अक्टूबर महीने की शुरुआत हो गई है। मौसम में थोड़ी ठंडक शुरू हो चुकी है । घर के पीछे आँगन में बिल्ली और उसके तीन "बलूँगड़ों " को धूप में बैठना अच्छा लगने लगा है ।
पिछली बार 6 सितमबर को चिठ्ठी लिखी थी । अगस्त महीने में राखी का त्यौहार भी था । बहन भाई के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन पूरे भारत में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार का मुझे तो बेसब्री से इंतज़ार रहता है। भागम् भाग भरे इस युग में भाई बहन और दूसरे रिश्तेदारों से मिलना हो जाता है । मण्ढौर मेरा ससुराल है । वहां भी जाना होता है ।हर साल 20 से 25 लोगों का जमावड़ा वहां अपने आप एक महोत्सव जैसा माहौल बना देता है ।
इस बार मेरी पत्नी की बुआ के घर भी जाना हुआ । वो अम्बाला जिला के गोली गांव में रहती हैं । सादगी और संयम से भरपूर इस परिवार में मेरी पत्नी के फूफा ,बुआ उनके बेटे ,पुत्रवधु ,पोते राजदीप और पोतीयों नवदीप और नीरज से मिलना हुआ ।
अच्छा लगा कि गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई के प्रति सीरियस होने लगे हैं ,बड़ी बिटिया ने अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिए है और दूसरी बेटी एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग कर रही है ।
अपनी चिठ्ठी में कर्ण पब्लिक स्कूल का ज़िक्र न करूँ तो है तो ऐसा लगता है जैसे कि कुछ छूट सा गया है। पिछले दो महीने स्कूल में बच्चों के लिए बहुत सारी एक्टिविटीज का आयोजन किया गया । मेहंदी ,रंगोली ,भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।
हिंदी व अध्यापक दिवस के साथ -साथ छोटे बच्चों के लिए "एप्पल डे " और "बनाना डे " मनाया गया जिसमें बच्चों को फलों के महत्व के बारे में बताया गया ।
27 सितम्बर को "निफा " व " सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट " के बैनर तले शहीद -ए - आज़म "भगत सिंह " के जीवन पर आधारित एक लाइट एंड साउंड ड्रामा " A Misunderstood Hero " को निर्देशित करने का मौका मिला। Nifaa का सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थापित नाम है। इस संस्था के ' गिनीज़ Book ऑफ़ रिकार्ड्स " में तीन रिकार्ड्स दर्ज हैं। लम्बे अर्से के बाद एक अच्छी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। इस बार मैंने नाटक को ख़ूब मस्ती से किया। कुछ अच्छे लोगों के साथ काम करने का अनुभव लम्बे अरसे तक याद रहेगा। "नोनीत " ने नाटक की बहुत बढ़िया photos क्लिक की। Noneet निफ़ा का कर्मठ सदस्य है। निफ़ा के सभी सदस्यों की कार्यशैली ने भी प्रभावित किया।
इस शो में भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने भी शिरकत की। Nifaa के संचालक प्रितपाल सिंह पन्नू ने बताया कि इस नाटक के shows भारत व विदेश में भी किए जाएंगे।
पिछले दिनों शहर में आयोजित एक कार्यक्रम "राहगिरी "में जाना हुआ। बहुत दिनों के बाद किसी कार्यक्रम जाना अच्छा लगा। कोई फॉर्मेलिटी नहीं ,कोई बंधन नहीं ! समीर भाई का राहगिरी में जाने का प्रस्ताव था। मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि मैं अकेला कैसे जाऊँगा तो मैं भी तैयार हो लिया।
राहगिरी का "चौथा" शो था। हरियाणा के मुख्य मंत्री ने भी राहगिरी की। ज़बरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद भी वो आम आदमी की तरह मस्ती करते नज़र आये। वो सभी जगह मस्त अंदाज़ में बच्चों के साथ photos खिंचवाते नज़र आए।
राहगिरी का "छठ पर्व " सैक्टर -12 भी मनाया जा चुका है। खुसफ़ुस ये भी है कि पुलिस फ़ोर्स के जवान इसे बिना बात की सिरदर्दी मान रहे हैं। ऊँची आवाज़ में बजते फ़िल्मी गानों का शोर जहाँ जहाँ होता है ,वहीँ पर भीड़ ज़्यादा नज़र आती है । यदि संचालक इस प्रोग्राम की रूपरेखा को थोड़ा व्यस्थित करने में कामयाब हो जाते हैं तो उभरते कलाकारों (गीत /संगीत /अभिनय /नृत्य ) के लिए ये मंच कारगर साबित हो सकता है।
एक लम्बे समय से बीमार चल रहे हमारे पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता जी प्रभू चरणों में लीन हो गए। हंसमुख व्यक्तित्व के धनी व कभी हार न मानने वाले मेहंदीरत्ता जी की उनके बेटे अनिल व बॉबी ने खूब सेवा की। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
डेंगू ने शहर के लगभग सभी इलाकों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। सरकार डेंगू पर कंट्रोल करने में असफल रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले चांदी कूट रहे हैं। सरकार अपने चिर परिचित अंदाज़ में ये दावे कर रही है कि,"स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंतरण में है। "
नासा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 नवंबर से 30 नवंबर तक दिन में भी अँधेरा छाया रहेगा। अगर ऐसा होता है तो ये देखना अपने आप में एक अजब संजोग होगा।
चिट्ठियां लिखने का सिलसिला यूं ही बना रहे। यहाँ मैं " फैज़ अहमद फैज़ " साहब का शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
हम परवरिश - ए - लौह - ओ - क़लम करते रहेंगे
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे।
दोस्तों फिर मिलते हैं ! शुभकामनाएं !
