Wednesday, 18 February 2015

उदास चेहरा

     
                                                      उदास चेहरा
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर 
 महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है 
सब कुछ
माला के मोती ,
वीणा के तार 
आईना 
और 
कविता के सब शब्द । 
बहुत कोशिश करता हूँ
मोतियों को जोड़ने की
के फिर से इक माला बन जाए ,
धीरे से फेरता हूँ अंगुलियां
वीणा की तारों पर
के तान सुनाए ,
जोड़ता हूँ शब्दों का ताना बाना 
के इक कविता बन पाए ,
करता हूँ इकठ्ठा 
बिखरे पड़े शीशे के टुकड़ों को 
के अक्स नज़र आए ।
तुम्हारा उदास चेहरा
देखकर 
महसूस होता है ऐसा
के बिखर सा गया है 
सब कुछ
मैं 
मेरे होने का अहसास 
और ये दुनिया ।









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