Saturday, 24 October 2015

राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )

                                                राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )
आज देश में जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। पशु मांस को लेकर जिस तरह आदमी का आदमी दुश्मन हुए जा रहा है। पुरस्कारों को लौटने का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी को लेकर जिस तरह से पंजाब थम सा गया है। विरोध करने के चक्कर में जिस तरह काली होली खेली जा रही है। जिस तरह आम आदमी के लिए रोज़मर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है।  दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों मुनासिब दाम नहीं मिल रहे। बॉर्डर पर पाकिस्तान जिस तरह गोलाबारी किए जा रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लिए जिस तरह असुरक्षा बढ़ती जा रही है। जिस तरह देश के अलग अलग कोनों से कमज़ोर वर्ग पर उत्पीड़न और अत्याचार के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। पढ़े -लिखे युवा वर्ग को जिस तरह रोज़गार या स्वरोज़गार  के लिए दर - ब -दर धूल फांकनी पड़ रही है । जहाँ शिक्षा का स्तर गिरने के समाचार हैं । जिस तरह अख़बार की सुर्खियां हत्याएं और बलात्कार बनती जा रही हैं।  हरियाणा में दलित परिवार के दो नन्हें बच्चों को जिस तरह ज़िंदा जला दिया गया है। उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
यहाँ मुझे बेर्टोल्ट ब्रेष्ट द्वारा कही वो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं जिसमें वो कहते हैं कि आज राजनीति को समझने  की ज़रुरत है , "सबसे जाहिल व्यक्ति वह है जो राजनीतिक रूप से जाहिल है। वह कुछ सुनता नहीं, कुछ देखता नहीं, राजनीतिक जीवन में कोई भाग नहीं लेता। लगता है उसे पता नहीं कि जीने का खर्च, सब्ज़ि‍यों की, आटे की, दवाओं की क़ीमत, किराया-भाड़ा, सब कुछ राजनीतिक फ़ैसलों पर निर्भर करता है। वह तो अपने राजनीतिक अज्ञान पर गर्व भी करता है, और सीना फुलाकर कहता है कि वह राजनीति से नफ़रत करता है। उस मूर्ख को पता नहीं कि राजनीति में उसकी ग़ैर-भागीदारी का ही नतीजा हैं वेश्या एँ, परित्यक्त बच्चे़, लुटेरे और इस सबसे बदतर, भ्रष्ट अफ़सर तथा शोषक बहुराष्ट्रींय कंपनियों के चाकर।"  
यदि आप बेर्टोल्ट  पर यकीन नहीं करते तो जल्दी से किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ लाओ जिसे नज़र उतारना या झाड़ फूँक आता हो । हो सकता है मेरे देश को किसी की नज़र लग गई हो ! जल्दी से इस की नज़र उतार लो भाई !

Friday, 9 October 2015

राम झूठ न बुलवाए ! (Part -4 )

                                                                राम झूठ न बुलवाए !(Part -4 )
                                                                  सब गोलमाल है ! 


