Sunday, 2 February 2014

zahar...!

सफेदपोश भौंक रहे  हैं
लोग चौंक रहे हैं
बार बार पूछा
जा रहा है ,

क्या आप की
बहु बेटियाँ
सुरक्षित हैं  ?

क्या आप
सुरक्षित हैं ?

क्या आपके
बुज़ुर्गों ने
अच्छे दिन
देखे हैं  ?

क्या आप के
सपने
पूरे हुए हैं ?

सब ज़ोर से
बोलते हैं
नहीं ,नहीं ,नहीं !

सब
एक स्वर में
बोलते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !

ये सब
आम लोग हैं
ये इन की चाल
नहीं समझते !

इन को
मुट्ठियां बंद
कर के
बोलने को
कहा जाता है ,

सब मुट्ठियां बंद करके
दोहराते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !

सफेदपोश
मुस्कुराता है
खुश है
जादू चल गया !

बस फिर क्या
वो भी
ज़हर उगलने लगता है !

आम आदमी
तो आम आदमी है
वो सोच रहा है
किस का ज़हर
पिया जाए  !

उनको तो पीना ही
ज़हर है
क्योंकि उनको
तो यही
समझाया गया है
ज़हर को ज़हर ही काटता  है ! 



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