Saturday, 31 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE(PART-29)

                                                              जनवरीनामा -3
स्कूल में सफाई कर्मचारी कृष्णा दादी बन गई है। स्कूल की कर्मठ वर्कर पूनम नानी बन गई है। दूसरी भी लड़की हुई इसलिए नानी थोड़ी मायूस थी। सभी अध्यापकों द्वारा समझाए जाने पर पूनम के चेहरे पर ख़ुशी के भाव दिखाई दिए। वो असली थे या नकली वो खुद पूनम जाने। आज भी लड़की का घर में जन्म अशुभ ही माना जाता है । यही कारण है के हरियाणा में 1000 लड़कों के मुकाबले लड़कियों की संख्या आज भी 860 -70 के आसपास है। हालांकि 22 जनवरी  को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा "लड़की बचाओ ,लड़की पढ़ाओ "
अभियान की शुरुआत हरियाणा की ऐतिहासिक स्थली पानीपत से कर दी गई है। इस का असर आम जनता पर कैसे और कितना पड़ता है ये आने वाला समय ही बताएगा।
सरकार द्वारा आयोजन को सफल बनाने के लिए 22 जनवरी को स्कूलों में छुट्टी का एलान कर दिया गया। इस तुगलकी फरमान से जहाँ बच्चों में ख़ुशी की लहर थी। वहीँ अध्यापकों को पानीपत रैली में भाग लेने के आदेशों से वो परेशान नज़र आए। बच्चे हमेशा से स्कूल में छुट्टी से इतने खुश क्यों होते हैं इस विषय पर सोचें और समझें तो शिक्षा क्षेत्र में सुधार की संभावनाओं को तलाशा जा सकता है।
24 जनवरी को स्कूल में बच्चों ने वसंत उत्सव पतंगें उड़ा कर मनाया। यही नहीं एक खास तरह की पतंग भी उड़ाई गई।
एक कागज़ नुमा balloon में रखे कपूर में आग लगाई और उसकी गैस से कागज़ नुमा balloon पतंग बन उड़ चला । बरसों से ऐसे balloons को देखता आ रहा था लेकिन असल रहस्य आज पता चला।
 हर वर्ष की तरह इस बार भी कर्ण पब्लिक स्कूल में बच्चों के साथ झंडा फहराया।
66 वें गणतंत्र के बाद भी देश में गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,भ्रष्टाचार ,अपाहिज व पेचीदा कार्य प्रणाली जैसी समस्याएं आज भी मुहँ बाहे खड़ी हैं। नई सरकार इन सब समस्यायों का समाधान कैसे और कब तक निकाल पाएगी ये अभी देखना है। 
दिल्ली में राजनीतिक युद्ध का बिगुल एक बार फिर से बज चुका है। कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो चुका है। असली युद्ध बीजेपी और आम पार्टी के बीच है। मोदी लहर इस बार दिल्ली में क्या असर दिखाती है ये हम सब को 10 फरवरी को ही पता चल पाएगा।
जनवरी में शादियों का सीज़न भी शुरू हो गया। सीज़न शब्द इस लिए प्रयोग किया क्योंकि पंडितों के अनुसार इस माह शादियों का भरपूर साया था ।
21 जनवरी को मेरी पत्नि के साथ काम करने वाली अध्यापिका संगीता मेहता के पुत्र अकुल की शादी थी। इसी दिन बेटे के घनिष्ठ दोस्त जीवेश की बहन की शादी में भी शिरकत की। शादियों की भव्यता पर बढ़ता खर्चा सच में समाज के लिए चिंता का विषय है। 26 जनवरी को अम्बाला में अनिल दत्ता के बेटे अली अंगद की शादी भी थी। अमेरिका से संजय मल्होत्रा और कुवैत से आए उपेन्द्र कौशल उर्फ़ बबलू भी विवाह समारोह में शामिल हुए। 
