Thursday, 7 August 2014

A JOURNEY TO BAALA G DHAM PART-2

अब आगे………………
 सालासर जाते हुए रास्ते में अधिकतर खेत सूखे हुए थे। हालांकि पिछले दिनों हुई बरसात के कारण आसपास काफी हरयाली नज़र आ रही थी। लेकिन अधिकतर खेत रेत के टीलों की तरह ही लग रहे थे हमारे सारे रास्ते में बादल आसमान में मंडराते रहे हमारे साथ चलते रहे लेकिन कहाँ बरसे ये बाला जी  ही जानें। रास्ते में लक्ष्मणगढ़ का किला भी आया। सालासर जल्दी पहुँचने के चक्कर में उसे नज़दीक से नहीं देख सके। हालाँकि ज़्यादातर फोटो चलते -चलते ही खींची थी और लक्ष्मणगढ़ के किले को भी दूर से ही क्लिक कर सका।

शाम को सालासर  पहुँच कर गाड़ी को चमेली देवी धर्मशाला के सामने रोक दिया गया। ध्रर्मशाला का निर्माण बखूबी किया गया था।  कहीं से भी फाइव स्टार होटल से कम नज़र नहीं आ रही थी। अंदर जाने के बाद जब हमने अपने कमरे में प्रवेश किया तो मैं हैरान हो गया। कमरे में खूबसूरत नक्काशी वाले बेड ,मित्सुबिशी का ए सी ,तोशिबा का एल सी डी ,शानदार बाथरूम ,गर्म और ठंडे पानी की व्य्वस्था ,भोजन के लिए साफसुथरी मेस और कैंटीन। सच में सब कमाल था। सब कुछ मात्र 600 रुपये में लेकिन खाने का बिल अलग से।

शहर में जब घूमने गए तो पता चला के यहाँ धर्मशालाओं का जाल सा बिछा हुआ है।हिसार धर्मशाला। आदमपुर धर्मशाला। मायादेवी धर्मशाला। नरवाना वालों की धर्मशाला। बातों बातों में गाइड की भूमिका अदा कर रहे राकेश ने बताया के अधिकतर धर्मशालाएं देश के बड़े सेठों और हरयाणा के बड़े राजनितिक घरानों की हैं।ऐसा नहीं के सभी धर्मशालाएं महंगी थी। आपकी श्रद्धा और जेब के हिसाब से यहाँ सभी तरह की व्यवस्था है।
यहाँ अधिकतर  धर्मशालाओं के नाम बेशक हरयाणा के शहरों पर रखे गए थे लेकिन उन पर लगे पोस्टरों की और इशारा करते हुए राकेश ने बताया के ये धर्मशालाएं हरयाणा के पूर्व मुख्य मंत्रियों भजनलाल और ओम प्रकाश चौटाला की हैं।  "धर्म के नाम पर काले को सफ़ेद करने का ये नायाब तरीका है", राकेश ने इशारों -इशारों में मुझे समझाने  की कोशिश की।
 यही नहीं हरयाणा के मौजूदा मुख्य मंत्री की भी यहाँ एक धर्मशाला निर्माणाधीन है। वैसे तो पूरे भारत वर्ष से भगतजन बाला जी के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं लेकिन अधिकतर लोग यहाँ हरयाणा , राजस्थान और पंजाब से आते हैं।
थोड़ी देर आराम करने के बाद हम तीनों ने मंदिर का रुख किया। आरती का समय शाम 7. 40 निर्धारित था। मंदिर द्वार पर पहुंचे तो वहां बहुत भीड़ थी।  
आरती का समय नज़दीक आता जा रहा था। अगर श्रद्धालूओं वाली लाइन में लगते तो आरती का समय निकल जाता। श्यामलाल ने जुगाड़ लगा कर वी आई पी द्वार से प्रवेश करवा दिया। मंदिर के अंदर प्रवेश करते ही मन आनंदमयी हो गया। मंदिर की सरंचना बहुत भव्य थी।
लेकिन मंदिर के अंदर प्रवेश करने के बावजूद भी मन बाला जी से यही प्रश्न करता रहा और सोचता रहा के क्या भगवान भी जुगाड़ वालों को ही दर्शन देते हैं। कुछ समय बाद ही आरती आरम्भ हो गई।  जो कुछ भी हो लोगों की श्रद्धा और विश्वास देखते ही बनता था। देखते ही देखते पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

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