पिछली बार 6 सितमबर को चिठ्ठी लिखी थी । अगस्त महीने में राखी का त्यौहार भी था । बहन भाई के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन पूरे भारत में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार का मुझे तो बेसब्री से इंतज़ार रहता है। भागम् भाग भरे इस युग में भाई बहन और दूसरे रिश्तेदारों से मिलना हो जाता है । मण्ढौर मेरा ससुराल है । वहां भी जाना होता है ।हर साल 20 से 25 लोगों का जमावड़ा वहां अपने आप एक महोत्सव जैसा माहौल बना देता है ।
इस बार मेरी पत्नी की बुआ के घर भी जाना हुआ । वो अम्बाला जिला के गोली गांव में रहती हैं । सादगी और संयम से भरपूर इस परिवार में मेरी पत्नी के फूफा ,बुआ उनके बेटे ,पुत्रवधु ,पोते राजदीप और पोतीयों नवदीप और नीरज से मिलना हुआ ।
अच्छा लगा कि गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई के प्रति सीरियस होने लगे हैं ,बड़ी बिटिया ने अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिए है और दूसरी बेटी एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग कर रही है ।
अपनी चिठ्ठी में कर्ण पब्लिक स्कूल का ज़िक्र न करूँ तो है तो ऐसा लगता है जैसे कि कुछ छूट सा गया है। पिछले दो महीने स्कूल में बच्चों के लिए बहुत सारी एक्टिविटीज का आयोजन किया गया । मेहंदी ,रंगोली ,भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।
हिंदी व अध्यापक दिवस के साथ -साथ छोटे बच्चों के लिए "एप्पल डे " और "बनाना डे " मनाया गया जिसमें बच्चों को फलों के महत्व के बारे में बताया गया ।
27 सितम्बर को "निफा " व " सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट " के बैनर तले शहीद -ए - आज़म "भगत सिंह " के जीवन पर आधारित एक लाइट एंड साउंड ड्रामा " A Misunderstood Hero " को निर्देशित करने का मौका मिला। Nifaa का सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थापित नाम है। इस संस्था के ' गिनीज़ Book ऑफ़ रिकार्ड्स " में तीन रिकार्ड्स दर्ज हैं। लम्बे अर्से के बाद एक अच्छी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। इस बार मैंने नाटक को ख़ूब मस्ती से किया। कुछ अच्छे लोगों के साथ काम करने का अनुभव लम्बे अरसे तक याद रहेगा। "नोनीत " ने नाटक की बहुत बढ़िया photos क्लिक की। Noneet निफ़ा का कर्मठ सदस्य है। निफ़ा के सभी सदस्यों की कार्यशैली ने भी प्रभावित किया।
इस शो में भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने भी शिरकत की। Nifaa के संचालक प्रितपाल सिंह पन्नू ने बताया कि इस नाटक के shows भारत व विदेश में भी किए जाएंगे।
पिछले दिनों शहर में आयोजित एक कार्यक्रम "राहगिरी "में जाना हुआ। बहुत दिनों के बाद किसी कार्यक्रम जाना अच्छा लगा। कोई फॉर्मेलिटी नहीं ,कोई बंधन नहीं ! समीर भाई का राहगिरी में जाने का प्रस्ताव था। मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि मैं अकेला कैसे जाऊँगा तो मैं भी तैयार हो लिया।
राहगिरी का "चौथा" शो था। हरियाणा के मुख्य मंत्री ने भी राहगिरी की। ज़बरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद भी वो आम आदमी की तरह मस्ती करते नज़र आये। वो सभी जगह मस्त अंदाज़ में बच्चों के साथ photos खिंचवाते नज़र आए।
राहगिरी का "छठ पर्व " सैक्टर -12 भी मनाया जा चुका है। खुसफ़ुस ये भी है कि पुलिस फ़ोर्स के जवान इसे बिना बात की सिरदर्दी मान रहे हैं। ऊँची आवाज़ में बजते फ़िल्मी गानों का शोर जहाँ जहाँ होता है ,वहीँ पर भीड़ ज़्यादा नज़र आती है । यदि संचालक इस प्रोग्राम की रूपरेखा को थोड़ा व्यस्थित करने में कामयाब हो जाते हैं तो उभरते कलाकारों (गीत /संगीत /अभिनय /नृत्य ) के लिए ये मंच कारगर साबित हो सकता है।
एक लम्बे समय से बीमार चल रहे हमारे पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता जी प्रभू चरणों में लीन हो गए। हंसमुख व्यक्तित्व के धनी व कभी हार न मानने वाले मेहंदीरत्ता जी की उनके बेटे अनिल व बॉबी ने खूब सेवा की। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
डेंगू ने शहर के लगभग सभी इलाकों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। सरकार डेंगू पर कंट्रोल करने में असफल रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले चांदी कूट रहे हैं। सरकार अपने चिर परिचित अंदाज़ में ये दावे कर रही है कि,"स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंतरण में है। "
नासा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 15 नवंबर से 30 नवंबर तक दिन में भी अँधेरा छाया रहेगा। अगर ऐसा होता है तो ये देखना अपने आप में एक अजब संजोग होगा।
चिट्ठियां लिखने का सिलसिला यूं ही बना रहे। यहाँ मैं " फैज़ अहमद फैज़ " साहब का शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
हम परवरिश - ए - लौह - ओ - क़लम करते रहेंगे
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे।
दोस्तों फिर मिलते हैं ! शुभकामनाएं !














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