दत्ता ने अपने बेटे से परिचय कुछ इस तरह से करवाया, "ये सभी मेरे इंडियन थिएटर के चांडाल चौकड़ी के साथी हैं।" एक लम्बे अर्से के बाद दत्ता से लम्बी बातचीत हुई। वो बिलकुल नहीं बदला है।नत्थू राम स्कूलों की कैंटीन के ठेकेदार हैं। उनके बेटे टिंकू की शादी में भी जाना हुआ। सच पूछो तो कुछ शादियों का मैं ज़िक्र नहीं कर रहा हूँ। इस बार शादियों ने बजट बिगाड़ कर रख दिया। अधिकतर शादियां पंडितों के लग्न और समय के निर्धारण से ही होती है ,फिर भी रिश्ते टूटने की संख्या में इज़ाफ़ा क्यों होता जा रहा है। ये समझ से परे है।
रास्ते में बेटे कशिश और उसके दोस्तों नितीश और पुंज से भी मुलाकात हो गई। कशिश मोटरसाइकिल के silencers बनाने में व्यस्त है।
भारत में बाबा ओबामा अपना जलवा बिखेर कर अमेरिका रुखसत हो गए हैं। जाते जाते भारत को नसीहत भी दे गए के अगर तरक्की करनी है तो धार्मिक सौहार्दता बना कर रखनी होगी। कार्टूनिस्ट आर के लक्ष्मण अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर एक रिक्त स्थान छोड़ गए जिस की भरपाई कभी पूरी नहीं हो पाएगी। उनकी कमी हमेशा खलती रहेगी। मेरी श्रद्धांजलि।
जहाँ निफ़्टी 8900 और सेंसेक्स 29000 का आंकड़ा छू चुके हैं। वहीँ मेरे ब्लॉग पर viewers की संख्या 9800 पार कर चुकी है। ख़ुशी होती है जब आपके काम पर लोगों की नज़रे इनायत बनी रहती है। Dil-e-Dastan Pageview chart 9800 pageviews. 
आप को बता दूँ के दैनिक सवेरा में 29 जनवरी को मेरी कहानी ,"गर्म खून " publish "हुई है।https://m.ak.fbcdn.net/sphotos-e.ak/hphotos-ak-xfp1/v/t1.0-9/10406365_743963132359986_8912261835031181026_n.jpg?oh=e87c982d3c96ec623db67d6492cb66bb&oe=555B9143&__gda__=1432115402_fc62807bd649b2f3a4a6973f93e64423 मौका लगे तो ज़रूर पढ़ियेगा। मैं इस के लिए डॉ अजय शर्मा और दैनिक सवेरा का ज़रूर धन्यवाद करना चाहूँगा।  
पिछले ख़त में आप को बताया था के करनाल की सामाजिक संस्था निफा द्वारा आयोजित कार्यक्रम "लोहड़ी लड़कियों के नाम" में भ्रुण हत्या पर एक नाटिका करवाने का अवसर मिला था।बच्चों में छिपी कला को निखारने के लिए बस एक नज़र चाहिए। निफा समाज सेवा के साथ बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए अच्छा काम कर रहा है। नोनीत एक अच्छा एक्टर है। मेहनत करे तो अच्छा scope है। https://fbcdn-sphotos-b-a.akamaihd.net/hphotos-ak-xap1/v/t1.0-9/10685410_912264758786595_7638150339185660102_n.jpg?oh=d0a7156c73ccac7e901e0b3d07a55382&oe=55622C60&__gda__=1432085180_2433575fd64f70bd9e13a28c28cb9c70 उसी दिन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल महामहिम कप्तान सिंह सोलंकी द्वारा सम्मानित किए जाने की एक फोटो आप के साथ भी शेयर कर रहा हूँ।
जनवरी '15 जा चुका है , कल एक नया दिन \ नया महीना शुरू हो जायेगा.......... उम्मीद करता हूँ के आने वाला समय भी बढ़िया ही बीतेगा। आज नज़ीर अकबराबादी को पढ़ रहा था ,उनकी नज़्म का एक शेर आप के मुख़ातिब है ……" जिसे मोल लेना हो ले लो ख़ुशी से , 
                             मैं इस वक़्त दोनों जहां बेचता हूँ। "
शुभकामनाएं !

