A LETTER...EK CHITHEE PART-22 से आगे ………………………
अपहरण (भाग -2 )
नाटक "अपहरण " को निर्देशित करना मेरे लिए एक बढ़िया अनुभव रहा। पिछले साल भी इसी कॉलेज (K V A D A V, KARNAL) में नाटक करवाया था। बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया सो इस बार भी नाटक करवाने का जिम्मा मुझे ही सौंप दिया गया।
अगस्त महीने की आखिरी तारीख को जैसे ही भंडारी मैडम का फ़ोन आया मुझे समझते देर ना लगी कि युवा उत्सव नज़दीक आ गया है। भंडारी मैडम कॉलेज में सांस्कृतिक विभाग को देखती हैं। नाटक करवाने का न्यौता स्वीकार करते हुए मैं अगले दिन कॉलेज पहुँच गया।
विश्व विद्यालयों द्वारा हर साल युवाओं में छिपी प्रतिभा को निखारने और संवारने के उदेश्य से युवा उत्सव के माध्यम से एक मंच प्रदान किया जाता है। जहाँ सभी महाविद्यालयों के छात्र -छात्राएं विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं। एक अच्छा ख़ासा फण्ड विश्व विद्यालयों द्वारा सभी महाविद्यालयों को दिया जाता है।
ये बात अलग है के ट्रॉफी हासिल करने के चक्कर में host college ऐसा घालमेल करते हैं के कला ,प्रतिभा और संस्कृति को नज़र अंदाज़ कर देते हैं। यूथ फेस्टिवल में इस तरह के घालमेल के कारण ही प्रतिभावान कलाकार पिछड़ जाते हैं। वो इस मंच का सदुपयोग नहीं कर पाते।
खैर इस बार मुझे नाटक की विषय वस्तु को explain करने को कहा गया। मैंने दो कहानियाँ सुनाई -अपहरण और तेज़ाब। " दो कहानियां सुनाने के बाद यह तय हुआ के अपहरण नाटक की तैयारी की जाए। दूसरी कहानी "तेज़ाब " को इस लिए मना कर दिया गया चूँकि ये महिलाओं के मुद्दे की कहानी थी और महिलाओं के मुद्दे से जुडी कहानी पर पिछले साल नाटक खेला जा चुका था। मेरे लाख आग्रह पर के लड़कियां अपने साथ हो रहे शोषण या अत्याचार के विषय को बारीकी से समझ पाएंगी यह निर्णय लिया गया की तेज़ाब नहीं अपितु अपहरण नाटक करवाया जाए।
लड़कियों पर लड़कों द्वारा तेज़ाब फेंके जाने और उसके बाद उसके जीवन की कहानी है-" तेज़ाब "।
"अपहरण "- एक गरीब परिवार में जन्मी नन्हीं लड़की "कंचन "की कहानी है जो दूसरे बच्चों की तरह टी /वी बहुत देखती है।माँ से एक अदद साइकिल दिलवाने की ज़िद करती है। गरीबी का वास्ता देकर माँ कुछ दिन इंतज़ार करने को कहती है।बस्ती की ही दो लड़कियों सलोनी और सुहानी के पास साइकिल है। वो दोनों कंचन को साथ नहीं खेलने देती और ऊपर से उसको चिढ़ाती भी हैं। बस्ती में गणेश उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। गणेश स्थापित हो चुके हैं। कंचन घर में उदास बैठी टी /वी देख रही है। चॅनेल्स बदलते हुए एक सीरियल पर उसकी आँखें जम जाती हैं। उसमे कुछ युवा किसी साहूकार के बच्चे का अपहरण कर लेते हैं और फिरौती की मांग करते हैं। कंचन के मन में एक आईडिया आता है और वो गणेशा का अपहरण कर लेती है। कंचन गणेश के पिता शिव शंकर से गणेशा के बदले साइकिल की मांग करती है।
शंकर अपने बच्चे को छुड़वाने के लिए पार्वती के साथ प्रकट होते हैं। कंचन से गणेशा को छोड़ने की अपील करते हैं। लेकिन बाल-मन कंचन साइकिल की ज़िद पर अड़ी रहती है। भोले शंकर तब कंचन के माध्यम से सन्देश देते हैं के बाज़ार आम आदमी के घर में घुस गया है। इसीलिए लोगों की इच्छाएं बढ़ती जा रही हैं। यही कारण है के संसार में अराजकता,अशांति,लूट,भय और अपहरण जैसी वारदातें बढ़ी हैं। बच्ची को भगवन की बात समझ आती है तो वो गणेशा को दोबारा से स्थापित कर देती है।
