दोस्तों नमस्कार !
8 मार्च को "महिला दिवस" मनाने की औपचारिकताएं सम्पन्न हो चुकी हैं।महिलाओं के साथ होने वाले शोषण में कमी के लिए पुरुषों को अपनी मनोवृति को बदलना होगा। शायद तभी बदलाव भी सम्भव है।
के। वी। ए। डी। ए। वी। कॉलेज फॉर वूमेन करनाल में मोहिंदर प्रताप सिंह द्वारा लिखित "पल पल जीती हर पल मरती " नाटक का सफल मंचन हो गया है।मैंने आप को इस बारे पहले भी लिखा था।महिलाओं के अंतर्मन में दबी इच्छाओं और समाज के महिलाओं के प्रति दोहरे चरित्र का बढ़िया चित्रण है।
आम चुनाव की घोषणा के साथ ही विभिन्न राजनितिक पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है। ब्यानबाज़ी और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो चुका है।राजनीतिक नाटक भी शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता योगेंदर यादव के मुहं पर कोई कालिख पोत गया है। लगता ऐसा है -"एक नई प्रथा की शुरुआत हो चुकी है।"
पिछले दिनों अमेरिका से मेरे मित्र मंजीत चीमा का फ़ोन आया। वो मेरी चिठियाँ नियमित पढ़ रहे हैं। उन्होंने चिट्ठियों से जुड़े एक किस्से का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया के लगभग ३० वर्ष पूर्व पंजाब के गुरबखश सिंह विदेश में आकर बस गए थे। वो हर रोज़ अपनी बीवी को एक चिठ्ठी लिखते पर पोस्ट न करते। बाद में उन की चिट्ठियों पर एक पुस्तक प्रकाशित हुई। उस पुस्तक का नाम "चिट्ठियां जितो नूँ " है ऐसा मुझे बताया गया।वैसे आज की पोस्ट और पहले की पोस्ट में बहुत अंतर है।
मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली कंप्यूटर टीचर रजनी स्वीडन से ६ महीने के बाद कल ही हिंदुस्तान वापिस आई है। स्कूल का स्टाफ और उसके घर के सभी सदस्य उसके आने पर काफी खुश हैं। रजनी की बहन सीमा चोपड़ा से इस मुत्तालिक नियमित बात होती रही। शादी के कुछ दिनों बाद ही रजनी स्वीडन चली गई थी। रजनी का पति जतिन स्वीडन में सेटेल्ड है। किसी ने ये सोचा भी नहीं था के सब कुछ इतनी जल्द हो जाएगा और रजनी सात समुंदर पार जा बसेगी। समझ लो के "लिखी लिखाई आई है धुरों रोटी।" सभी उसके स्कूल आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। अभी वो अपने ससुराल में है। दोनों को मेरी शुभकामनायें।
लम्बे अर्से के बाद लेखक मित्र डॉ अजय शर्मा से जालंधर बात हुई। बातों बातों में चाय का ज़िक्र हुआ। बोले जहाँ भी जाते हैं फीकी चाय ही पीते हैं। मीठी चाय पीने का फ़ायदा भी क्या जब जीवन में ही मिठास न हो।
ओह सच !आप को एक खुशखबरी और सुना दूं। डॉ डेंग दादा बन गया है।डॉ डेंग बाबत कहानी भी लिखी थी,"बावन बुद्धि !" उस का Reference लिख रहा हूँ : http://krishankumarmalik.blogspot.in/2013/12/baavan-budhi.html
ख़ुशी की बात ये भी है के डॉ डेंग आज पार्टी दे रहा है। यहाँ भी डॉ डेंग बावन बुद्धि प्रयोग कर रहा है। ससुर और दादा बनने की पार्टी एक साथ कर रहा है। कुछ दोस्त तो मज़ाक में चटकारे ले रहे हैं। कह रहे हैं डॉ डेंग से पार्टी लेना स्टील के थन से दूध निकालने जैसा है। हमारे यहाँ कहावत है ,"बुरा न मानो होली है। "
17 मार्च को होली है। आप सब को भी होली की शुभकामनायें।
पार्टी कैसी हुई इस बारे अगले ख़त में लिखूंगा। इस उम्मीद के साथ के फिर मिलेंगे !
तब तक के लिए अलविदा !
To Be Continued.....................................