  • राम झूठ न बुलवाए…! 
  • समझ नहीं आ रहा के अपनी बात कहाँ से शुरू करूं । पूरे देश में आह्कार मचा हुआ है। दिल्ली से सटे गांव दादरी में एक मुस्लिम इकल्लाहक की हत्या इस लिए कर दी गई क्यों की गांव में ये अफवाह फ़ैल गई थी के उनके घर में गौ मांस खाया जा रहा है । अफवाहें बहुत ख़तरनाक़ होती हैं ये हम सभी को समझना होगा !
  • गौ हत्या की अफवाह से गांव के ही लोगों द्वारा अपने ही गांव के मुस्लिम की हत्या ने पूरे भारत में ये असर डाला है कि हिन्दू मुस्लिम के बीच की खाई बढ़ती जा रही है। उतरप्रदेश में समाज पार्टी के मुखिया के क्षेत्र मैनपुरी में गाय मांस को लेकर अहिंसा भड़क गई है। हर जगह बस गौ मांस की चर्चा है। ऐसा लगता है मानो देश के मूल मुद्दे खत्म हो गए हों ! 
  •  बिहार के चुनावों ने इस मुद्दे  के लिए आग में घी का काम किया है। बिहार में सभी नेता कपड़ों से बाहर हो रहे हैं। अपने कपड़े डालने के बजाय दूसरों के कपड़े उतारने की कोशिश की जा रही है। कहीं लालू के बच्चों के जन्म तो कहीं पासवान की पत्नी के नाम पर पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। कोई शैतान तो कोई ब्रह्म पिशाच हो गया है। देश और देश की जनता जाए भाड़ में ! सत्ता हासिल करने के लिए अपुन कुछ भी करेगा !
  • राजनीति का स्तर इतना  "Cheap" हो गया है कि सब जगह मुद्दा "बीफ़" हो गया है !
  •  हद तो देखिए जम्मू कश्मीर में एक मुस्लिम नेता ने बीफ पार्टी ही दे डाली और विधान सभा में पिटाई हो गई। ऐसा लगने लगा है जैसे विधान पालिका मसलों का हल करने के बजाय अखाड़े हो गए हैं !
  • MNC Nestle की मैग्गी बंद हो चुकी है। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने अपनी मैग्गी लॉन्च कर दी  है। बाबा जी की कंपनी ने अपने प्रोडक्ट्स की सेल के लिए बिग बाज़ार से करार कर लिया है। "Make in India" कामयाब होता नज़र आ रहा है !
  • ग़ुलाम अली साहब के ग़ज़ल के दो प्रोग्राम (मुंबई और पुणे) cancel हो गए है। मुंबई में शिव सेना की धमकी के बाद ग़ुलाम अली के ये प्रोग्राम रद्द किए गए हैं । ख़बर है के दिसंबर में  दिल्ली में उनके शो का आयोजन किया जायगा।  कला और संस्कृति पर धार्मिक उन्माद का असर साफ़ दिखाई देने लगा है !
  • दिल्ली के मुख्य मंत्री केजरीवाल द्वारा आम पार्टी की सरकार में मंत्री आसिम अहमद खान को घूस मामले में बर्खास्त कर दिया गया है । इसी सरकार का एक मंत्री अपनी पत्नी को प्रताड़ित करने के मामले में हवालात काट कर ज़मानत पर चंद दिन पहले ही छूटा है । किस पर विश्वास करें किस पर न करें कुछ समझ नहीं आ रहा !
  •  मैं अपने शहर करनाल की बात ज़रूर करना चाहूंगा। पुलिस सवेंदनशील हो रही है ये दावे करनाल के स्मार्ट सिटी बनने के बाद लगातार किए जा रहे हैं। हर रोज़ स्कूल जाते हुए रास्ते में लड़कियों के एक स्कूल के सामने से गुज़रना होता है। इसके समीप कुछ गुंडा किस्म के लोगों का झुण्ड जमने लगा था।  सुबह स्कूल जाती लड़कियों पर ये लड़के फब्तियां कस्ते दिखाई दिए । मुझ से रहा नहीं गया। मैंने रास्ते में खड़ी एक पुलिस वैन को जब इस बारे बताया तो वहां तैनात दोनों पुलिस वालों  ने करीब 500 मीटर की दूरी पर जाने के लिए इस लिए मना कर दिया क्योँकि वो एरिया उनके अंडर नहीं आता था। पुलिस कब स्मार्ट होगी ये समझ से परे है !
  •  ज़रा संभल के देश के नेता सधे हुए कलाकार हैं। रंगीन सपने दिखाने में ये सिद्धहस्त हैं। आप को आपस में लड़वाने की कला इन्हें खूब आती है। चुनावों के बाद ये सब एक हो जाते हैं। एक दूसरे पर ज़हर उगलने वाले इन नेताओं को किसी भी नेता के बच्चों की शादी की album में गले मिलते हुए आप जब मर्ज़ी देख सकते हैं। 
  •  ध्यान रहे सब गोलमाल है !
  •  यहाँ मैं मीर तक़ी मीर साहेब का शेर आप की नज़र करना चाहूँगा : 
               यारो मुझे मुआफ़ रखो मैं नशे में हूँ 
               अब दो तो जाम ख़ाली ही दो मैं नशे में हूँ ...

Monday, 5 October 2015

A LETTER- EK CHITHEE(Part-37)

 अक्टूबर महीने की शुरुआत हो गई है। मौसम में थोड़ी ठंडक शुरू हो चुकी है । घर के पीछे आँगन में बिल्ली और उसके तीन "बलूँगड़ों " को धूप में बैठना अच्छा लगने लगा है ।
 पिछली बार 6 सितमबर को चिठ्ठी लिखी थी । अगस्त महीने में राखी का त्यौहार भी था । बहन भाई के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन पूरे भारत में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।  इस त्यौहार का मुझे तो बेसब्री से इंतज़ार रहता  है।  भागम् भाग भरे इस युग में भाई बहन और दूसरे रिश्तेदारों से मिलना हो जाता है । मण्ढौर मेरा ससुराल है । वहां भी जाना होता है ।हर साल 20 से 25 लोगों का जमावड़ा वहां अपने आप एक महोत्सव जैसा माहौल बना देता है ।
इस बार मेरी पत्नी की बुआ के घर भी जाना हुआ । वो अम्बाला जिला के गोली गांव में रहती हैं । सादगी और संयम से भरपूर इस परिवार में मेरी पत्नी के फूफा ,बुआ उनके बेटे ,पुत्रवधु ,पोते राजदीप और पोतीयों नवदीप और नीरज से मिलना हुआ ।
अच्छा लगा कि गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई के प्रति सीरियस होने लगे हैं ,बड़ी बिटिया ने अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिए है और दूसरी बेटी एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग कर रही है ।

