Sunday, 21 February 2016

A LETTER-EK CHITHEE (PART-40)

                                 जागो इंडिया जागो .......! (Part -1 )
लिखते हुए बहुत दुःख हो रहा है के "देशां मै देश हरयाणा ,जित दूध दही का खाणा " कहे जाने वाला मेरा प्रान्त आज आरक्षण की चपेट में जल रहा है। चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं और जाट एकता ज़िंदाबाद के नारे गूँज रहे हैं। इसे पुलिस की नाकामयाबी कहें या कुछ और समझ नहीं आ रहा। सड़कों पर पुलिस के आला अधिकारी सेना के साथ फ्लैग मार्च कर रहे हैं। लगभग 9 लोग मारे जा चुके हैं। चारों तरफ जलती हुई बसें ,गाड़ियां और बिल्डिंग जलती हुई नज़र आ रही हैं। रास्ते हैं लेकिन उन पर आरक्षण मांगने वालों का कब्ज़ा है। बड़े पुलिस अधिकारी अपने चिर परिचित अंदाज़ में आश्वासन दे रहे हैं , "स्थिति चिंता जनक किन्तु नियंत्रण में है। "
ये सही है के ऐसे मौकों पर प्रशासन का  कर्तव्य बनता है के वो लोगों में भय निकाल कर शांति का माहौल बना कर रखे। मेरी समझ से परे है की ऐसे हालातों में पुलिस भाईचारे की बात करती है लेकिन जब सब ठीक ठाक  होता है तो उस की छवि किसी वर्दी वाले गुंडे , उपद्रवी या फिर किसी रिश्वत खोर दानव की तरह क्यों बन जाती है।
आज आरक्षण समर्थक फ्रंट फुट पर तो पुलिस बैक फुट पर है। आज पुलिस अस्त्र शस्त्र से लैस होने के बावजूद भी किसी नपुंसक की तरह कुछ भी कर पाने में असमर्थ नज़र आ रही है। जब भी स्थिति विकट हो जाती है तो पुलिस असहाय क्यों हो जाती है। ऐसे में आर्मी को तलब किया जाता है।
आम दिनों में सुरक्षा के नाम पर सड़क के बीचों बीच नाके लगा कर आम आदमी के चालान करने व रिश्वत ऐंठने वाली दबंग पुलिस आज न जाने कहाँ गायब है। कल शाम को घर के नज़दीक मार्केट में रोज़ मर्रा की ज़रुरत का सामान लेने गया। जब मार्किट के पास पहुंचा तो वहां लगे एक पेड़ के नीचे करीब 15 -20 युवाओं का एक ग्रुप हाथों में डंडे लहराते हुए खड़ा था । उन्हें देख कर एक बारगी तो मैं दहल गया। मैंने तुरंत 100 नंबर पर डायल किया। लेकिन वहां से कोई response नहीं मिला। थोड़ी देर में बिना किसी अप्रिय घटना के वो वहां से गायब हो गए। थोड़ी देर में स्कूटर और मोटर बाइक पर झुण्ड में करीब 40 -50 युवक हुड़दंग मचाते हुए निकले। मैं उन्हें इधर उधर घूमते हुए देखता भर रहा।ऐसे मौके पर जब पुलिस को शहर में शांति बना कर रखने के लिए तैनात रहना चाहिए ,ऐसे में पुलिस नदारद नज़र आ रही है।
इस दृश्य के बाद मेरे मानस पटल पर कुछ पुरानी बातें और तस्वीरें तैरने लगीं। करीब दो माह पूर्व मेरा इंजीनियर बेटा अपने दो मित्रों के साथ किसी मोटर बाइक के एक इवेंट को देखने के लिए गया था। कार्यक्रम की शुरुआत से पहले ही पुलिस ने इस को रद्द कर दिया। इस से खफा वहां उपस्थित युवाओं ने हुड़दंग मचाना शुरू कर दिया। पुलिस ने सतर्कता बरतते हुए वहां पुलिस फ़ोर्स को भेजा। पुलिस को देखकर हुड़दंगी गायब हो गए। लेकिन पुलिस को अपनी कार्यवाही को अमली जमा तो पहनाना ही था। उपरोक्त कार्यवाही से बेखबर बेटा और उसके दोस्त इस पूरे ड्रामे को समझ पाते - पुलिस ने उनको पकड़ लिया। शहर के दरोगा ने बेटे को उसको कॉलर से पकड़ते हुए पुलिस की गाड़ी में धकेल दिया। बेटे ने जब अपना परिचय देना चाहा तो दरोगा ने उसके मुहं पर ज़ोर से तमाचे जड़ना शुरू कर दिया। थोड़ी ही देर में "मेक इन इंडिया " का सपना लेने वाले तीन बेक़सूर  इंजीनियर किसी उपद्रवी और हुड़दंगी के tag के साथ पुलिस चौकी में थे। लगभग तीन घंटे तक पुलिस ने किसी मुज़रिम की तरह उन्हें पुलिस चौकी में बिठा कर रखा और उनकी एक न सुनी । यही नहीं उनके मोबाइल फ़ोन भी पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए ताकि वो किसी से संपर्क न कर सकें।
शुक्र है के उन पर पुलिस ने राजद्रोह या असहिषुणता का कोई केस नहीं बनाया लेकिन उनकी मोटर साइकिल और कार के चालान काट दिए गए और दोनों इम्पाउंड कर लिए गए । पुलिस के चालान के जुर्माने को चुकाने और गाड़ी रिलीज़ करवाने के चक्कर में मेरे एक महीने की तनख्वाह मेरी जेब से खिसक गई ।  मुझे इस जुर्माने की चिंता की बजाये बच्चों की मानसिक अस्थिरता और असंतुलन की चिंता ज़्यादा थी। सच मानिए उनको इस मनोस्थिति से उबरने में कईं दिन लगे। वर्ना इन युवाओं को अपने रास्ते से भटकाने के लिए पुलिस के इस कुकृत्य ने कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी।
To be  continued ...........

