जनवरी नामा ( भाग - 1 )
हमेशा की तरह नए साल की शुरुआत कर्म स्थली में पूजन से हुई। स्कूल में पूरे स्टाफ के साथ यह प्रण लिया गया के सब बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ेगा।
असल में मैं और मेरे साथ विद्यालय में काम करने वाले सभी अध्यापक एक मिशन की तरह काम कर रहे हैं। यही कारण है के हम सभी अपने स्कूल को कर्म स्थली का नाम देते हैं। स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियों का एलान हो चुका था। पिछले तीन चार सालों से सर्दी देर से पड़ने के कारण इस बार छुट्टियां 1 जनवरी से करने का निर्णय लिया गया था ।
मेरे लिए नए साल की शुरुआत सफर से हुई। एक दिन पहले बच्चों के साथ गांव में चला गया था।
स्कूल में पहुंचना ज़रूरी था। इसलिए सुबह ही गाड़ी स्टार्ट की और करनाल के लिए रवानगी डाल दी। गाँव में कोहरे की चादर बिछी हुई थी। लेकिन जैसे ही जी टी रोड पर पहुंचा तो धुप खिली हुई थी।
स्कूल में पहुँचते ही ऐसा लगा मानो मंज़िल मिल गई हो। यहाँ भी धूप खिली थी लेकिन मौसम में ढंडक थी। इधर -उधर बैठे अध्यापक अपने काम में व्यस्त थे।
मेरे ऑफिस के साथ वाले पार्क में नन्हें -नन्हें बच्चे डांस प्रैक्टिस में व्यस्त थे। सरबजीत बच्चों को बहुत ही सरल तरीके से डांस की टिप्स दे रहा था।
इस बार स्कूल का वार्षिकोत्सव लेट हो गया था और इसीलिए उसकी तैयारियों के लिए स्कूल में पांच दिन की नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया गया था।
इसी आँगन में मेरी सहयोगी नवज्योत कौर ,सुनीता भंडारी ,संगीता चावला ,पूनम ,दीपिका व अन्य अध्यापिकायें नए सैशन के लिए books फाइनल करने में व्यस्त थीं। सर्दियों की छुट्टियों में काम के प्रति इन की लग्न देखते ही बनती थी। नए साल के पांच दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
हर साल की तरह इस बार भी प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया और बाद में स्टाफ द्वारा आयोजित स्वादिष्ट भोजन का आनंद उठाया।
आज बहुत अच्छा लगा क्योंकि सभी लोग एक "टीम "तरह काम कर रहे थे।
पिछले कई बरसों से टीचर्स का घूमने का प्रोग्राम बन रहा था। कभी स्वर्ण मंदिर तो कभी दिल्ली भ्रमण फाइनल होता लेकिन किसी न किसी वजह से सिरे न चढ़ता। इस बार दिल्ली का प्रोग्राम फाइनल हो गया। सभी ने मेरी हामी भी भरवा ली लेकिन न जाने कैसी खिचड़ी बनी कि इस बार प्रोग्राम फिर कैंसल हो गया। छुट्टियों के बाद पता चला के सभी दिल्ली घूम अाये थे।
जीवन की भागमभाग में अपने लिए समय निकालना शायद बहुत मुश्किल होता है। इसलिए दुनियादारी की चिंताओं से मुक्त होने के लिए ये ज़रूरी है के कहीं घूम लिया जाए।
नए साल की शुरूआत मैंने भी कुछ फोटो खींच कर और घूमने के साथ की। सुबह खेतों में छिन्दे के साथ घूमने गए तो आनंद आ गया।
न जाने जीवन की डोर कब कट जाए इसलिए ज़रूरी है के जीवन को भरपूर जी लिया जाना चाहिए। इस दुनिया और जीवन से कोई गिला शिकवा नहीं है। बीता हुआ कल अच्छा बीत गया ,आने वाले कल की चिंता किए बिना आज को जीने की कोशिश कर रहा हूँ।
आप सब के लिए भी नया साल खुशियों से भरा हो यही दुआ करता हूँ। जल्द मिलता हूँ अगले ख़त के साथ।
जय हो !
To be continued......