अपनी चिठ्ठी में  कर्ण पब्लिक स्कूल का ज़िक्र न करूँ तो  है तो ऐसा लगता है जैसे कि कुछ छूट सा गया है। पिछले दो महीने स्कूल में बच्चों के लिए बहुत सारी एक्टिविटीज का आयोजन किया गया । मेहंदी ,रंगोली ,भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।
हिंदी व अध्यापक दिवस के साथ -साथ छोटे बच्चों के लिए "एप्पल डे " और "बनाना डे " मनाया गया जिसमें बच्चों को फलों के महत्व के बारे में बताया गया । 
27 सितम्बर को "निफा " व  " सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट " के बैनर तले शहीद -ए - आज़म "भगत सिंह " के जीवन पर आधारित एक लाइट एंड साउंड ड्रामा " A Misunderstood Hero " को निर्देशित करने का मौका मिला। Nifaa का सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थापित नाम है। इस संस्था के ' गिनीज़ Book ऑफ़ रिकार्ड्स " में तीन रिकार्ड्स दर्ज हैं। लम्बे अर्से के बाद एक अच्छी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। इस बार मैंने नाटक को ख़ूब मस्ती से किया। कुछ अच्छे लोगों के साथ काम करने का अनुभव लम्बे अरसे तक याद रहेगा। "नोनीत " ने नाटक की बहुत बढ़िया photos  क्लिक की। Noneet निफ़ा का कर्मठ सदस्य है। निफ़ा के सभी सदस्यों की कार्यशैली ने भी प्रभावित किया।

  इस शो में भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने भी शिरकत की। Nifaa के संचालक प्रितपाल सिंह पन्नू ने बताया कि इस नाटक के shows भारत व विदेश में भी किए जाएंगे।
पिछले दिनों  शहर में आयोजित एक कार्यक्रम "राहगिरी "में जाना हुआ। बहुत दिनों के बाद किसी कार्यक्रम जाना अच्छा लगा। कोई फॉर्मेलिटी नहीं ,कोई बंधन नहीं ! समीर भाई का  राहगिरी में जाने का प्रस्ताव था। मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि मैं अकेला कैसे जाऊँगा तो मैं भी तैयार हो लिया।
राहगिरी का "चौथा" शो था। हरियाणा के मुख्य मंत्री ने भी राहगिरी की। ज़बरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद भी वो आम आदमी की तरह मस्ती करते नज़र आये।  वो सभी जगह मस्त अंदाज़ में बच्चों के साथ photos खिंचवाते नज़र आए। 
राहगिरी का "छठ पर्व " सैक्टर -12  भी  मनाया जा चुका है। खुसफ़ुस ये भी है कि पुलिस फ़ोर्स के जवान इसे बिना बात की सिरदर्दी मान रहे हैं। ऊँची आवाज़ में बजते फ़िल्मी गानों का शोर जहाँ जहाँ होता है ,वहीँ पर भीड़ ज़्यादा नज़र आती है । यदि संचालक इस प्रोग्राम की रूपरेखा को थोड़ा व्यस्थित करने में कामयाब हो जाते हैं तो उभरते कलाकारों (गीत /संगीत /अभिनय /नृत्य ) के लिए ये मंच कारगर साबित हो सकता है।
एक लम्बे समय से बीमार चल रहे हमारे पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता जी प्रभू चरणों में लीन हो गए। हंसमुख व्यक्तित्व के धनी व कभी हार न मानने वाले मेहंदीरत्ता जी की उनके बेटे अनिल व बॉबी ने खूब सेवा की। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
 डेंगू ने शहर के लगभग सभी इलाकों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। सरकार डेंगू पर कंट्रोल करने में असफल रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले चांदी कूट रहे हैं। सरकार अपने चिर परिचित अंदाज़ में ये दावे कर रही है कि,"स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंतरण में है। "
नासा की एक रिपोर्ट में कहा  गया है कि 15 नवंबर से 30 नवंबर तक दिन में भी अँधेरा छाया रहेगा। अगर ऐसा होता है तो ये देखना अपने आप में एक अजब संजोग होगा।
चिट्ठियां लिखने का सिलसिला यूं ही बना रहे। यहाँ मैं " फैज़ अहमद फैज़ " साहब का शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
हम परवरिश - ए - लौह - ओ  - क़लम करते रहेंगे 
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे। 
दोस्तों फिर मिलते हैं ! शुभकामनाएं !


