ये ज़िंदगी के मेले !
सावधान ! अगर आप ने किसी को उधार दिया है तो वापिस कभी न माँगिएगा। जिस ने आप के पैसे देने हैं उसके आत्म सम्मान को चोट पहुँच सकती है। जो दे दिया सो दे दिया ,अब उसे भूल ही जाएं तो बेहतर होगा। इधर आप ने अपने पैसे की मांग की उधर देने वाला आग बबूला हुआ। झट से वो रिश्ता तोड़ देगा। ख्याल रहे ,अगर आप ने कहीं अपने पैसे के लिए थोड़ा दबाव बनाने की कोशिश की तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
मुझे यहाँ मेरा एक दोस्त बिन्दा उर्फ़ बलविंदर सिंह मठारू (जो अब इस दुनिया में नहीं है )याद आ गया। लोहे की ग्रिल बंनाने का काम करता था। उसके हाथों में हुन्नर था। बहुत अच्छा काम था उसका। जिसको ज़रुरत होती बिन्दे से पैसे ले जाता। क्या मज़ाल के बिंदा किसी से पैसे वापिस मांग ले। वो तो बस यही कहता ,"सर जी वाहेगुरु देता रहे ,ये सब कुछ तो उसका है।" न जाने किस की नज़र लगी बिन्दे को- उसे शराब की लत लग गई। अब बिंदा शराब में टुन रहने लगा था। दोस्तों ने भी ऐश मारी बिंदे के साथ। क्या दिन ! क्या रात ! मयखाना हमेशा खुला रहता। धीरे धीरे काम कम होने लगा। पैसे की तंगी बढ़ने लगी। बहुत मुफलिसी के दिन देखे थे उसने। काम खत्म हो गया। घर में रोटी के लाले पड़ने लगे। दोस्त कभी कभार मदद कर देते। धीरे धीरे दोस्त भी बिंदे से छिपने लगे थे और बिंदा जहाँ दिखाई दे जाता कन्नी काट लेते। । पैसे की कमी के कारण लोगों से उधार उठाना पड़ता था उसे। देने में देर सवेर हो जाती तो माँ बहन भी सुननी पड़ती उसे। क्या मज़ाल की वो किसी को बुरा कह दे। बिंदा सब से अलग था।
बिन्दा अक्सर कहा करता था ,"ये दुनिया बहुत "मास्टर माइंड " (master mind ) है sir जी !
सोचता हूँ के क्या दुनिया सच में" मास्टर माइंड " है !
सावधान ! अगर आप ने किसी को उधार दिया है तो वापिस कभी न माँगिएगा। जिस ने आप के पैसे देने हैं उसके आत्म सम्मान को चोट पहुँच सकती है। जो दे दिया सो दे दिया ,अब उसे भूल ही जाएं तो बेहतर होगा। इधर आप ने अपने पैसे की मांग की उधर देने वाला आग बबूला हुआ। झट से वो रिश्ता तोड़ देगा। ख्याल रहे ,अगर आप ने कहीं अपने पैसे के लिए थोड़ा दबाव बनाने की कोशिश की तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
मुझे यहाँ मेरा एक दोस्त बिन्दा उर्फ़ बलविंदर सिंह मठारू (जो अब इस दुनिया में नहीं है )याद आ गया। लोहे की ग्रिल बंनाने का काम करता था। उसके हाथों में हुन्नर था। बहुत अच्छा काम था उसका। जिसको ज़रुरत होती बिन्दे से पैसे ले जाता। क्या मज़ाल के बिंदा किसी से पैसे वापिस मांग ले। वो तो बस यही कहता ,"सर जी वाहेगुरु देता रहे ,ये सब कुछ तो उसका है।" न जाने किस की नज़र लगी बिन्दे को- उसे शराब की लत लग गई। अब बिंदा शराब में टुन रहने लगा था। दोस्तों ने भी ऐश मारी बिंदे के साथ। क्या दिन ! क्या रात ! मयखाना हमेशा खुला रहता। धीरे धीरे काम कम होने लगा। पैसे की तंगी बढ़ने लगी। बहुत मुफलिसी के दिन देखे थे उसने। काम खत्म हो गया। घर में रोटी के लाले पड़ने लगे। दोस्त कभी कभार मदद कर देते। धीरे धीरे दोस्त भी बिंदे से छिपने लगे थे और बिंदा जहाँ दिखाई दे जाता कन्नी काट लेते। । पैसे की कमी के कारण लोगों से उधार उठाना पड़ता था उसे। देने में देर सवेर हो जाती तो माँ बहन भी सुननी पड़ती उसे। क्या मज़ाल की वो किसी को बुरा कह दे। बिंदा सब से अलग था।
बिन्दा अक्सर कहा करता था ,"ये दुनिया बहुत "मास्टर माइंड " (master mind ) है sir जी !
सोचता हूँ के क्या दुनिया सच में" मास्टर माइंड " है !
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