स्कूल फीस
स्कूल असेंबली का ये नियम था के हर रोज़ एक अध्यापक और कुछ बच्चे कहानी ,गीत,चुटकले ,कविता ,यात्रा संस्मरण ,सद्वचन ,आज की बात ,ताज़ा ख़बरें या फिर किसी current topic पर ज़रूर बोलते। इस के बाद प्रिंसिपल बच्चों से मुख़ातिब होते और अपने अनुभव और कुछ नई बातें बच्चों के साथ सांझा करते । आज स्कूल असेंबली को पाँच बच्चों ने conduct किया था। रीना , अमर ,ज्योति ,पवन और माया। पांचों की presentation कमाल की थी। टीचर्स और बच्चों ने खूब enjoy किया। तालियों की गड़गड़ाहट से पाँचों बच्चे फूले नहीं समा रहे थे।
प्रिंसिपल ने बच्चों की सराहना करते हुए कहा ,"आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं। आप ही में से कोई कल का सचिन ,धोनी,सायना ,कल्पना या मलाला हो सकते हैं। " अपनी बात को समझाने के उदेश्य से प्रिंसिपल ने आगे बोलते हुए कहा ,"मैं आप को बता देना चाहता हूँ के अगर जोश और जुनून साथ हो तो कोई भी विपदा आड़े नहीं आती। बस ज़रुरत है अपने आप को सही दिशा में तैयार करने की। " अपनी speech के दौरान घडी की तरफ देखते हुए प्रिंसिपल बोले,"स्कूल आप सब के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ आप अपनी तैयारी सही ढंग से कर सकते हैं।"
इसी दौरान एकाउंट्स क्लर्क मीनू हाथ में एक लिस्ट लिए प्रिंसिपल के पास आकर खड़ी हो गई। प्रिंसिपल ने अपने चश्मे में से मीनू को देखा और उसने वो लिस्ट प्रिंसिपल को थमा दी। लिस्ट पर नज़र दौडाते हुए उन्होंने अपना टॉपिक change करते हुए कहा ,"देखो बेटा आज महीने की 12 तारीख हो गई है लेकिन अभी तक बहुत सारे बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है। जिन बच्चों की फीस अभी तक जमा नहीं हुई है वो अपने पेरेंट्स को फीस जमा करवाने के लिए बोलें। आप लोगों सेबातें तो बहुत करनी थी लेकिन असेंबली का समय पूरा हो चुका है। May God bless you all .आप से कल फिर मु लाकात होती है।" यह कहते हुए प्रिंसिपल ने अपनी वाणी को विराम दे दिया।
अपने कमरे में पहुँचते ही प्रिंसिपल ने टेबल पर रखी घंटी पर अपनी अंगुली दबा दी। आवाज़ सुन कर रमेश ने भागते हुए कमरे में प्रवेश किया। अपने ही स्टाइल में उसने पूछा ,"हाँ जी सर ?" प्रिंसिपल ने रमेश को एक पर्ची थमाते हुए कहा ,"इन बच्चों को जल्दी से मेरे पास भेजो। " पर्ची पर उन पाँचों के नाम थे। रमेश बाहर जा चुका था। प्रिंसिपल असेंबली वाले बच्चों को गिफ्ट देने के लिए अलमारी में से कुछ निकालने लगे। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रिंसिपल कोई न कोई गिफ्ट देते रहते।
अपनी कुर्सी पर बैठने के बाद खिड़की में से वो बाहर की तरफ देखने लगे। उन्होंने बाहर से ज्योति को आते हुए देखा। ज्योति उन पांचों बच्चों में से एक थी। वो धीरे -धीरे प्रिंसिपल के कमरे की और बढ़ रही थी। उसके चेहरे पर उदासी साफ नज़र आ रही थी। प्रिंसिपल के कमरे में प्रवेश करते ही वो पीली पड़ गई। प्रिंसिपल ने बच्ची को घबराते हुए देखा तो वो मुस्कुराते हुए बोले , " बेटा आप को मालूम है के मैंने आप को आज किस लिए बुलाया है ?"
अपनी गर्दन हिलाते हुए हुए वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। "अरे बेटा क्या हुआ ?आप इस तरह से क्यों रो……?" इस से पहले के प्रिंसिपल अपनी बात पूरी करते ,ज्योति रोते -रोते बोली , "मेरे पापा कह रहे थे के फीस जल्द ही जमा करवा देंगे। पापा बीमार हैं। वो आज कल काम पर भी नहीं जाते। वो कह रहे थे के पैसे आते ही फीस जमा करवा देंगे। सर , क्लर्क मैडम कह रही थी कि जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है उनको दिसंबर टेस्ट में नहीं बैठने दिया जाएगा।"
कल से दिसंबर टेस्ट शुरू होने थे। ज्योति को इनाम के रूप में दिया जाने वाला पेन प्रिंसिपल के हाथ से छिटक कर नीचे गिर गया। उसने नन्ही ज्योति को अपनी छाती से लगा लिया।
बच्ची डर के मारे अभी भी रोए जा रही थी !