Friday, 23 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE (PART-28)

                                                                   जनवरी नामा -2
दोस्तों ,
बचपन से ये सुनते और पढ़ते आ रहे हैं के वक़्त बलवान है। उम्र के इस पड़ाव पर आकर सच में ये समझ आने लगा है के वक़्त के आगे किसी का ज़ोर नहीं चलता। सर्दियों की छुट्टियों के बाद 15 जनवरी को स्कूल खुले तो ख़बर मिली के नंगल (पंजाब ) में हमारी आंटी बिमला देवी ओहरी इस दुनिया में नहीं रही। 16 जनवरी को संस्कार और 18 जनवरी को रस्म पगड़ी थी। श्रद्धांजलि।
 ये भी पढ़ते और सुनते हुए आ रहे हैं के सूर्य पूर्व में उगता है और पश्चिम में अस्त होता है व जीवन मृत्यु कड़वे सत्य हैं। कईं बार सोचता हूँ के ये साइंस है या सच में कोई अदृश्य शक्ति है जो इस पूरी सृष्टि को चला रही है। क्या सच में कोई ऐसी शक्ति है जो सब कुछ तय करती है और मनुष्य रुपी रोबोट को किर्यान्वित और संचालित करती है। जानता हूँ इस मनुष्य को सभी अलग अलग तरह से परिभाषित करते है। कोई इसे मिट्टी का खिलौना तो कोई इसे कठपुतली का नाम देता है। सभी की परिभाषा को समझने की कोशिश करता हूँ तो जितना कुछ समझ आता है वो बस यही है कि मनुष्य स्वयं कुछ नहीं। वो तो बस यूं ही गुमां करता है ,अपना दम भरता है। कल रितु के पति हरीश की आकस्मिक मृत्यु के समाचार से कर्ण परिवार के साथ मैं सकते में हूँ। रितु हमारे साथ स्कूल में काम करती थी। कुछ समय पहले ही दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर गई थी। हर हाल में खुश और मुस्कुराते रहने वाली रितु व उसके परिवार को ये अदृश्य शक्ति इस दुःख को सहने की ताकत प्रदान करे। 20 जनवरी को शोक सभा में जाना हुआ। श्रद्धांजलि।
करनाल की सामाजिक संस्था निफा द्वारा दयाल सिंह कॉलेज में "लोहड़ी लड़कियों के नाम " कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हरियाणा के राज्यपाल महामहिम प्रोफेसर कप्तान सिंह सोलंकी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।इस भव्य कार्यक्रम में करनाल ज़िले के सभी विधायक और हरियाणा सरकार के मंत्री भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। मेरे साथ दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ने वाले हरिंदर कल्याण से भी मिलने का मौका मिला। हरिंदर कल्याण घरौंडा से विधायक हैं। मुझे झुग्गी झोंपड़ी में रहने वाले बच्चों के साथ एक लघु नाटिका का निर्देशन करने का अवसर भी मिला। निफा के मुखिया प्रितपाल पन्नू के काम करने की शैली और सादगी ने प्रभावित किया। बच्चों ने अच्छा परफॉर्म किया।
दयाल सिंह कॉलेज में नाटक की रिहर्सल का दृश्य
हालांकि की स्कूल में छुट्टियां थी फिर भी हर वर्ष की भाॅंति स्कूल में 13 जनवरी को लोहड़ी का त्यौहार मनाने के लिए सभी टीचर्स जुट गए। बहुत ही सादगी से अग्नि पूजा कर लोहड़ी का त्यौहार मनाया गया।
कर्ण पब्लिक स्कूल में लोहड़ी मनाते अध्यापिकाएं
जब आग में मुंगफली को आग में डालने कारण जानने की कोशिश की तो पता चला के इस से पापों नाश हो जाता है। अजब गजब की किंवदंतियां हैं हमारे यहाँ !
1 से 15 जनवरी तक  स्कूल में छुट्टियां थी। छुट्टियों में कहीं घूमना नहीं हो सका था। छुट्टियों की पूर्व संध्या पर बबलू और संजय मल्होत्रा करनाल रुके। अच्छा लगा। इसके बाद 17 जनवरी को  पंचकुला में J . P के घर में दोबारा मुलाकात हुई। बबलू ने पुराने साथियों अनिल दत्ता ,बेगोवाल ,नागेश धवन से बातचीत करवा दी। ये सभी चंडीगढ़ पंजाब युनिवर्सिटी में साथ थे।
31 दिसंबर को करनाल में बनी फिल्म "एक था भुजंग" सेंसर ने पास कर दी थी। फिल्म का पोस्टर भी लांच हो गया है। फिल्म में मैंने भी एक role किया है। इसीलिए शायद इस फिल्म का ज़िक्र बार -बार हो जाता है।फिल्म का पोस्टर बहुत सुन्दर बना है।

उधर अमितोष करनालवी और कंपनी टीम  कलाकारों ने chille में "पिया बहरूपिया " नाटक का 100 वां सफल मंचन किया। अमितोष और नाटक की पूरी टीम को बधाई। नाटक के बारे में बस इतना कहूँगा के ये ULTIMATE है।Piya Behrupiya (Twelfth Night)
                                                                                                                                                                         अच्छा दोस्तों फिर मिलते हैं।