Saturday, 20 February 2016

राम झूठ न बुलवाये !(Part-6)

राम झूठ न बुलवाये !
हररोज़ की तरह आज घर से काम के लिए निकला तो ट्रैफिक कुछ कम था। ये तो आप जानते ही हैं कि हरियाणा आरक्षण की आग में जल रहा है। सभी रास्ते जाम हो चुके हैं। अधिकतर रेल गाड़ियां रद्द हो चुकी हैं। रोहतक और भिवानी में आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया है। रोहतक ,भिवानी,  झज्जर और जींद में कर्फ्यू लगा दिया गया है। हरियाणा अपने पड़ौसी राज्यों पंजाब ,राजस्थान ,दिल्ली और उतर प्रदेश से बिलकुल कट सा गया है। 
इस आंदोलन में अब तक पांच लोगों की मृत्यु का समाचार है। आगजनी जारी है और सरकारी व प्राइवेट गाड़ियों तथा सम्पति को आग के हवाले किया जा रहा है। अधिकतर मोर्चों की कमान उग्र युवाओं के हाथ में है। सेना बुलवा ली गई है। सेना Flag मार्च कर रही है। HTET और CTET की परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं।
नेता अपने अपने ढंग से शांति बनाये रखने की अपील कर रहे हैं। राजनीती गर्म हो गई है। कुछ नेताओं द्वारा राजनीतिक रोटियां सेकने में कोई गुरेज़ नहीं किया जा रहा।
G . T . Road पर गाड़ियों का पहिया थम सा गया है। दोपहर वापिस घर लौटा तो कर्फ्यू जैसा माहौल लगा। हालांकि मेरे शहर करनाल में अभी शांति बनी हुई है। स्कूलों में आज छुट्टी की घोषणा कर दी गई। कुछ स्कूलों के अध्यापक करनाल में आयोजित सरस मेला घूम आये। अध्यापक आरक्षण से बेख़बर सेल्फ़ी खिंचवाने में मशगूल थे।
नुक्क्ड़ और चाय के खोखों पर लोग चाय की चुस्की लेते हुए इस पर अपने ढंग से तप्सरा कर रहे हैं। पानीपत टोल प्लाज़ा को आग के हवाले किए जाने की ख़बर से लोग खुश हैं। खुसफुस करते हुए कहने लगे कि कितना अच्छा हो अगर सभी टोल प्लाज़ा फूंक दिए जाएं। अधिकतर लोग इसे आरक्षण के ज़रिए जाट और एंटी जाट के शक्ति परीक्षण के रूप में परिभाषित कर रहे हैं।
राम झूठ न बुलवाये - आम आदमी स्तब्ध है ! आम आदमी को आरक्षण नाम की इस चिड़िया के मायने समझ नहीं आ रहे हैं !

