Wednesday, 12 March 2014

A LETTER......EK CHITHEE PART-11






 जयहिन्द !! !!
इस बार जय हिन्द इसलिए ताकि मेरे देश के मतदाता सोच समझ कर अपनी सरकार चुनें। चुनाव सर पर हैं और सभी पार्टियां जनता का सर घुमाने में जुटी हैं। इस बार ऐसी सरकार हो जो गरीबों ,किसानों ,मज़दूरों ,महिलाओं और मेहनत कश लोगों के दुःख दर्द को समझे। इन के दुःख निवारण के लिए कृतसंकल्प हो और साथ साथ प्रयास भी करे। देश जब तक गरीबी और भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं होता तब तक हम सब के लिए जयहिन्द के कोई मायने नहीं। ज़रुरत है ज़मीनी स्तर पर परिवर्तन की। अन्यथा पिछले 66 साल की तरह हम इस बार भी आम चुनावों में ख़ुद को ठगा ठगा सा महसूस करेंगे। अभी मौका है , सोच और समझदारी से निर्णय लें। बकौल ज़ाहिद शाह :
ईद का दिन है ,गले आज तो मिल ले ज़ालिम, रस्में दुनिया भी है ,मौका भी है ,दस्तूर भी है ........… 
सच में ! इस बार अगर आप देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द बनाना और परिवर्तन के साथ -साथ    "जयहिन्द" चाहते हैं तो इस बार चुनाव रूपी ईद को बहुत ईमानदारी से मनाना होगा।      

पिछले ख़त में आपसे वायदा किया था के आप को डॉ डेंग की पार्टी के बारे में ज़रूर बताऊंगा। बढ़िया प्रबंध किया था। सब मेहमान खुश थे। लाली ने थोड़ी ज़यादा पी ली थी। डॉ खुश था। जिन लोगों को भी न्यौता दिया ,सभी पहुंचे। चाँद बाऊ जी ,दिनेश कुमार ,अमित अरोड़ा ,राजीव चौधरी , वीरप्रकाश ,राहुल राणा , समीर पॉल ,लाली उर्फ़ सरदार मनमोहन सिंह ,बबलू वल्द नाथी राम मितल ,जितेंदर उर्फ़ जीतू ,जीतू का छोटा भाई राकेश और राजबीर पाढा।
इन सभी से परिचय अपनी अगली चिट्ठियों में करता रहूंगा। बस यूं समझ लो ये ही मेरी कहानियों के मुख्य पात्र और दुःख सुख के साथी भी हैं । इस पार्टी का बखां करने की बजाय यदि मैं हरिवंश राय बच्चन की ये पंक्तियाँ लिख दूं तो आप को सब समझ आ जायेगा :
बने पुजारी प्रेमी साकी, गंगाजल पावन हाला,
रहे फेरता अविरत गति से मधु के प्यालों की माला'
मुसलमान औ' हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला!।


कहते हैं दुःख सुख साथ साथ चलते हैं बिल्कुल धूप और छाया की तरह। ख़ुशी के बाद एक दुःखद समाचार ने दस्तक दी। 10 मार्च को एक और साथी इस दुनिया को अलविदा कह गया। दीपक कईं दिनों से बीमार चल रहा था। दीपक ,टैगोर बाल निकेतन स्कूल में आर्ट टीचर के पद पर कार्यरत था। मैंने उस के साथ १९९७ से १९९९ तक काम किया। मनमौजी दीपक अपने काम में सिधहस्त था। रंगों का विलक्षण चितेरा था। लगभग २० वर्ष पहले पछ्चिम बंगाल से आकर हरयाणा में दीपक ने अपने आप को कला के क्षेत्र में स्थापित किया। कबीर दास की ये पंक्तियां जीवन मृत्यु की सच्चाई को बखूबी बयाँ करती हैं :
पानी केरा बुदबुदा, अस मानुस की जात.                                                                                         एक दिना छिप जाएगा,ज्यों तारा परभात।   

 अलविदा दोस्त !
 चलते चलते आप को बता दूं   ……… अमितोष द्वारा अनुवादित शेकस्पेयर के नाटक ट्वेल्वथ नाईट के हिंदी रूपांतरण "पिया बहरूपिया " को META की ओर से सर्वश्रेष्ठ नाटक घोषित किया गया है। नाटक ने कुल पाँच पुरस्कार जीते हैं।http://www.thehindu.com/features/friday-review/theatre/starry-night/article5777146.ece
 यही नहीं फ़िल्म "ग़ुलाब गैंग " रिलीज़ हो चुकी और फ़िल्म के लिए लिखित डायलॉग की भी सराहना हो रही है।इस के डायलॉग अमितोष और गीत नेहा ने लिखे हैं। अमितोष मेरे शहर करनाल का रहने वाला है। हमें तुम पर गर्व है अमितोष !   Photo: And that's a night folks!!
5 META awards for #piyabehrupiya including Best Play

5 META awards for #piyabehrupiya including Best Play
     
जयहिन्द ! फिर मिलते हैं ……………
To Be Continued.......................................

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