Sunday, 11 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE PART-27

                                                                     जनवरीनामा -1
दोस्तों आप सब को नववर्ष मंगलमय हो।
 ढंड और कोहरे के कारण पूरा उतर भारत ठिठुर रहा है। स्कूलों की छुट्टियां चल रही हैं। पारा और नीचे गिरने की उम्मीद है। 1 जनवरी को स्कूल में विश्व शांति के लिए प्रार्थना के साथ नववर्ष की शुरुआत की।
 फ्रांस की राजधानी पेरिस में धार्मिक उन्मादियों के द्वारा एक मैगज़ीन के दफ्तर पर आतंकी हमले से ऐसा लगा मानो धर्मांध लोगों को शांति और मानवता के मायने मालूम नहीं हैं। पूरे भारत में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। एक गणतंत्र दिवस का आयोजन दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत आगमन। भारत में अमेरिकी राष्ट्रपति बोराक ओबामा का गणतंत्र दिवस पर आने का बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है।
पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर इमरान खान ने 60 साल की उम्र में दोबारा शादी कर ली है। ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच खेली गई टेस्ट series भारत हार चुका है।  धोनी ने टेस्ट मैच फॉर्मेट से सन्यास ले लिया है। विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया में अपने bat  से अच्छा प्रदर्शन किया है । ऑस्ट्रेलियाई पिच पर लगातार 4 centuries लगा कर सिद्ध कर दिया है के वो कप्तानी के लिए सक्षम है। इसी के साथ उसने आलोचकों को ये भी बता दिया के प्यार कभी अशुभ नहीं होता।
 फिल्म P K विश्व भर में  600 करोड़ कमा चुकी है। देशभर में फिल्म के विरोध के बावज़ूद फिल्म की सफलता बताती है के कला या कलाकार को धर्म ,जाति ,भाषा और सीमाओं के दायरे में नहीं बांधना चाहिए। संकीर्ण दिमाग के लोगों को ये समझ लेना चाहिेए के कला किसी की मोहताज़ नहीं होती।
कच्चे तेल के भाव बुरी तरह से गिर चुके हैं। लेकिन जिस तरह से कच्चे तेल के भाव में गिरावट आई है ,भारत में पेट्रोल के दाम में उतनी गिरावट नहीं आई है।सरकारें क्या घालमेल करती हैं ये आम आदमी को समझना होगा।
7 जनवरी को बिटिया याशिका का जन्मदिन था। उसने अपनी सहेलियों के साथ इसे खूब मस्त तरीके से मनाया। 8 जनवरी को मेरी एक कहानी "स्कूल फीस " दैनिक सवेरा अख़बार में प्रकाशित हुई। http://krishankumarmalik.blogspot.in/2014/12/blog-post_11.html
 9 जनवरी 1914 को महात्मा गांधी अफ्रीका से वापिस भारत लौटे। 100 वर्ष पूरे होने पर कई channels देश की आज़ादी के लिए उनके सहयोग और मार्ग दर्शन को बखूबी दिखाया जा रहा है। गांधीनगर में प्रवासी भारतीयों के एक कार्यक्रम में मोदी ने भी महात्मा को याद किया। देश की आज़ादी के लिए महात्मा ने एक नई दिशा दी। मेरा नमन।
दो तीन दिन के लिए गांव घूम आया हूँ। बिटिया और पत्नी साथ में थे।
गांव की सादगी और शांति हमेशा मुझे अपनी और आकर्षित करती है।

खेतों में लहलहाती फसलें ,लोगों के चेहरे पर भोलापन ,सकूं और
 बेफिक्री - सच में इन सब को परिभाषित करना बहुत मुश्किल है।
फिर मिलते हैं। आप सभी अपना ध्यान रखिएगा।


Wednesday, 7 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE PART-2

13 जनवरी को स्कूल खुलने का समय भी आ गया। सर्दी की लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल की ओर चल दिया। रास्ते में सोचता रहा के आज असेंबली में बच्चों और टीचर्स के साथ क्या साँझा किया जाए। पिछले कईं सालों से ऐसा हो रहा था के ठण्ड और धुंध की वजह से छुट्टियों को आगे बढ़ा दिया जाता था। आज भी बहुत धुंध थी। स्कूल पहुँच कर बच्चों से रूबरू हुआ तो उन्हें जीवन में विचार के साथ सपने ज़िंदा रखने की बात कही।स्कूल में बच्चों के साथ लोहड़ी का त्यौहार मनाया।
 प्रशासन का तुग़लकी फरमान भी आ गया । प्राइमरी तक के बच्चों की छुटियाँ 27 जनवरी तक बढ़ा दी गई !

लैपटॉप पुराना होने के कारण धीरे चलने लगा था। अंकुश की सलाह पर अपडेट करवा लिया है। "अब सब कुछ फटाफट होने लगा है।"

20 जनवरी को घर से स्कूल जाते हुए राम लाल को हॉस्पिटल के बाहर खड़े देखा तो मैं रुक गया। मैने हॉस्पिटल में आने का कारण पूछा तो वो उदास मन से बोला ,"बीवी दाखिल है।" राम लाल की एक बिटिया हमारे स्कूल में नर्सरी में पढ़ती है। मैने दोबारा कारण पूछा तो राम लाल बोला,"बेटी हुई है। " मैने उस की उदासी को अनदेखा करते हुए कहा ,"बधाई हो ,घर में लक्ष्मी आ गई। " राम लाल उदासी भरे लहज़े से धीरे से बोला ,"काहे की बधाई सर ,जुड़वां लड़कियां हुई हैं। " इस से पहले के मैं कुछ कहता वो अपने किसी रिश्तेदार से बातचीत करने लगा।