Saturday, 13 February 2016

A LETTER- EK CHITHEE(Part-39)

                                                          जनवरी नामा ( भाग - 1 )

हमेशा की तरह नए साल की शुरुआत कर्म स्थली में पूजन से हुई। स्कूल में पूरे स्टाफ के साथ यह प्रण लिया गया के सब बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेगा।
असल में मैं और मेरे साथ विद्यालय में काम करने वाले सभी अध्यापक एक मिशन की तरह काम कर रहे हैं। यही कारण है के हम सभी अपने स्कूल को कर्म स्थली का नाम देते हैं। स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियों का एलान हो चुका था।  पिछले तीन चार सालों से सर्दी देर से पड़ने के कारण इस बार छुट्टियां 1 जनवरी से करने का निर्णय लिया गया था ।
मेरे लिए नए साल की शुरुआत सफर से हुई। एक दिन पहले बच्चों के साथ गांव में चला गया था।
स्कूल में पहुंचना ज़रूरी था। इसलिए सुबह ही गाड़ी स्टार्ट की और करनाल के लिए रवानगी डाल दी। गाँव में कोहरे की चादर बिछी हुई थी। लेकिन जैसे ही जी टी रोड पर पहुंचा तो धुप खिली हुई थी।
स्कूल में पहुँचते ही ऐसा लगा मानो मंज़िल मिल गई हो। यहाँ भी धूप खिली थी लेकिन मौसम में ढंडक थी। इधर -उधर बैठे अध्यापक अपने काम में व्यस्त थे।
मेरे ऑफिस के साथ वाले पार्क में नन्हें -नन्हें बच्चे डांस प्रैक्टिस में व्यस्त थे। सरबजीत बच्चों को बहुत ही सरल तरीके से डांस की टिप्स दे रहा था।
इस बार स्कूल का वार्षिकोत्सव लेट हो गया था और इसीलिए उसकी तैयारियों के लिए स्कूल में पांच दिन की नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
इसी आँगन में मेरी सहयोगी नवज्योत कौर ,सुनीता भंडारी ,संगीता चावला ,पूनम ,दीपिका व अन्य अध्यापिकायें नए सैशन के लिए books फाइनल करने में व्यस्त थीं। सर्दियों की छुट्टियों में काम के प्रति इन की लग्न देखते ही बनती थी। नए साल के पांच दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
हर साल की तरह इस बार भी प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और बाद में स्टाफ द्वारा आयोजित स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाया।
आज बहुत अच्छा लगा क्योंकि सभी लोग एक "टीम "तरह काम कर रहे थे।
पिछले कई बरसों से टीचर्स का घूमने का प्रोग्राम बन रहा था। कभी स्वर्ण मंदिर तो कभी दिल्ली भ्रमण फाइनल होता लेकिन किसी न किसी वजह से सिरे न चढ़ता। इस बार दिल्ली का प्रोग्राम फाइनल हो गया। सभी ने मेरी हामी भी भरवा ली लेकिन न जाने कैसी खिचड़ी बनी कि इस बार प्रोग्राम फिर कैंसल हो गया। छुट्टियों के बाद पता चला के सभी दिल्ली घूम अाये थे।
जीवन की भागमभाग में अपने लिए समय निकालना शायद बहुत मुश्किल होता है। इसलिए दुनियादारी की चिंताओं से मुक्त होने के लिए ये ज़रूरी है के कहीं घूम लिया जाए।
नए साल की शुरूआत मैंने भी कुछ फोटो खींच कर और घूमने के साथ की। सुबह खेतों में छिन्दे के साथ घूमने गए तो आनंद आ गया।
न जाने जीवन की डोर कब कट जाए इसलिए ज़रूरी है के जीवन को भरपूर जी लिया जाना चाहिए। इस दुनिया और जीवन से कोई गिला शिकवा नहीं है। बीता हुआ कल अच्छा बीत गया ,आने वाले कल की चिंता किए बिना आज को जीने की कोशिश कर रहा हूँ।
आप सब के लिए भी नया साल खुशियों से भरा हो यही दुआ करता हूँ। जल्द मिलता हूँ अगले ख़त के साथ।
जय हो !
To be continued......

