Sunday, 17 August 2014

SHOK SABHA

 एक शोक सभा में जाने का अवसर मिला। दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए पाठ  चल रहा था। जितने लोग हॉल में थे ,उतने ही बाहर खड़े थे। अलग -अलग झुंडों में अलग -अलग चर्चा चल रही थी। चुनाव नज़दीक होने के कारण अधिकतर लोग चुनावों पर बतिया रहे थे।मृतक का भाई भी बाहर खड़ा था। वो नज़दीकी सम्बन्धियों और मित्रों को मिलने में व्यस्त था।
बाहर खड़े लोगों में अधिकतर नेता और अफसर थे जो अपने -अपने चाटुकारों से घिरे हुए थे। आज कल शोक सभाएं भी शक्ति प्रदर्शन का अखाडा लगने लगी हैं। बाहर खड़ी लाल और नीली बत्ती वाली गाड़ियों से तो कुछ ऐसा ही लग रहा था।
शोक सभा समाप्त होने में अभी देरी थी , मैं भी समय बिताने के लिए एक झुण्ड के समीप हो लिया। इस झुण्ड में मृतक का भाई सुल्तान और कुछ सम्बन्धी आपस में बतिया रहे थे। इधर उधर की बात करने के बाद सुल्तान ताली पीटते हुए ज़ोर से बोला,"कोई ग़म नहीं है भाई के जाने का,मौज कर के गया है।अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। घोड़े जैसा था अब तक !" सुल्तान की बात सुन कर सब ने ज़ोर का ठहाका लगाया।
ठहाकों के बीच एक लाल बत्ती लगी गाड़ी की कूँ कूँ ने शोक स्थल के बाहर खड़े सभी लोगों का ध्यान अपनी और खींच लिया। गाड़ी को देखते ही सुल्तान गाड़ी की तरफ हो लिया। गाड़ी से उतरने वाले व्यक्ति से सभी का परिचय करवाते हुए सुल्तान बोला ,"अपने दामाद के बड़े भाई हैं ,"मलखान सिंह " कमिश्नर हैं आज कल। " पास खड़े लोगों में से कुछ अपनी मुंडी हिलाते हुए एक स्वर में बोले ,"जनाब को कौन नहीं जानता। " अपनी प्रशंसा सुनते ही मलखान सिंह का चेहरा लाल गुलाब की तरह खिल उठा।
मलखान ने सुल्तान को एक तरफ ले जा कर शोक प्रकट किया। लेकिन सुल्तान तो जैसे भाई के चरित्र का सर्टिफिकेट सब को दे देना चाहता था। उसने मलखान का हाथ दबाते हुए फिर दोहराया ,"मौज कर के गया है भाई। अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर ,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। बिल्कुल घोड़े जैसा था अब तक !" मलखान सिंह के चेहरे पर भी एक कमीनी सी मुस्कान दिखाई देने लगी।बाकी सभी लोगों ने इस बार ठहाका तो नहीं लगाया लेकिन एक कटु मुस्कान सब के चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही थी।
बातों बातों में मलखान का भाई जगतार भी मण्डली में शामिल हो गया और सुल्तान दूसरे रिश्तेदारों को मिलने लगा। उसने आते ही भाई को प्रणाम किया और भाभी व बच्चों के बारे में पूछने लगा। मलखान सिंह के चेहरे पर उदासी छा गई। इस से पहले के मलखान सिंह कुछ बोलता , झुण्ड में से ही एक परिचित ने उदासी भरे लहज़े से पूछा ," सब ठीक तो है कमिशनर साब  ?"
"हाँ , कल सुबह जब्बर भगवान को प्यारा हो गया ,घर में मातम छाया हुआ था !"भरे हुए गले से मलखान सिंह बोला।
मलखान की बात सुनते ही सारा वातावरण ग़मगीन हो गया। हालांकि बहुत सारे लोग जब्बर से परिचित नहीं थे। भाई को उदास देख जगतार बोला ,"आप ने बताया भी नहीं ,कैसे हुआ ये सब ?"
 "कईं दिनों से बीमार चल रहा था," मलखान ने जवाब दिया।
 इतने में सुल्तान फिर वहां पहुँच गया। माहौल को उदास देख उसने इशारों इशारों में उदासी का कारण जानने की कोशिश की।जगतार सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए बोला , "भाई साब के कुत्ते की मौत हो गई आज सुबह , बहुत प्यारा और समझदार कुत्ता था।सुल्तान, जगतार की बात सुनते ही अफ़सोस करते हुए बोला ,"ओहो ! पिछली बार ही तो मिला था मैं , बहुत प्यार करते थे बच्चे उससे। घर में तो सभी बहुत उदास होंगे !"इतने में जगतार बोला ,"बिल्कुल घर के मेंबर की तरह था जब्बर। "
 इससे पहले के कमिशनर साब कुछ बोलते ,झुण्ड में खड़े सभी लोग शोक प्रकट करने लगे !