राम लाल की उदासी का कारण मैं समझ चुका था। पुत्र प्राप्ति की इच्छा में दो और बेटियाँ उस के लिए बोझ बन कर आई थीं।उस के चेहरे से पराजय के भाव साफ़ झलक रहे थे। स्कूल पहुंचा तो अख़बार में प्रकाशित एक आर्टिकल पढ़ने लगा। बार बार राम लाल का चेहरा सामने आने लगा। शेक्सपियर की एक पंक्ति याद आने लगी ,"त्रासदी के कारण ईश्वर से क्या पूछते हो ,शत्रु तुम्हारे भीतर ही रहता है !"

इस साल 24 से 26 जनवरी के दिन खास रहे। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला। 24 जनवरी के दिन कुरुक्षेत्र के सांसद नवीन जिंदल के अथक प्रयास के कारण प्रत्येक भारतीए को हर रोज़ झण्डा फहराने का अधिकार मिला। बच्चों के साथ इस बात को साँझा कर के सकून मिला।झण्डा दिवस के बाद 25 जनवरी को मतदाता दिवस और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में  मनाया गया।

 तीनों दिन स्कूल के बच्चों और स्कूल स्टूडेंट यूनियन के प्रजातान्त्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों शुभम कपूर,स्वीनी ,हरप्रीत सिंह व् सुनिधि द्वारा ध्वजारोहण किया गया। प्रजातंत्र और गणतंत्र के मायनों के साथ इस बात को समझने की कोशिश की गई के जब तक देश में से गरीबी ,बेरोज़गारी ,महंगाई ,कमज़ोर वर्ग के साथ अन्याय जैसी समस्याएं समाप्त नहीं होती देश का मेहनतकश समाज और देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।

25 -26 जनवरी को अमितोष नागपाल द्वारा शेक्सपियर के अंग्रेजी नाटक 12th Night के हिंदी रूपांतरण "पिया बहरूपिया" के दिल्ली में मंचन का समाचार मिला। पर नाटक देखने जा नहीं पाया।पिया बहरूपिया एक ऐसी प्रस्तुति है जिसे बार बार देखने का मन करता है। मैं स्वयं इस की दो प्रस्तुतियां दिल्ली और चडीगढ़ में देख चुका हूँ। हिन्दी रूपांतरण ,निर्देशन और सभी कलाकारों का अभिनय लाजवाब है।"अमितोष उर्फ़ अमित करनालवी तुम ने उम्दा लिखा है।"

27 जनवरी को नर्सरी के बच्चों से स्कूल फिर से खिल उठा। आज फिर धुंध छा गई। धुंध और ढंड का पुनः आगमन प्रशासन के लिए परिहास का कारण भी बना। क्योंकि इस बार ठण्ड 13 जनवरी से भी ज्यादा थी।बच्चे एक बार फिर से छुट्टियां बढ़ाए जाने की आस लगा बैठे थे।

 29 जनवरी की रात अम्बाला में शादी में गया। इतनी धुंध जीवन में इस से पूर्व कभी नहीं देखी। कईं लोगों से मिलना हुआ वहाँ। कुछ रिश्तेदारों से भी मिलना हुआ। रिश्तों के बनने बिगड़ने को समझने की कोशिश करता रहा। कुछ समझ नहीं आया। रात को ही घर वापिस चल दिए। रास्ते में पत्नी से बातचीत में इस निष्कर्ष पर पहुंचा के "रिश्ते भी अब औपचारिक हो गए हैं।" धुंध बहुत थी। रास्ते में गाड़ी तीन बार दुर्घटना ग्रस्त होते होते बची।

शादी में जाते हुए बेटे को मिलने का भी प्रोग्राम बन गया। कशिश हॉस्टल छोड़ कर बाहर घर लेकर रहने लगा है। उसने तर्क़ ये दिया के हॉस्टल में खाना अच्छा नहीं मिलता। परिवार में सभी चाहते थे के वो हॉस्टल में ही रहे। दोनों तरफ से ख़ूब कोशिश हुई। "अंततः कशिश की कोशिश कामयाब हो गई।" आज कल स्विंग आर्म में मशगूल है।       

जनवरी माह का अंत एक धार्मिक कार्यक्रम में भागेदारी से हुआ। स्कूल की एक अध्यापिका नवज्योत के ससुर की रिटायरमेंट के उपलक्ष में गुरुग्रंथ साब के पाठ का आयोजन किया गया था। अखंड पाठ के भोग पर नवज्योत के ससुर को बधाई के साथ लंगर छका और सभी की मंगलकामना के लिए अरदास की।टेन्ट में लगे ऑडियो सिस्टम पर गुरबाणी की सीडी लगा दी गई और वातावरण भक्तिमय हो गया, शब्द के बोल थे.................... "जो मांगो ठाकुर अपने से सोई ,सोई ही देवै !"