Saturday, 6 February 2016

A LETTER- EK CHITHEE(PART-38)

                                                         अलविदा -2016  !
मैंने अपनी आखिरी चिठ्ठी अक्टूबर -2015 में लिखी थी। नवंबर और दिसंबर '१५  में आप से कोई सम्पर्क नहीं कर पाया। जीवन की भागमभाग में समय कितनी तेज़ भागता है ये पता ही नहीं चलता। भला हो इस फेस बुक वालों का जो समय समय पर कुछ नया करते रहते हैं। आज कल फेस बुक वाले ये बता रहे हैं के पिछले बरस आज ही के दिन आप ने फेस बुक पर क्या शेयर किया था। इसी के ज़रिये आप से संपर्क बना रहता है।
कुछ दिन पहले जल्दी नींद से जाग गया। फेस बुक खोला तो पिछले बरस लिखी चिठ्ठी नंबर -२९ ( जनवरी नामा - 2015 ) सामने थी। चिठ्ठी को पढ़ा तो ऐसा महसूस हुआ जैसे सब कल ही की बातें हैं। लेकिन इस चिठ्ठी को लिखे एक बरस बीत चुका था।
लम्बे अरसे से कुछ लिखा नहीं था। सोचा पिछले साल की तर्ज पर चिठ्ठी ही लिख दी जाए ! लिखने बैठा हूँ तो ऐसा लगता है के समय बेशक भागता जाए परन्तु समय चक्र में किस्से ,कहानियां ,घटनाएं लगभग वही रहती हैं लेकिन किरदार बदल जाते हैं।
आज रविवार है जैसे सोने पे सुहागा। पिछले बरस को याद करता हूँ तो कुछ ख़ास बातें या लम्हें ही मानस पटल पर चित्रित होते हैं। बार बार मानस पटल  के बटन दबाने के बावजूद भी सब कुछ स्पष्ट नज़र नहीं आता। दिमाग पर ज़्यादा ज़ोर न डाला जाए इस लिए सिरहाने के नीचे एक डायरी और पेन रख लिया था ताकि कुछ छूट न जाए। लेकिन फिर भी सब कुछ याद रखना या लिखना असंभव लगता है। अपने लेखक मित्र डॉ अजय शर्मा से एक दिन बात कर रहा था। गुरु ग्रन्थ साहेब का ज़िक्र करते हुए कहने लगे ," हम जितना मर्ज़ी लिखते रहें लेकिन सृष्टि निर्माता के लिखे का मुकाबला नहीं कर सकते और न उस को समझ सकते।" डॉ शर्मा एक नॉवल लिख रहे हैं , जिस का नाम भी इन्हीं पंक्तियों पर आधारित है ,"कागद कलम न लिखण हार। "
पिछले बरस निफा के सहयोग से दो बढ़िया नाटक खेलने का मौका मिला। निफा " National Integrated Fouram of Artists & Activists " राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए अग्रसर है। इस संस्था के नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में चार रिकॉर्ड दर्ज हैं। इस संस्था के चेयरमैन प्रितपाल सिंह पन्नू से मेरा विशेष लगाव है। इस लगाव का कारण यही है के सामजिक क्षेत्र में बदलाव का जो सपना मैंने संजोया था वो उसे पूरा करने में निस्वार्थ लगा हुआ है। वो जो काम कर रहा है सच में सराहनीय है।
