही बिना पलक झपके रिजल्ट सामने होता है। ऐसे में इस पीढ़ी की मनोस्थिति सरंचना भी "झट मंगनी और फट ब्याह" वाली हो गई है। शायद ये राष्ट्र उत्थान और राष्ट्र निर्माण लिए ठीक भी है।
यहाँ मैं मशहूर शायर "मुन्नवर राणा" के एक ट्वीट का ज़िक्र ज़रूर करना चाहूँगा,
" हुकूमत ट्रैफिक नहीं है जिसे डाइवर्ट कर दिया जाए , हुकूमत के लिए सुनना ज़्यादा पड़ता है और सुनाना कम। "  
उम्मीद करता हूँ के मेरी ये बात हुक्मरान के कानों तक ज़रूर पहुंचेगी।  
  

Saturday, 31 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE(PART-29)

                                                              जनवरीनामा -3
स्कूल में सफाई कर्मचारी कृष्णा दादी बन गई है। स्कूल की कर्मठ वर्कर पूनम नानी बन गई है। दूसरी भी लड़की हुई इसलिए नानी थोड़ी मायूस थी। सभी अध्यापकों द्वारा समझाए जाने पर पूनम के चेहरे पर ख़ुशी के भाव दिखाई दिए। वो असली थे या नकली वो खुद पूनम जाने। आज भी लड़की का घर में जन्म अशुभ ही माना जाता है । यही कारण है के हरियाणा में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आज भी 860 -70 के आसपास है। हालांकि 22 जनवरी  को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा "लड़की बचाओ ,लड़की पढ़ाओ "
अभियान की शुरुआत हरियाणा की ऐतिहासिक स्थली पानीपत से कर दी गई है। इस का असर आम जनता पर कैसे और कितना पड़ता है ये आने वाला समय ही बताएगा।
सरकार द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए 22 जनवरी को स्कूलों में छुट्टी का एलान कर दिया गया। इस तुगलकी फरमान से जहाँ बच्चों में ख़ुशी की लहर थी। वहीँ अध्यापकों को पानीपत रैली में भाग लेने के आदेशों से वो परेशान नज़र आए। बच्चे हमेशा से स्कूल में छुट्टी से इतने खुश क्यों होते हैं इस विषय पर सोचें और समझें तो शिक्षा क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है।
24 जनवरी को स्कूल में बच्चों ने वसंत उत्सव पतंगें उड़ा कर मनाया। यही नहीं एक खास तरह की पतंग भी उड़ाई गई।
एक कागज़ नुमा balloon में रखे कपूर में आग लगाई और उसकी गैस से कागज़ नुमा balloon पतंग बन उड़ चला । बरसों से ऐसे balloons को देखता आ रहा था लेकिन असल रहस्य आज पता चला।
 हर वर्ष की तरह इस बार भी कर्ण पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ झंडा फहराया।
66 वें गणतंत्र के बाद भी देश में गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार ,अपाहिज व पेचीदा कार्य प्रणाली जैसी समस्याएं आज भी मुहँ बाहे खड़ी हैं। नई सरकार इन सब समस्यायों का समाधान कैसे और कब तक निकाल पाएगी ये अभी देखना है। 
दिल्ली में राजनीतिक युद्ध का बिगुल एक बार फिर से बज चुका है। कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो चुका है। असली युद्ध बीजेपी और आम पार्टी के बीच है। मोदी लहर इस बार दिल्ली में क्या असर दिखाती है ये हम सब को 10 फरवरी को ही पता चल पाएगा।
जनवरी में शादियों का सीज़न भी शुरू हो गया। सीज़न शब्द इस लिए प्रयोग किया क्योंकि पंडितों के अनुसार इस माह शादियों का भरपूर साया था ।
21 जनवरी को मेरी पत्नि के साथ काम करने वाली अध्यापिका संगीता मेहता के पुत्र अकुल की शादी थी। इसी दिन बेटे के घनिष्ठ दोस्त जीवेश की बहन की शादी में भी शिरकत की। शादियों की भव्यता पर बढ़ता खर्चा सच में समाज के लिए चिंता का विषय है। 26 जनवरी को अम्बाला में अनिल दत्ता के बेटे अली अंगद की शादी भी थी। अमेरिका से संजय मल्होत्रा और कुवैत से आए उपेन्द्र कौशल उर्फ़ बबलू भी विवाह समारोह में शामिल हुए। 