Monday, 5 January 2015

पछवा

                                                                        पछवा
डॉ डेंग की दुकान से बाहर निकल कर अपनी एक्टिवा स्टार्ट कर के घर की ओर जाने लगा तो बाहर धूप सेक रहे सुभाष गुप्ता से राम राम हो गई। आज तेज हवा ने ढंड को बढ़ा दिया था। तीन दिन की बरसात के बाद सूर्य देवता  के दर्शन हुए थे। उत्तर भारत में जनवरी के महीने में धूप निकल आये तो लोगों को सूर्य की गर्मी का असल महत्व पता चलता है। ऐसे में लोग अपने घर- दुकान के बाहर अक्सर धूप सेकते नज़र आ जाते हैं। सुभाष के साथ दुआ सलाम करने के बाद मैंने अपनी जैकेट की ज़िप बंद करते हुआ कहा ,"आज तो बहुत ढंड है !"  अपनी बीड़ी को सुलगाते हुए सुभाष ने तुरंत जवाब दिया ,"ये हवा जितनी मर्ज़ी तेज़ चले , सेहत के लिए बहुत बढ़िया है। ""ये हवा बुज़ुर्गों के लिए बहुत बढ़िया है। "
बाएं से बुज़ुर्ग रामफल और सुभाष  गुप्ता
सुभाष ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा। उसकी बात सुन कर मैंने अपनी एक्टिवा को बंद करते हुए पूछा , "ऐसा क्या है इस हवा में ? " सुभाष के साथ बैठे धूप सेक रहे एक बुज़ुर्ग ने हाथ मलते हुए कहा ,"बाऊ जी ,ये पछवा  हवा है। बेशक ये ढंडी होती है लेकिन ये जोड़ों के दर्द के लिए बहुत नयामत का काम करती है । अगर ये थोडे दिन और चल गई तो बूढ़ों को आराम मिल जाएगा। " "बूढ़ों के लिए ही नहीं ,ये तो फसलों के लिए भी बहुत अच्छी है पछवा । " सुभाष ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा। मैंने सुभाष की बात सुनते ही उसके साथ बैठे बुज़ुर्ग की तरफ देखा तो तुरंत बोले ,"ठीक कह रहे हैं लाला जी। इन दिनों में अगर पुरवा चल जाए तो गेहूँ और सब्जियों को कीड़ा लग जाता है। पछवा से फसलें लहलहाने लगती हैं और फूल खिल उठते हैं।
इन दोनों की बात सुन कर मेरा ध्यान सीधे घर में चला गया। बुज़ुर्ग माँ पिता को भी घुटनों के दर्द  शिकायत थी। माँ को ये शिकायत दो तीन महीनों से ही शुरू हुई थी। अभी १० दिन पहले ही माँ के घुटनों का check up हड्डियों वाले डॉ से दोबारा करवाया था। डॉ ने X -RAY लिया था। डॉ ने कहा ," कोई ख़ास चिंता की बात नहीं है। सर्दी का मौसम है थोड़ा बचाव रखें तो बेहतर होगा। कुछ दवाइयाँ लिख रहा हूँ इसे लेते  रहें। थोड़ा खानपान का ध्यान रखें ,चिंता की कोई बात नहीं है। "
आज इस बात को दस दिन बीत चुके थे। मैंने तुरंत एक्टिवा स्टार्ट किया और घर जा कर ब्रेक लगाई। माँ और पिता दोनों बाहर धूप सेक रहे थे। पछवा पिछले 10 दिन से चल रही थी और हर दिन तेज़ होती जा रही थी। मैंने अपना बैग रखा और माँ के साथ रखी कुर्सी पर बैठते हुए पूछा , "माँ दर्द का क्या हाल है ?" "आराम तो है बेटा ,डॉ के पास दोबारा दिखला लाए तो अच्छा होगा। " माँ ने मुझे कहा। मैंने हामी भर दी।
 माँ को ठीक देख कर मेरा चेहरा खिल उठा था मैं माँ को ठीक देख कर खुश था। मैं ये कतई नहीं जानना चाहता था के ये डॉ की दवा का असर है या पछवा हवा का !

