जनवरीनामा -3
स्कूल में सफाई कर्मचारी कृष्णा दादी बन गई है। स्कूल की कर्मठ वर्कर पूनम नानी बन गई है। दूसरी भी लड़की हुई इसलिए नानी थोड़ी मायूस थी। सभी अध्यापकों द्वारा समझाए जाने पर पूनम के चेहरे पर ख़ुशी के भाव दिखाई दिए। वो असली थे या नकली वो खुद पूनम जाने। आज भी लड़की का घर में जन्म अशुभ ही माना जाता है । यही कारण है के हरियाणा में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आज भी 860 -70 के आसपास है। हालांकि 22 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा "लड़की बचाओ ,लड़की पढ़ाओ "
अभियान की शुरुआत हरियाणा की ऐतिहासिक स्थली पानीपत से कर दी गई है। इस का असर आम जनता पर कैसे और कितना पड़ता है ये आने वाला समय ही बताएगा।
सरकार द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए 22 जनवरी को स्कूलों में छुट्टी का एलान कर दिया गया। इस तुगलकी फरमान से जहाँ बच्चों में ख़ुशी की लहर थी। वहीँ अध्यापकों को पानीपत रैली में भाग लेने के आदेशों से वो परेशान नज़र आए। बच्चे हमेशा से स्कूल में छुट्टी से इतने खुश क्यों होते हैं इस विषय पर सोचें और समझें तो शिक्षा क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है।
24 जनवरी को स्कूल में बच्चों ने वसंत उत्सव पतंगें उड़ा कर मनाया। यही नहीं एक खास तरह की पतंग भी उड़ाई गई।
एक कागज़ नुमा balloon में रखे कपूर में आग लगाई और उसकी गैस से कागज़ नुमा balloon पतंग बन उड़ चला । बरसों से ऐसे balloons को देखता आ रहा था लेकिन असल रहस्य आज पता चला।
हर वर्ष की तरह इस बार भी कर्ण पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ झंडा फहराया।
66 वें गणतंत्र के बाद भी देश में गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार ,अपाहिज व पेचीदा कार्य प्रणाली जैसी समस्याएं आज भी मुहँ बाहे खड़ी हैं। नई सरकार इन सब समस्यायों का समाधान कैसे और कब तक निकाल पाएगी ये अभी देखना है।
दिल्ली में राजनीतिक युद्ध का बिगुल एक बार फिर से बज चुका है। कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो चुका है। असली युद्ध बीजेपी और आम पार्टी के बीच है। मोदी लहर इस बार दिल्ली में क्या असर दिखाती है ये हम सब को 10 फरवरी को ही पता चल पाएगा।
जनवरी में शादियों का सीज़न भी शुरू हो गया। सीज़न शब्द इस लिए प्रयोग किया क्योंकि पंडितों के अनुसार इस माह शादियों का भरपूर साया था ।
21 जनवरी को मेरी पत्नि के साथ काम करने वाली अध्यापिका संगीता मेहता के पुत्र अकुल की शादी थी। इसी दिन बेटे के घनिष्ठ दोस्त जीवेश की बहन की शादी में भी शिरकत की। शादियों की भव्यता पर बढ़ता खर्चा सच में समाज के लिए चिंता का विषय है। 26 जनवरी को अम्बाला में अनिल दत्ता के बेटे अली अंगद की शादी भी थी। अमेरिका से संजय मल्होत्रा और कुवैत से आए उपेन्द्र कौशल उर्फ़ बबलू भी विवाह समारोह में शामिल हुए।
दत्ता ने अपने बेटे से परिचय कुछ इस तरह से करवाया, "ये सभी मेरे इंडियन थिएटर के चांडाल चौकड़ी के साथी हैं।" एक लम्बे अर्से के बाद दत्ता से लम्बी बातचीत हुई। वो बिलकुल नहीं बदला है।नत्थू राम स्कूलों की कैंटीन के ठेकेदार हैं। उनके बेटे टिंकू की शादी में भी जाना हुआ। सच पूछो तो कुछ शादियों का मैं ज़िक्र नहीं कर रहा हूँ। इस बार शादियों ने बजट बिगाड़ कर रख दिया। अधिकतर शादियां पंडितों के लग्न और समय के निर्धारण से ही होती है ,फिर भी रिश्ते टूटने की संख्या में इज़ाफ़ा क्यों होता जा रहा है। ये समझ से परे है।
रास्ते में बेटे कशिश और उसके दोस्तों नितीश और पुंज से भी मुलाकात हो गई। कशिश मोटरसाइकिल के silencers बनाने में व्यस्त है।
भारत में बाबा ओबामा अपना जलवा बिखेर कर अमेरिका रुखसत हो गए हैं। जाते जाते भारत को नसीहत भी दे गए के अगर तरक्की करनी है तो धार्मिक सौहार्दता बना कर रखनी होगी। कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर एक रिक्त स्थान छोड़ गए जिस की भरपाई कभी पूरी नहीं हो पाएगी। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। मेरी श्रद्धांजलि।
जहाँ निफ़्टी 8900 और सेंसेक्स 29000 का आंकड़ा छू चुके हैं। वहीँ मेरे ब्लॉग पर viewers की संख्या 9800 पार कर चुकी है। ख़ुशी होती है जब आपके काम पर लोगों की नज़रे इनायत बनी रहती है। Dil-e-Dastan
9800 pageviews.
