Tuesday, 30 December 2014

खिचड़ी -2

                                                            खिचड़ी -2 
  दिसम्बर महीने में दोस्तों  को comments किए और कुछ अपनी वाल पर पोस्ट किया ! इन को पढ़ रहा था तो लगा के social media के बेशक़ लाख नुकसान हों लेकिन ये आपको दोस्तों ,विचारों ,संवेदनाओं और खासतौर पर दुनिया से जोड़े रखता है।दोस्त और दुनिया के लोग क्या सोच रहे हैं हम उससे वाकिफ होते हैं। "खिचड़ी -1 " की तरह ही इस बार भी दोस्तों की wall पर जो post किया वो "खिचड़ी -2" के रूप में तैयार है। 2014 बस जाने वाला है आओ हम सब मिलकर नववर्ष 2015 का स्वागत करें।
धर्म परिवर्तन।  कुछ समझ नहीं आ रहा के देश में ये चल क्या रहा है। "न्म दिन मुबारक हो विशाल भाई। आपका जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे।"य हो। अच्छा डॉक्टर साहेब मुंबई पहुँच गए ! पेंदर जी  अगर आप के पास समय हो तो बात करें ? वैसे आप हैं कहाँ? Mr. India की तरह कहाँ गायब हो जाते हो ? कोई खबर नहीं ?र ते मन च रहन्दा ही है डॉ साहेब।  शिखर के छूने के सुख को मनुष्य जो पहाड़ों पर विजय पताका फहरा रहा है। और जहाँ -जहाँ मनुष्य पहुंचा है वहां सत्यानाश हुआ है। बेशक वो धरती ,आसमान ,समुद्र या फिर पहाड़ हों !
ये सब कुछ इसी तरह होता रहेगा ,जब तक हम सुनने वाली भीड़ का हिस्सा बने रहेंगे। जोगेन्दर भाई जीवन में खटास और मिठास के साथ संतुलन बना रहे। यही शुभकामना।देश में अच्छा माहौल बनाने की ज़रुरत है। आखिर हम कब तक इसी तरह की राजनीति करते रहेंगे। ये वास्तव में दुखद समझौता ही है।
लो थोड़ा घूमना हो जाए !कल मिलते हैं।लिक परिवार की ओर से ऋचा को जन्म दिन मुबारक हो।
बरदस्त फोटो है डॉ साहेब !  ये बताता है के जीना  चाहते हो अभी उपमन्यु। उपमन्यु अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा संभल जाओ ! 
कभी -कभी आतंक का दूसरा नाम लगता है पुलिस।  साल में एक दो बार चंडीगढ़ जाना होता है,शहर में घुसते ही चौंक पर शिकारी कुत्तों की तरह सूंघते पुलिस वालों को देख कर सच में डर लगने लगता है। अब रोका के अब रोका। साल में एक बार वो पकड़ ही लेते हैं। कभी हेड लाइट बुझी है तो कभी हेड लाइट क्यों जला रखी है ? चलान भुगतो या फिर जेब गर्म करो।बिलकुल नहीं डरते हैं घूस लेते हुए। पता नहीं क्यों।
 Pakistan में स्कूली बच्चों पर हुए हमले ने अंदर तक हिला के रख दिया है। सोच रहा हूँ के आदमी इतना निर्दयी भी हो सकता है ?अमानवीयता की अति है ये तो !
 हुत मर्म है आप की बात में ! "माँ " दरवाजा तकती रह गई-बच्चे स्कूल से सीधे जन्नत चले गए ।।साभार प्रदीप राठौर। क  उम्दा कविता।हुत ख़ूब जनाब ! सच्ची कहानी ! शादियों में अक्सर ऐसा सुनने को मिलता है। यही नहीं लोग अपनी प्लेटों में इतना भर लेते है मानो सदियों से भूखे हों !
 न्म दिन की मुबारक कबूल हो हमारी ! जीवन में हर ख़ुशी मिले आप को ये कामना है हमारी ! जन्म दिन मुबारक़ हो सुनील जी।  न्म दिन मुबारक़ हो प्रियंका ! जन्मदिन मुबारक़ हो समीर जी !न्मदिन मुबारक़ हो अशोक भाई !पुरानी तस्वीरें। ये तस्वीर अमानत की शादी वाले दिन खींची थी। न्म दिन मुबारक हो परविंदर पल जी  ! इसी के साथ नव वर्ष की शुभकामनायें भी स्वीकार करें। प्रभु आप को व् परिवार को खुशियां बख्शें।
 दुःख सुख ,लाभ हानि और जीवन मृत्यु हमारी रोज़मर्रा ज़िंदगी का हिस्सा हैं। 2014 बीत चुका है।  पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो यही लगता है के आज पुरे विश्व में शांति और मानवता की ज़रुरत है।  नया साल 2015 आने वाला है। आओ सब मिल कर पूरे विश्व कल्याण के लिए दुआ करें और इस के लिए सार्थक प्रयास भी करें ।
 आप सब को नववर्ष २०१५ के लिए शुभकामनायें !

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