पिछले बरस मेरी दो कहानियों "स्कूल फीस " और "Friend Request" पर पुनीत सहगल के निर्देशन में दूरदर्शन शिमला द्वारा दो फिल्म्स का निर्माण किया गया। मैं इस चिठ्ठी के ज़रिये पुनीत सहगल और दूरदर्शन का धन्यवाद करना चाहूँगा !
पिछले बरस ही भतीजे कन्नू की शादी तो बिन्नी की सगाई हो गई। बिन्नी की शादी का इस बरस सब को इंतज़ार है। भतीजी अमानकौर की शादी भी धूमधाम से हो गई। उसके माता पिता -शेरो व बघेल सिंह ने इटली से अपने वतन आकर शादी करना बेहतर समझा। उनका सारा परिवार इटली में सेटल्ड है।
नीशू की शादी भी पिछले बरस ही हुई। लेकिन शादी के दो महीने के भीतर ही उसकी पत्नी सौम्या को कैंसर की खबर ने पूरे परिवार को दहला कर रख दिया। नीशू ने अपने प्यार सौम्या के लिए कैंसर से जिस तरह लड़ाई लड़ी वो सच में काबिले तारीफ है। कुछ दिन पूर्व ही  Bone Marrow  Transplantation हुआ है। सामाजिक संस्थाओं ने निशु और सौम्या को जिस तरह से मानसिक और वितीय सहायता दी उससे ऐसा लगा के दुनिया में मानवता अभी ज़िंदा है। बेशक असहिषुणता के नाम पर पूरा देश मानवता को तार तार करता रहा हो। हम सब सौम्या के जल्द ठीक होने की दुआ करते हैं।
पिछले बरस करनाल में शिक्षा क्षेत्र के स्तम्भ G S Warraich का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके पुत्र नवज्योत सिंह ने अपने पिता का पार्थिव शरीर PGI Chandigarh में दान करके एक मिसाल कायम की। पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता भी अपनी जीवन यात्रा पूरी करके ब्रह्मलीन हो गए। एक अच्छे व्यक्तित्व के धनी मेरे मित्र नरेंदर के पिता भी प्रभु चरणों में लींन हो गए।
मेरे मित्र डॉ अजय शर्मा की रीढ़ की हड्डी का सफल ऑपरेशन हो गया। इस तरह के ऑपरेशन का नाम सुनकर एक बारगी तो शरीर में कम्पन पैदा हो जाती है। भला हो नई टेक्नोलॉजी और सक्षम doctors का। डॉ अजय शर्मा का ऑपरेशन सफल रहा। डॉ अजय शर्मा लेखन और पत्रकारिता में एक स्थापित नाम हैं।
फिर मिलने की उम्मीद से बस इतना ही लिखूंगा के "कागद कलम न लिखण हार !" 
 अलविदा 2016 ........ !
 




