सफेदपोश भौंक रहे हैं
लोग चौंक रहे हैं
बार बार पूछा
जा रहा है ,
क्या आप की
बहु बेटियाँ
सुरक्षित हैं ?
क्या आप
सुरक्षित हैं ?
क्या आपके
बुज़ुर्गों ने
अच्छे दिन
देखे हैं ?
क्या आप के
सपने
पूरे हुए हैं ?
सब ज़ोर से
बोलते हैं
नहीं ,नहीं ,नहीं !
सब
एक स्वर में
बोलते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !
ये सब
आम लोग हैं
ये इन की चाल
नहीं समझते !
इन को
मुट्ठियां बंद
कर के
बोलने को
कहा जाता है ,
सब मुट्ठियां बंद करके
दोहराते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !
सफेदपोश
मुस्कुराता है
खुश है
जादू चल गया !
बस फिर क्या
वो भी
ज़हर उगलने लगता है !
आम आदमी
तो आम आदमी है
वो सोच रहा है
किस का ज़हर
पिया जाए !
उनको तो पीना ही
ज़हर है
क्योंकि उनको
तो यही
समझाया गया है
ज़हर को ज़हर ही काटता है !
लोग चौंक रहे हैं
बार बार पूछा
जा रहा है ,
क्या आप की
बहु बेटियाँ
सुरक्षित हैं ?
क्या आप
सुरक्षित हैं ?
क्या आपके
बुज़ुर्गों ने
अच्छे दिन
देखे हैं ?
क्या आप के
सपने
पूरे हुए हैं ?
सब ज़ोर से
बोलते हैं
नहीं ,नहीं ,नहीं !
सब
एक स्वर में
बोलते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !
ये सब
आम लोग हैं
ये इन की चाल
नहीं समझते !
इन को
मुट्ठियां बंद
कर के
बोलने को
कहा जाता है ,
सब मुट्ठियां बंद करके
दोहराते हैं
नहीं ,नहीं, नहीं !
सफेदपोश
मुस्कुराता है
खुश है
जादू चल गया !
बस फिर क्या
वो भी
ज़हर उगलने लगता है !
आम आदमी
तो आम आदमी है
वो सोच रहा है
किस का ज़हर
पिया जाए !
उनको तो पीना ही
ज़हर है
क्योंकि उनको
तो यही
समझाया गया है
ज़हर को ज़हर ही काटता है !
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