Sunday, 2 March 2014

A LETTER......EK CHITHEE PART-7




दोस्तों !
कमाल की चीज़ है ये चिठ्ठी। मन तो ये करता है के लिखना बंद ही न करूं। लिखता रहूँ निरंतर। खैर ! ये सिलसिला अगर चलता रहा तो आप लोगों के साथ बहुत कुछ साँझा करने का मौका मिलेगा।

आप को बता दूं ७ मार्च को "गुलाब गैंग" रिलीज़ हो रही है। ज़रूर देखिएगा। आप भी  सोच रहे होंगे मेरा इस से क्या ताल्लुक़ ! ताल्लुक़ है इसीलिए आप को लिख रहा हूँ। इस फ़िल्म के डायलॉग अमितोष नागपाल ने लिखे हैं। यही नहीं फ़िल्म "गुलाब गैंग" के गीत अमितोष की पत्नी नेहा सराफ ने लिखे हैं। अमितोष में गजब की एनर्जी के साथ साथ बहुगुणी प्रतिभा है। इस से पहले वो शेक्सपियर के नाटक "ट्वेल्फ़्थ नाईट " का हिंदी रूपांतरण कर चुका है। "पिया बहरूपिया" के नाम से इस के शो देश विदेश में पसंद किए जा रहे हैं। इस नाटक में दोनों ने अभिनय भी किया है। अतुल कुमार  द्वारा निर्देशित इस नाटक में नेहा ने लाजवाब काम किया है।

अमित इस से पहले कईं फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ चुका है। हाल ही में प्रदर्शित "बेशर्म",रंगरेज़ ","आरक्षण" व  "दबंग" में उसने अपने अभिनय से सब को प्रभावित किया है। "

मेरे संपर्क में अमितोष कईं साल पहले करनाल (हरयाणा ) में खालसा कॉलेज में एक नाटक करवाने के दोरान आया।  "मुंशी प्रेम चंद " की कहानी पर आधारित नाटक "कफ़न" में अमितोष ने ज़बरदस्त अभिनय किया। कमाल का जुनून था उसमें। नाटक के बाद भी अमित ने मेरा पीछा नहीं छोड़ा। हर रोज़ मुझे खोज लेता और एक ओर नाटक करवाने की ज़िद करने लगता। नाटक तो मैं भी करना चाहता था परन्तु पेट और परिवार के चक्कर में समय न निकाल पाता। अमितोष पर किसी बात का असर न होता। वो तो बस नाटक करवाने की ज़िद पर अड़ा रहता। मैं उस को कहता ,"येड़ा है क्या ? " तो वो बिल्कुल पागलों की तरह कहता ,"जो कुछ मर्ज़ी  समझ लो गुरु जी।"

अगले बरस मुझे करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में नाटक करवाने का मौका मिला। वहाँ "डॉ कँवल नयन कपूर " द्वारा लिखित नाटक "चिड़िया मुझे बना दो राम " नाटक करवा रहा था। मैंने अमित को इस का कोई ज़िक्र न किया। लेकिन अमित तो अमित ,पता नहीं उसे कहाँ से भनक लगी और आ धमका रिहर्सल पर। यहाँ उसने  मेरी खूब मदद की। जब भी खाली समय मिलता ,एक नाटक करवाने की ज़िद दोहराता।

इसके बाद उसने  मिलने का सिलसिला और तेज़ कर दिया। एक दिन मैं उसे कह बैठा " एक्टर्स के बिना नाटक कैसे होगा। तेरे अकेले को कैसे नाटक करवाऊं। " मेरी इस बात को सुन कर वो उठा और अपनी ख़ास मुस्कान बिखेरते  हुए बोला," कोई न गुरु जी ! अब देखता हूँ के कैसे बचोगे।" हर रोज़ दो तीन लोगों को पकड़ लाता। पकड़ने से मेरा मतलब ये है के हर रोज़ एक नया आता और एक पुराना चला जाता।

जब मुझे लगा के अमितोष के आगे मेरी दाल नहीं गलने वाली तो रिहर्सल का सिलसिला शुरू हो गया। आग तो मेरे अंदर भी धधक रही थी , अमित ने उसमें चिंगारी लगा दी। नाटक की रिहर्सल शुरू हो गई। कभी मेरे घर कि छत पर तो कभी अटल पार्क में। धीरे -धीरे लोग जुड़ने लगे और कारवां बनता चला गया। मेरे साथ कॉलेज में पढ़ने वाले सुदर्शन के एक स्कूल में भी नाटक की रिहर्सल का सिलसिला चलता रहा। बाद में समीर के स्कूल गुरु हर किशन पब्लिक स्कूल के साइकिल स्टैंड में भी रिहर्सल करते रहे। समीर ने मेरे हर नाटक में प्रत्य़क्ष-अप्रत्यकश दोनों तरह से मेरी मदद की है।

