उदास चेहरा
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर
महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है
सब कुछ
माला के मोती ,
वीणा के तार
आईना
और
कविता के सब शब्द ।
बहुत कोशिश करता हूँ
मोतियों को जोड़ने की
के फिर से इक माला बन जाए ,
धीरे से फेरता हूँ अंगुलियां
वीणा की तारों पर
के तान सुनाए ,
जोड़ता हूँ शब्दों का ताना बाना
के इक कविता बन पाए ,
करता हूँ इकठ्ठा
बिखरे पड़े शीशे के टुकड़ों को
के अक्स नज़र आए ।
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर
महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है
सब कुछ
मैं
मेरे होने का अहसास
और ये दुनिया ।
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