Sunday, 6 September 2015

A LETTER...EK CHITHEE (PART-36) राहगिरी !

राहगिरी !

दोस्तों चलो थोड़ी राहगिरी हो जाए। 
मेरा शहर करनाल स्मार्ट सिटी हो गया है। हाल ही में देश में कुल 98 शहरों के साथ मेरे शहर को भी स्मार्ट घोषित किया जाना सच में गर्व की बात है। शहर में दूसरे बड़े शहरों की तरह हर संडे को एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, कार्यक्रम का नाम है ----"राहगिरी ! "
नाम अच्छा है ! प्रयास अच्छा है ! कमाल तो यह है कि इस आयोजन का प्रारूप पुलिस विभाग और करनाल पुलिस मुखिया पंकज नैन द्वारा किया गया है। इस की शुरुआत 30 अगस्त 2015 को की गई । शहर से बाहर होने के कारण मैं इसकी opening में शिरकत नहीं कर पाया था। आज इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कल ही भाई समीर और राहुल के साथ तय हो गया था।
घूमते हुए जैसे ही मैं सब्ज़ी मंडी चौंक पर पहुंचा , सुबह - सुबह सड़कों पर लोगों के झुण्ड देख कर अच्छा लगा। बच्चे ,युवा ,महिलाएं व बुज़ुर्ग सभी जगह जगह पर होती activities का भरपूर लुत्फ़ उठा रहे थे। अधिकतर लोग सपरिवार बच्चों के साथ आए हुए थे। मुझे तो ये कार्यक्रम इस लिहाज़ से बहुत अच्छा लगा कि लोग sunday के दिन घर से निकल कर आए और ख़ूब मस्ती करते नज़र आए!
सब्ज़ी मंडी रोड ,कुंजपुरा रोड और Old G T Road  ब्लॉक कर दिए गए और रोज़मर्रा के कामों को बंद कर के मस्ती के लिए खोल दिए गए। कईं स्थानों पर बढ़े -बढ़े मंच बना दिए गए जहाँ डांस और गाने के कार्यक्रम चलते रहे।  सब्ज़ी मंडी के मुख्य चौंक पर गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा बैंड बजाया जा रहा था। उभरती प्रतिभाओं के लिए इस तरह के मंच कारगर हो सकते हैं !
करनाल के खेलकूद विभाग का सहयोग इस आयोजन में साफ़ नज़र आ रहा था। सड़क के बीचों बीच कहीं तलवार बाज़ी हो रही थी तो कहीं गतका खेल जा रहा था।
कुछ बच्चों ने तो सड़क के बीच में ही बैडमिंटन का नेट बाँध लिया था। नेहरू प्लेस की पार्किंग में गद्दे बिछाकर कबड्डी खेलते युवा सब को आकर्षित कर रहे थे। कहीं रस्सा कूदा जा रहा था तो कहीं एक बड़े से टेबल पर chess खेलते बच्चे इस बात से बेख़बर नज़र आ रहे थे कि उन्हें भी लोग देख रहे हैं। हाथों में तिरंगा लिए skating करते बच्चे सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।  कईं जगहों पर गानों के साथ डांस और कसरत करने का भरपूर फायदा उठाया जा रहा था। योगा class में भी लोगों की भागेदारी कोई कम नहीं थी। निःसंदेह इस से बच्चों का रुझान खेलों की और बढ़ेगा ,जोकि ज़रूरी भी है।
मानव सेवा संघ के संचालक प्रेम मूर्ति जी हमेशा की तरह लोगों को पानी पिलाने के लिए अपनी रेहड़ी पर कायम खड़े थे। मैं उनको काफी देर तक देखता रहा। गर्मी बढ़ चुकी थी लेकिन उनके पास पानी पीने वाला कोई नहीं आया।
शायद शहर के साथ लोग भी स्मार्ट हो गए हैं। सफाई और hygine के मायने समझने लगे हैं। मैं प्रेम मूर्ति जी की कार्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा बल्कि बस इतना कहना चाहता हूँ कि समय के
साथ -साथ कार्यप्रणाली और नई टेक्नोलॉजी को adopt कर लेना चाहिए। दूसरी सामाजिक संस्थाएं इस में अपना सहयोग दें तो समस्या का निपटारा हो सकता है !
"राहगिरी" में करनाल के प्रतिष्ठित समाज सेवियों ,राजनीतिज्ञों ,खिलाडियों ,कलाकारों ,रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों की भागेदारी देख कर मन गदगद हो गया। बहुत सारे पुराने मित्रों से इस बहाने मिलना भी हो गया। सोच रहा था मौज मस्ती के साथ साथ युवा क्रांति , सांस्कृतिक उत्थान , मेलजोल और सामयिक व गंभीर विषयों पर बहस के लिए भी इस मंच को  बखूबी प्रयोग किया जा सकता है। आखिरकार क्रांति इसी तरह ही तो आती हैं !
चप्पे चप्पे पर पुलिस मुस्तैद नज़र आ रही थी।
खुद करनाल पुलिस प्रमुख ने सपरिवार इस कार्यक्रम में शामिल होकर प्रोग्राम में चार चाँद लगा दिए।
मंच पर बच्चों के साथ नृत्य कर के उन्होंने जनता का मन जीत लिया। पुलिस अफसर ने जनता के बीच जाकर सेल्फ़ी और फोटो भी खिंचवाए। इस तरह जनता के मन से पुलिस का डर और खौफ तो दूर होगा ही बल्कि जनता और पुलिस के बीच की खाई को भी पाटा जा सकेगा !