"सआदत हसन मंटो " की कहानी "हतक " के लिए नाटक करने के लिए कोई लड़की तैयार न होती। जो भी आती भाग जाती। पता नहीं अमितोष ने क्या घुट्टी पिलाई आख़िरकार दो लड़कियां नाटक करने के लिए तैयार हो गईं। कभी देर हो जाती तो अपनी साइकिल पर कईं किलोमीटर लड़कियों को उन के घर छोड़ कर भी आता।

इसी बीच कॉलेज में मुझे मेरा पहला नाटक करवाने वाले मेरे गुरु विजय साहनी से मुलाक़ात हो गई। उन्होंने सुझाव दिया के नाटक को पंजाब के पठानकोट में हर वर्ष होने वाले नाट्य उत्सव में खेला जाए।हम सब तैयार हो गए।  अंततय : नाटक का सफल मंचन हुआ। अमितोष के अभिनय की सभी ने भूरि भूरि प्रशंसा की। यहाँ अमित "सर्वश्रेष्ठ अभिनेता " चुना गया।

गुरु नानक खालसा कॉलेज में "ओम प्रकाश बाल्मीकि" के नॉवेल "झूठन" की एकल प्रस्तुति से भी अमित ने खूब सुर्खियां बटोरीं। कॉलेज के लोगों  को इस बात पर विश्वास नहीं होता था के केवल एक एक्टर से भी नाटक हो सकता है !यूनिवर्सिटी के युवा उत्सव में ये अपनी तरह का पहला प्रयोग था। अमित ने यहाँ भी अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़े। यहाँ पुन :अमित सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया।  बड़ी सादगी से अमित अपने कर्मक्षेत्र से जुड़ा रहा । नाटक और अभिनेता दोनों सर्वश्रेष्ठ घोषित किए गए। अमित को कॉलेज व कुरुक्षेत्रा विशव विद्यालय दोनों के द्वारा सम्मानित किया गया।
यही नहीं "खुशवंत सिंह" के नाटक " गिरगिट " और "मंगलेश डबराल" द्वारा गुजरात के दंगों पर लिखित कविता "एक जले हुए आदमी की आत्मकथा " में अमित द्वारा  किया गया अभिनय आज भी दर्शकों के दिलो -दिमाग पर छपा हुआ है।

बाद में अमितोष ने एन एस ड़ी (नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा )से डिप्लोमा किया और आजकल क्या कर रहा है इससे तो आप सब वाकिफ़ हो ही गए होंगे।

आज ही अमितोष से फ़ोन पर लम्बे अर्से के बाद बातचीत हुई। उसने बताया के वो अभी अभी "कामशेत " से लौटा है। मुम्बई से दूर गांव में कामशेत थिएटर और कला से जुड़े लोगों के लिए एक ऐसी जगह है ,जहाँ कलाकार शान्ती और सकूं से कम कर सकता है। लम्बे अर्से से इस ड्रीम प्रोजेक्ट का उनकी टीम को इंतज़ार था। जो पूरा हुआ। अमितोष बाप बन गया है बेटे का नाम पूछा तो उसने बताया ,"अनेये।" "अमितोष -नेहा और ये। " अमितोष ख़त पढ़ो तो "अ ने ये " को मेरा प्यार देना।                  

अभी अभी मुम्बई में ही मोहिंदर प्रताप सिंह से भी फ़ोन पर बातचीत हुई। मैंने पहले भी एक चिठ्ठी में ज़िक्र किया था के उसके द्वारा निर्देशित फ़िल्म भुजंग को चिल्ड्रेन फ़िल्म सोसाइटी ऑफ़ इंडिया ने अप्रूव कर दिया है। मोहिंदर बोला ,"पैसे मिल जाएँ तो समझो फ़िल्म की यात्रा भी पूरी हो जाएगी। " कर्ण पब्लिक स्कूल के सभी लोगों को इस फ़िल्म का बेसब्री से इंतज़ार है। आखिर सभी ने इस फ़िल्म में अपनी रूह से हिस्सेदारी जो की है। उम्मीद करता हूँ के फ़िल्म जल्द पूरी होगी।


एक बार पुन : अमितोष नेहा को "गुलाब गैंग" के लिए बधाई और सफलता के लिए ढ़ेर सारी शुभ कामनाएँ। अगले ख़त के ज़रिए जल्द मिलते हैं !आप सब फ़िल्म ज़रूर देखिएगा।

फ़िल्म की तरह जीवन भी एक यात्रा ही तो है। जिस में हम सब यात्री की तरह अपने अपने ढंग से सफ़र कर रहे हैं !

-----------------------TO BE CONTINUED




 

No comments:

Post a Comment