Thursday, 7 August 2014

A JOURNEY TO BAALA G DHAM PART-2

अब आगे………………
 सालासर जाते हुए रास्ते में अधिकतर खेत सूखे हुए थे। हालांकि पिछले दिनों हुई बरसात के कारण आसपास काफी हरयाली नज़र आ रही थी। लेकिन अधिकतर खेत रेत के टीलों की तरह ही लग रहे थे हमारे सारे रास्ते में बादल आसमान में मंडराते रहे हमारे साथ चलते रहे लेकिन कहाँ बरसे ये बाला जी  ही जानें। रास्ते में लक्ष्मणगढ़ का किला भी आया। सालासर जल्दी पहुँचने के चक्कर में उसे नज़दीक से नहीं देख सके। हालाँकि ज़्यादातर फोटो चलते -चलते ही खींची थी और लक्ष्मणगढ़ के किले को भी दूर से ही क्लिक कर सका।

शाम को सालासर  पहुँच कर गाड़ी को चमेली देवी धर्मशाला के सामने रोक दिया गया। ध्रर्मशाला का निर्माण बखूबी किया गया था।  कहीं से भी फाइव स्टार होटल से कम नज़र नहीं आ रही थी। अंदर जाने के बाद जब हमने अपने कमरे में प्रवेश किया तो मैं हैरान हो गया। कमरे में खूबसूरत नक्काशी वाले बेड ,मित्सुबिशी का ए सी ,तोशिबा का एल सी डी ,शानदार बाथरूम ,गर्म और ठंडे पानी की व्य्वस्था ,भोजन के लिए साफसुथरी मेस और कैंटीन। सच में सब कमाल था। सब कुछ मात्र 600 रुपये में लेकिन खाने का बिल अलग से।

शहर में जब घूमने गए तो पता चला के यहाँ धर्मशालाओं का जाल सा बिछा हुआ है।हिसार धर्मशाला। आदमपुर धर्मशाला। मायादेवी धर्मशाला। नरवाना वालों की धर्मशाला। बातों बातों में गाइड की भूमिका अदा कर रहे राकेश ने बताया के अधिकतर धर्मशालाएं देश के बड़े सेठों और हरयाणा के बड़े राजनितिक घरानों की हैं।ऐसा नहीं के सभी धर्मशालाएं महंगी थी। आपकी श्रद्धा और जेब के हिसाब से यहाँ सभी तरह की व्यवस्था है।
यहाँ अधिकतर  धर्मशालाओं के नाम बेशक हरयाणा के शहरों पर रखे गए थे लेकिन उन पर लगे पोस्टरों की और इशारा करते हुए राकेश ने बताया के ये धर्मशालाएं हरयाणा के पूर्व मुख्य मंत्रियों भजनलाल और ओम प्रकाश चौटाला की हैं।  "धर्म के नाम पर काले को सफ़ेद करने का ये नायाब तरीका है", राकेश ने इशारों -इशारों में मुझे समझाने  की कोशिश की।
 यही नहीं हरयाणा के मौजूदा मुख्य मंत्री की भी यहाँ एक धर्मशाला निर्माणाधीन है। वैसे तो पूरे भारत वर्ष से भगतजन बाला जी के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं लेकिन अधिकतर लोग यहाँ हरयाणा , राजस्थान और पंजाब से आते हैं।
थोड़ी देर आराम करने के बाद हम तीनों ने मंदिर का रुख किया। आरती का समय शाम 7. 40 निर्धारित था। मंदिर द्वार पर पहुंचे तो वहां बहुत भीड़ थी।  
आरती का समय नज़दीक आता जा रहा था। अगर श्रद्धालूओं वाली लाइन में लगते तो आरती का समय निकल जाता। श्यामलाल ने जुगाड़ लगा कर वी आई पी द्वार से प्रवेश करवा दिया। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही मन आनंदमयी हो गया। मंदिर की सरंचना बहुत भव्य थी।
लेकिन मंदिर के अंदर प्रवेश करने के बावजूद भी मन बाला जी से यही प्रश्न करता रहा और सोचता रहा के क्या भगवान भी जुगाड़ वालों को ही दर्शन देते हैं। कुछ समय बाद ही आरती आरम्भ हो गई।  जो कुछ भी हो लोगों की श्रद्धा और विश्वास देखते ही बनता था। देखते ही देखते पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

