मन की बात
दोस्तों ,
जय हिन्द !
15 अगस्त को पूरा देश आज़ादी के जश्न में डूबा रहा । पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल था । देश के हर कोने में नेता अभिनेता ,समाजसेवी ,अध्यापक ,प्रध्यापक ,व्यापारी और अधिकारी राष्ट्रिय झंडा फहराने में मशग़ूल रहे। देश के प्रधान मंत्री ने भी लाल किले की प्राचीर से देश के नाम सन्देश दिया। टीवी channel भी
अपने -अपने ढंग से समाचार दिखाते रहे हैं। एक दिन के बाद अखबारों ने भी फोटो लगा कर अपने हिसाब से ख़बरें प्रकाशित कर दी।
इसी दिन बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से सीज़ फायर का उल्लंघन करते हुए भारत की तरफ गोले दागे जाते रहे। हालांकि सभी जानते हैं की भारत अलगाववादियों की बन्दर भबकियों से कतई डरने वाला नहीं है। परन्तु इस समस्या का कोई न कोई हल तो निकालना ही होगा। दोनों देशों के बीच होने वाली हाई प्रोफाइल वार्ता भी रद्द हो गई है।
आज़ादी के दिन भारत की क्रिकेट टीम को श्रीलंका के हाथों करारी हार से क्रिकेट प्रेमी थोड़े शर्म सार हुए। लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल की जीत ने लाज बचाने का काम किया। फाइनल में हार के बावजूद भी सायना विश्व रैंकिंग में नंबर वन बनी हुई है।
राजनीतिज्ञों ने ऐसा मकड़ जाल बनाया रखा है के जनता बेचारी परेशान है। क्या करें और क्या न करें। प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं और 70 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रहे हैं। बाज़ार में अरहर की दाल का भाव 160 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
ऐसा लगने लगा है कि क्रिकेट मैच के खिलाडियों की तरह राजनीतिज्ञ भी बारी बारी से अपनी पारी खेलते हैं। क्रिकेट मैच की तरह राजनीती में नेताओं की हार हो या जीत अपने आप को ठगा हुआ तो आम आदमी और दर्शक ही महसूस करता है। इनकी तो चित भी अपनी पट भी अपनी।
देश की आज़ादी को 68 साल हो गए हैं लेकिन समस्याएं जूं की तूं अपना मुहँ बाहे खड़ी हैं। गरीबी ,बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य,भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों में सुधार और इन समस्यायों का हल जल्द से जल्द खोजना होगा।
आज़ादी के अगले ही दिन देश के प्रधान मंत्री मोदी दुबई में पहुँच गए। अपने भाषणों और संवाद अदायगी से एक बार फिर वो मीडिया में छाए रहे। ध्यान रहे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान उतरी क्षेत्रों में घनघोर बादल छा तो रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इस बार मानसून 20 % कम आंकी जा रही है। ये समझना होगा कि आम आदमी का पेट भाषणों से नहीं भरता। अब तो आम आदमी कहने भी लगा है कि मोदी के भाषण कहीं मॉनसून के बादलों की तरह बिन बरसे तो नहीं निकल जाएंगे !
बेशक़ "फ़िल्म अभी बाकी है " आज कल ये डायलॉग सोशल मीडिया की भाषा में वायरल हो गया है और आम जनता भी ये समझती है के 60 साल से खोदे गए गड्ढों को भरने में समय चाहिए लेकिन ये भी नहीं भूलना होगा कि गरीबी से लड़ता आम आदमी अब थक चुका है।
फ़िल्म से याद आया के 15 अगस्त 1975 को शोले फिल्म रिलीज़ हुई थी। 40 साल हो गए लेकिन ये फिल्म आज भी लोगों के दिलों में राज करती है।
मशहूर शायर साक़ी फ़ारूक़ी की ग़ज़ल का एक शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
नज़रें मिला के देख मनाज़िर की आग में , (मनाज़िर - scenes /views )
असरार -ए -क़ायनात से पर्दा न कर अभी । (असरार -ए -क़ायनात - secret of universe )
चलिए फिर मिलते हैं ! अगले ख़त तक के लिए रुख़सत चाहता हूँ !
