13 जनवरी को स्कूल खुलने का समय भी आ गया। सर्दी की लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल की ओर चल दिया। रास्ते में सोचता रहा के आज असेंबली में बच्चों और टीचर्स के साथ क्या साँझा किया जाए। पिछले कईं सालों से ऐसा हो रहा था के ठण्ड और धुंध की वजह से छुट्टियों को आगे बढ़ा दिया जाता था। आज भी बहुत धुंध थी। स्कूल पहुँच कर बच्चों से रूबरू हुआ तो उन्हें जीवन में विचार के साथ सपने ज़िंदा रखने की बात कही।स्कूल में बच्चों के साथ लोहड़ी का त्यौहार मनाया।
प्रशासन का तुग़लकी फरमान भी आ गया । प्राइमरी तक के बच्चों की छुटियाँ 27 जनवरी तक बढ़ा दी गई !
लैपटॉप पुराना होने के कारण धीरे चलने लगा था। अंकुश की सलाह पर अपडेट करवा लिया है। "अब सब कुछ फटाफट होने लगा है।"
20 जनवरी को घर से स्कूल जाते हुए राम लाल को हॉस्पिटल के बाहर खड़े देखा तो मैं रुक गया। मैने हॉस्पिटल में आने का कारण पूछा तो वो उदास मन से बोला ,"बीवी दाखिल है।" राम लाल की एक बिटिया हमारे स्कूल में नर्सरी में पढ़ती है। मैने दोबारा कारण पूछा तो राम लाल बोला,"बेटी हुई है। " मैने उस की उदासी को अनदेखा करते हुए कहा ,"बधाई हो ,घर में लक्ष्मी आ गई। " राम लाल उदासी भरे लहज़े से धीरे से बोला ,"काहे की बधाई सर ,जुड़वां लड़कियां हुई हैं। " इस से पहले के मैं कुछ कहता वो अपने किसी रिश्तेदार से बातचीत करने लगा।
राम लाल की उदासी का कारण मैं समझ चुका था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा में दो और बेटियाँ उस के लिए बोझ बन कर आई थीं।उस के चेहरे से पराजय के भाव साफ़ झलक रहे थे। स्कूल पहुंचा तो अख़बार में प्रकाशित एक आर्टिकल पढ़ने लगा। बार बार राम लाल का चेहरा सामने आने लगा। शेक्सपियर की एक पंक्ति याद आने लगी ,"त्रासदी के कारण ईश्वर से क्या पूछते हो ,शत्रु तुम्हारे भीतर ही रहता है !"
इस साल 24 से 26 जनवरी के दिन खास रहे। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला। 24 जनवरी के दिन कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल के अथक प्रयास के कारण प्रत्येक भारतीए को हर रोज़ झण्डा फहराने का अधिकार मिला। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला।झण्डा दिवस के बाद 25 जनवरी को मतदाता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया गया।
तीनों दिन स्कूल के बच्चों और स्कूल स्टूडेंट यूनियन के प्रजातान्त्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों शुभम कपूर,स्वीनी ,हरप्रीत सिंह व् सुनिधि द्वारा ध्वजारोहण किया गया। प्रजातंत्र और गणतंत्र के मायनों के साथ इस बात को समझने की कोशिश की गई के जब तक देश में से गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,कमज़ोर वर्ग के साथ अन्याय जैसी समस्याएं समाप्त नहीं होती देश का मेहनतकश समाज और देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।
25 -26 जनवरी को अमितोष नागपाल द्वारा शेक्सपियर के अंग्रेजी नाटक 12th Night के हिंदी रूपांतरण "पिया बहरूपिया" के दिल्ली में मंचन का समाचार मिला। पर नाटक देखने जा नहीं पाया।पिया बहरूपिया एक ऐसी प्रस्तुति है जिसे बार बार देखने का मन करता है। मैं स्वयं इस की दो प्रस्तुतियां दिल्ली और चडीगढ़ में देख चुका हूँ। हिन्दी रूपांतरण ,निर्देशन और सभी कलाकारों का अभिनय लाजवाब है।"अमितोष उर्फ़ अमित करनालवी तुम ने उम्दा लिखा है।"