Tuesday, 5 August 2014

A JOURNEY TO BAALA G DHAM - PART 1




लम्बे अरसे से दोस्तों के साथ किसी दौरे पर नहीं गया था। चार -पांच साल पहले तक दोस्तों की चौंकड़ी जमते ही कहीं न कहीं निकल लेते थे। पिछले दो सालों से मित्रमंडली में से श्यामलाल गर्ग और राकेश हर महीने बाला जी धाम सालासर राजस्थान की यात्रा पर जाते हैं। उनके साथ समीर ,राहुल ,जगदीश पाण्डे ,राजीव चौधरी,वीर प्रकाश आदि लगभग सभी साथी वहां हो आए थे। मन तो मेरा भी था लेकिन संजोग नहीं बन रहा था।
 श्यामलाल गर्ग और राकेश का 26 जुलाई को सालासर जाने का प्रोग्राम बना। शनिवार का दिन था , मैं भी हो लिया उनके साथ। मुझे बताया गया के करनाल से सालासर 370 किलोमीटर है। सुबह 8. 30 पर सफर की शुरुआत हुई और पानीपत ,रोहतक ,भिवानी ,लोहारू ,झुंझनू ,लक्ष्मणगढ़ से होते हुए हम शाम 5 बजे सालासर पहुँच गए।
रास्ते में पानीपत पर पहला टोल प्लाजा आया और उसके बाद कुल 6 जगह सड़क पर चलने के लिए एक तरफ का कुल 350 रूपए टैक्स देना पड़ा। सरकार का कहना है के जगह जगह पर लिए जाने वाले टोल टैक्स सड़कों के रखरखाव के लिए हैं। कुछ इलाकों को छोड़ कर अधिकतर सड़कें खस्ताहाल थीं। न जाने लोग इन्हें बंद करवाने के लिए एकजुट क्यों नहीं होते।
लोहारू के बाद जैसे ही राजस्थान में प्रवेश किया तो कासनी गांव में राकेश ने कार को रोक लिया। मुझे बताया गया के ये गांव नीलम प्रदीप कासनी का ससुराल है। नीलम प्रदीप कासनी हरयाणा में आई ए एस काडर की अफसर हैं और कुछ समय के लिए करनाल की डी सी भी रहीं। उनके पति भी हरयाणा में आई ए एस अफसर हैं। आगे चल कर बख्तावर पुरा  गांव के बारे में बताते हुए राकेश ने बताया के ये एक मॉडल विलेज है। बख्तावर पूरा की खासीयत ये है के इस गांव में कोई नाली नहीं है