यहाँ मैं आज ही के एक किस्से का ज़िक्र भी ज़रूर करना चाहूँगा। घर की तरफ वापिस चलने लगा तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति अपने बच्चों के साथ राहगिरी में शामिल होने के लिए अपनी मोटर साइकिल खड़ी कर रहा था। सहसा पीछे से एक आवाज़ आती है ," ओ ,यो आपणी मोटर साइकिल उर्रै न खड़ी कर्रै !" इस कर्कश आवाज़ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये आवाज़ एक पुलिस अफसर की थी जिसकी ड्यूटी बैरियर के तौर पर बांधी  गई रस्सी के एक कोने पर थी। मैं पुलिस वाले इस अफसर के समीप पहुँच चुका था जो एक छोर पर अपने दूसरे सहयोगी के साथ कुर्सी पर बैठा था। बात यहीं तक होती तो शायद मैं इस का ज़िक्र कतई न करता। इससे पहले कि वो आदमी संभल पाता पुलिस वाला किसी गुंडे की तरह अपने एक हवालदार की ओर इशारा करके बोला ,"यो मोटर साइकिल बाहर करवा साले की ! इन्हैं दीखता नहीं एड बड़ी रस्सी बांध कै बेठे हैं हम !" मेरी नज़र साथ खड़ी गाड़ी पर पड़ी जिस पर लिखा था ,"सुरक्षा ,सहयोग और सहायता !" 

पिछले दिनों एक आर्टिकल पढ़  रहा था। उसमें लिखा था की कोई भी शहर या देश तभी स्मार्ट बनता है जब वहां के लोग smart हो जाते हैं। जनता और कार्य पालिका आपसी सहयोग करते हैं , सौहार्द और प्रेमभाव से रहने के साथ एक दूसरे का सम्मान करते हैं !





अंत में आयोजकों को मेरी ओर से इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनायें !

Friday, 28 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE (Part-35)

                                                                     अगस्त नामा -2015  
दोस्तों जय हो !
  • सबसे पहले आप सब लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद। आप सोच रहे होंगे कि किस बात का धन्यवाद ? असल में मैं जो लिखता हूँ उसके पेज view लगभग 13000 से पर जा चुके हैं और 101  posts पब्लिश हो चुके हैं। कमाल की बात है की मेरी इन पोस्ट्स को भारत सहित अधिकतर विदेशों में पढ़ा जा रहा है। आप का प्रेम इसी तरह बना रहे और मैं अपनी डायरी इसी तरह लिखता रहूँ !

Dil-e-Dastan  ·  Posts  ›  Published (101 )