Thursday, 24 December 2015

"सैंटा "

"सैंटा "
क्रिसमस का दिन था। छुट्टी के दिन कईं दिनों के बाद मैं आज घर पर था। अपने कमरे में बैठा लैपटॉप पर अंगुलियां चला रहा तो सहसा बाहर से कुछ आवाज़ें सुनाई दीं। अब्बा और माँ आँगन में धूप सेक रहे थे। माँ बार बार अब्बा को हलवा बनाने के लिए  कह रही थीं। माँ के बनिस्पत अब्बा का रसोई में दखल ज़्यादा रहता था। बातों से ऐसा लग रहा था मानो आज तो किसी ज़िद्दी बच्चे की तरह माँ अड़ ही गई कि हलवा ही खाएंगी। अब्बा के आगे दाल न गली तो अपनी बहु को बार -बार कहने लगीं के हलवा खाने का बहुत मन है। बहु ने लाख समझाया के आप की तबियत ख़राब है। साँस और शुगर की दिक्कत है ,इसलिए हलवा न ही खाएं तो बेहतर होगा। पर माँ तो माँ हैं कहाँ मानने लगी। खूब बहस हुई। जीत माँ की ही हुई। माँ की ये जीत पहली ना थी। दस -पंद्रह दिन में माँ कुछ नया खाने की फरमाइश कर ही देतीं। कभी खीर तो कभी हलवा। कभी चना पूरी तो कभी गुरु कृपा वाले के घी में लपा लप करते भटूरे। अपने इस खानपान में बदलाव का माँ कोई न कोई तर्क भी ज़रूर देती। गुरुपर्व , जन्माष्टमी , शिव रात्रि , दीपावली , दशहरा हो या कोई और त्यौहार ,अमावस हो या फिर पूर्णमाशी माँ को ये दिन खूब याद रहते। माँ किसी न किसी पर्व की दुहाई देतीं और ऐसे में बहु को ही पराजित होना पड़ता। कई बार कमाल तो ये होता के अगर माँ की मन पसंद चीज़ माँ को न परोसी जाती तो भूख हड़ताल की धमकी दे माँ मौन व्रत पर भी चली जातीं। माँ की ये ख़ास फरमाइश रविवार वाले दिन या फिर कभी बहू की छुट्टी वाले दिन तो ज़रूर ही होती।  अपने कमरे में बैठा दोनों के बीच इस शीत युद्ध के डायलॉग सुन मुस्कुरा रहा था। ऐसे में किसी एक का पक्ष लेने का मतलब होता युद्ध के रुख को अपनी ओऱ मोड़ना। ठण्डी के मौसम में गर्म -गर्म रजाई से लिपटे हुए मैं इस आग में थोड़ी सी फूँक मार कर आग को भड़काने का काम भी कर सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया क्योंकि बार बार हलवे का ज़िक्र सुनते -सुनते मेरे भी मुहँ में भी पानी आने लगा था। अंततः मैंने युद्ध में कूदने की बजाय  युद्ध विराम ही बेहतर समझा। मुझे समझ नहीं आ रहा था के माँ आज क्रिसमस पर्व को कैसे भूल गई थीं। मैने अपनी बीवी को बोला ,"भई आज christmas है ,हलवा तो बनता है। " क्रिसमस का नाम सुनते ही माँ का चेहरा ख़ुशी से खिल उठा। अधिकतर माँ के उल्टे पुल्टे तर्कों का मैं विरोध ही करता और मुझे माँ की गालियों का रसास्वादन करना पड़ता था।  बीवी ने रसोई की ओर जाते हुए माँ से नज़रें चुरा आँखों को तिरछा कर के गुस्से और प्यार के तड़के वाली मुस्कराहट से मेरी तरफ देखा और हलवा बनाने के लिए रसोई में जा घुसी। बीवी की ये मुस्कुराहट मेरे लिए किसी "सैंटा" के तोहफे से कम न थी !