27 जनवरी को नर्सरी के बच्चों से स्कूल फिर से खिल उठा। आज फिर धुंध छा गई। धुंध और ढंड का पुनः आगमन प्रशासन के लिए परिहास का कारण भी बना। क्योंकि इस बार ठण्ड 13 जनवरी से भी ज्यादा थी।बच्चे एक बार फिर से छुट्टियां बढ़ाए जाने की आस लगा बैठे थे।
29 जनवरी की रात अम्बाला में शादी में गया। इतनी धुंध जीवन में इस से पूर्व कभी नहीं देखी। कईं लोगों से मिलना हुआ वहाँ। कुछ रिश्तेदारों से भी मिलना हुआ। रिश्तों के बनने बिगड़ने को समझने की कोशिश करता रहा। कुछ समझ नहीं आया। रात को ही घर वापिस चल दिए। रास्ते में पत्नी से बातचीत में इस निष्कर्ष पर पहुंचा के "रिश्ते भी अब औपचारिक हो गए हैं।" धुंध बहुत थी। रास्ते में गाड़ी तीन बार दुर्घटना ग्रस्त होते होते बची।
शादी में जाते हुए बेटे को मिलने का भी प्रोग्राम बन गया। कशिश हॉस्टल छोड़ कर बाहर घर लेकर रहने लगा है। उसने तर्क़ ये दिया के हॉस्टल में खाना अच्छा नहीं मिलता। परिवार में सभी चाहते थे के वो हॉस्टल में ही रहे। दोनों तरफ से ख़ूब कोशिश हुई। "अंततः कशिश की कोशिश कामयाब हो गई।" आज कल स्विंग आर्म में मशगूल है।
जनवरी माह का अंत एक धार्मिक कार्यक्रम में भागेदारी से हुआ। स्कूल की एक अध्यापिका नवज्योत के ससुर की रिटायरमेंट के उपलक्ष में गुरुग्रंथ साब के पाठ का आयोजन किया गया था। अखंड पाठ के भोग पर नवज्योत के ससुर को बधाई के साथ लंगर छका और सभी की मंगलकामना के लिए अरदास की।टेन्ट में लगे ऑडियो सिस्टम पर गुरबाणी की सीडी लगा दी गई और वातावरण भक्तिमय हो गया, शब्द के बोल थे.................... "जो मांगो ठाकुर अपने से सोई ,सोई ही देवै !"
प्रशासन का तुग़लकी फरमान भी आ गया । प्राइमरी तक के बच्चों की छुटियाँ 27 जनवरी तक बढ़ा दी गई !
लैपटॉप पुराना होने के कारण धीरे चलने लगा था। अंकुश की सलाह पर अपडेट करवा लिया है। "अब सब कुछ फटाफट होने लगा है।"
20 जनवरी को घर से स्कूल जाते हुए राम लाल को हॉस्पिटल के बाहर खड़े देखा तो मैं रुक गया। मैने हॉस्पिटल में आने का कारण पूछा तो वो उदास मन से बोला ,"बीवी दाखिल है।" राम लाल की एक बिटिया हमारे स्कूल में नर्सरी में पढ़ती है। मैने दोबारा कारण पूछा तो राम लाल बोला,"बेटी हुई है। " मैने उस की उदासी को अनदेखा करते हुए कहा ,"बधाई हो ,घर में लक्ष्मी आ गई। " राम लाल उदासी भरे लहज़े से धीरे से बोला ,"काहे की बधाई सर ,जुड़वां लड़कियां हुई हैं। " इस से पहले के मैं कुछ कहता वो अपने किसी रिश्तेदार से बातचीत करने लगा।
राम लाल की उदासी का कारण मैं समझ चुका था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा में दो और बेटियाँ उस के लिए बोझ बन कर आई थीं।उस के चेहरे से पराजय के भाव साफ़ झलक रहे थे। स्कूल पहुंचा तो अख़बार में प्रकाशित एक आर्टिकल पढ़ने लगा। बार बार राम लाल का चेहरा सामने आने लगा। शेक्सपियर की एक पंक्ति याद आने लगी ,"त्रासदी के कारण ईश्वर से क्या पूछते हो ,शत्रु तुम्हारे भीतर ही रहता है !"