रास्ते में दो जगह रुक कर चाय पी और खाना खाया। रास्ते में गाड़ी को उन्हीं जगह पर रोक गया जहाँ वो हर बार रुकते थे। रास्ते में होटल न्यू सुख सागर में खाना खाया और कुछ देर आराम किया। इस जगह का ज़िक्र राकेश और श्याम लाल अक्सर किया करते थे। यहाँ की आवभगत और खासतौर पर हुक्के का ज़िक्र करते हुए दोनों थकते नहीं थे। वापसी पर भी यहाँ रुके लेकिन दोनों बार हुक्का नदारद था।

 पूरे सफर में राकेश एक गाइड की तरह मुझे हर उस चीज़ की जानकारी  देता रहा। रास्ते में मरुस्थल के जहाज़ के नाम से मशहूर ऊँट की सवारी आम थी। गधों को ईंट के भट्ठों पर ईंट की ढुलाई ,धोबियों के पास कपड़ों की ढुलाई और गावों में सामान इधर -उधर पहुंचाने के प्रयोग में आम  देखा था लेकिन गधों को ठेला खींचते हुए देखना अजब संजोग था। लोकल आने जाने के लिए लोग थ्री व्हीलर का प्रयोग करते हैं। यहाँ चलने वाले थ्री व्हीलर्स का डिज़ाइन भी कमाल का है।

Monday, 21 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-17

दोस्तों नमस्कार।
आशा करता हूँ आप सब कुशल मंगल से हैं।
जब देश में मानसून का मौसम हो और बरसात का कहीं अतापता न हो। देश के अधिकतर इलाकों में सूखे के आसार हों। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 जब महंगाई आसमां छू रही हो। टमाटर ,प्याज और आलू जैसी आम सब्ज़ियाँ ,आम आदमी की पहुँच से बहुत दूर हो गई हों।सरकारें काला बाज़ारी को दोषी ठहरा कर पल्ला झाड़ रही हों। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
जब देश के अलग -अलग हिस्सों से युवतियों और बच्चियों से बलात्कार की ख़बरें समाचार पत्रों की सुर्खियां बन रही हों।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा ऐसी ख़बरों को जब चटपटी चाट की तरह परोसा जा रहा हो। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 जब देश की सत्ताधारी पार्टी से लोगों को बहुत सारी उम्मीदें हों और लोग अच्छे दिन आने के सपने देख रहे हों। ऐसे समय में देश में धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने के उदेश्य से सत्ताधारी पार्टी के ही नेता द्वारा धार्मिक उन्माद के किस्सों को स्मरण करने की बात कही जा रही हो , ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है। जब आसमाँ से बम्बों की वर्षा के समाचार सुनने को मिल रहे हों।  आसमान में मलेशिया एयरलाइन्स के विमान को मिसाईल से हमला कर जिस तरह से 298 लोगों की ज़िन्दगी को लील दिया गया है। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 फिर भी लोइस मेकमास्टर बुजोल्ड(LOIS MCMASTER BUJOLD) के इस कथन ,"The dead can't cry out for justice.It is duty of the living to do for them." के साथ आप के मंगल भविष्य और आप से पुनः मिलने की कामना करते हुए अपनी कलम को विश्राम देता हूँ।







SEXFUL

डॉक्टर डेंग आज सुबह से ही अपने मोबाइल पर व्यस्त था। नया फ़ोन था ,बेटे ने ऑस्ट्रेलिया से भेजा था। इस लिए फ़ोन के साथ कुश्ती तो होनी ही थी। आज सुरजीत का भी आना बार बार हो रहा था। डॉ डेंग और सुरजीत दोनों कार की खरीद फरोख्त का काम करते हैं। सुरजीत कोई खास पढ़ा लिखा नहीं है। डॉक्टर डेंग कोई एप्लीकेशन डाउनलोड करना चाह रहा था। सुरजीत ने डॉक्टर का फ़ोन लिया और वो भी मोबाइल के साथ कुश्ती करने लगा।जब बहुत देर हो गई तो डॉक्टर डेंग ने सुरजीत से पूछा ,"हाँ भाई क्या बना ?" सुरजीत भी मोबाइल से गर्दन निकाल कर बोला ,"हो तो गया भाई डॉक्टर ,पर सैक्सफुल नहीं हो रहा। "वहां बैठे सभी लोग एक क्षण के लिए तो हतप्रद रह गए और एक दूसरे की और देखने लगे।  जब तक सुरजीत को अपनी गलती  का एहसास होता वहां की फ़िज़ा ठहाकों से गूँज उठी थी।
सुरजीत भी खिसयानी हंसी हंसने लगा। असल में अंग्रेजी में हाथ तंग होने के कारण सुरजीत सक्सेस फुल को सेक्सफुल बोल गया। उस दिन के बाद से ही सुरजीत को सभी सेक्सफुल कह कर ही सम्बोधित करने लगे।