दत्ता ने अपने बेटे से परिचय कुछ इस तरह से करवाया, "ये सभी मेरे इंडियन थिएटर के चांडाल चौकड़ी के साथी हैं।" एक लम्बे अर्से के बाद दत्ता से लम्बी बातचीत हुई। वो बिलकुल नहीं बदला है।नत्थू राम स्कूलों की कैंटीन के ठेकेदार हैं। उनके बेटे टिंकू की शादी में भी जाना हुआ। सच पूछो तो कुछ शादियों का मैं ज़िक्र नहीं कर रहा हूँ। इस बार शादियों ने बजट बिगाड़ कर रख दिया। अधिकतर शादियां पंडितों के लग्न और समय के निर्धारण से ही होती है ,फिर भी रिश्ते टूटने की संख्या में इज़ाफ़ा क्यों होता जा रहा है। ये समझ से परे है।
रास्ते में बेटे कशिश और उसके दोस्तों नितीश और पुंज से भी मुलाकात हो गई। कशिश मोटरसाइकिल के silencers बनाने में व्यस्त है।
भारत में बाबा ओबामा अपना जलवा बिखेर कर अमेरिका रुखसत हो गए हैं। जाते जाते भारत को नसीहत भी दे गए के अगर तरक्की करनी है तो धार्मिक सौहार्दता बना कर रखनी होगी। कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर एक रिक्त स्थान छोड़ गए जिस की भरपाई कभी पूरी नहीं हो पाएगी। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। मेरी श्रद्धांजलि।
जहाँ निफ़्टी 8900 और सेंसेक्स 29000 का आंकड़ा छू चुके हैं। वहीँ मेरे ब्लॉग पर viewers की संख्या 9800 पार कर चुकी है। ख़ुशी होती है जब आपके काम पर लोगों की नज़रे इनायत बनी रहती है। Dil-e-Dastan Pageview chart 9800 pageviews. 
आप को बता दूँ के दैनिक सवेरा में 29 जनवरी को मेरी कहानी ,"गर्म खून " publish "हुई है।https://m.ak.fbcdn.net/sphotos-e.ak/hphotos-ak-xfp1/v/t1.0-9/10406365_743963132359986_8912261835031181026_n.jpg?oh=e87c982d3c96ec623db67d6492cb66bb&oe=555B9143&__gda__=1432115402_fc62807bd649b2f3a4a6973f93e64423 मौका लगे तो ज़रूर पढ़ियेगा। मैं इस के लिए डॉ अजय शर्मा और दैनिक सवेरा का ज़रूर धन्यवाद करना चाहूँगा।  
पिछले ख़त में आप को बताया था के करनाल की सामाजिक संस्था निफा द्वारा आयोजित कार्यक्रम "लोहड़ी लड़कियों के नाम" में भ्रुण हत्या पर एक नाटिका करवाने का अवसर मिला था।बच्चों में छिपी कला को निखारने के लिए बस एक नज़र चाहिए। निफा समाज सेवा के साथ बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए अच्छा काम कर रहा है। नोनीत एक अच्छा एक्टर है। मेहनत करे तो अच्छा scope है। https://fbcdn-sphotos-b-a.akamaihd.net/hphotos-ak-xap1/v/t1.0-9/10685410_912264758786595_7638150339185660102_n.jpg?oh=d0a7156c73ccac7e901e0b3d07a55382&oe=55622C60&__gda__=1432085180_2433575fd64f70bd9e13a28c28cb9c70 उसी दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल महामहिम कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा सम्मानित किए जाने की एक फोटो आप के साथ भी शेयर कर रहा हूँ।
जनवरी '15 जा चुका है , कल एक नया दिन \ नया महीना शुरू हो जायेगा.......... उम्मीद करता हूँ के आने वाला समय भी बढ़िया ही बीतेगा। आज नज़ीर अकबराबादी को पढ़ रहा था ,उनकी नज़्म का एक शेर आप के मुख़ातिब है ……" जिसे मोल लेना हो ले लो ख़ुशी से , 
                             मैं इस वक़्त दोनों जहां बेचता हूँ। "
शुभकामनाएं !