इस साल 24 से 26 जनवरी के दिन खास रहे। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला। 24 जनवरी के दिन कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल के अथक प्रयास के कारण प्रत्येक भारतीए को हर रोज़ झण्डा फहराने का अधिकार मिला। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला।झण्डा दिवस के बाद 25 जनवरी को मतदाता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया गया।
तीनों दिन स्कूल के बच्चों और स्कूल स्टूडेंट यूनियन के प्रजातान्त्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों शुभम कपूर,स्वीनी ,हरप्रीत सिंह व् सुनिधि द्वारा ध्वजारोहण किया गया। प्रजातंत्र और गणतंत्र के मायनों के साथ इस बात को समझने की कोशिश की गई के जब तक देश में से गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,कमज़ोर वर्ग के साथ अन्याय जैसी समस्याएं समाप्त नहीं होती देश का मेहनतकश समाज और देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।
25 -26 जनवरी को अमितोष नागपाल द्वारा शेक्सपियर के अंग्रेजी नाटक 12th Night के हिंदी रूपांतरण "पिया बहरूपिया" के दिल्ली में मंचन का समाचार मिला। पर नाटक देखने जा नहीं पाया।पिया बहरूपिया एक ऐसी प्रस्तुति है जिसे बार बार देखने का मन करता है। मैं स्वयं इस की दो प्रस्तुतियां दिल्ली और चडीगढ़ में देख चुका हूँ। हिन्दी रूपांतरण ,निर्देशन और सभी कलाकारों का अभिनय लाजवाब है।"अमितोष उर्फ़ अमित करनालवी तुम ने उम्दा लिखा है।"
27 जनवरी को नर्सरी के बच्चों से स्कूल फिर से खिल उठा। आज फिर धुंध छा गई। धुंध और ढंड का पुनः आगमन प्रशासन के लिए परिहास का कारण भी बना। क्योंकि इस बार ठण्ड 13 जनवरी से भी ज्यादा थी।बच्चे एक बार फिर से छुट्टियां बढ़ाए जाने की आस लगा बैठे थे।
29 जनवरी की रात अम्बाला में शादी में गया। इतनी धुंध जीवन में इस से पूर्व कभी नहीं देखी। कईं लोगों से मिलना हुआ वहाँ। कुछ रिश्तेदारों से भी मिलना हुआ। रिश्तों के बनने बिगड़ने को समझने की कोशिश करता रहा। कुछ समझ नहीं आया। रात को ही घर वापिस चल दिए। रास्ते में पत्नी से बातचीत में इस निष्कर्ष पर पहुंचा के "रिश्ते भी अब औपचारिक हो गए हैं।" धुंध बहुत थी। रास्ते में गाड़ी तीन बार दुर्घटना ग्रस्त होते होते बची।
शादी में जाते हुए बेटे को मिलने का भी प्रोग्राम बन गया। कशिश हॉस्टल छोड़ कर बाहर घर लेकर रहने लगा है। उसने तर्क़ ये दिया के हॉस्टल में खाना अच्छा नहीं मिलता। परिवार में सभी चाहते थे के वो हॉस्टल में ही रहे। दोनों तरफ से ख़ूब कोशिश हुई। "अंततः कशिश की कोशिश कामयाब हो गई।" आज कल स्विंग आर्म में मशगूल है।
जनवरी माह का अंत एक धार्मिक कार्यक्रम में भागेदारी से हुआ। स्कूल की एक अध्यापिका नवज्योत के ससुर की रिटायरमेंट के उपलक्ष में गुरुग्रंथ साब के पाठ का आयोजन किया गया था। अखंड पाठ के भोग पर नवज्योत के ससुर को बधाई के साथ लंगर छका और सभी की मंगलकामना के लिए अरदास की।टेन्ट में लगे ऑडियो सिस्टम पर गुरबाणी की सीडी लगा दी गई और वातावरण भक्तिमय हो गया, शब्द के बोल थे.................... "जो मांगो ठाकुर अपने से सोई ,सोई ही देवै !"
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