8 मार्च को "महिला दिवस" मनाने की औपचारिकताएं सम्पन्न हो चुकी हैं।महिलाओं के साथ होने वाले शोषण में कमी के लिए पुरुषों को अपनी मनोवृति को बदलना होगा। शायद तभी बदलाव भी सम्भव है।
के। वी। ए। डी। ए। वी। कॉलेज फॉर वूमेन करनाल में मोहिंदर प्रताप सिंह द्वारा लिखित "पल पल जीती हर पल मरती " नाटक का सफल मंचन हो गया है।मैंने आप को इस बारे पहले भी लिखा था।महिलाओं के अंतर्मन में दबी इच्छाओं और समाज के महिलाओं के प्रति दोहरे चरित्र का बढ़िया चित्रण है।
आम चुनाव की घोषणा के साथ ही विभिन्न राजनितिक पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर दी है। ब्यानबाज़ी और आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो चुका है।राजनीतिक नाटक भी शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी के नेता योगेंदर यादव के मुहं पर कोई कालिख पोत गया है। लगता ऐसा है -"एक नई प्रथा की शुरुआत हो चुकी है।"
पिछले दिनों अमेरिका से मेरे मित्र मंजीत चीमा का फ़ोन आया। वो मेरी चिठियाँ नियमित पढ़ रहे हैं। उन्होंने चिट्ठियों से जुड़े एक किस्से का ज़िक्र किया। उन्होंने बताया के लगभग ३० वर्ष पूर्व पंजाब के गुरबखश सिंह विदेश में आकर बस गए थे। वो हर रोज़ अपनी बीवी को एक चिठ्ठी लिखते पर पोस्ट न करते। बाद में उन की चिट्ठियों पर एक पुस्तक प्रकाशित हुई। उस पुस्तक का नाम "चिट्ठियां जितो नूँ " है ऐसा मुझे बताया गया।वैसे आज की पोस्ट और पहले की पोस्ट में बहुत अंतर है।
मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली कंप्यूटर टीचर रजनी स्वीडन से ६ महीने के बाद कल ही हिंदुस्तान वापिस आई है। स्कूल का स्टाफ और उसके घर के सभी सदस्य उसके आने पर काफी खुश हैं। रजनी की बहन सीमा चोपड़ा से इस मुत्तालिक नियमित बात होती रही। शादी के कुछ दिनों बाद ही रजनी स्वीडन चली गई थी। रजनी का पति जतिन स्वीडन में सेटेल्ड है। किसी ने ये सोचा भी नहीं था के सब कुछ इतनी जल्द हो जाएगा और रजनी सात समुंदर पार जा बसेगी। समझ लो के "लिखी लिखाई आई है धुरों रोटी।" सभी उसके स्कूल आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। अभी वो अपने ससुराल में है। दोनों को मेरी शुभकामनायें।
लम्बे अर्से के बाद लेखक मित्र डॉ अजय शर्मा से जालंधर बात हुई। बातों बातों में चाय का ज़िक्र हुआ। बोले जहाँ भी जाते हैं फीकी चाय ही पीते हैं। मीठी चाय पीने का फ़ायदा भी क्या जब जीवन में ही मिठास न हो।
ओह सच !आप को एक खुशखबरी और सुना दूं। डॉ डेंग दादा बन गया है।डॉ डेंग बाबत कहानी भी लिखी थी,"बावन बुद्धि !" उस का Reference लिख रहा हूँ : http://krishankumarmalik.blogspot.in/2013/12/baavan-budhi.html
ख़ुशी की बात ये भी है के डॉ डेंग आज पार्टी दे रहा है। यहाँ भी डॉ डेंग बावन बुद्धि प्रयोग कर रहा है। ससुर और दादा बनने की पार्टी एक साथ कर रहा है। कुछ दोस्त तो मज़ाक में चटकारे ले रहे हैं। कह रहे हैं डॉ डेंग से पार्टी लेना स्टील के थन से दूध निकालने जैसा है। हमारे यहाँ कहावत है ,"बुरा न मानो होली है। "
17 मार्च को होली है। आप सब को भी होली की शुभकामनायें।
पार्टी कैसी हुई इस बारे अगले ख़त में लिखूंगा। इस उम्मीद के साथ के फिर मिलेंगे !
तब तक के लिए अलविदा !
To Be Continued.....................................
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