Thursday, 11 December 2014

खिचड़ी-1

                                                               खिचड़ी-1 
ल किरयाने की एक दुकान पर खड़ा था। लाला जी किसी ग्राहक से बातचीत में मशगूल थे। वो उस को बताने लगे के दुकानदारी आसान काम नहीं है। कहने लगे के दुकान में जितना मर्ज़ी सामान डाल लो कोई न कोई ग्राहक खाली ज़रूर जाता है। ग्राहक उनसे पूछ बैठा ,"ऐसी कौन सी चीज़ है जो आप की दुकान में नहीं है ?" लाला जी सोचने लगे लेकिन उन्हें ऐसी कोई चीज़ याद न आई। दिमाग पर बहुत ज़ोर डालने के बाद बोले ,"हाँ सच ! कल एक ग्राहक खिचड़ी मांगने लगा। लेकिन मेरी दुकान में खिचड़ी का पैकेट नहीं था। "
"खिचड़ी का क्या है इसको बनाना तो बहुत ही आसान है। कोई भी दो -तीन दाल और चावल mix कर के दे देते।" लाला के साथ खड़ा व्यक्ति बोला। " मैं भी जाणू हूँ के खिचड़ी क्या होती है लेकिन वो तो किसी कंपनी का पैकेट ही मांग रहा था। " लाला जी  ने सफाई देते हुए कहा ।
घर पहुंचा तो फेसबुक पर हिंदी में लिखे comments देख कर मेरा भी मन हुआ के हिंदी  में कमेंट्स किए जाएं तो पढ़ने वाले के लिए आसान हो जाएगा। वर्ना कई बार तो अर्थ ही बदल जाता है। कंप्यूटर में हाथ तंग होने के कारण मैं ये कर नहीं पा रहा था। मैंने एक file खोल कर किसी तरह हिंदी में लिख कर copy किया और लगा face Book पर  paste करने। थोड़ी देर के बाद जब हिंदी लिखने वाली file पर पहुंचा तो  वहां बहुत बढ़िया खिचड़ी पक चुकी थी। आप भी चख कर देखिए कैसी है ये खिचड़ी !
 ज़ुल्फ़िकार भाई , अगर 27 साल के बाद दोबारा "आगरा बाज़ार " में काम करने का मौका मिलता है तो अच्छा होगा। बहुत सारी यादें जुड़ी हैं इस  नाटक के साथ। शुभकामनायें।   मोहिन्दर जी को मेरा सादर प्रणाम ज़रूर पहुँचाना। च्चन जी पहले बधाई.... …… ! बच्चन जी ,दिल से लिखते हैं आप। जीवन में सामजस्य बना कर रखना भी कोई अपराध है क्या ? ज़ुली, मोहिन्दर जी को मेरा सादर प्रणाम ज़रूर पहुँचाना। क्या शादी के बाद किसी दूसरी स्त्री से प्यार बनाना जुर्म है ? वैसे लोग ये भी तो कहते हैं के प्यार कभी एक तरफ़ा नहीं होता। बरदस्त ! विलक्षण के जन्म दिवस पर पूरे जोशी परिवार को मुबारक। प्रभू विलक्षण को सद्बुद्धि व् दीर्घायु बख्शें। धाई अंकल ! परन्तु समझ नहीं आ रहा के आप ने किसी बनिए की बही  की तरह ऐसा क्यों लिखा कि किसी को समझ ही न आये। लो अच्छा है ………इसी तरह कारवां बनता रहे। पुनः  विलक्षण को जन्मदिन मुबारक हो ! "Happy B 'Day"  हुत ही पेचीदगी है आप की इस बात में। क्या आप का ये मानना है कि पुरुष फ़िज़ूल खर्ची  है और उसी की वजह से परिवार ऋणी होता है।क समय के बाद पारिवारिक रिश्ते टूटने और बिखरने ही लगते हैं ,बेशक कारण अलग अलग हो सकते हैं। ब माया है ! दलाव मे समय तो लगता ही है। ढ़िया है जोगेन्दर भाई ! हा हा हा हाहाहाःहाहा हा हा हा हा ! ता नहीं पादने के नाम पर सब का पाद क्यों निकल जाता है। हुत अच्छे ! किसी कहानी का ज़िक्र करें तो और भी अच्छा होगा ललित जी ! ये एक बढ़िया प्रयास है समाज में फैली बुराइयों और कचरे को दूर करने के लिए किसी न किसी को तो आगे आना ही होगा। निफा टीम को बधाई ! शा करता हूँ आप दोनों सकुशल हैं ! सुप्रभात ! हाँ मोहिन्दर आप  की कहानी के हिसाब से तो ये ज़बरदस्त लग रहा है ! श्विनी ,लोगों को खुजली लगाने का ये अच्छा तरीका है। लेकिन बच्चों को तो आज तक यही पढ़ाया गया के "जनसंख्या "अभिशाप है। ये एक ऐसा भूत है जो प्रगति को डकार जाता है। और गरीबों को आगे नहीं बढ़ने देता।  हन जी ये हमारे और अंकल के बीच की गुफ्तगू थी। खैर ! मेरी यही शुभकामना है के almighty आप सब पर खुशियों रुपी पुष्प वर्षा सदैव करते रहें। मिठाई देखकर मुहं में पानी आ रहा है।
 बचपन से यहीं गाना सुनते आ रहे हैं……, "हम भी अगर बच्चे होते खाने को मिलते लड्डू। "
जय हो !

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