Tuesday, 25 February 2014

A LETTER......EK CHITHEE PART-4

उम्मीद करता हूँ कि इस से पहले लिखे ख़त आप सब ने पढ़ लिए होंगे। वायदे के अनुसार ये ख़त समय पर ही लिख रहा हूँ। पिछले ख़त में बहुत सारी बातें लिखना भूल गया था। क्षमा करना !

 फरवरी की शुरूआत में ही मनीष ढुल से मुलाकात हुई। मनीष बटेऊ है हमारा। हरयाणा में दामाद को बटेऊ कह कर ही पुकारते हैं।समीर की बिटिया अमानत से मनीष की शादी पिछले वर्ष हुई थी।बेटियां को अगर ससुराल अच्छा मिल जाए तो माँ बाप की उम्र बढ़ जाती है। ऐसा लगता है के समीर और नीरू ने पिछले जन्म में दान पुण्य किया था। बटेऊ बढ़िया ही नहीं संस्कारी भी है।मनीष एक सॉफ्ट वेयर इंजीनियर है। मनीष अगर ख़त पढ़ो तो अपने माता -पिता को मेरा सादर नमस्कार कहना !

 १५ फरवरी को वीरेंदर पंडित के भाई की शादी समारोह में शामिल हुआ। वीरेंदर पंडित हरयाणा पुलिस में इंस्पेक्टर और भाई फ़ौज में कर्नल है। कनाडा से एक और पुराना मित्र श्रीकांत लम्बे अर्से के बाद हिंदुस्तान आया है। श्रीकांत से अभी तक बात नहीं हो पाई है।

पूरे फरवरी में सी।बी। एस। सी। के स्कूलों में सरकार के आदेशों को लेकर असमंजस की स्तिथी बनी रही। सरकार के द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स से भी स्कूल मालिक परेशान रहे। उनका भी कोई दोष नहीं ! आख़िर मंदिर अब व्यवसायिक केंद्र जो बन गए हैं ! मंदिर भगवान  का हो या शिक्षा का !

हरयाणा में कुछ दिनों पहले सरकारी अध्यापकों की भर्ती हुई है। कुछ लोगों से मिला ,वो सभी खुश हैं। कृषण लाल की भी नियुक्ति हो गई है। पहले वो एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक था। पहले परेशान रहता था ,अब खुश है। एक दिन मिला तो बोला ,"अब लगी असल लाटरी ! काम न काज अर फेर भी अपना राज।" "इतने नोट मिलते हैं सर जी , के पूछो न बस।" वो ख़ुशी से फूला नहीं समा रहा था !

देश में राजनीति का बिगुल तो आप सब सुन ही रहे होंगे। केजरी ने इस्तीफा दे दिया है। मोदी कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रहे हैं। राहुल के लिए झ़ण्डु के चिंकारा की दरकार है। उधर अन्ना और दीदी के सुर एक हो गए हैं। जय ललिता की चुनावी चाल में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मोच आ गई है। केजरीवाल का झाड़ू बुहारी नहीं लगा पा रहा। लगाता है तो धुल अपने ऊपर ही आ रही है। मीडिया ने भी तवज्जो देना कम कर दिया है। हवा का रुख बदल जाय तो ऐसा अक्सर होता  है।तीसरा फ्रंट एक बार फिर एकजुट होने की कोशिश में है !

आप को बताना भूल गया के चौधरी साब आज कल बिल्कुल ठीक -ठाक हैं। डॉक्टर्स ने उनका शराब पीना और मांस खाना बंद कर दिया है। पर चौधरी तो ठहरे चौधरी। ………ज़ब भी दिल करता है अमल पूरा कर ही लेते हैं।पिछले हफ्ते तो चौधरी साब ने कमाल ही कर दिया। दोपहर को ही मेरे स्कूल में आ गए। उनके साथ सीमान्त शर्मा था। बोले ,"सिरसी चलना है। "सिरसी मधुबन पुलिस काम्प्लेक्स के बिल्कुल पीछे एक गॉंव है। सुरजीत चिकेन वाला यहाँ लाजवाब चिकेन बनता है। मैं भी मना नहीं कर सका। चिकेन खाने के शौकीन लोगों के लिए ये जगह जन्नत की तरह है। प्रतिस्पर्धा के इस युग में सुरजीत शहर से करीब १० -१२ किलोमीटर दूर गॉंव में अपनी दुकान चला रहा है। वो लगभग २००० -३००० हजार रूपए प्रतिदिन कमा लेता है। लोगों का वहाँ जमावड़ा लगा रहता है वो भी पुलिस की नाक के नीचे !

२० फरवरी को पड़ोस में कृषण राणा के बेटे और बेटी के विवाह के उपलक्ष में साँझा कार्यक्रम आयोजित  किया गया। मैं शामिल नहीं हो पाया। घर के सदस्यों ने उस में शिरकत की।

 २१ फरवरी को एम् आर धीमान को श्रद्धांजलि देने के लिए नाटक के मंचन की सूचना दी दलजिंदर ने।गीता ने भी इंडियन थिएटर चंडीगढ़ से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। गीता के पति एम् आर धीमान का पिछले माह ही देहांत हो गया था।  अम्बाला में जी। एम्। एन। कॉलेज में "सफ़र "का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन मिल्खीराम धीमान के शिषय राहुल शर्मा द्वारा किया गया। नाटक के ज़रिए श्रद्धांजलि का कार्यक्रम एक बढ़िया प्रयोग लगा। धीमान हरयाणा रंगमंच के सशक्त हस्ताक्षर थे। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें !

 इस महीने की और बहुत सी बातें भी मेरे ज़हन में हैं। अगले ख़त में शेयर करूंगा। आप सब अपना ध्यान रखना। बड़ों को मेरा प्रणाम कहना और बच्चों को प्यार देना।

अगली चिठ्ठी जल्द ही पोस्ट करूंगा ! 

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