Sunday, 4 January 2015

A LETTER...EK CHITHEE PART-26

                                                             अलविदा - 2014
सबसे पहले आप सब को नववर्ष -2015 मुबारक़ हो । चिट्ठियां लिख कर बहुत कुछ आप से शेयर करता हूँ फिर भी बहुत कुछ छूट जाता है। वैसे तो अपनी पिछली 25 चिट्ठियों में सब कुछ शेयर कर ही चूका हूँ। पिछले दो महीनों में जो कुछ आप से share  नहीं कर पाया वो इस चिट्ठी के ज़रिये आप तक पहुंचा रहा हूँ।
पिछले दो महीनों में परिवार के बहुत करीबी अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर प्रभु चरणों में लीन हो गए।
धीरेश के पिता मलखान सिंह सैनी की मृत्यु हो गई है। धीरेश पत्रकार है और आजकल रोहतक में नवभारत के साथ जुड़ा हुआ है। एक लम्बे अरसे के बाद लोहारी गांव में जाना हुआ। मिलना जुलना कम हो जाए तो बहुत कुछ छूट जाता है। धीरेश के पिता मलखान सिंह सैनी इलाके के विधायक थे। अपनी सादगी और ईमानदारी के लिए पुरे इलाके में मशहूर थे। उनसे बहुत बार मिलना हुआ। सच में हम आप को miss केरेंगे। 
मेरे बेटे कशिश के दोस्त जोंटी के पिता की मृत्यु से हम सकते में थे । जोंटी के दादा सीताराम अदलखा कशिश के दादा के अच्छे मित्र थे। उन्होंने मियांवाली बिरादरी के लिए बहुत काम किया।
हमारे साथ स्कूल में नर्सरी टीचर Mrs डावर के पति भी अपनी जीवन यात्रा पूर्ण करके प्रभु चरणो में लीन हो गए।मेरी बहन के ससुर चौधरी रणजीत सिंह आहलूवालिया भी प्रभु चरणों में लीन हो गए। उन्होंने बिरादरी और समाज कार्यों में सदैव बढ़ चढ़ कर भाग लिया। भगवन से मेरी यही प्रार्थना है के उनकी आत्मा को शांति और परिवार के सभी सदस्यों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी भाव भीनी श्रद्धांजलि।
इस बार भी K V A D A V कॉलेज फॉर गर्ल्स में नाटक करवाया। मेरे दोस्त मोहिन्दर द्वारा लिखित नाटक अपहरण और नाटिका तेज़ाब किया गया। अच्छा एक्सपीरियंस रहा।
http://krishankumarmalik.blogspot.in/2014/11/a-letterek-chithee-part-22.html ब्लॉग पढ़ सकते हैं।
दोस्तों का ज़िक्र करना भी ज़रूरी है। ये वो लोग हैं जिनसे साल भर बातचीत होती रही। समीर ,राहुल ,राजीव चौधरी ,वीरप्रकाश भाटिया दुःख सुख में हमेशा साथ खड़े रहे। लाली की बिटिया की शादी हो गई है। डॉ डेंग ,जीत और राकेश कारें बेचने में मशगूल हैं। नरवाना में सिर्फ तरसेम से बातचीत और मिलना जुलना होता है। बचपन का साथी राजेंदर शर्मा न जाने कहाँ गायब हो गया है। एक अरसा हो गया है राजेन्द्र उर्फ़ पप्पू से मिले।
दलजिंदर भाई ने एक हिंदी film सावी में काम कर लिया है। पिछले दिनों बातचीत हुई थी। फिल्म जल्द release होने वाली है। शुभकामनायें। पुनीत जालंधर से शिमला दूरदर्शन का हेड हो गया है। दलजिंदर और पुनीत दोनों ने इकट्ठे वर्ष १९८८ में इंडियन थिएटर किया था।
यशिका बिटिया कॉलेज में पहले वर्ष में ही क्लास REPRESENTATIVE चुनी गई।याशिका कॉलेज में मिस elegant भी चुनी गई।रजनी जो हमारे स्कूल में टीचर थी और विदेश चली गई थी। उससे अक्सर बातचीत हो जाया करती थी। पिछली बार जब वो इंडिया आई थी तो स्कूल में सब से मिलने आई थी। इस बार कब आई और कब चली गई पता ही नहीं चला।
जालंधर से डॉ अजय शर्मा व धर्मेंदर से बातचीत होती रही। दोनों अख़बार से जुड़े हैं। डॉ शर्मा साहित्य क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान रखते हैं।अमितोष नागपाल का नाटक "पिया बहरूपिया "देश विदेश में धूम मचा रहा है। आज कल उनका ग्रुप ब्राज़ील में है। 
मोहिन्दर की फिल्म "एक था भुजंग "  C F S I से approve  हो गई है। सेंसर बोर्ड से भी पास हो गई है।
मई -जून 2015 में रिलीज़ करने का प्रोग्राम है।  सब को इस फिल्म का बेसब्री से इंतज़ार है। एडवोकेट साहनी ने तो फिल्म का ज़िक्र करना ही बंद कर दिया है।उनका इस फिल्म में एक किरदार है।
पिछली बार जब मोहिन्दर मुंबई से करनाल आया तो उनके घर संत अमरीक देव के दर्शन करने का मौका भी मिला।
संत अमरीक देव निर्मल अनुयायी हैं ,उन्होंने अपनी करोड़ों की सम्पति निर्मल धाम को दान कर दी है और वे करनाल में वृद्ध आश्रम और ज़रूरतमंद बच्चों के लिए फ्री शिक्षा के लिए स्कूल चला रहे हैं। यहाँ लगभग 1500 बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। खूब बातें हुई उनसे। यहाँ ये बताना ज़रूरी है के वो कल्पना चावला के चाचा हैं।
अजब संजोग और भरपूर मस्ती। अम्बाला की तरफ से गुज़र रहा था ,इसे अजब संजोग ही कहें के फ़ोन पर बात हुई और सभी हो गए इकट्ठा सिहंपुर में। खूब धमाल मचाया सभी ने।
परिवार के  लोग जब इकठ्ठा होते हैं तो अच्छा लगता ही है। वैसे रिश्ते औपचारिकता भर ही रह गए हैं।
परिवर्तन का साल रहा 2014 लोगों ने पिछली सरकार से तंग आ कर भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत से चुना। नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने। रिजल्ट कार्ड आना अभी बाकी है।शेयर बाजार ने भी इस वर्ष नई  ऊंचाइयों को छुआ। पाकिस्तान में स्कूली बच्चों पर आतंकी हमले ने दहला कर रख दिया।
20 दिसंबर को भांजे बिन्नी की हैदराबाद में passing out parade में जाने का मौका मिला। वो Air Force में फ्लाइंग ऑफिसर हो गया है।
ज़बरदस्त अनुभव के साथ सभी गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं।बिन्नी के पिता , माँ ,बहन और भाई कन्नू व निशु भी साथ ही थे।

