राम झूठ न बुलवाए...! (Part-1)
फरवरी माह की शुरूआत के साथ ही सूर्य देवता अपनी चमक दिखाने लगे हैं। ठंडी हवाऐं अपने पूरे यौवन पर हैं। फाल्गुन की शुरूआत से ही ये सर्द हवाएं मंद पड़ेंगी। लेकिन सूर्य देवता की गर्मी के आगे ढंड फाल्गुन से पहले ही फुर्र होती नज़र आ रही है।
दिल्ली में चुनाव संपन्न हो चुके हैं। आम आदमी पार्टी भाजपा को चुनावी दंगल में पटखनी दे चुकी है। इससे ये तो साफ़ हो गया है कि जनता जनार्दन की अनदेखी करना किसी भी पार्टी के लिए ख़तरनाक हो सकता है। बेशक़ वो कांग्रेस हो या फिर भाजपा।
आज जनता की मांग है कि कागज़ों पर बनने वाली योजनाओं -परियोजनाओं को तुरंत प्रभाव से किर्यान्वित करना होगा ताकि सरकार जो कर रही हैं उसका रिजल्ट भी साथ -साथ आता रहे । अच्छे दिन आने वाले हैं के नारे पर भाजपा को अर्श से फर्श पर पहुंचाने वाली जनता हरारत महसूस करने लगी है। आम आदमी कहने लगा है के उद्घाटन और घोषणाएं नहीं बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम करने की ज़रुरत है। टूटी सड़कें , बंद पड़ी सैनिटेशन व्यवस्था , अव्यवस्थित यातायात , पार्किंग व्यवस्था ,बस अड्डे का स्थानांतरण ,सुस्त और पेचीदा प्रशासनिक कार्य प्रणाली , बाजार में दुकानदारों द्वारा सड़कों पर कब्ज़ा करनाल की जनता के लिए कुछ ऐसे मुद्दे हैँ जिनका वो तुरंत हल चाहती है।
करनाल जब से सी एम सिटी बना है तब से सभी अफसर अपनी ट्रांसफर करवाने के चक्कर में हैं। हरियाणा में नौकरी करने वालों के लिए सब से बढ़िया कहे जाने वाले शहर करनाल में अब कोई अफसर रहना नहीं चाहता। पुलिस वाले तो कतई नहीं। कर्ण नगरी करनाल को ऐसा क्या हुआ कि अफसरों को करनाल में पोस्टिंग से डर लगने लगा है। बेशक़ ये "गुड गवर्नेंस " का असर हो परन्तु स्थानीय लोगों को सरकारी मशीनरी के ढीलेपन का कारण समझ नहीं आ रहा है। आम आदमी को अभी भी छोटे -छोटे कामों लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
करनाल के एम पी साहेब एक बड़े अख़बार के मालिक भी हैं। पिछले दिनों अख़बार में अमेरिकी राष्ट्रपति बोराक ओबामा के साथ अपनी तस्वीर को दूसरी अखबारों में विज्ञापन के रूप में छपवा कर वो शायद ये सिद्ध करना चाहते थे के उनके हाथ अलाद्दीन का चिराग हाथ लग गया है। चिराग के साथ हाथ मिलाते फोटो खिंचवा कर उन्हें क्या हासिल हुआ ये तो मैं नहीं जानता पर इस प्रकरण से थोड़ी किरकिरी तो ज़रूर हुई है।जिन अपना कमाल दिखा वापिस अमेरिका लौट चुका है। हलके में एम पी साहेब की नदारदगी से स्थानीय लोग नाख़ुश हैं।
स्कूलों में नया सैशन शुरू होने वाला है। शिक्षा संसद शुरू हो चुकी हैं। सरकार और स्कूल मालिकों के बीच बैठकों का दौर जारी हैं। कुछ अभिवावक संघ भी सक्रिय हो चुके हैं। फ्री एजुकेशन को ले कर बहस छिड़ चुकी है। मां -बाप महंगी होती शिक्षा से दुःखी हैं तो शिक्षा संस्थानों के मालिक बढ़ते खर्चों से परेशान हैं। इस शीत युद्ध में बच्चों के मर्म से सब बेफिक्र हैं। शिक्षा प्रणाली में बदलाव की आवश्यकता है।
देश में पेट्रोल और डीज़ल के दाम पिछले दिनों कम हुए। लेकिन समाचार है के हरियाणा में ५% वैट के कारण पेट्रोल के दाम दो रूपये 50 पैसे प्रति लीटर बढ़ गए हैं । विश्व बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में जिस तरह गिरावट आई है उसके मुकाबले पेट्रोल और डीज़ल के दाम में जितनी कटौती होनी चाहिए थी उतनी कटौती नहीं हुई । बेशक भाजपाई इस का क्रेडिट अपनी सरकार को देते रहें और देश के प्रधानमंत्री आम सभा में कहते रहें नसीब का अच्छा होना कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन देश की आम जनता का नसीब कब बुहरेगा इसका सभी को इंतज़ार है।
राम झूठ न बुलवाए .......... हुकमरान को ये समझना होगा कि आज की जनता कंप्यूटर युग में जी रही है जहाँ बटन दबाते ही बिना पलक झपके रिजल्ट सामने होता है। ऐसे में इस पीढ़ी की मनोस्थिति सरंचना भी "झट मंगनी और फट ब्याह" वाली हो गई है। शायद ये राष्ट्र उत्थान और राष्ट्र निर्माण लिए ठीक भी है।
यहाँ मैं मशहूर शायर "मुन्नवर राणा" के एक ट्वीट का ज़िक्र ज़रूर करना चाहूँगा,
" हुकूमत ट्रैफिक नहीं है जिसे डाइवर्ट कर दिया जाए , हुकूमत के लिए सुनना ज़्यादा पड़ता है और सुनाना कम। "
उम्मीद करता हूँ के मेरी ये बात हुक्मरान के कानों तक ज़रूर पहुंचेगी।
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