स्कूल असेंबली का ये नियम था के हर रोज़ एक अध्यापक और कुछ बच्चे कहानी ,गीत,चुटकले ,कविता ,यात्रा संस्मरण ,सद्वचन ,आज की बात ,ताज़ा ख़बरें या फिर किसी current topic पर ज़रूर बोलते। इस के बाद प्रिंसिपल बच्चों से मुख़ातिब होते और अपने अनुभव और कुछ नई बातें बच्चों के साथ सांझा करते । आज स्कूल असेंबली को पाँच बच्चों ने conduct किया था। रीना , अमर ,ज्योति ,पवन और माया। पांचों की presentation कमाल की थी। टीचर्स और बच्चों ने खूब enjoy किया। तालियों की गड़गड़ाहट से पाँचों बच्चे फूले नहीं समा रहे थे।
प्रिंसिपल ने बच्चों की सराहना करते हुए कहा ,"आज के बच्चे ही कल का भविष्य हैं। आप ही में से कोई कल का सचिन ,धोनी,सायना ,कल्पना या मलाला हो सकते हैं। " अपनी बात को समझाने के उदेश्य से प्रिंसिपल ने आगे बोलते हुए कहा ,"मैं आप को बता देना चाहता हूँ के अगर जोश और जुनून साथ हो तो कोई भी विपदा आड़े नहीं आती। बस ज़रुरत है अपने आप को सही दिशा में तैयार करने की। " अपनी speech के दौरान घडी की तरफ देखते हुए प्रिंसिपल बोले,"स्कूल आप सब के लिए एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहाँ आप अपनी तैयारी सही ढंग से कर सकते हैं।"
इसी दौरान एकाउंट्स क्लर्क मीनू हाथ में एक लिस्ट लिए प्रिंसिपल के पास आकर खड़ी हो गई। प्रिंसिपल ने अपने चश्मे में से मीनू को देखा और उसने वो लिस्ट प्रिंसिपल को थमा दी। लिस्ट पर नज़र दौडाते हुए उन्होंने अपना टॉपिक change करते हुए कहा ,"देखो बेटा आज महीने की 12 तारीख हो गई है लेकिन अभी तक बहुत सारे बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है। जिन बच्चों की फीस अभी तक जमा नहीं हुई है वो अपने पेरेंट्स को फीस जमा करवाने के लिए बोलें। आप लोगों सेबातें तो बहुत करनी थी लेकिन असेंबली का समय पूरा हो चुका है। May God bless you all .आप से कल फिर मु लाकात होती है।" यह कहते हुए प्रिंसिपल ने अपनी वाणी को विराम दे दिया।
अपने कमरे में पहुँचते ही प्रिंसिपल ने टेबल पर रखी घंटी पर अपनी अंगुली दबा दी। आवाज़ सुन कर रमेश ने भागते हुए कमरे में प्रवेश किया। अपने ही स्टाइल में उसने पूछा ,"हाँ जी सर ?" प्रिंसिपल ने रमेश को एक पर्ची थमाते हुए कहा ,"इन बच्चों को जल्दी से मेरे पास भेजो। " पर्ची पर उन पाँचों के नाम थे। रमेश बाहर जा चुका था। प्रिंसिपल असेंबली वाले बच्चों को गिफ्ट देने के लिए अलमारी में से कुछ निकालने लगे। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रिंसिपल कोई न कोई गिफ्ट देते रहते।
अपनी कुर्सी पर बैठने के बाद खिड़की में से वो बाहर की तरफ देखने लगे। उन्होंने बाहर से ज्योति को आते हुए देखा। ज्योति उन पांचों बच्चों में से एक थी। वो धीरे -धीरे प्रिंसिपल के कमरे की और बढ़ रही थी। उसके चेहरे पर उदासी साफ नज़र आ रही थी। प्रिंसिपल के कमरे में प्रवेश करते ही वो पीली पड़ गई। प्रिंसिपल ने बच्ची को घबराते हुए देखा तो वो मुस्कुराते हुए बोले , " बेटा आप को मालूम है के मैंने आप को आज किस लिए बुलाया है ?"
अपनी गर्दन हिलाते हुए हुए वो ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। "अरे बेटा क्या हुआ ?आप इस तरह से क्यों रो……?" इस से पहले के प्रिंसिपल अपनी बात पूरी करते ,ज्योति रोते -रोते बोली , "मेरे पापा कह रहे थे के फीस जल्द ही जमा करवा देंगे। पापा बीमार हैं। वो आज कल काम पर भी नहीं जाते। वो कह रहे थे के पैसे आते ही फीस जमा करवा देंगे। सर , क्लर्क मैडम कह रही थी कि जिन बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है उनको दिसंबर टेस्ट में नहीं बैठने दिया जाएगा।"
कल से दिसंबर टेस्ट शुरू होने थे। ज्योति को इनाम के रूप में दिया जाने वाला पेन प्रिंसिपल के हाथ से छिटक कर नीचे गिर गया। उसने नन्ही ज्योति को अपनी छाती से लगा लिया।
बच्ची डर के मारे अभी भी रोए जा रही थी !
No comments:
Post a Comment