दोस्तों ,
जय हिन्द !
15 अगस्त को पूरा देश आज़ादी के जश्न में डूबा रहा । पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल था । देश के हर कोने में नेता अभिनेता ,समाजसेवी ,अध्यापक ,प्रध्यापक ,व्यापारी और अधिकारी राष्ट्रिय झंडा फहराने में मशग़ूल रहे। देश के प्रधान मंत्री ने भी लाल किले की प्राचीर से देश के नाम सन्देश दिया। टीवी channel भी
अपने -अपने ढंग से समाचार दिखाते रहे हैं। एक दिन के बाद अखबारों ने भी फोटो लगा कर अपने हिसाब से ख़बरें प्रकाशित कर दी।
इसी दिन बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से सीज़ फायर का उल्लंघन करते हुए भारत की तरफ गोले दागे जाते रहे। हालांकि सभी जानते हैं की भारत अलगाववादियों की बन्दर भबकियों से कतई डरने वाला नहीं है। परन्तु इस समस्या का कोई न कोई हल तो निकालना ही होगा। दोनों देशों के बीच होने वाली हाई प्रोफाइल वार्ता भी रद्द हो गई है।
आज़ादी के दिन भारत की क्रिकेट टीम को श्रीलंका के हाथों करारी हार से क्रिकेट प्रेमी थोड़े शर्म सार हुए। लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल की जीत ने लाज बचाने का काम किया। फाइनल में हार के बावजूद भी सायना विश्व रैंकिंग में नंबर वन बनी हुई है।
राजनीतिज्ञों ने ऐसा मकड़ जाल बनाया रखा है के जनता बेचारी परेशान है। क्या करें और क्या न करें। प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं और 70 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रहे हैं। बाज़ार में अरहर की दाल का भाव 160 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
ऐसा लगने लगा है कि क्रिकेट मैच के खिलाडियों की तरह राजनीतिज्ञ भी बारी बारी से अपनी पारी खेलते हैं। क्रिकेट मैच की तरह राजनीती में नेताओं की हार हो या जीत अपने आप को ठगा हुआ तो आम आदमी और दर्शक ही महसूस करता है। इनकी तो चित भी अपनी पट भी अपनी।
देश की आज़ादी को 68 साल हो गए हैं लेकिन समस्याएं जूं की तूं अपना मुहँ बाहे खड़ी हैं। गरीबी ,बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य,भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों में सुधार और इन समस्यायों का हल जल्द से जल्द खोजना होगा।
आज़ादी के अगले ही दिन देश के प्रधान मंत्री मोदी दुबई में पहुँच गए। अपने भाषणों और संवाद अदायगी से एक बार फिर वो मीडिया में छाए रहे। ध्यान रहे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान उतरी क्षेत्रों में घनघोर बादल छा तो रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इस बार मानसून 20 % कम आंकी जा रही है। ये समझना होगा कि आम आदमी का पेट भाषणों से नहीं भरता। अब तो आम आदमी कहने भी लगा है कि मोदी के भाषण कहीं मॉनसून के बादलों की तरह बिन बरसे तो नहीं निकल जाएंगे !
बेशक़ "फ़िल्म अभी बाकी है " आज कल ये डायलॉग सोशल मीडिया की भाषा में वायरल हो गया है और आम जनता भी ये समझती है के 60 साल से खोदे गए गड्ढों को भरने में समय चाहिए लेकिन ये भी नहीं भूलना होगा कि गरीबी से लड़ता आम आदमी अब थक चुका है।
फ़िल्म से याद आया के 15 अगस्त 1975 को शोले फिल्म रिलीज़ हुई थी। 40 साल हो गए लेकिन ये फिल्म आज भी लोगों के दिलों में राज करती है।
मशहूर शायर साक़ी फ़ारूक़ी की ग़ज़ल का एक शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
नज़रें मिला के देख मनाज़िर की आग में , (मनाज़िर - scenes /views )
असरार -ए -क़ायनात से पर्दा न कर अभी । (असरार -ए -क़ायनात - secret of universe )
चलिए फिर मिलते हैं ! अगले ख़त तक के लिए रुख़सत चाहता हूँ !
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