Saturday, 24 October 2015

राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )

                                                राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )
आज देश में जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। पशु मांस को लेकर जिस तरह आदमी का आदमी दुश्मन हुए जा रहा है। पुरस्कारों को लौटने का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी को लेकर जिस तरह से पंजाब थम सा गया है। विरोध करने के चक्कर में जिस तरह काली होली खेली जा रही है। जिस तरह आम आदमी के लिए रोज़मर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।  दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों मुनासिब दाम नहीं मिल रहे। बॉर्डर पर पाकिस्तान जिस तरह गोलाबारी किए जा रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लिए जिस तरह असुरक्षा बढ़ती जा रही है। जिस तरह देश के अलग अलग कोनों से कमज़ोर वर्ग पर उत्पीड़न और अत्याचार के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। पढ़े -लिखे युवा वर्ग को जिस तरह रोज़गार या स्वरोज़गार  के लिए दर - ब -दर धूल फांकनी पड़ रही है । जहाँ शिक्षा का स्तर गिरने के समाचार हैं । जिस तरह अख़बार की सुर्खियां हत्याएं और बलात्कार बनती जा रही हैं।  हरियाणा में दलित परिवार के दो नन्हें बच्चों को जिस तरह ज़िंदा जला दिया गया है। उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
यहाँ मुझे बेर्टोल्ट ब्रेष्ट द्वारा कही वो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं जिसमें वो कहते हैं कि आज राजनीति को समझने  की ज़रुरत है , "सबसे जाहिल व्यक्ति वह है जो राजनीतिक रूप से जाहिल है। वह कुछ सुनता नहीं, कुछ देखता नहीं, राजनीतिक जीवन में कोई भाग नहीं लेता। लगता है उसे पता नहीं कि जीने का खर्च, सब्ज़ि‍यों की, आटे की, दवाओं की क़ीमत, किराया-भाड़ा, सब कुछ राजनीतिक फ़ैसलों पर निर्भर करता है। वह तो अपने राजनीतिक अज्ञान पर गर्व भी करता है, और सीना फुलाकर कहता है कि वह राजनीति से नफ़रत करता है। उस मूर्ख को पता नहीं कि राजनीति में उसकी ग़ैर-भागीदारी का ही नतीजा हैं वेश्या एँ, परित्यक्त बच्चे़, लुटेरे और इस सबसे बदतर, भ्रष्ट अफ़सर तथा शोषक बहुराष्ट्रींय कंपनियों के चाकर।"  
यदि आप बेर्टोल्ट  पर यकीन नहीं करते तो जल्दी से किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ लाओ जिसे नज़र उतारना या झाड़ फूँक आता हो । हो सकता है मेरे देश को किसी की नज़र लग गई हो ! जल्दी से इस की नज़र उतार लो भाई !

Friday, 9 October 2015

राम झूठ न बुलवाए ! (Part -4 )

                                                                राम झूठ न बुलवाए !(Part -4 )
                                                                  सब गोलमाल है ! 


