Sunday, 19 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-32)

                                                                    जून -2015
दोस्तों नमस्कार !
स्कूलों में छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं । गर्मियों की इन छुट्टियों में ज़्यादातर दिनों में मौसम सुहाना ही बना रहा। बच्चों से 6 जुलाई को  मिलना हुआ  , बच्चों से दूर एक महीने भर की छुट्टियां बीताना काफी मुश्किल भरा रहा। स्कूल खुलने के साथ सच में ऐसा लगा मानो बगिया फूलों से खिल उठी हो।


बेटे कशिश ने मैकेनिकल में B.Tech कर लिया है। कईं जगह apply किया लेकिन किसी एक जगह से भी कॉल नहीं आई।  इस बात से पता चलता है की देश में रोज़गार  की कितनी समस्या है। दुनिया से बेखबर कशिश आज कल एक पुरानी गाड़ी को modify करने में मशगूल है।
उसका कहना है कि जीवन में वही काम करना चाहिए जो आप को अच्छा लगता है। कशिश का उत्साह और passion देखते बनता है ,मेरी शुभकामनायें।

लम्बे समय से जिस  इंतज़ार था वो घड़ी भी आ ही गई।  कर्ण पब्लिक स्कूल में भुजंग फिल्म का निर्माण दो साल पहले हुआ था।  इस फिल्म में रोल करने वालों ने अभी तक इस फिल्म को देखा नहीं था।  १४ जून को चंडीगढ़ के ललित कला अकादमी auditorium में इस फिल्म को दिखाया गया। फिल्म में काम करने वाले लोगों से पुनः मिलना हो गया ,अच्छा लगा।  फिल्म देखने के लिए कास्ट डायरेक्टर ज्योतिका , costume designer सुप्रीत चीमा , anchor प्रितमा , सुरेन , प्रोडक्शन इंचार्ज प्रवीन सहित करीब 250 लोगों ने फिल्म को देखा। यही नहीं फिल्म के दो मुख्य बाल कलाकारों यशित और सिद्धांत ने भी अपने -अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिरक़त की। फिल्म में मुख्य भूमिका "शंटी " का क़िरदार  निभाने वाला कलाकार ज़ुबिन गैर हाज़िर रहा।

जालंधर से दलजिंदर, मुंबई से फिल्म के लेखक/निर्देशक मोहिंदर प्रताप सिंह ने भी शिरकत की।   दोस्त अनुराग भी मुंबई काम के सिलसिले में चंडीगढ़ आया हुआ था ,रात को मोहाली अनुराग के फ्लैट में ही रुकना हुआ। रात को दलजिंदर के गीत सुनते रहे। ये रात यादगार बन गई।
जून की छुट्टियों में कसौली भी घूम आया। पहाड़ों का खुशनुमा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता मुझे हमेशा सुहाती है। हालाँकि पहाड़ों पर बढ़ता कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक खटकता है लेकिन पहाड़ों की सादगी और हरयावल हमेशा भाती है।
कसौली से २-३ किलोमीटर पहले ही गड़खल में दोस्त अमन सेठ की माता जी से भी मिल आया। कुछ दिनों पहले अमन के पिता की मृत्यु हो  गई थी। अमन के पिता कसौली और आसपास के इलाके में "सेठ साहब" के नाम से मशहूर थे और सरकारी ठेकेदार थे। मैं कईं बार उनसे मिला।  उनकी सादगी ,साफगोही और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा मेरे ज़हन में बसा रहेगा। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि !
धूप -छाँव और दुःख -सुख की तरह जीवन -मृत्यु भी अटल सत्य हैं। जो जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है। मेरे एक पुराने मित्र नवीन की माता जी भी अपनी जीवन यात्रा पूरी कर गईं। पड़ोस में रहने वाले नीटू भाई की माता जी और मन्नू भाई के पिता भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह गए। मेरे मित्र नवीन के पास सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले मेरे अजीज़ रवि के छोटे भाई ने आत्म हत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रवि ने बताया के उसका छोटा भाई कोई स्थाई रोज़गार ना मिलने के कारण परेशान रहता था। सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि !
आज सुबह ही मशहूर रूमानी शायर अहमद फ़राज़ की एक ग़ज़ल पढ़ रहा था। उस ग़ज़ल के दो अलग अलग शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
                                              "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
                                                सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

                                                सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
                                                ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं "

दोस्तों , बातों का सिलसिला इसी तरह चलता रहे। वैसे इस चिठ्ठी में कईं बातें जो छूट गई हैं , अगले ख़त के साथ उनका ज़िक्र ज़रूर करूंगा। अब आप से विदा लेता हूँ।
जय हो !

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