  •    आप सब को बता दूँ कि पिछले साल एक कहानी लिखी थी "स्कूल फीस"। उस कहानी पर शिमला दूरदर्शन द्वारा टेली फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। आज ही शिमला बात हुई और पता चला कि फिल्म की editing का काम चल रहा है। इस टेली फिल्म का का प्रसारण शीघ्र ही कर दिया जाएगा।
  •     पिछले दिनों धर्मेंदर जोशी से बातचीत हुई। जोशी इंग्लिश ट्रिब्यून में कईं सालों से कार्यरत थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उन्हें ये नौकरी छोड़नी पड़ी। ईमानदारी ,कर्मठता और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता का अगर यही इनाम है तो सच में ये बहुत कड़वा सत्य है। दस वर्ष पूर्व जब मैं भी पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ा हुआ था तो धर्मेंदर और मैने पानीपत में एक साथ काम किया था। प्राइवेट companies के शोषण और insecurity की हम अक्सर बात किया करते थे।
  •       जालंधर में सुनील जोशी जी ने अपनी बिटिया की शादी कर दी है। जोशी जी ने भी इंडियन थिएटर चंडीगढ़ से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। नव दम्पति को मेरी शुभ कामनायें व शुभ आशीष ।  
  •  1985 -87 में दयाल सिंह कॉलेज में मेरे साथ पढ़ने वाले प्रवेश गोयल से 28 साल बाद मिलना एक संयोग ही था। मेरे स्कूल में उसका  किसी कंपनी की गाड़ियों की सेल के सिलसिले में आना हुआ था। खूब बातचीत हुई। 
  •  एक सप्ताह पहले कॉलेज के ही एक संगी हरिंदर संधू से भी मुलाकात हो गई। 1983 -84  में हम साथ -साथ दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ते थे। संधू ने एयर फ़ोर्स ज्वाइन कर लिया था। आजकल वो सरसावा में पोस्टेड है। संधु की माता जी से भी मिलना हुआ। खूब बातें हुईं। 
  •  पुराने दोस्तों से लम्बे अरसे के बाद मिलना अच्छा लगा।
  • करनाल , निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में आयोजित एक वर्कशॉप में जाने का मौका मिला। ये स्कूल संत अमरीक देव  द्वारा चलाया जा रहा है। स्कूल के साथ यहाँ एक वृद्ध आश्रम भी चलाया जा रहा है। ख़ास बात ये है कि यहाँ करीब 3000 बच्चे बिल्कुल फ्री पढ़ाये जाते हैं ,फीस के नाम पर उनसे एक भी पैसा नहीं लिया जाता। यहाँ रहने वाले 400 वृद्धों की भी निःशुल्क सेवा की जाती है। यही नहीं सभी बच्चों को पुस्तकों का वितरण भी बिल्कुल फ्री किया जाता है। हमारे करनाल शहर के लिए ये बहुत गर्व की बात है। संत अमरीक देव जी को मेरा नमन। एक ब्लॉग में पहले भी लिखा था कि संत अमरीक देव उड़न पारी कल्पना चावला के uncle हैं। 
  • चंडीगढ़ पुलिस सच में गुंडों की तरह लगने लगी है।चंडीगढ़ में घुसते ही लगभग सभी चौंक पर पुलिस वालों को स्निफर डॉग्स की तरह गाड़ियों के आस पास सूंघते हुए उन्हें कोई भी देखेगा तो ऐसा लगेगा की यहाँ की पुलिस बहुत अलर्ट है। असल में ये लोग शिकार को ढूंढ रहे होते हैं। दूसरी स्टेट की गाड़ियों को ये पुलिस वाले ऐसे रोकते हैं मानो  सभी चोर या उग्रवादी दूसरी स्टेट्स में हैं। रोकने के बाद ये लोग गाड़ी में या कागज़ों में कोई न कोई कमी निकाल देते हैं। परेशानी से बचने के लिए गाड़ी वाले इन की जेब गर्म कर देते हैं। सहयोग और सुरक्षा के नाम पर इन  वर्दी वाले गुण्डों ने सच में आतंक मचाया हुआ है। पिछले दिनों मेरे बेटे को दो बार चंडीगढ़ जाना पड़ा और दोनी ही बार वो इन वर्दी वाले गुंडों का शिकार हुआ। 
  • माता -पिता की आँखों का सफल ऑपरेशन हो गया है। 
  • मेरे दोस्त समीर ने 4 अगस्त को अपनी शादी की 25 वीं सालगिरह धूम धाम से मनाई। इस समारोह में नज़दीकी दोस्त और सगे सम्बन्धी शामिल हुए। मैं भी परिवार सहित इस समारोह में शामिल हुआ। नीरू व समीर को इस ख़त के ज़रिए पुनः हार्दिक शुभकामनायें। सादगी और प्रेम से भरपूर ये प्रोग्राम हमेशा के लिए यादगार बन गया। इसी दिन समीर के पापा "सुन्दर पाल "जी का जन्म दिन भी था। उनके जन्म दिन को मनाना  "सोने पे सुहागे " की तरह हो गया।
  • स्कूल में बच्चों के साथ cultural ,educational ,literary और social प्रोग्राम में मेरी उपस्थिति रहती है। बच्चों के अंदर छिपी सृजनात्मकता को एक दिशा देने की ज़रुरत होती है। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे साथी अध्यापक बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने में बखूबी अपना काम  रहे हैं। स्कूल में आज़ादी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह लड़कियों ने तिरंगा झंडा फहराया। 
  • आप को बता दूँ के बिटिया याशिका अपने कॉलेज की Vice President चुनी गई है। उसकी इस उपलब्धि से हम सभी गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं। शुभकामनायें याशिका ! 
  • आज रक्षा बंधन है। आओ सब मिलकर इस शुभ अवसर पर सभी बहनों की रक्षा और सुरक्षा का प्रण लें। 
  • फिर मिलते हैं !  जय हिन्द !





