Monday, 5 January 2015

पछवा

                                                                        पछवा
डॉ डेंग की दुकान से बाहर निकल कर अपनी एक्टिवा स्टार्ट कर के घर की ओर जाने लगा तो बाहर धूप सेक रहे सुभाष गुप्ता से राम राम हो गई। आज तेज हवा ने ढंड को बढ़ा दिया था। तीन दिन की बरसात के बाद सूर्य देवता  के दर्शन हुए थे। उत्तर भारत में जनवरी के महीने में धूप निकल आये तो लोगों को सूर्य की गर्मी का असल महत्व पता चलता है। ऐसे में लोग अपने घर- दुकान के बाहर अक्सर धूप सेकते नज़र आ जाते हैं। सुभाष के साथ दुआ सलाम करने के बाद मैंने अपनी जैकेट की ज़िप बंद करते हुआ कहा ,"आज तो बहुत ढंड है !"  अपनी बीड़ी को सुलगाते हुए सुभाष ने तुरंत जवाब दिया ,"ये हवा जितनी मर्ज़ी तेज़ चले , सेहत के लिए बहुत बढ़िया है। ""ये हवा बुज़ुर्गों के लिए बहुत बढ़िया है। "
बाएं से बुज़ुर्ग रामफल और सुभाष  गुप्ता
सुभाष ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा। उसकी बात सुन कर मैंने अपनी एक्टिवा को बंद करते हुए पूछा , "ऐसा क्या है इस हवा में ? " सुभाष के साथ बैठे धूप सेक रहे एक बुज़ुर्ग ने हाथ मलते हुए कहा ,"बाऊ जी ,ये पछवा  हवा है। बेशक ये ढंडी होती है लेकिन ये जोड़ों के दर्द के लिए बहुत नयामत का काम करती है । अगर ये थोडे दिन और चल गई तो बूढ़ों को आराम मिल जाएगा। " "बूढ़ों के लिए ही नहीं ,ये तो फसलों के लिए भी बहुत अच्छी है पछवा । " सुभाष ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा। मैंने सुभाष की बात सुनते ही उसके साथ बैठे बुज़ुर्ग की तरफ देखा तो तुरंत बोले ,"ठीक कह रहे हैं लाला जी। इन दिनों में अगर पुरवा चल जाए तो गेहूँ और सब्जियों को कीड़ा लग जाता है। पछवा से फसलें लहलहाने लगती हैं और फूल खिल उठते हैं।
इन दोनों की बात सुन कर मेरा ध्यान सीधे घर में चला गया। बुज़ुर्ग माँ पिता को भी घुटनों के दर्द  शिकायत थी। माँ को ये शिकायत दो तीन महीनों से ही शुरू हुई थी। अभी १० दिन पहले ही माँ के घुटनों का check up हड्डियों वाले डॉ से दोबारा करवाया था। डॉ ने X -RAY लिया था। डॉ ने कहा ," कोई ख़ास चिंता की बात नहीं है। सर्दी का मौसम है थोड़ा बचाव रखें तो बेहतर होगा। कुछ दवाइयाँ लिख रहा हूँ इसे लेते  रहें। थोड़ा खानपान का ध्यान रखें ,चिंता की कोई बात नहीं है। "
आज इस बात को दस दिन बीत चुके थे। मैंने तुरंत एक्टिवा स्टार्ट किया और घर जा कर ब्रेक लगाई। माँ और पिता दोनों बाहर धूप सेक रहे थे। पछवा पिछले 10 दिन से चल रही थी और हर दिन तेज़ होती जा रही थी। मैंने अपना बैग रखा और माँ के साथ रखी कुर्सी पर बैठते हुए पूछा , "माँ दर्द का क्या हाल है ?" "आराम तो है बेटा ,डॉ के पास दोबारा दिखला लाए तो अच्छा होगा। " माँ ने मुझे कहा। मैंने हामी भर दी।
 माँ को ठीक देख कर मेरा चेहरा खिल उठा था मैं माँ को ठीक देख कर खुश था। मैं ये कतई नहीं जानना चाहता था के ये डॉ की दवा का असर है या पछवा हवा का !

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