Thursday, 17 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-16

दोस्तों नमस्कार।
आप ने मेरा पहला ख़त तो पढ़ ही लिया होगा। आप से बातचीत का सिलसिला बना रहे सो दोबारा मुखातिब हो रहा हूँ।
कल अचानक मेरे एक पुराने दोस्त धर्मेंदर जोशी का फ़ोन आया। धर्मेंदर इंग्लिश ट्रिब्यून के लिए पानीपत जिला के संवाददाता हैं।धर्मेंदर पंजाब के रहने वाले हैं। धर्मेंदर पानीपत से जालंधर जाते हुए कुछ समय के लिए मेरे पास रुके।उन्होंने करनाल हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत विशाल जोशी को भी स्कूल में ही बुलवा लिया। धर्मेंदर में कमाल का सेंस ऑफ़ ह्यूमर है। खूब बातें हुई।बातों बातों में कुछ पुराने किस्सों का भी ज़िक्र हुआ। दरअसल मैं भी पानीपत से हरियाणा न्यूज़ के लिए खबरनवीस के तौर पर काम किया करता था। वहीँ उनसे मिलना हुआ था। बातों बातों में जब हिसाब लगाया गया तो पता चला के इन बातों को करीब दस वर्ष हो चुके थे। समय की रफ़्तार कभी -कभी बेशक़ तेज़ लगने लगती है।

पिछले खत में लिखा था के मेरी एक सहयोगी रजनी महेंद्रू ने पुत्र को जन्म दिया है। वो मेरे साथ कर्ण पब्लिक स्कूल में काम करती थी। आज कल स्वीडन में रह रही है। आज ही उसकी बहन रीतू स्कूल में मिठाई लेकर आई। मिठाई के बिना जैसे ख़ुशी अधूरी लगती है। रजनी हर रोज़ अपने बेटे की खास फोटो उस की टाइम लाइन पर पोस्ट कर देती है।जुम्मा जुम्मा चार दिन तो हुए हैं  चुनमुन को अपना फेस बुक अकाउंट भी बना लिया। समय के साथ जीवन की रफ़्तार भी तेज़ हो गई है। 

धूप छाँव की तरह जीवन मृत्यु भी सत्य हैं। रिशा के पिता की मृत्यु का समाचार पिछले सप्ताह मिला। रिशा भी मेरे साथ स्कूल में हिसाब की टीचर है। पिता बहुत दारू पीते थे। घर वालों से मनमुटाव रहता था। पिता अपनी पारी खेल कर चले गए हैं। रिशा घर में बड़ी है। घर में माँ और एक छोटी बहन है। रिशा को अब शायद जीवन का हिसाब भी समझना पड़ेगा।
हमारे एक मित्र चाँद बाऊ जी व डब्बू काम्बोज के भाई भी अपनी -अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के प्रभु चरणों में लीन हो गए हैं।
मेरा फेस बुक परिवार बढ़ता जा रहा है।इस सिस्टम की कोई खास जानकारी न होने कि वजह से हालांकि मैं बहुत संजीदगी और ध्यान से क्लिक करता हूँ। कुछ नए पुराने दोस्तों के बारे में पता चलता रहता है। वक़्त का कमाल है कुछ नए दोस्त पुराने और पुराने नए से लगने हैं। 
14 जुलाई को दलजिंदर का जन्म दिवस था। फ़ोन पर बात हुई। दलजिंदर फिल्म पंजाब 1984 में अपनी परफॉरमेंस को लेकर खुश था। बकौल दलजिंदर ,"बड़े परदे की पहुँच सच में कमाल की है। "
 
अंत में इस चुनौती भरे संसार में आगमन करने वालों को बधाई और शुभकामनायें। इस संसार को छोड़ कर जो चले गए हैं उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना।
जल्द ही फिर मिलते हैं। ख़ुदा ख़ैर करे।

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