नाटक करते हुए अजब संयोग हुआ। एक लघु नाटिका (skit) का जिम्मा भी मुझे सौंप दिया गया। तेज़ाब की कहानी को लघु नाटिका के तौर पर प्रस्तुत किया गया। इस के लिए भी अच्छी टीम मिल गई। हालाँकि मुख्य पात्र को अपहरण की काजल (कंचन )ने ही अभिनीत किया।
तेज़ाब में अनुराधा नाम की लड़की एक लड़के की बात नहीं मानती और वो उसके चेहरे पर तेज़ाब फेंक देता है। चेहरा जलने के बाद अनुराधा के जीवन की व्यथा और उसकी जीवन के साथ लड़ाई को ये कहानी बखूबी चित्रित करती है।
नाटक और नाटिका में सभी लड़कियों ने बखूबी अभिनय किया।
अपहरण और तेज़ाब दोनों नाटक मेरे लेखक मित्र मोहिन्दर प्रताप सिंह ने लिखे हैं। मोहिन्दर पिछले कई बरसों से लेखक ,प्रोडूसर और निर्देशक के रूप में मुंबई में काम कर रहा है। नाटक के दौरान मोहिन्दर ने रिहर्सल भी देखी। मुझे इस बात की ख़ुशी है के मोहिन्दर अपहरण और तेज़ाब की परफॉरमेंस से संतुष्ट था।
कॉलेज प्रबंधन ,प्रिंसिपल ,मिसेज भंडारी , मिसेज कादयान ,मिसेज ठाकुर ,अमनदीप ,अम्बिका और कॉलेज के कर्मचारियों के सहयोग से ही अपहरण और तेज़ाब की सफल प्रस्तुतियाँ हो सकी।
बेशक मेरे दोनों नाटकों की सभी actresses की प्रतिबद्धत्ता ,सीखने की ललक ,सहयोग और सादगी को मैं कतई नहीं भूल सकता। नाटक में सहयोग के लिए सभी को मेरा सलाम !
अपहरण (भाग -2 )
नाटक "अपहरण " को निर्देशित करना मेरे लिए एक बढ़िया अनुभव रहा। पिछले साल भी इसी कॉलेज (K V A D A V, KARNAL) में नाटक करवाया था। बच्चों ने अच्छा प्रदर्शन किया सो इस बार भी नाटक करवाने का जिम्मा मुझे ही सौंप दिया गया।
अगस्त महीने की आखिरी तारीख को जैसे ही भंडारी मैडम का फ़ोन आया मुझे समझते देर ना लगी कि युवा उत्सव नज़दीक आ गया है। भंडारी मैडम कॉलेज में सांस्कृतिक विभाग को देखती हैं। नाटक करवाने का न्यौता स्वीकार करते हुए मैं अगले दिन कॉलेज पहुँच गया।
विश्व विद्यालयों द्वारा हर साल युवाओं में छिपी प्रतिभा को निखारने और संवारने के उदेश्य से युवा उत्सव के माध्यम से एक मंच प्रदान किया जाता है। जहाँ सभी महाविद्यालयों के छात्र -छात्राएं विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रतियोगिताओं में बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं। एक अच्छा ख़ासा फण्ड विश्व विद्यालयों द्वारा सभी महाविद्यालयों को दिया जाता है।
ये बात अलग है के ट्रॉफी हासिल करने के चक्कर में host college ऐसा घालमेल करते हैं के कला ,प्रतिभा और संस्कृति को नज़र अंदाज़ कर देते हैं। यूथ फेस्टिवल में इस तरह के घालमेल के कारण ही प्रतिभावान कलाकार पिछड़ जाते हैं। वो इस मंच का सदुपयोग नहीं कर पाते।
खैर इस बार मुझे नाटक की विषय वस्तु को explain करने को कहा गया। मैंने दो कहानियाँ सुनाई -अपहरण और तेज़ाब। " दो कहानियां सुनाने के बाद यह तय हुआ के अपहरण नाटक की तैयारी की जाए। दूसरी कहानी "तेज़ाब " को इस लिए मना कर दिया गया चूँकि ये महिलाओं के मुद्दे की कहानी थी और महिलाओं के मुद्दे से जुडी कहानी पर पिछले साल नाटक खेला जा चुका था। मेरे लाख आग्रह पर के लड़कियां अपने साथ हो रहे शोषण या अत्याचार के विषय को बारीकी से समझ पाएंगी यह निर्णय लिया गया की तेज़ाब नहीं अपितु अपहरण नाटक करवाया जाए।
लड़कियों पर लड़कों द्वारा तेज़ाब फेंके जाने और उसके बाद उसके जीवन की कहानी है-" तेज़ाब "।