Sunday, 23 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE(34)

                                                                         मन की बात 
दोस्तों ,
जय हिन्द !
15 अगस्त को पूरा देश आज़ादी के जश्न में डूबा रहा । पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल था । देश के हर कोने में नेता अभिनेता ,समाजसेवी ,अध्यापक ,प्रध्यापक ,व्यापारी और अधिकारी राष्ट्रिय झंडा फहराने में  मशग़ूल रहे। देश के प्रधान मंत्री ने भी लाल किले की प्राचीर से देश के नाम सन्देश दिया। टीवी channel भी
अपने -अपने ढंग से समाचार दिखाते रहे हैं। एक दिन के बाद अखबारों ने भी फोटो लगा कर अपने हिसाब से ख़बरें प्रकाशित कर दी।
इसी दिन बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से सीज़ फायर का उल्लंघन करते हुए भारत की तरफ गोले दागे जाते रहे। हालांकि सभी जानते हैं की भारत अलगाववादियों की बन्दर भबकियों से कतई डरने वाला नहीं है। परन्तु इस समस्या का कोई न कोई  हल तो निकालना ही होगा। दोनों देशों के बीच होने वाली हाई प्रोफाइल वार्ता भी रद्द हो गई है।
आज़ादी के दिन भारत की क्रिकेट टीम को श्रीलंका के हाथों करारी हार से क्रिकेट प्रेमी थोड़े शर्म सार हुए। लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल  की जीत ने लाज बचाने का काम किया। फाइनल में हार के बावजूद भी सायना विश्व रैंकिंग में नंबर वन बनी हुई है।
राजनीतिज्ञों ने ऐसा मकड़ जाल बनाया रखा है के जनता बेचारी परेशान है। क्या करें और क्या न करें। प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं और 70 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रहे हैं। बाज़ार में अरहर की दाल का भाव 160 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
ऐसा लगने लगा है कि क्रिकेट मैच के खिलाडियों की तरह राजनीतिज्ञ भी बारी बारी से अपनी पारी खेलते हैं। क्रिकेट मैच की तरह राजनीती में नेताओं की हार हो या जीत अपने आप को ठगा हुआ तो आम आदमी और दर्शक ही महसूस करता है। इनकी तो चित भी अपनी पट भी अपनी। 
 देश की आज़ादी को 68 साल हो गए हैं लेकिन समस्याएं जूं की तूं अपना मुहँ बाहे खड़ी  हैं। गरीबी ,बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य,भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों में सुधार और इन समस्यायों का हल जल्द से जल्द खोजना होगा।
आज़ादी के अगले ही दिन देश के प्रधान मंत्री मोदी  दुबई में पहुँच गए। अपने भाषणों और संवाद अदायगी से एक बार फिर वो मीडिया में छाए रहे।  ध्यान रहे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान उतरी क्षेत्रों में घनघोर बादल छा तो रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इस बार मानसून 20 % कम आंकी जा रही है। ये समझना होगा कि आम आदमी का पेट भाषणों से नहीं भरता। अब तो आम आदमी कहने भी लगा है कि मोदी के भाषण कहीं मॉनसून के बादलों की तरह बिन बरसे तो नहीं निकल जाएंगे !
बेशक़  "फ़िल्म अभी बाकी है " आज कल ये डायलॉग सोशल मीडिया की भाषा में वायरल हो गया है और आम जनता भी ये समझती है के 60 साल से खोदे गए गड्ढों को भरने में समय चाहिए लेकिन ये भी नहीं भूलना होगा कि गरीबी से लड़ता आम आदमी अब थक चुका है।
फ़िल्म से याद आया के 15 अगस्त 1975 को शोले फिल्म रिलीज़ हुई थी। 40 साल हो गए लेकिन ये फिल्म आज भी लोगों के दिलों में राज करती है।
मशहूर शायर साक़ी फ़ारूक़ी की ग़ज़ल का एक शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
नज़रें मिला के देख मनाज़िर की आग में , (मनाज़िर -  scenes /views )
असरार -ए -क़ायनात से पर्दा न कर अभी । (असरार -ए -क़ायनात -  secret of universe )
चलिए फिर मिलते हैं ! अगले ख़त तक के लिए रुख़सत चाहता हूँ !



Sunday, 26 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-33)

                                                           जुलाई नामा -2015 

दोस्तों नमस्कार !
आप सब तो जानते ही हैं कि मैं करनाल में कर्ण पब्लिक स्कूल में कार्यरत हूँ। लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे जान में जान आ गई हो। स्कूल में बच्चों के साथ असल मस्ती , दुनिया से बेखबर उनका भोलापन और चुलबुली शरारतें हर पल इक नई सीख दे जाती हैं।  स्कूल का दसवीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है।  इस बार भी आशा के अनुरूप रिजल्ट अच्छा रहा। मोहित ने दसवीं में 100 % marks लेकर एक मिसाल कायम कर दी।   इस के अलावा,मानसी ने 96 % marks हासिल किए। नमन ,करणवीर और रूचि दसवीं का इम्तिहान पास नहीं कर पाए। हार जीत जीवन का हिस्सा है और उम्मीद  है कि सभी बच्चे अपने जीवन के इम्तहान में ज़रूर कामयाब होंगे। यहाँ मैं आप को ये बता देना चाहता हूँ कि हमारे स्कूल में अधिकतर मेहनतकश लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे उन की आँखों में अपने बच्चों को लेकर बुने जाने वाले सपनों को नज़दीक से महसूस करने का मौका मिलता है। मेरी सदा यही कोशिश रहती है की बच्चे पढ़ लिखकर अपनी ज़िन्दगी की किताब खुद लिख सकें और स्कूल के सभी अध्यापक एक टीम की तरह बखूबी मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलते हैं।

 जून में करनाल में राज्य स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कर्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी इस में शिरकत की। जून की छुट्टियों में ही करनाल के निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में जाने का मौका मिला। मेरे गुरु व मेरे दोस्त मोहिन्दर के पिता डॉ मदन गुलाटी ने सभी आगंतुकों का खूब मान -सम्मान किया।
 अपनी इन चिट्ठियों के ज़रिए लगभग दो साल पहले लिखने का सिलसिला शुरू किया था। भला हो भाई मोहिन्दर प्रताप सिंह का जिसने हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहिन्दर ख़ुद एक लेखक है और मुंबई में एडवरटाइजिंग और फिल्म क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।  उसने बताया कि वो उसने एक पंजाबी फिल्म लिखी  र है जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है । अमितोष नागपाल और मोहिन्दर दोनों आज कल मिल कर काम कर रहे हैं और  Big Magic channel के लिए एक serial टेढ़ी मेढ़ी फैमिली लिख रहे हैं ,जिसका प्रसारण शुरू हो चुका है। अमितोष भी मुंबई फ़िल्मी दुनिया में अपना भाग्य आजमा रहा है।
 डॉ अजय शर्मा का ज़िक्र चला है तो बता दूँ कि उनके द्वारा दूरदर्शन( किसान  )के लिए लिखित सीरियल "आधारशिला " प्रसारण शुरू हो चुका है । इस सीरियल में डॉ शर्मा ने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना खाता खोल लिया है। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस सीरियल में मेरा पुराना साथी दलजिंदर सिंह मुख्य पात्र अभिनीत कर रहा है। दलजिंदर ने 1988 में चंडीगढ़ से इंडियन थिएटर किया था। दलजिंदर आजकल एक पंजाबी फिल्म "कप्तान   " की शूटिंग में व्यस्त है। दलजिंदर यह फिल्म Gipy Grewal  के साथ कर रहा है।
 डॉ शर्मा मेरे पुराने मित्र हैं और लेखन क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान है। आजकल दैनिक सवेरा  जालंधर (पंजाब ) में कार्यरत हैं। उनके साथ बातचीत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ के सुबह उठते ही उनसे बातचीत न हो तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ छूट सा गया है। दैनिक सवेरा में मेरी दो कहानियां -"स्कूल फीस " और "गर्म ख़ून " (चार किश्तों में ) के अलावा एक कविता -"उदास चेहरा "प्रकाशित हो गई। इस चिठ्ठी के माध्यम से मेरा डॉ शर्मा को दिली धन्यवाद।
हरियाणा में मानसून शुरू हो चूका है। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले एक हफ्ते से लगातार बरसात के कारण मौसम ख़ुशगवार और सुहाना हो गया है !
हालांकि बीच में humidity के कारण गड़बड़ हो जाती है। सैर का सिलसिला जारी रखने की कोशिश करता हूँ और घूमते -घूमते फोटो खींचने की लत लग गई है। 
पिछले ख़त में आपको बताना भूल गया था कि मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली रेनू सास बन गई है। उसकी बेटी की शादी में शिरकत की। शादी जिस सादगी से हुई वो सच में तारीफे क़ाबिल था। यहाँ उसका ज़िक्र करना इस लिए ज़रूरी क्योंकि आजकल की चमक -धमक वाली शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बहुत होती है। रेनू ने बताया कि लड़के वालों ने शादी में शगुन  के रूप में मात्र एक रुपया लिया। इस के अलावा कुछ भी लेने से लड़के वालों ने साफ़ इंकार कर दिया। लड़के वालों को मेरा सलाम !
  अमेरिका में भतीजे सिकंदर और उसकी पत्नि सुखमन को पुत्र प्राप्ति हुई है। सांगवान परिवार को मेरी ढेरों शुभ कामनाएं।
यहाँ मुझे निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद आ रहा है:
"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
रोते हुए किसी बच्चे को हंसाया जाए " 
 जय हो दोस्तों ! फिर मिलते हैं !