आप को बता दूँ के दैनिक सवेरा में 29 जनवरी को मेरी कहानी ,"गर्म खून " publish "हुई है।
मौका लगे तो ज़रूर पढ़ियेगा। मैं इस के लिए डॉ अजय शर्मा और दैनिक सवेरा का ज़रूर धन्यवाद करना चाहूँगा।
पिछले ख़त में आप को बताया था के करनाल की सामाजिक संस्था निफा द्वारा आयोजित कार्यक्रम "लोहड़ी लड़कियों के नाम" में भ्रुण हत्या पर एक नाटिका करवाने का अवसर मिला था।बच्चों में छिपी कला को निखारने के लिए बस एक नज़र चाहिए। निफा समाज सेवा के साथ बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए अच्छा काम कर रहा है। नोनीत एक अच्छा एक्टर है। मेहनत करे तो अच्छा scope है।
उसी दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल महामहिम कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा सम्मानित किए जाने की एक फोटो आप के साथ भी शेयर कर रहा हूँ।
जनवरी '15 जा चुका है , कल एक नया दिन \ नया महीना शुरू हो जायेगा.......... उम्मीद करता हूँ के आने वाला समय भी बढ़िया ही बीतेगा। आज नज़ीर अकबराबादी को पढ़ रहा था ,उनकी नज़्म का एक शेर आप के मुख़ातिब है ……" जिसे मोल लेना हो ले लो ख़ुशी से ,
मैं इस वक़्त दोनों जहां बेचता हूँ। "
शुभकामनाएं !
स्कूल में सफाई कर्मचारी कृष्णा दादी बन गई है। स्कूल की कर्मठ वर्कर पूनम नानी बन गई है। दूसरी भी लड़की हुई इसलिए नानी थोड़ी मायूस थी। सभी अध्यापकों द्वारा समझाए जाने पर पूनम के चेहरे पर ख़ुशी के भाव दिखाई दिए। वो असली थे या नकली वो खुद पूनम जाने। आज भी लड़की का घर में जन्म अशुभ ही माना जाता है । यही कारण है के हरियाणा में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आज भी 860 -70 के आसपास है। हालांकि 22 जनवरी को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा "लड़की बचाओ ,लड़की पढ़ाओ "
अभियान की शुरुआत हरियाणा की ऐतिहासिक स्थली पानीपत से कर दी गई है। इस का असर आम जनता पर कैसे और कितना पड़ता है ये आने वाला समय ही बताएगा।
सरकार द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए 22 जनवरी को स्कूलों में छुट्टी का एलान कर दिया गया। इस तुगलकी फरमान से जहाँ बच्चों में ख़ुशी की लहर थी। वहीँ अध्यापकों को पानीपत रैली में भाग लेने के आदेशों से वो परेशान नज़र आए। बच्चे हमेशा से स्कूल में छुट्टी से इतने खुश क्यों होते हैं इस विषय पर सोचें और समझें तो शिक्षा क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है।
24 जनवरी को स्कूल में बच्चों ने वसंत उत्सव पतंगें उड़ा कर मनाया। यही नहीं एक खास तरह की पतंग भी उड़ाई गई।
एक कागज़ नुमा balloon में रखे कपूर में आग लगाई और उसकी गैस से कागज़ नुमा balloon पतंग बन उड़ चला । बरसों से ऐसे balloons को देखता आ रहा था लेकिन असल रहस्य आज पता चला।
हर वर्ष की तरह इस बार भी कर्ण पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ झंडा फहराया।
66 वें गणतंत्र के बाद भी देश में गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार ,अपाहिज व पेचीदा कार्य प्रणाली जैसी समस्याएं आज भी मुहँ बाहे खड़ी हैं। नई सरकार इन सब समस्यायों का समाधान कैसे और कब तक निकाल पाएगी ये अभी देखना है।
दिल्ली में राजनीतिक युद्ध का बिगुल एक बार फिर से बज चुका है। कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो चुका है। असली युद्ध बीजेपी और आम पार्टी के बीच है। मोदी लहर इस बार दिल्ली में क्या असर दिखाती है ये हम सब को 10 फरवरी को ही पता चल पाएगा।
