Saturday, 6 February 2016

A LETTER- EK CHITHEE(PART-38)

                                                         अलविदा -2016  !
मैंने अपनी आखिरी चिठ्ठी अक्टूबर -2015 में लिखी थी। नवंबर और दिसंबर '१५  में आप से कोई सम्पर्क नहीं कर पाया। जीवन की भागमभाग में समय कितनी तेज़ भागता है ये पता ही नहीं चलता। भला हो इस फेस बुक वालों का जो समय समय पर कुछ नया करते रहते हैं। आज कल फेस बुक वाले ये बता रहे हैं के पिछले बरस आज ही के दिन आप ने फेस बुक पर क्या शेयर किया था। इसी के ज़रिये आप से संपर्क बना रहता है।
कुछ दिन पहले जल्दी नींद से जाग गया। फेस बुक खोला तो पिछले बरस लिखी चिठ्ठी नंबर -२९ ( जनवरी नामा - 2015 ) सामने थी। चिठ्ठी को पढ़ा तो ऐसा महसूस हुआ जैसे सब कल ही की बातें हैं। लेकिन इस चिठ्ठी को लिखे एक बरस बीत चुका था।
लम्बे अरसे से कुछ लिखा नहीं था। सोचा पिछले साल की तर्ज पर चिठ्ठी ही लिख दी जाए ! लिखने बैठा हूँ तो ऐसा लगता है के समय बेशक भागता जाए परन्तु समय चक्र में किस्से ,कहानियां ,घटनाएं लगभग वही रहती हैं लेकिन किरदार बदल जाते हैं।
आज रविवार है जैसे सोने पे सुहागा। पिछले बरस को याद करता हूँ तो कुछ ख़ास बातें या लम्हें ही मानस पटल पर चित्रित होते हैं। बार बार मानस पटल  के बटन दबाने के बावजूद भी सब कुछ स्पष्ट नज़र नहीं आता। दिमाग पर ज़्यादा ज़ोर न डाला जाए इस लिए सिरहाने के नीचे एक डायरी और पेन रख लिया था ताकि कुछ छूट न जाए। लेकिन फिर भी सब कुछ याद रखना या लिखना असंभव लगता है। अपने लेखक मित्र डॉ अजय शर्मा से एक दिन बात कर रहा था। गुरु ग्रन्थ साहेब का ज़िक्र करते हुए कहने लगे ," हम जितना मर्ज़ी लिखते रहें लेकिन सृष्टि निर्माता के लिखे का मुकाबला नहीं कर सकते और न उस को समझ सकते।" डॉ शर्मा एक नॉवल लिख रहे हैं , जिस का नाम भी इन्हीं पंक्तियों पर आधारित है ,"कागद कलम न लिखण हार। "
पिछले बरस निफा के सहयोग से दो बढ़िया नाटक खेलने का मौका मिला। निफा " National Integrated Fouram of Artists & Activists " राष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए अग्रसर है। इस संस्था के नाम गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में चार रिकॉर्ड दर्ज हैं। इस संस्था के चेयरमैन प्रितपाल सिंह पन्नू से मेरा विशेष लगाव है। इस लगाव का कारण यही है के सामजिक क्षेत्र में बदलाव का जो सपना मैंने संजोया था वो उसे पूरा करने में निस्वार्थ लगा हुआ है। वो जो काम कर रहा है सच में सराहनीय है।
पिछले बरस मेरी दो कहानियों "स्कूल फीस " और "Friend Request" पर पुनीत सहगल के निर्देशन में दूरदर्शन शिमला द्वारा दो फिल्म्स का निर्माण किया गया। मैं इस चिठ्ठी के ज़रिये पुनीत सहगल और दूरदर्शन का धन्यवाद करना चाहूँगा !
पिछले बरस ही भतीजे कन्नू की शादी तो बिन्नी की सगाई हो गई। बिन्नी की शादी का इस बरस सब को इंतज़ार है। भतीजी अमानकौर की शादी भी धूमधाम से हो गई। उसके माता पिता -शेरो व बघेल सिंह ने इटली से अपने वतन आकर शादी करना बेहतर समझा। उनका सारा परिवार इटली में सेटल्ड है।
नीशू की शादी भी पिछले बरस ही हुई। लेकिन शादी के दो महीने के भीतर ही उसकी पत्नी सौम्या को कैंसर की खबर ने पूरे परिवार को दहला कर रख दिया। नीशू ने अपने प्यार सौम्या के लिए कैंसर से जिस तरह लड़ाई लड़ी वो सच में काबिले तारीफ है। कुछ दिन पूर्व ही  Bone Marrow  Transplantation हुआ है। सामाजिक संस्थाओं ने निशु और सौम्या को जिस तरह से मानसिक और वितीय सहायता दी उससे ऐसा लगा के दुनिया में मानवता अभी ज़िंदा है। बेशक असहिषुणता के नाम पर पूरा देश मानवता को तार तार करता रहा हो। हम सब सौम्या के जल्द ठीक होने की दुआ करते हैं।
पिछले बरस करनाल में शिक्षा क्षेत्र के स्तम्भ G S Warraich का लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। उनके पुत्र नवज्योत सिंह ने अपने पिता का पार्थिव शरीर PGI Chandigarh में दान करके एक मिसाल कायम की। पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता भी अपनी जीवन यात्रा पूरी करके ब्रह्मलीन हो गए। एक अच्छे व्यक्तित्व के धनी मेरे मित्र नरेंदर के पिता भी प्रभु चरणों में लींन हो गए।
मेरे मित्र डॉ अजय शर्मा की रीढ़ की हड्डी का सफल ऑपरेशन हो गया। इस तरह के ऑपरेशन का नाम सुनकर एक बारगी तो शरीर में कम्पन पैदा हो जाती है। भला हो नई टेक्नोलॉजी और सक्षम doctors का। डॉ अजय शर्मा का ऑपरेशन सफल रहा। डॉ अजय शर्मा लेखन और पत्रकारिता में एक स्थापित नाम हैं।
फिर मिलने की उम्मीद से बस इतना ही लिखूंगा के "कागद कलम न लिखण हार !" 
 अलविदा 2016 ........ !
 




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