मस्ती भरी पलों में इन तीनों की फोटो क्लिक की। तीनों भाइयों ने खूब एन्जॉय किया।
Karan public school  में बरस-2014 कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। 28 दिसम्बर को annual function किया। डॉ मदन गुलाटी ने मुख्य अतिथि और डॉ अशोक मेहता ने गेस्ट ऑफ़ ऑनर के रूप में शिरकत की।
बच्चों ने अपनी परफॉरमेंस से धमाल मचा दिया।
बच्चों की मेहनत लग्न और teachers की प्रतिबद्धता ने  प्रभावित किया।
Art  & Craft  टीचर उमीशा ,भंडारी मैडम की बिटिया आशिना ,science टीचर मोना मलिक और नवज्योत कौर का विशेष धन्यवाद। इन्होंने बच्चों में छिपी प्रतिभा को समझने और तराशने का काम किया। बरस 2014 ही नहीं बल्कि जीवन के 10 बरस स्कूल में कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। जीवन यूं ही चलता रहे और समय का पता ही न चले इस से बढ़ी ख़ुशी क्या हो सकती है ! अधिकतर समय स्कूल में ही बीतता है इस लिए अपने साथियों का ज़िक्र ज़रूर करना चाहूँगा। ऐसे तो सभी टीचर्स ने बढ़िया काम किया लेकिन स्कूल में मेरे साथ नवज्योत कौर ,सुनीता भंडारी ,मंजू ने खूब लग्न और मेहनत से काम किया। इस साल उनके काम करने के स्टाइल में गजब का बदलाव देखने को मिला। मोना मलिक ,जया ,रेनू ,पूजा ,निर्मला ,ममता और पूनम की भागेदारी भी सराहनीय रही।दिनेश ,बाबा ,नरेश ,सतीश और मानसिहं ने भी भरपूर सहयोग दिया।
सर्दी की वजह से स्कूल में छुट्टियां हो गई हैं। 1 जनवरी को स्कूल में इकट्ठा हो कर अध्यापकों ने सभी बच्चों के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की।
इसी बरस अपने जीवन की Half  Century भी पूरी कर ली।http://krishankumarmalik.blogspot.in/2014/11/a-letterek-chithee-part-25.html  जीवन से कोई शिकवा नहीं ,जितना जिया भरपूर जिया।
 दुःख सुख ,लाभ हानि और जीवन मृत्यु हमारी रोज़मर्रा ज़िंदगी का हिस्सा हैं। 2014 बीत चुका है। पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो यही लगता है के आज पूरे विश्व में शांति और मानवता की ज़रुरत है। नया साल 2015 आरम्भ हो चुका है। आओ सब मिल कर पूरे विश्व कल्याण के लिए दुआ करें और इस के लिए सार्थक प्रयास भी करें ।
आप सब को पुनः नववर्ष २०१५ के लिए शुभकामनायें !