Monday, 21 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-17

दोस्तों नमस्कार।
आशा करता हूँ आप सब कुशल मंगल से हैं।
जब देश में मानसून का मौसम हो और बरसात का कहीं अतापता न हो। देश के अधिकतर इलाकों में सूखे के आसार हों। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 जब महंगाई आसमां छू रही हो। टमाटर ,प्याज और आलू जैसी आम सब्ज़ियाँ ,आम आदमी की पहुँच से बहुत दूर हो गई हों।सरकारें काला बाज़ारी को दोषी ठहरा कर पल्ला झाड़ रही हों। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
जब देश के अलग -अलग हिस्सों से युवतियों और बच्चियों से बलात्कार की ख़बरें समाचार पत्रों की सुर्खियां बन रही हों।इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा ऐसी ख़बरों को जब चटपटी चाट की तरह परोसा जा रहा हो। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 जब देश की सत्ताधारी पार्टी से लोगों को बहुत सारी उम्मीदें हों और लोग अच्छे दिन आने के सपने देख रहे हों। ऐसे समय में देश में धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने के उदेश्य से सत्ताधारी पार्टी के ही नेता द्वारा धार्मिक उन्माद के किस्सों को स्मरण करने की बात कही जा रही हो , ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है। जब आसमाँ से बम्बों की वर्षा के समाचार सुनने को मिल रहे हों।  आसमान में मलेशिया एयरलाइन्स के विमान को मिसाईल से हमला कर जिस तरह से 298 लोगों की ज़िन्दगी को लील दिया गया है। ऐसे में कुशल मंगल पूछना बेमानी सा लगता है।
 फिर भी लोइस मेकमास्टर बुजोल्ड(LOIS MCMASTER BUJOLD) के इस कथन ,"The dead can't cry out for justice.It is duty of the living to do for them." के साथ आप के मंगल भविष्य और आप से पुनः मिलने की कामना करते हुए अपनी कलम को विश्राम देता हूँ।







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