Thursday, 17 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-16

दोस्तों नमस्कार।
आप ने मेरा पहला ख़त तो पढ़ ही लिया होगा। आप से बातचीत का सिलसिला बना रहे सो दोबारा मुखातिब हो रहा हूँ।
कल अचानक मेरे एक पुराने दोस्त धर्मेंदर जोशी का फ़ोन आया। धर्मेंदर इंग्लिश ट्रिब्यून के लिए पानीपत जिला के संवाददाता हैं।धर्मेंदर पंजाब के रहने वाले हैं। धर्मेंदर पानीपत से जालंधर जाते हुए कुछ समय के लिए मेरे पास रुके।उन्होंने करनाल हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत विशाल जोशी को भी स्कूल में ही बुलवा लिया। धर्मेंदर में कमाल का सेंस ऑफ़ ह्यूमर है। खूब बातें हुई।बातों बातों में कुछ पुराने किस्सों का भी ज़िक्र हुआ। दरअसल मैं भी पानीपत से हरियाणा न्यूज़ के लिए खबरनवीस के तौर पर काम किया करता था। वहीँ उनसे मिलना हुआ था। बातों बातों में जब हिसाब लगाया गया तो पता चला के इन बातों को करीब दस वर्ष हो चुके थे। समय की रफ़्तार कभी -कभी बेशक़ तेज़ लगने लगती है।

पिछले खत में लिखा था के मेरी एक सहयोगी रजनी महेंद्रू ने पुत्र को जन्म दिया है। वो मेरे साथ कर्ण पब्लिक स्कूल में काम करती थी। आज कल स्वीडन में रह रही है। आज ही उसकी बहन रीतू स्कूल में मिठाई लेकर आई। मिठाई के बिना जैसे ख़ुशी अधूरी लगती है। रजनी हर रोज़ अपने बेटे की खास फोटो उस की टाइम लाइन पर पोस्ट कर देती है।जुम्मा जुम्मा चार दिन तो हुए हैं  चुनमुन को अपना फेस बुक अकाउंट भी बना लिया। समय के साथ जीवन की रफ़्तार भी तेज़ हो गई है। 

धूप छाँव की तरह जीवन मृत्यु भी सत्य हैं। रिशा के पिता की मृत्यु का समाचार पिछले सप्ताह मिला। रिशा भी मेरे साथ स्कूल में हिसाब की टीचर है। पिता बहुत दारू पीते थे। घर वालों से मनमुटाव रहता था। पिता अपनी पारी खेल कर चले गए हैं। रिशा घर में बड़ी है। घर में माँ और एक छोटी बहन है। रिशा को अब शायद जीवन का हिसाब भी समझना पड़ेगा।
हमारे एक मित्र चाँद बाऊ जी व डब्बू काम्बोज के भाई भी अपनी -अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के प्रभु चरणों में लीन हो गए हैं।
मेरा फेस बुक परिवार बढ़ता जा रहा है।इस सिस्टम की कोई खास जानकारी न होने कि वजह से हालांकि मैं बहुत संजीदगी और ध्यान से क्लिक करता हूँ। कुछ नए पुराने दोस्तों के बारे में पता चलता रहता है। वक़्त का कमाल है कुछ नए दोस्त पुराने और पुराने नए से लगने हैं। 
14 जुलाई को दलजिंदर का जन्म दिवस था। फ़ोन पर बात हुई। दलजिंदर फिल्म पंजाब 1984 में अपनी परफॉरमेंस को लेकर खुश था। बकौल दलजिंदर ,"बड़े परदे की पहुँच सच में कमाल की है। "
 
