पिछले रविवार बहना घर आई। साथ में बेटे द्वारा लिखी चिठियाँ भी ले आई। शाम को जब सब इकठ्ठा एक कमरे में बैठे तो गीता ने बिन्नी की लिखी चिठियाँ मेरे हाथ में थमा दीं। मैने सब को चिठियाँ पढ़ कर सुनाई।चिठ्ठी सादगी से लिखी हुई थी और पढ़ते-पढ़ते आँखें छलक आईं। उसने चिठ्ठी में बहुत सारी भावनात्मक बातें लिखी हुई थीं।इसीलिए तो चिठ्ठी की ख़ासियत कभी खत्म नहीं हो सकती।
असल में ये "चिठ्ठी" या फिर "कहानी" लिखने यानि कि आज की भाषा में "ब्लॉग" या "पोस्ट" लिखने का आईडिया भी भूपेंदर की चिठ्ठी के बाद ही आया। ये आप के लिए मेरी तीसरी चिठ्ठी है। आप को अब हर महीने दो चिट्ठियां लिखता रहूँगा। फरवरी 2014 की ये मेरी पहली और कुल तीसरी चिठ्ठी है। हर चिठ्ठी में मेरा लोगों के साथ मिलने जुलने का लेखा -जोखा ही होगा।
फरवरी -2014 ,उत्साह ,प्रेम ,नवजीवन ,खुशियों ,सफलता और मित्रता का माह रहा। आज ही मोहिंदर प्रताप सिंह का फ़ोन आया। फ़िल्म "भुजंग " के बारे में बताया के सी.एफ.एस.आई.(चिल्ड्रन फ़िल्म सोसाइटी ऑफ़ इंडिया) द्वारा फ़िल्म को अप्रूव कर दिया गया है। बच्चों पर आधारित फ़िल्म भुजंग की अधिकतर शूटिंग पिछले वर्ष कर्ण पब्लिक स्कूल ,करनाल में ही हुई थी।इन्हीं दिनों कर्ण पब्लिक स्कूल फ़िल्म स्टूडियो बना हुआ था। स्कूल के सभी बच्चे ,अध्यापक , बच्चों के माता पिता और दोस्तों के सहयोग से फ़िल्म की शूटिंग सफलता पूर्वक हो सकी।
स्कूल के बच्चों की फ़िल्म में भागेदारी मेरे लिए एक अभूतपूर्व अनुभव है। बच्चों पर आधारित इस फ़िल्म का हीरो व् मुख्य पात्र स्कूल के बच्चे ही हैं।अगर ये फ़िल्म रिलीज़ हो जाती है तो सभी के लिए ये मील का पत्थर साबित होगी। हालांकि हीरो शूटिंग खत्म होते ही स्कूल छोड़ कर किसी दूसरे स्कूल में चला गया है।
मेरे मित्र और फ़िल्म के डायरेक्टर मोहिंदर प्रताप सिंह से अक्सर मेरी बात होती थी। मोहिंदर कहता था, "फ़िल्म एक ऐसा पिटारा है जिसमे काम करने वाले सभी लोगों का भाग्य छिपा होता है। पर्दे पर फ़िल्म आने के बाद किस का भाग्य खुल जाए ये किसी को पता नहीं होता।" जब मोहिंदर का फ़ोन आया तो मैं समीर के साथ करनाल के अटल पार्क में सैर कर रहा था। समीर ने भी फ़िल्म में एक अहम् रोल किया है। मैंने फ़ोन समीर को थमा दिया। समीर ने तुरन्त मोहिंदर को कहा ,"भा जी जल्दी करो फ़िल्म नूं पूरा ,हुंण तां लोग वी पुछण लगे ने कि फ़िल्म कदों रिलीज़ होंणी है। "समीर आगे बोला ,"फ़िल्म रिलीज़ होगी ,तभी तो लोगों को मेरी एक्टिंग के बारे पता चलेगा। " फ़ोन बंद करने के बाद समीर बोला ,"भा जी अप्पां करनाल विच तां फ़िल्म हिट करवा देंगे। " मैने आश्चर्य से पूछा ,"वो कैसे ?" "अपने सारे यार दोस्त टीचर हैं। सब नूं कह देणा है के डंडा चुक लो ते बच्यां नूं स्कूल दी बजाए फ़िल्म देखण भेजो, " मस्ती भरे लहज़े में उसने कहा।
पड़ोस में 14 फरवरी को रजत बराड़ की शादी में आई बरसात ने पिछले साल मेरे भतीजे " कीनू " सिकंदर सांगवान की शादी की याद दिला दी। उसकी शादी 8 फरवरी 2013 को थी। पिछले साल भी लगातार तीन दिन बरसात होती रही थी।कल मेरी और दीप चंद की शादी की साल गिरह भी है। मैं अपनी पत्नी को प्यार से दीपचंद ही कह कर बुलाता हूँ।
इस 8 फरवरी को डॉक्टर के भतीजे की शादी में भी जाना हुआ। राहुल मेरे साथ था। राहुल भी समीर के साथ स्कूल में अध्यापक है। डॉ चार -पांच भाई हैं। एक फुटबाल और दूसरा हॉकी का खिलाडी है। बाकियों से मेरा कोई ख़ास परिचय नहीं है। परिवार में कोई डॉ नहीं है लेकिन परिवार में सभी पुरुष सदस्यों को डॉ कह कर ही सम्बोधित किया जाता है। शादी में जाते हुए राहुल बोला ,"भाईसाब ,यो बढ़िया है, बिना डिग्री के सारे डॉक्टर हैं। मैं राहुल की इस बात पर मुस्कुरा दिया।
17 को मेरे स्कूल में कंप्यूटर की अध्यापिका मंजू की शादी थी। इसी महीने गीता और बबले का जन्म दिन,भूषण मदान और पवन मदान की मैरिज एनीवर्सरी भी थी। दोस्तों सम्बन्धियों के ये ख़ास दिन - तारीखें आज की टेक्नोलॉजी के कारण ही याद रह पाई। वर्ना ये तो याद नहीं रहता के कल क्या खाया था। इस मामले में मेरा दोस्त दलजिंदर लाजवाब है। बिल्कुल कंप्यूटर की तरह सभी कुछ याद रहता है। कोई भी ख़ास दिन हो ,उसका मेसेज या फ़ोन ज़रूर आता है।
...................................................TO BE CONTINUED
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