"अपहरण "- एक गरीब परिवार में जन्मी नन्हीं लड़की "कंचन "की कहानी है जो दूसरे बच्चों की तरह टी /वी बहुत देखती है।माँ से एक अदद साइकिल दिलवाने की ज़िद करती है। गरीबी का वास्ता देकर माँ कुछ दिन इंतज़ार करने को कहती है।बस्ती की ही दो लड़कियों सलोनी और सुहानी के पास साइकिल है। वो दोनों कंचन को साथ नहीं खेलने देती और ऊपर से उसको चिढ़ाती भी हैं। बस्ती में गणेश उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। गणेश स्थापित हो चुके हैं। कंचन घर में उदास बैठी टी /वी देख रही है। चॅनेल्स बदलते हुए एक सीरियल पर उसकी आँखें जम जाती हैं। उसमे कुछ युवा किसी साहूकार के बच्चे का अपहरण कर लेते हैं और फिरौती की मांग करते हैं। कंचन के मन में एक आईडिया आता है और वो गणेशा का अपहरण कर लेती है। कंचन गणेश के पिता शिव शंकर से गणेशा के बदले साइकिल की मांग करती है।
शंकर अपने बच्चे को छुड़वाने के लिए पार्वती के साथ प्रकट होते हैं। कंचन से गणेशा को छोड़ने की अपील करते हैं। लेकिन बाल-मन कंचन साइकिल की ज़िद पर अड़ी रहती है। भोले शंकर तब कंचन के माध्यम से सन्देश देते हैं के बाज़ार आम आदमी के घर में घुस गया है। इसीलिए लोगों की इच्छाएं बढ़ती जा रही हैं। यही कारण है के संसार में अराजकता,अशांति,लूट,भय और अपहरण जैसी वारदातें बढ़ी हैं। बच्ची को भगवन की बात समझ आती है तो वो गणेशा को दोबारा से स्थापित कर देती है।नाटक करते हुए अजब संयोग हुआ। एक लघु नाटिका (skit) का जिम्मा भी मुझे सौंप दिया गया। तेज़ाब की कहानी को लघु नाटिका के तौर पर प्रस्तुत किया गया। इस के लिए भी अच्छी टीम मिल गई। हालाँकि मुख्य पात्र को अपहरण की काजल (कंचन )ने ही अभिनीत किया।

तेज़ाब में अनुराधा नाम की लड़की एक लड़के की बात नहीं मानती और वो उसके चेहरे पर तेज़ाब फेंक देता है। चेहरा जलने के बाद अनुराधा के जीवन की व्यथा और उसकी जीवन के साथ लड़ाई को ये कहानी बखूबी चित्रित करती है।
नाटक और नाटिका में सभी लड़कियों ने बखूबी अभिनय किया।अपहरण और तेज़ाब दोनों नाटक मेरे लेखक मित्र मोहिन्दर प्रताप सिंह ने लिखे हैं। मोहिन्दर पिछले कई बरसों से लेखक ,प्रोडूसर और निर्देशक के रूप में मुंबई में काम कर रहा है। नाटक के दौरान मोहिन्दर ने रिहर्सल भी देखी। मुझे इस बात की ख़ुशी है के मोहिन्दर अपहरण और तेज़ाब की परफॉरमेंस से संतुष्ट था।
कॉलेज प्रबंधन ,प्रिंसिपल ,मिसेज भंडारी , मिसेज कादयान ,मिसेज ठाकुर ,अमनदीप ,अम्बिका और कॉलेज के कर्मचारियों के सहयोग से ही अपहरण और तेज़ाब की सफल प्रस्तुतियाँ हो सकी।
बेशक मेरे दोनों नाटकों की सभी actresses की प्रतिबद्धत्ता ,सीखने की ललक ,सहयोग और सादगी को मैं कतई नहीं भूल सकता। नाटक में सहयोग के लिए सभी को मेरा सलाम !
बस्ती की ही दो लड़कियों सलोनी और सुहानी के पास साइकिल है। वो दोनों कंचन को साथ नहीं खेलने देती और ऊपर से उसको चिढ़ाती भी हैं। बस्ती में गणेश उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। गणेश स्थापित हो चुके हैं। कंचन घर में उदास बैठी टी /वी देख रही है। चॅनेल्स बदलते हुए एक सीरियल पर उसकी आँखें जम जाती हैं। उसमे कुछ युवा किसी साहूकार के बच्चे का अपहरण कर लेते हैं और फिरौती की मांग करते हैं। कंचन के मन में एक आईडिया आता है और वो गणेशा का अपहरण कर लेती है। कंचन गणेश के पिता शिव शंकर से गणेशा के बदले साइकिल की मांग करती है।
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