  • राम झूठ न बुलवाए…! 
  • समझ नहीं आ रहा के अपनी बात कहाँ से शुरू करूं । पूरे देश में आह्कार मचा हुआ है। दिल्ली से सटे गांव दादरी में एक मुस्लिम इकल्लाहक की हत्या इस लिए कर दी गई क्यों की गांव में ये अफवाह फ़ैल गई थी के उनके घर में गौ मांस खाया जा रहा है । अफवाहें बहुत ख़तरनाक़ होती हैं ये हम सभी को समझना होगा !
  • गौ हत्या की अफवाह से गांव के ही लोगों द्वारा अपने ही गांव के मुस्लिम की हत्या ने पूरे भारत में ये असर डाला है कि हिन्दू मुस्लिम के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। उतरप्रदेश में समाज पार्टी के मुखिया के क्षेत्र मैनपुरी में गाय मांस को लेकर अहिंसा भड़क गई है। हर जगह बस गौ मांस की चर्चा है। ऐसा लगता है मानो देश के मूल मुद्दे खत्म हो गए हों ! 
  •  बिहार के चुनावों ने इस मुद्दे  के लिए आग में घी का काम किया है। बिहार में सभी नेता कपड़ों से बाहर हो रहे हैं। अपने कपड़े डालने के बजाय दूसरों के कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है। कहीं लालू के बच्चों के जन्म तो कहीं पासवान की पत्नी के नाम पर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कोई शैतान तो कोई ब्रह्म पिशाच हो गया है। देश और देश की जनता जाए भाड़ में ! सत्ता हासिल करने के लिए अपुन कुछ भी करेगा !
  • राजनीति का स्तर इतना  "Cheap" हो गया है कि सब जगह मुद्दा "बीफ़" हो गया है !
  •  हद तो देखिए जम्मू कश्मीर में एक मुस्लिम नेता ने बीफ पार्टी ही दे डाली और विधान सभा में पिटाई हो गई। ऐसा लगने लगा है जैसे विधान पालिका मसलों का हल करने के बजाय अखाड़े हो गए हैं !
  • MNC Nestle की मैग्गी बंद हो चुकी है। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने अपनी मैग्गी लॉन्च कर दी  है। बाबा जी की कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की सेल के लिए बिग बाज़ार से करार कर लिया है। "Make in India" कामयाब होता नज़र आ रहा है !
  • ग़ुलाम अली साहब के ग़ज़ल के दो प्रोग्राम (मुंबई और पुणे) cancel हो गए है। मुंबई में शिव सेना की धमकी के बाद ग़ुलाम अली के ये प्रोग्राम रद्द किए गए हैं । ख़बर है के दिसंबर में  दिल्ली में उनके शो का आयोजन किया जायगा।  कला और संस्कृति पर धार्मिक उन्माद का असर साफ़ दिखाई देने लगा है !
  • दिल्ली के मुख्य मंत्री केजरीवाल द्वारा आम पार्टी की सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान को घूस मामले में बर्खास्त कर दिया गया है । इसी सरकार का एक मंत्री अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में हवालात काट कर ज़मानत पर चंद दिन पहले ही छूटा है । किस पर विश्वास करें किस पर न करें कुछ समझ नहीं आ रहा !
  •  मैं अपने शहर करनाल की बात ज़रूर करना चाहूंगा। पुलिस सवेंदनशील हो रही है ये दावे करनाल के स्मार्ट सिटी बनने के बाद लगातार किए जा रहे हैं। हर रोज़ स्कूल जाते हुए रास्ते में लड़कियों के एक स्कूल के सामने से गुज़रना होता है। इसके समीप कुछ गुंडा किस्म के लोगों का झुण्ड जमने लगा था।  सुबह स्कूल जाती लड़कियों पर ये लड़के फब्तियां कस्ते दिखाई दिए । मुझ से रहा नहीं गया। मैंने रास्ते में खड़ी एक पुलिस वैन को जब इस बारे बताया तो वहां तैनात दोनों पुलिस वालों  ने करीब 500 मीटर की दूरी पर जाने के लिए इस लिए मना कर दिया क्योँकि वो एरिया उनके अंडर नहीं आता था। पुलिस कब स्मार्ट होगी ये समझ से परे है !
  •  ज़रा संभल के देश के नेता सधे हुए कलाकार हैं। रंगीन सपने दिखाने में ये सिद्धहस्त हैं। आप को आपस में लड़वाने की कला इन्हें खूब आती है। चुनावों के बाद ये सब एक हो जाते हैं। एक दूसरे पर ज़हर उगलने वाले इन नेताओं को किसी भी नेता के बच्चों की शादी की album में गले मिलते हुए आप जब मर्ज़ी देख सकते हैं। 
  •  ध्यान रहे सब गोलमाल है !
  •  यहाँ मैं मीर तक़ी मीर साहेब का शेर आप की नज़र करना चाहूँगा : 
               यारो मुझे मुआफ़ रखो मैं नशे में हूँ 
               अब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ ...