Monday, 5 October 2015

A LETTER- EK CHITHEE(Part-37)

 अक्टूबर महीने की शुरुआत हो गई है। मौसम में थोड़ी ठंडक शुरू हो चुकी है । घर के पीछे आँगन में बिल्ली और उसके तीन "बलूँगड़ों " को धूप में बैठना अच्छा लगने लगा है ।
 पिछली बार 6 सितमबर को चिठ्ठी लिखी थी । अगस्त महीने में राखी का त्यौहार भी था । बहन भाई के पवित्र रिश्ते का त्यौहार रक्षा बंधन पूरे भारत में पूरे धूमधाम से मनाया जाता है।  इस त्यौहार का मुझे तो बेसब्री से इंतज़ार रहता  है।  भागम् भाग भरे इस युग में भाई बहन और दूसरे रिश्तेदारों से मिलना हो जाता है । मण्ढौर मेरा ससुराल है । वहां भी जाना होता है ।हर साल 20 से 25 लोगों का जमावड़ा वहां अपने आप एक महोत्सव जैसा माहौल बना देता है ।
इस बार मेरी पत्नी की बुआ के घर भी जाना हुआ । वो अम्बाला जिला के गोली गांव में रहती हैं । सादगी और संयम से भरपूर इस परिवार में मेरी पत्नी के फूफा ,बुआ उनके बेटे ,पुत्रवधु ,पोते राजदीप और पोतीयों नवदीप और नीरज से मिलना हुआ ।
अच्छा लगा कि गांव के बच्चे अपनी पढ़ाई के प्रति सीरियस होने लगे हैं ,बड़ी बिटिया ने अपना ग्रेजुएशन कम्पलीट कर लिए है और दूसरी बेटी एयरोनॉटिक्स में इंजीनियरिंग कर रही है ।

अपनी चिठ्ठी में  कर्ण पब्लिक स्कूल का ज़िक्र न करूँ तो  है तो ऐसा लगता है जैसे कि कुछ छूट सा गया है। पिछले दो महीने स्कूल में बच्चों के लिए बहुत सारी एक्टिविटीज का आयोजन किया गया । मेहंदी ,रंगोली ,भाषण व कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया ।
हिंदी व अध्यापक दिवस के साथ -साथ छोटे बच्चों के लिए "एप्पल डे " और "बनाना डे " मनाया गया जिसमें बच्चों को फलों के महत्व के बारे में बताया गया । 
27 सितम्बर को "निफा " व  " सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट " के बैनर तले शहीद -ए - आज़म "भगत सिंह " के जीवन पर आधारित एक लाइट एंड साउंड ड्रामा " A Misunderstood Hero " को निर्देशित करने का मौका मिला। Nifaa का सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में स्थापित नाम है। इस संस्था के ' गिनीज़ Book ऑफ़ रिकार्ड्स " में तीन रिकार्ड्स दर्ज हैं। लम्बे अर्से के बाद एक अच्छी टीम के साथ काम करने का अवसर मिला। इस बार मैंने नाटक को ख़ूब मस्ती से किया। कुछ अच्छे लोगों के साथ काम करने का अनुभव लम्बे अरसे तक याद रहेगा। "नोनीत " ने नाटक की बहुत बढ़िया photos  क्लिक की। Noneet निफ़ा का कर्मठ सदस्य है। निफ़ा के सभी सदस्यों की कार्यशैली ने भी प्रभावित किया।

  इस शो में भगत सिंह के भतीजे अभय सिंह संधू ने भी शिरकत की। Nifaa के संचालक प्रितपाल सिंह पन्नू ने बताया कि इस नाटक के shows भारत व विदेश में भी किए जाएंगे।
पिछले दिनों  शहर में आयोजित एक कार्यक्रम "राहगिरी "में जाना हुआ। बहुत दिनों के बाद किसी कार्यक्रम जाना अच्छा लगा। कोई फॉर्मेलिटी नहीं ,कोई बंधन नहीं ! समीर भाई का  राहगिरी में जाने का प्रस्ताव था। मैंने मना करने की कोशिश की लेकिन जब उसने कहा कि मैं अकेला कैसे जाऊँगा तो मैं भी तैयार हो लिया।
राहगिरी का "चौथा" शो था। हरियाणा के मुख्य मंत्री ने भी राहगिरी की। ज़बरदस्त सिक्योरिटी के बावजूद भी वो आम आदमी की तरह मस्ती करते नज़र आये।  वो सभी जगह मस्त अंदाज़ में बच्चों के साथ photos खिंचवाते नज़र आए। 
राहगिरी का "छठ पर्व " सैक्टर -12  भी  मनाया जा चुका है। खुसफ़ुस ये भी है कि पुलिस फ़ोर्स के जवान इसे बिना बात की सिरदर्दी मान रहे हैं। ऊँची आवाज़ में बजते फ़िल्मी गानों का शोर जहाँ जहाँ होता है ,वहीँ पर भीड़ ज़्यादा नज़र आती है । यदि संचालक इस प्रोग्राम की रूपरेखा को थोड़ा व्यस्थित करने में कामयाब हो जाते हैं तो उभरते कलाकारों (गीत /संगीत /अभिनय /नृत्य ) के लिए ये मंच कारगर साबित हो सकता है।
एक लम्बे समय से बीमार चल रहे हमारे पारिवारिक मित्र अमृत लाल मेहंदीरत्ता जी प्रभू चरणों में लीन हो गए। हंसमुख व्यक्तित्व के धनी व कभी हार न मानने वाले मेहंदीरत्ता जी की उनके बेटे अनिल व बॉबी ने खूब सेवा की। भगवान उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
 डेंगू ने शहर के लगभग सभी इलाकों में अपनी पकड़ बनाई हुई है। सरकार डेंगू पर कंट्रोल करने में असफल रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले चांदी कूट रहे हैं। सरकार अपने चिर परिचित अंदाज़ में ये दावे कर रही है कि,"स्थिति चिंताजनक लेकिन नियंतरण में है। "
नासा की एक रिपोर्ट में कहा  गया है कि 15 नवंबर से 30 नवंबर तक दिन में भी अँधेरा छाया रहेगा। अगर ऐसा होता है तो ये देखना अपने आप में एक अजब संजोग होगा।
चिट्ठियां लिखने का सिलसिला यूं ही बना रहे। यहाँ मैं " फैज़ अहमद फैज़ " साहब का शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
हम परवरिश - ए - लौह - ओ  - क़लम करते रहेंगे 
जो दिल पे गुज़रती है रक़म करते रहेंगे। 
दोस्तों फिर मिलते हैं ! शुभकामनाएं !


Sunday, 6 September 2015

A LETTER...EK CHITHEE (PART-36) राहगिरी !

राहगिरी !

दोस्तों चलो थोड़ी राहगिरी हो जाए। 
मेरा शहर करनाल स्मार्ट सिटी हो गया है। हाल ही में देश में कुल 98 शहरों के साथ मेरे शहर को भी स्मार्ट घोषित किया जाना सच में गर्व की बात है। शहर में दूसरे बड़े शहरों की तरह हर संडे को एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, कार्यक्रम का नाम है ----"राहगिरी ! "
नाम अच्छा है ! प्रयास अच्छा है ! कमाल तो यह है कि इस आयोजन का प्रारूप पुलिस विभाग और करनाल पुलिस मुखिया पंकज नैन द्वारा किया गया है। इस की शुरुआत 30 अगस्त 2015 को की गई । शहर से बाहर होने के कारण मैं इसकी opening में शिरकत नहीं कर पाया था। आज इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कल ही भाई समीर और राहुल के साथ तय हो गया था।
घूमते हुए जैसे ही मैं सब्ज़ी मंडी चौंक पर पहुंचा , सुबह - सुबह सड़कों पर लोगों के झुण्ड देख कर अच्छा लगा। बच्चे ,युवा ,महिलाएं व बुज़ुर्ग सभी जगह जगह पर होती activities का भरपूर लुत्फ़ उठा रहे थे। अधिकतर लोग सपरिवार बच्चों के साथ आए हुए थे। मुझे तो ये कार्यक्रम इस लिहाज़ से बहुत अच्छा लगा कि लोग sunday के दिन घर से निकल कर आए और ख़ूब मस्ती करते नज़र आए!
सब्ज़ी मंडी रोड ,कुंजपुरा रोड और Old G T Road  ब्लॉक कर दिए गए और रोज़मर्रा के कामों को बंद कर के मस्ती के लिए खोल दिए गए। कईं स्थानों पर बढ़े -बढ़े मंच बना दिए गए जहाँ डांस और गाने के कार्यक्रम चलते रहे।  सब्ज़ी मंडी के मुख्य चौंक पर गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा बैंड बजाया जा रहा था। उभरती प्रतिभाओं के लिए इस तरह के मंच कारगर हो सकते हैं !
करनाल के खेलकूद विभाग का सहयोग इस आयोजन में साफ़ नज़र आ रहा था। सड़क के बीचों बीच कहीं तलवार बाज़ी हो रही थी तो कहीं गतका खेल जा रहा था।
कुछ बच्चों ने तो सड़क के बीच में ही बैडमिंटन का नेट बाँध लिया था। नेहरू प्लेस की पार्किंग में गद्दे बिछाकर कबड्डी खेलते युवा सब को आकर्षित कर रहे थे। कहीं रस्सा कूदा जा रहा था तो कहीं एक बड़े से टेबल पर chess खेलते बच्चे इस बात से बेख़बर नज़र आ रहे थे कि उन्हें भी लोग देख रहे हैं। हाथों में तिरंगा लिए skating करते बच्चे सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।  कईं जगहों पर गानों के साथ डांस और कसरत करने का भरपूर फायदा उठाया जा रहा था। योगा class में भी लोगों की भागेदारी कोई कम नहीं थी। निःसंदेह इस से बच्चों का रुझान खेलों की और बढ़ेगा ,जोकि ज़रूरी भी है।
मानव सेवा संघ के संचालक प्रेम मूर्ति जी हमेशा की तरह लोगों को पानी पिलाने के लिए अपनी रेहड़ी पर कायम खड़े थे। मैं उनको काफी देर तक देखता रहा। गर्मी बढ़ चुकी थी लेकिन उनके पास पानी पीने वाला कोई नहीं आया।
शायद शहर के साथ लोग भी स्मार्ट हो गए हैं। सफाई और hygine के मायने समझने लगे हैं। मैं प्रेम मूर्ति जी की कार्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा बल्कि बस इतना कहना चाहता हूँ कि समय के
साथ -साथ कार्यप्रणाली और नई टेक्नोलॉजी को adopt कर लेना चाहिए। दूसरी सामाजिक संस्थाएं इस में अपना सहयोग दें तो समस्या का निपटारा हो सकता है !
"राहगिरी" में करनाल के प्रतिष्ठित समाज सेवियों ,राजनीतिज्ञों ,खिलाडियों ,कलाकारों ,रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों की भागेदारी देख कर मन गदगद हो गया। बहुत सारे पुराने मित्रों से इस बहाने मिलना भी हो गया। सोच रहा था मौज मस्ती के साथ साथ युवा क्रांति , सांस्कृतिक उत्थान , मेलजोल और सामयिक व गंभीर विषयों पर बहस के लिए भी इस मंच को  बखूबी प्रयोग किया जा सकता है। आखिरकार क्रांति इसी तरह ही तो आती हैं !
चप्पे चप्पे पर पुलिस मुस्तैद नज़र आ रही थी।
खुद करनाल पुलिस प्रमुख ने सपरिवार इस कार्यक्रम में शामिल होकर प्रोग्राम में चार चाँद लगा दिए।
मंच पर बच्चों के साथ नृत्य कर के उन्होंने जनता का मन जीत लिया। पुलिस अफसर ने जनता के बीच जाकर सेल्फ़ी और फोटो भी खिंचवाए। इस तरह जनता के मन से पुलिस का डर और खौफ तो दूर होगा ही बल्कि जनता और पुलिस के बीच की खाई को भी पाटा जा सकेगा !

यहाँ मैं आज ही के एक किस्से का ज़िक्र भी ज़रूर करना चाहूँगा। घर की तरफ वापिस चलने लगा तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति अपने बच्चों के साथ राहगिरी में शामिल होने के लिए अपनी मोटर साइकिल खड़ी कर रहा था। सहसा पीछे से एक आवाज़ आती है ," ओ ,यो आपणी मोटर साइकिल उर्रै न खड़ी कर्रै !" इस कर्कश आवाज़ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये आवाज़ एक पुलिस अफसर की थी जिसकी ड्यूटी बैरियर के तौर पर बांधी  गई रस्सी के एक कोने पर थी। मैं पुलिस वाले इस अफसर के समीप पहुँच चुका था जो एक छोर पर अपने दूसरे सहयोगी के साथ कुर्सी पर बैठा था। बात यहीं तक होती तो शायद मैं इस का ज़िक्र कतई न करता। इससे पहले कि वो आदमी संभल पाता पुलिस वाला किसी गुंडे की तरह अपने एक हवालदार की ओर इशारा करके बोला ,"यो मोटर साइकिल बाहर करवा साले की ! इन्हैं दीखता नहीं एड बड़ी रस्सी बांध कै बेठे हैं हम !" मेरी नज़र साथ खड़ी गाड़ी पर पड़ी जिस पर लिखा था ,"सुरक्षा ,सहयोग और सहायता !" 

पिछले दिनों एक आर्टिकल पढ़  रहा था। उसमें लिखा था की कोई भी शहर या देश तभी स्मार्ट बनता है जब वहां के लोग smart हो जाते हैं। जनता और कार्य पालिका आपसी सहयोग करते हैं , सौहार्द और प्रेमभाव से रहने के साथ एक दूसरे का सम्मान करते हैं !





अंत में आयोजकों को मेरी ओर से इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनायें !

Friday, 28 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE (Part-35)

                                                                     अगस्त नामा -2015  
दोस्तों जय हो !
  • सबसे पहले आप सब लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद। आप सोच रहे होंगे कि किस बात का धन्यवाद ? असल में मैं जो लिखता हूँ उसके पेज view लगभग 13000 से पर जा चुके हैं और 101  posts पब्लिश हो चुके हैं। कमाल की बात है की मेरी इन पोस्ट्स को भारत सहित अधिकतर विदेशों में पढ़ा जा रहा है। आप का प्रेम इसी तरह बना रहे और मैं अपनी डायरी इसी तरह लिखता रहूँ !

Dil-e-Dastan  ·  Posts  ›  Published (101 )


  •    आप सब को बता दूँ कि पिछले साल एक कहानी लिखी थी "स्कूल फीस"। उस कहानी पर शिमला दूरदर्शन द्वारा टेली फिल्म का निर्माण किया जा रहा है। आज ही शिमला बात हुई और पता चला कि फिल्म की editing का काम चल रहा है। इस टेली फिल्म का का प्रसारण शीघ्र ही कर दिया जाएगा।
  •     पिछले दिनों धर्मेंदर जोशी से बातचीत हुई। जोशी इंग्लिश ट्रिब्यून में कईं सालों से कार्यरत थे। न जाने ऐसा क्या हुआ कि उन्हें ये नौकरी छोड़नी पड़ी। ईमानदारी ,कर्मठता और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता का अगर यही इनाम है तो सच में ये बहुत कड़वा सत्य है। दस वर्ष पूर्व जब मैं भी पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़ा हुआ था तो धर्मेंदर और मैने पानीपत में एक साथ काम किया था। प्राइवेट companies के शोषण और insecurity की हम अक्सर बात किया करते थे।
  •       जालंधर में सुनील जोशी जी ने अपनी बिटिया की शादी कर दी है। जोशी जी ने भी इंडियन थिएटर चंडीगढ़ से पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। नव दम्पति को मेरी शुभ कामनायें व शुभ आशीष ।  
  •  1985 -87 में दयाल सिंह कॉलेज में मेरे साथ पढ़ने वाले प्रवेश गोयल से 28 साल बाद मिलना एक संयोग ही था। मेरे स्कूल में उसका  किसी कंपनी की गाड़ियों की सेल के सिलसिले में आना हुआ था। खूब बातचीत हुई। 
  •  एक सप्ताह पहले कॉलेज के ही एक संगी हरिंदर संधू से भी मुलाकात हो गई। 1983 -84  में हम साथ -साथ दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ते थे। संधू ने एयर फ़ोर्स ज्वाइन कर लिया था। आजकल वो सरसावा में पोस्टेड है। संधु की माता जी से भी मिलना हुआ। खूब बातें हुईं। 
  •  पुराने दोस्तों से लम्बे अरसे के बाद मिलना अच्छा लगा।
  • करनाल , निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में आयोजित एक वर्कशॉप में जाने का मौका मिला। ये स्कूल संत अमरीक देव  द्वारा चलाया जा रहा है। स्कूल के साथ यहाँ एक वृद्ध आश्रम भी चलाया जा रहा है। ख़ास बात ये है कि यहाँ करीब 3000 बच्चे बिल्कुल फ्री पढ़ाये जाते हैं ,फीस के नाम पर उनसे एक भी पैसा नहीं लिया जाता। यहाँ रहने वाले 400 वृद्धों की भी निःशुल्क सेवा की जाती है। यही नहीं सभी बच्चों को पुस्तकों का वितरण भी बिल्कुल फ्री किया जाता है। हमारे करनाल शहर के लिए ये बहुत गर्व की बात है। संत अमरीक देव जी को मेरा नमन। एक ब्लॉग में पहले भी लिखा था कि संत अमरीक देव उड़न पारी कल्पना चावला के uncle हैं। 
  • चंडीगढ़ पुलिस सच में गुंडों की तरह लगने लगी है।चंडीगढ़ में घुसते ही लगभग सभी चौंक पर पुलिस वालों को स्निफर डॉग्स की तरह गाड़ियों के आस पास सूंघते हुए उन्हें कोई भी देखेगा तो ऐसा लगेगा की यहाँ की पुलिस बहुत अलर्ट है। असल में ये लोग शिकार को ढूंढ रहे होते हैं। दूसरी स्टेट की गाड़ियों को ये पुलिस वाले ऐसे रोकते हैं मानो  सभी चोर या उग्रवादी दूसरी स्टेट्स में हैं। रोकने के बाद ये लोग गाड़ी में या कागज़ों में कोई न कोई कमी निकाल देते हैं। परेशानी से बचने के लिए गाड़ी वाले इन की जेब गर्म कर देते हैं। सहयोग और सुरक्षा के नाम पर इन  वर्दी वाले गुण्डों ने सच में आतंक मचाया हुआ है। पिछले दिनों मेरे बेटे को दो बार चंडीगढ़ जाना पड़ा और दोनी ही बार वो इन वर्दी वाले गुंडों का शिकार हुआ। 
  • माता -पिता की आँखों का सफल ऑपरेशन हो गया है। 
  • मेरे दोस्त समीर ने 4 अगस्त को अपनी शादी की 25 वीं सालगिरह धूम धाम से मनाई। इस समारोह में नज़दीकी दोस्त और सगे सम्बन्धी शामिल हुए। मैं भी परिवार सहित इस समारोह में शामिल हुआ। नीरू व समीर को इस ख़त के ज़रिए पुनः हार्दिक शुभकामनायें। सादगी और प्रेम से भरपूर ये प्रोग्राम हमेशा के लिए यादगार बन गया। इसी दिन समीर के पापा "सुन्दर पाल "जी का जन्म दिन भी था। उनके जन्म दिन को मनाना  "सोने पे सुहागे " की तरह हो गया।
  • स्कूल में बच्चों के साथ cultural ,educational ,literary और social प्रोग्राम में मेरी उपस्थिति रहती है। बच्चों के अंदर छिपी सृजनात्मकता को एक दिशा देने की ज़रुरत होती है। मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे साथी अध्यापक बच्चों में छिपी प्रतिभा को निखारने में बखूबी अपना काम  रहे हैं। स्कूल में आज़ादी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर हर वर्ष की तरह लड़कियों ने तिरंगा झंडा फहराया। 
  • आप को बता दूँ के बिटिया याशिका अपने कॉलेज की Vice President चुनी गई है। उसकी इस उपलब्धि से हम सभी गर्वान्वित महसूस कर रहे हैं। शुभकामनायें याशिका ! 
  • आज रक्षा बंधन है। आओ सब मिलकर इस शुभ अवसर पर सभी बहनों की रक्षा और सुरक्षा का प्रण लें। 
  • फिर मिलते हैं !  जय हिन्द !





Sunday, 23 August 2015

A LETTER...EK CHITHEE(34)

                                                                         मन की बात 
दोस्तों ,
जय हिन्द !
15 अगस्त को पूरा देश आज़ादी के जश्न में डूबा रहा । पूरे देश में उत्सव जैसा माहौल था । देश के हर कोने में नेता अभिनेता ,समाजसेवी ,अध्यापक ,प्रध्यापक ,व्यापारी और अधिकारी राष्ट्रिय झंडा फहराने में  मशग़ूल रहे। देश के प्रधान मंत्री ने भी लाल किले की प्राचीर से देश के नाम सन्देश दिया। टीवी channel भी
अपने -अपने ढंग से समाचार दिखाते रहे हैं। एक दिन के बाद अखबारों ने भी फोटो लगा कर अपने हिसाब से ख़बरें प्रकाशित कर दी।
इसी दिन बॉर्डर पर पाकिस्तान की ओर से सीज़ फायर का उल्लंघन करते हुए भारत की तरफ गोले दागे जाते रहे। हालांकि सभी जानते हैं की भारत अलगाववादियों की बन्दर भबकियों से कतई डरने वाला नहीं है। परन्तु इस समस्या का कोई न कोई  हल तो निकालना ही होगा। दोनों देशों के बीच होने वाली हाई प्रोफाइल वार्ता भी रद्द हो गई है।
आज़ादी के दिन भारत की क्रिकेट टीम को श्रीलंका के हाथों करारी हार से क्रिकेट प्रेमी थोड़े शर्म सार हुए। लेकिन वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में सायना नेहवाल  की जीत ने लाज बचाने का काम किया। फाइनल में हार के बावजूद भी सायना विश्व रैंकिंग में नंबर वन बनी हुई है।
राजनीतिज्ञों ने ऐसा मकड़ जाल बनाया रखा है के जनता बेचारी परेशान है। क्या करें और क्या न करें। प्याज के दाम आसमान छू रहे हैं और 70 से 100 रूपए प्रति किलो बिक रहे हैं। बाज़ार में अरहर की दाल का भाव 160 रूपए प्रति किलो बताया जा रहा है।
ऐसा लगने लगा है कि क्रिकेट मैच के खिलाडियों की तरह राजनीतिज्ञ भी बारी बारी से अपनी पारी खेलते हैं। क्रिकेट मैच की तरह राजनीती में नेताओं की हार हो या जीत अपने आप को ठगा हुआ तो आम आदमी और दर्शक ही महसूस करता है। इनकी तो चित भी अपनी पट भी अपनी। 
 देश की आज़ादी को 68 साल हो गए हैं लेकिन समस्याएं जूं की तूं अपना मुहँ बाहे खड़ी  हैं। गरीबी ,बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य,भ्रष्टाचार और सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्यायों में सुधार और इन समस्यायों का हल जल्द से जल्द खोजना होगा।
आज़ादी के अगले ही दिन देश के प्रधान मंत्री मोदी  दुबई में पहुँच गए। अपने भाषणों और संवाद अदायगी से एक बार फिर वो मीडिया में छाए रहे।  ध्यान रहे कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। कृषि प्रधान उतरी क्षेत्रों में घनघोर बादल छा तो रहे हैं लेकिन बरस नहीं रहे हैं। इस बार मानसून 20 % कम आंकी जा रही है। ये समझना होगा कि आम आदमी का पेट भाषणों से नहीं भरता। अब तो आम आदमी कहने भी लगा है कि मोदी के भाषण कहीं मॉनसून के बादलों की तरह बिन बरसे तो नहीं निकल जाएंगे !
बेशक़  "फ़िल्म अभी बाकी है " आज कल ये डायलॉग सोशल मीडिया की भाषा में वायरल हो गया है और आम जनता भी ये समझती है के 60 साल से खोदे गए गड्ढों को भरने में समय चाहिए लेकिन ये भी नहीं भूलना होगा कि गरीबी से लड़ता आम आदमी अब थक चुका है।
फ़िल्म से याद आया के 15 अगस्त 1975 को शोले फिल्म रिलीज़ हुई थी। 40 साल हो गए लेकिन ये फिल्म आज भी लोगों के दिलों में राज करती है।
मशहूर शायर साक़ी फ़ारूक़ी की ग़ज़ल का एक शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
नज़रें मिला के देख मनाज़िर की आग में , (मनाज़िर -  scenes /views )
असरार -ए -क़ायनात से पर्दा न कर अभी । (असरार -ए -क़ायनात -  secret of universe )
चलिए फिर मिलते हैं ! अगले ख़त तक के लिए रुख़सत चाहता हूँ !



Sunday, 26 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-33)

                                                           जुलाई नामा -2015 

दोस्तों नमस्कार !
आप सब तो जानते ही हैं कि मैं करनाल में कर्ण पब्लिक स्कूल में कार्यरत हूँ। लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे जान में जान आ गई हो। स्कूल में बच्चों के साथ असल मस्ती , दुनिया से बेखबर उनका भोलापन और चुलबुली शरारतें हर पल इक नई सीख दे जाती हैं।  स्कूल का दसवीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है।  इस बार भी आशा के अनुरूप रिजल्ट अच्छा रहा। मोहित ने दसवीं में 100 % marks लेकर एक मिसाल कायम कर दी।   इस के अलावा,मानसी ने 96 % marks हासिल किए। नमन ,करणवीर और रूचि दसवीं का इम्तिहान पास नहीं कर पाए। हार जीत जीवन का हिस्सा है और उम्मीद  है कि सभी बच्चे अपने जीवन के इम्तहान में ज़रूर कामयाब होंगे। यहाँ मैं आप को ये बता देना चाहता हूँ कि हमारे स्कूल में अधिकतर मेहनतकश लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे उन की आँखों में अपने बच्चों को लेकर बुने जाने वाले सपनों को नज़दीक से महसूस करने का मौका मिलता है। मेरी सदा यही कोशिश रहती है की बच्चे पढ़ लिखकर अपनी ज़िन्दगी की किताब खुद लिख सकें और स्कूल के सभी अध्यापक एक टीम की तरह बखूबी मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलते हैं।

 जून में करनाल में राज्य स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कर्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी इस में शिरकत की। जून की छुट्टियों में ही करनाल के निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में जाने का मौका मिला। मेरे गुरु व मेरे दोस्त मोहिन्दर के पिता डॉ मदन गुलाटी ने सभी आगंतुकों का खूब मान -सम्मान किया।
 अपनी इन चिट्ठियों के ज़रिए लगभग दो साल पहले लिखने का सिलसिला शुरू किया था। भला हो भाई मोहिन्दर प्रताप सिंह का जिसने हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहिन्दर ख़ुद एक लेखक है और मुंबई में एडवरटाइजिंग और फिल्म क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।  उसने बताया कि वो उसने एक पंजाबी फिल्म लिखी  र है जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है । अमितोष नागपाल और मोहिन्दर दोनों आज कल मिल कर काम कर रहे हैं और  Big Magic channel के लिए एक serial टेढ़ी मेढ़ी फैमिली लिख रहे हैं ,जिसका प्रसारण शुरू हो चुका है। अमितोष भी मुंबई फ़िल्मी दुनिया में अपना भाग्य आजमा रहा है।
 डॉ अजय शर्मा का ज़िक्र चला है तो बता दूँ कि उनके द्वारा दूरदर्शन( किसान  )के लिए लिखित सीरियल "आधारशिला " प्रसारण शुरू हो चुका है । इस सीरियल में डॉ शर्मा ने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना खाता खोल लिया है। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस सीरियल में मेरा पुराना साथी दलजिंदर सिंह मुख्य पात्र अभिनीत कर रहा है। दलजिंदर ने 1988 में चंडीगढ़ से इंडियन थिएटर किया था। दलजिंदर आजकल एक पंजाबी फिल्म "कप्तान   " की शूटिंग में व्यस्त है। दलजिंदर यह फिल्म Gipy Grewal  के साथ कर रहा है।
 डॉ शर्मा मेरे पुराने मित्र हैं और लेखन क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान है। आजकल दैनिक सवेरा  जालंधर (पंजाब ) में कार्यरत हैं। उनके साथ बातचीत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ के सुबह उठते ही उनसे बातचीत न हो तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ छूट सा गया है। दैनिक सवेरा में मेरी दो कहानियां -"स्कूल फीस " और "गर्म ख़ून " (चार किश्तों में ) के अलावा एक कविता -"उदास चेहरा "प्रकाशित हो गई। इस चिठ्ठी के माध्यम से मेरा डॉ शर्मा को दिली धन्यवाद।
हरियाणा में मानसून शुरू हो चूका है। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले एक हफ्ते से लगातार बरसात के कारण मौसम ख़ुशगवार और सुहाना हो गया है !
हालांकि बीच में humidity के कारण गड़बड़ हो जाती है। सैर का सिलसिला जारी रखने की कोशिश करता हूँ और घूमते -घूमते फोटो खींचने की लत लग गई है। 
पिछले ख़त में आपको बताना भूल गया था कि मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली रेनू सास बन गई है। उसकी बेटी की शादी में शिरकत की। शादी जिस सादगी से हुई वो सच में तारीफे क़ाबिल था। यहाँ उसका ज़िक्र करना इस लिए ज़रूरी क्योंकि आजकल की चमक -धमक वाली शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बहुत होती है। रेनू ने बताया कि लड़के वालों ने शादी में शगुन  के रूप में मात्र एक रुपया लिया। इस के अलावा कुछ भी लेने से लड़के वालों ने साफ़ इंकार कर दिया। लड़के वालों को मेरा सलाम !
  अमेरिका में भतीजे सिकंदर और उसकी पत्नि सुखमन को पुत्र प्राप्ति हुई है। सांगवान परिवार को मेरी ढेरों शुभ कामनाएं।
यहाँ मुझे निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद आ रहा है:
"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
रोते हुए किसी बच्चे को हंसाया जाए " 
 जय हो दोस्तों ! फिर मिलते हैं !

Sunday, 19 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-32)

                                                                    जून -2015
दोस्तों नमस्कार !
स्कूलों में छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं । गर्मियों की इन छुट्टियों में ज़्यादातर दिनों में मौसम सुहाना ही बना रहा। बच्चों से 6 जुलाई को  मिलना हुआ  , बच्चों से दूर एक महीने भर की छुट्टियां बीताना काफी मुश्किल भरा रहा। स्कूल खुलने के साथ सच में ऐसा लगा मानो बगिया फूलों से खिल उठी हो।


बेटे कशिश ने मैकेनिकल में B.Tech कर लिया है। कईं जगह apply किया लेकिन किसी एक जगह से भी कॉल नहीं आई।  इस बात से पता चलता है की देश में रोज़गार  की कितनी समस्या है। दुनिया से बेखबर कशिश आज कल एक पुरानी गाड़ी को modify करने में मशगूल है।
उसका कहना है कि जीवन में वही काम करना चाहिए जो आप को अच्छा लगता है। कशिश का उत्साह और passion देखते बनता है ,मेरी शुभकामनायें।

लम्बे समय से जिस  इंतज़ार था वो घड़ी भी आ ही गई।  कर्ण पब्लिक स्कूल में भुजंग फिल्म का निर्माण दो साल पहले हुआ था।  इस फिल्म में रोल करने वालों ने अभी तक इस फिल्म को देखा नहीं था।  १४ जून को चंडीगढ़ के ललित कला अकादमी auditorium में इस फिल्म को दिखाया गया। फिल्म में काम करने वाले लोगों से पुनः मिलना हो गया ,अच्छा लगा।  फिल्म देखने के लिए कास्ट डायरेक्टर ज्योतिका , costume designer सुप्रीत चीमा , anchor प्रितमा , सुरेन , प्रोडक्शन इंचार्ज प्रवीन सहित करीब 250 लोगों ने फिल्म को देखा। यही नहीं फिल्म के दो मुख्य बाल कलाकारों यशित और सिद्धांत ने भी अपने -अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिरक़त की। फिल्म में मुख्य भूमिका "शंटी " का क़िरदार  निभाने वाला कलाकार ज़ुबिन गैर हाज़िर रहा।

जालंधर से दलजिंदर, मुंबई से फिल्म के लेखक/निर्देशक मोहिंदर प्रताप सिंह ने भी शिरकत की।   दोस्त अनुराग भी मुंबई काम के सिलसिले में चंडीगढ़ आया हुआ था ,रात को मोहाली अनुराग के फ्लैट में ही रुकना हुआ। रात को दलजिंदर के गीत सुनते रहे। ये रात यादगार बन गई।
जून की छुट्टियों में कसौली भी घूम आया। पहाड़ों का खुशनुमा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता मुझे हमेशा सुहाती है। हालाँकि पहाड़ों पर बढ़ता कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक खटकता है लेकिन पहाड़ों की सादगी और हरयावल हमेशा भाती है।
कसौली से २-३ किलोमीटर पहले ही गड़खल में दोस्त अमन सेठ की माता जी से भी मिल आया। कुछ दिनों पहले अमन के पिता की मृत्यु हो  गई थी। अमन के पिता कसौली और आसपास के इलाके में "सेठ साहब" के नाम से मशहूर थे और सरकारी ठेकेदार थे। मैं कईं बार उनसे मिला।  उनकी सादगी ,साफगोही और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा मेरे ज़हन में बसा रहेगा। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि !
धूप -छाँव और दुःख -सुख की तरह जीवन -मृत्यु भी अटल सत्य हैं। जो जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है। मेरे एक पुराने मित्र नवीन की माता जी भी अपनी जीवन यात्रा पूरी कर गईं। पड़ोस में रहने वाले नीटू भाई की माता जी और मन्नू भाई के पिता भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह गए। मेरे मित्र नवीन के पास सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले मेरे अजीज़ रवि के छोटे भाई ने आत्म हत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रवि ने बताया के उसका छोटा भाई कोई स्थाई रोज़गार ना मिलने के कारण परेशान रहता था। सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि !
आज सुबह ही मशहूर रूमानी शायर अहमद फ़राज़ की एक ग़ज़ल पढ़ रहा था। उस ग़ज़ल के दो अलग अलग शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
                                              "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
                                                सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

                                                सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
                                                ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं "

दोस्तों , बातों का सिलसिला इसी तरह चलता रहे। वैसे इस चिठ्ठी में कईं बातें जो छूट गई हैं , अगले ख़त के साथ उनका ज़िक्र ज़रूर करूंगा। अब आप से विदा लेता हूँ।
जय हो !

Wednesday, 17 June 2015

A Letter...Ek Chithee (Part-31)

                                              
                                                                  यादें 
 मैं याद कर रहा हूँ उन दिनों( 1987 -88 ) को जब हम लोग पंजाब यूनिवर्सिटी में इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट में थे। जब भी समय मिलता डिपार्टमेंट के बाहर जमावड़ा जम जाता। अमरजीत ,पुनीत सहगल ,फ़्लोरा , बाठ, अरोड़ा  , कमल मलिक , दलजिंदर और रघवीर ये सभी लोग हमारे से एक बैच सीनियर थे। इस बैच में अधिकतर सभी लोग पंजाब से ही थे। साथ में ही हॉस्टल था लेकिन जब भी मौका मिलता शाम को सभी अपने -अपने घर की ओर रुखसत कर लेते। कौन कितने दिनों के बाद डिपार्टमेंट वापिस आएगा ,कुछ पता नहीं होता था। डिपार्टमेंट तो जैसे आरामगाह था। ऐसा नहीं कि सभी का यही हाल था ,इनमे से कुछ लोग सीरियस भी थे। इनमें दलजिंदर एक था जो कि सभी को कोसता रहता था। जब कभी इनके दर्शन हो जाते ,सभी ऐसे प्रोजेक्ट करते मानो दुनिया में इनसे सीरियस लोग ही न हों।
 डिपार्टमेंट के बग़ल में ही हॉस्टल कैंटीन थी। बड़े -बड़े छायादार पेड़ों के नीचे महफ़िल जम जाती और फिर    शुरू होता बातों का सिलसिला। आज कल की स्टैंडिंग कॉमेडी की तरह ये सभी दूसरों का मज़ाक करने में सिद्धहस्त थे। रघवीर ,पुनीत सहगल  ,बाठ और अमरजीत का अपना अलग ग्रुप था। पुनीत का अपना अलग अंदाज़ था।  जिस से भी मिलता ,  कुछ इस तरह से मिलता के साथ बैठे लोगों का शुगल हो जाता। अमरजीत अपने ग्रुप के सभी लोगों से बिलकुल अलग था। । लेकिन उसका व्यक्तित्व कमाल का था। शांत स्वभाव अमरजीत हमेशा किसी उधेड़ बुन में लगा रहता। शब्दों का वो ज़बरदस्त खिलाडी था। हमेशा कुछ न कुछ लिखता रहता। एक्टर तो वो कमाल का था। पुनीत ने पिछले दिनों सूचना दी कि अमरजीत इस दुनिया को  अलविदा कह कर हमेशा के लिए रुख़सत हो गया है। अमरजीत की आकस्मिक मृत्यु पर अपने फेस बुक पर पुनीत ने कुछ इस तरह लिखा ,
Serial Bhagan Waliya di shooting diya kuj yaadan .
Amarjeet Singh Rode sada sada lyi sanu Chad ke Tur gya . Bhagan Waliya , Eh kehi Rutt Ayi te horv kinne award jetu radio tv de natkan da likhari , kamaal da Director Adaakaar ate meri sajji bahn aj nhi rhi ........            








 जैसे शब्द हमेशा ज़िंदा रहते हैं , उसी तरह कलाकार कभी नहीं मरता। अमरजीत तुम हमेशा हमारे दिलों में बसे रहोगे। मेरे चचेरे भाई राजू की आकस्मिक मृत्यु ने भी अंदर तक हिला कर रख दिया । राजू भाई को नशे की लत थी और इसी कारण अपने आखिरी दिनों में वो मुफलिसी में रहा। वैसे तो जीवन में सफलता की कोई परिभाषा नहीं लेकिन बिना लक्ष्य के जीवन जीने वालों के लिए समाज की नज़रों में कोई इज़्ज़त नहीं होती। राजू जीवन भर संघर्ष करता रहा ,लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था। वो अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के पंच तत्व में विलीन हो गया। श्रद्धांजलि !

पिछले तीन  महीने (मार्च /अप्रैल/मई -2015 ) कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। पिछले 10 साल से एक स्कूल में कार्यरत हूँ। स्कूल की दूसरी ज़िम्मेदारियों के साथ -साथ इन दिनों में किसी सेल्समेन की तरह स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रहता है।शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण के कारण विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की इतनी प्रतिस्पर्धा हो गई है कि शिक्षा के मंदिर अब मार्केटिंग ऑफिस की तरह काम करने लगे हैं। बच्चों और उनके मातापिता को लुभाने के ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं कि मातापिता के लिए ये समय संकट भरा बन जाता है। महंगी होती शिक्षा , बीमार व दिशाहीन शिक्षा प्रणाली ,शिक्षा का गिरता स्तर ,कमज़ोर सरकारी नीतियां और अपंग सरकारी शिक्षा ढांचा ये कुछ ऐसे कारण हैं ,जिनकी वजह से शिक्षा के मायने बदल गए हैं। यही नहीं एक आम आदमी के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। खासतौर पर मेहनतकश माँ बाप अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा कर बढ़ने का सपना बुनते हैं ,लेकिन महंगी होती शिक्षा के कारण ऐसे अधिकतर लोगों के सपने बिखर ही जाते हैं।
आज कल गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। कई बार दिन काटना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल में दिन कैसे बीत जाते हैं इस का पता ही नहीं चलता। बच्चों की दुनिया में रहते रहते मेरा मन भी बच्चों जैसा हो गया है। एक अच्छी टीम बन गई है। सभी अपना काम जिम्मेदारी से करने लगें तो काम में आनंद की अनुभूति होना स्वाभाविक। है। नवज्योत ,सुनीता भंडारी ,मंजू , संगीता ,पूनम ,रेनू , मोना ,उमीशा व पूजा जैसे कर्ण परिवार का हिस्सा ही बन गई है।
24 अप्रैल को दिल्ली और 27 को चंडीगढ़ नीशू खन्ना के सगन और विवाह समारोह में शिरकत की। बच्चों संग विवाह समारोह में जाना अच्छा लगा। भांजे नीशू खन्ना ने प्रेम विवाह किया है।
पिछले तीन महीनों में मौसम का मिज़ाज ठंडा रहा। कभी बरसात तो कभी ठंडी हवाओं ने मौसम में ठंडक बनाए रखी। अपने जीवन में अप्रैल और मई के महीनों में इतनी ठंडक पहली बार महसूस की।
अच्छा दोस्तों फिर मिलते हैं ! मेरे अगले खत का इंतज़ार कीजिएगा !