जनवरी में शादियों का सीज़न भी शुरू हो गया। सीज़न शब्द इस लिए प्रयोग किया क्योंकि पंडितों के अनुसार इस माह शादियों का भरपूर साया था ।
21 जनवरी को मेरी पत्नि के साथ काम करने वाली अध्यापिका संगीता मेहता के पुत्र अकुल की शादी थी। इसी दिन बेटे के घनिष्ठ दोस्त जीवेश की बहन की शादी में भी शिरकत की। शादियों की भव्यता पर बढ़ता खर्चा सच में समाज के लिए चिंता का विषय है। 26 जनवरी को अम्बाला में अनिल दत्ता के बेटे अली अंगद की शादी भी थी। अमेरिका से संजय मल्होत्रा और कुवैत से आए उपेन्द्र कौशल उर्फ़ बबलू भी विवाह समारोह में शामिल हुए।
दत्ता ने अपने बेटे से परिचय कुछ इस तरह से करवाया, "ये सभी मेरे इंडियन थिएटर के चांडाल चौकड़ी के साथी हैं।" एक लम्बे अर्से के बाद दत्ता से लम्बी बातचीत हुई। वो बिलकुल नहीं बदला है।नत्थू राम स्कूलों की कैंटीन के ठेकेदार हैं। उनके बेटे टिंकू की शादी में भी जाना हुआ। सच पूछो तो कुछ शादियों का मैं ज़िक्र नहीं कर रहा हूँ। इस बार शादियों ने बजट बिगाड़ कर रख दिया। अधिकतर शादियां पंडितों के लग्न और समय के निर्धारण से ही होती है ,फिर भी रिश्ते टूटने की संख्या में इज़ाफ़ा क्यों होता जा रहा है। ये समझ से परे है।
रास्ते में बेटे कशिश और उसके दोस्तों नितीश और पुंज से भी मुलाकात हो गई। कशिश मोटरसाइकिल के silencers बनाने में व्यस्त है।
भारत में बाबा ओबामा अपना जलवा बिखेर कर अमेरिका रुखसत हो गए हैं। जाते जाते भारत को नसीहत भी दे गए के अगर तरक्की करनी है तो धार्मिक सौहार्दता बना कर रखनी होगी। कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर एक रिक्त स्थान छोड़ गए जिस की भरपाई कभी पूरी नहीं हो पाएगी। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। मेरी श्रद्धांजलि।
जहाँ निफ़्टी 8900 और सेंसेक्स 29000 का आंकड़ा छू चुके हैं। वहीँ मेरे ब्लॉग पर viewers की संख्या 9800 पार कर चुकी है। ख़ुशी होती है जब आपके काम पर लोगों की नज़रे इनायत बनी रहती है। Dil-e-Dastan
आप को बता दूँ के दैनिक सवेरा में 29 जनवरी को मेरी कहानी ,"गर्म खून " publish "हुई है।
मौका लगे तो ज़रूर पढ़ियेगा। मैं इस के लिए डॉ अजय शर्मा और दैनिक सवेरा का ज़रूर धन्यवाद करना चाहूँगा। पिछले ख़त में आप को बताया था के करनाल की सामाजिक संस्था निफा द्वारा आयोजित कार्यक्रम "लोहड़ी लड़कियों के नाम" में भ्रुण हत्या पर एक नाटिका करवाने का अवसर मिला था।बच्चों में छिपी कला को निखारने के लिए बस एक नज़र चाहिए। निफा समाज सेवा के साथ बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए अच्छा काम कर रहा है। नोनीत एक अच्छा एक्टर है। मेहनत करे तो अच्छा scope है।
उसी दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल महामहिम कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा सम्मानित किए जाने की एक फोटो आप के साथ भी शेयर कर रहा हूँ।जनवरी '15 जा चुका है , कल एक नया दिन \ नया महीना शुरू हो जायेगा.......... उम्मीद करता हूँ के आने वाला समय भी बढ़िया ही बीतेगा। आज नज़ीर अकबराबादी को पढ़ रहा था ,उनकी नज़्म का एक शेर आप के मुख़ातिब है ……" जिसे मोल लेना हो ले लो ख़ुशी से ,
मैं इस वक़्त दोनों जहां बेचता हूँ। "
शुभकामनाएं !









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