अंत में इस चुनौती भरे संसार में आगमन करने वालों को बधाई और शुभकामनायें। इस संसार को छोड़ कर जो चले गए हैं उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना।
जल्द ही फिर मिलते हैं। ख़ुदा ख़ैर करे।

Friday, 11 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-15

दोस्तों ,
नमस्कार।
कईं दिनों से आप सब से मुखातिब होने की कोशिश करता रहा लेकिन संयोग ही नहीं बना। आज एहसास हुआ के ख़त लिखने के लिए भी माहौल की ज़रुरत होती है।महीने भर की छुटियाँ थी ,लेकिन पूरी छुटियों  में माहौल नहीं बना। खैर आज बमुश्किल अपने आप को तैयार किया के कुछ लिख ही डाला जाए।
आप सब जानते ही हैं के अधिकतर लोगों का जीवन उतार चढ़ाव भरा होता है।जीवन में हम जो चाहते हैं कईं बार उसे हासिल करने में उम्र बीत जाती है।लेकिन देर आये दुरुस्त आए जैसी कहावत भी तो सोच समझ कर लिखी गई होगी।
मेरे दोस्त दलजिंदर सिंह के बारे में मैंने आप सब को पहले भी ज़िक्र किया था। उसने पंजाबी फिल्म "पंजाब 1984 "में  रोल किया था। फिल्म हिट हो गई है। सभी कलकारों ने बहुत बढ़िया अभिनय किया है।दलजिंदर के रोल की भी प्रशंसा की जा रही है। मैं तो उसकी स्मरण शक्ति के साथ -साथ उसके अभिनय का हमेशा से कायल रहा हूँ।शुभकामनायें दलजिंदर।
स्कूलों की छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं। लगभग डेढ़ महीने की छुटियों के बाद भी स्कूल में बच्चों की संख्या अभी तक पूरी नहीं हुई है।माँ -बाप और बच्चे शायद सीबीएसई की शिक्षा प्रणाली को समझने लगे हैं। इस लिए बेफिक्र हैं।
मौसम का मिज़ाज भी कमाल का है ,बिल्कुल शेयर बाजार की तरह। कभी ऊपर तो कभी नीचे। पारा तो कम है लेकिन मौसम में आद्रता अधिक होने के कारण लोग पसीने -पसीने हुए जा रहे हैं। रही सही कसर बिजली विभाग ने पूरी कर दी है। बिजली बाई कुछ इस तरह से आँख मिचोली खेल रही है मानो अपने आशिक़ों का इम्तिहान ले रही हो। लेकिन आशिक़ हैं के अपनी माशूका को भूल कर बुलेट ट्रैन की रफ़्तार की घोषणा से खुश हुए जा रहे हैं।
बरखा ऋतु ने जून के महीने में दस्तक दी थी ,चिलचिलाती गर्मी से कुछ राहत भी मिली थी ,पेड़ पौधों पर पड़ी धूल साफ़ हो गई थी और चारों तरफ हरियाली छाने लगी थी। परन्तु जुलाई महीने में बरखा जैसे रूठ सी गई है। टीवी पर बार बार दिखाया जा रहा है के उत्तर पश्चिम भारत में सुखा पड़ने के आसार हैं।
बातें तो खूब सारी हैं जिन्हें मैं आप सब के साथ शेयर करना चाहता हूँ। हाँ सच बता दूँ मेरा दोस्त समीर नाना हो गया है। बिटिया अमानत और गुड़िआ स्वस्थ हैं। मेरे साथ कर्ण पब्लिक स्कूल में कम्प्यूटर अध्यापिका रजनी महेंद्रू ने भी पुत्र को जन्म दिया है। दोनों तंदुरुस्त हैं।मेरी और से ढुल परिवार व रजनी परिवार के सभी सदस्यों को ढेरों बधाई व शुभकामनायें।
अच्छा दोस्तों विदा लेता हूँ ,जल्द ही आप सब से फिर मुलाकात होगी।