"HALF CENTURY"
दोस्तों नमस्कार।
पिछले दिनों घर में रंगाई पुताई का काम चला तो पुरानी डायरियां ,चिठियां और पर्चियां हाथ लग गई। खोल कर पढ़ना शुरू किया तो अवचेतन में दबी हुई बहुत सारी यादें ज़िंदा हो उठी। यात्रा संस्मरण ,खेलकूद , राजनीति के विविध समाचार , देश विदेश में होने वाली हलचल , कभी घर से भाग कर फिल्म देखने का ज़िक्र , कहीं प्रेमिका के साथ मिलने की बातें , किसी जगह उलटे शब्दों में लिखी किस्से कहानियाँ , टूटी फूटी कवितायेँ, कहीं सिस्टम के विरुद्ध आवाज़ ,नाटक का ज़िक्र , २० साल पुरानी सिनेमा की टिकट , हॉस्टल से भाग कर आवारागर्दी , घर बताये बिना दोस्तों के साथ कहीं दूर निकल जाना , नौकरी के दौरान अलग अलग लोगों के साथ मिलने वाले अनुभव, और न जाने क्या क्या । सब का ज़िक्र करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
आज मैं ५० वर्ष का हो गया हूँ। सच कहूँ तो जीवन के ये ५० वर्ष भरपूर जिए। आप हैरान होंगे लेकिन ये सच है के इस आधी सदी के जीवन में छः पीढ़ियों के जीवन को करीब से देख चुका हूँ। जितना कुछ साफ़ या धुँधला याद आता है कहीं कोई गिला शिकवा नहीं है इस ज़िंदगी से। परिवार ,दोस्त ,सहयोगियों और सम्बन्धियों का इतना सहयोग और प्यार मिलता रहा। समय कब फुर्र कर के उड़ गया पता ही नहीं चला। कभी एहसास ही नहीं हुआ के बूढ़ा हो गया हूँ। आज भी अपने आप को बच्चों की तरह बर्ताव करते हुए पाता हूँ। ये करम जले दोस्त कभी कभी याद दिला देते हैं के दाढ़ी सफ़ेद हो गई है। लेकिन मन को संतुष्टि है के ये बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुए हैं।
कल नाई के पास दाढ़ी बनवाने चला गया। नया लड़का था। दाढ़ी बनाते हुए बोला ,"आप काले बाल नहीं करते ? " "क्या हो जाएगा बाल काले करने से ? " , मैंने भी उस से पूछ लिया। वो बोला ,"अच्छे लगेंगे।" "अब अच्छे नहीं लग रहे क्या ?",मैंने फिर उससे पूछा। इस बार वो चुप था। शायद कुछ सोच रहा था। दाढ़ी बनवाते हुए मैंने एक आँख खोल कर उसकी ओर देखा तो वो मंद मंद मुस्कुरा रहा था। " बताया नहीं तूने की क्या हो जाएगा बाल काले करने से ।" मैंने दोबारा पूछा। अब की बार वो बोला ,"Personality निकल आएगी आप की , smart लगेंगे आप ! " मैंने फिर धीरे से फिर पूछा ,"क्या अब smart नहीं लग रहा मैं ?" इस बार उसने कोई जवाब नहीं दिया और वो फिर मंद मंद मुस्कुराने लगा।
बेशक दुःख सुख जीवन का हिस्सा हैं लेकिन माया नगरी के जादूगर ने जीवन में कभी कोई कमी नहीं आने दी। जो चाहा वो यदि मिल गया तो ठीक और यदि नहीं भी मिला तो भी ठीक। मुझे याद नहीं के कभी ज़्यादा हासिल करने का लालच किया हो। जो मिल गया उसे मुक़दर समझ लिया।
ऐसा नहीं के जीवन में सब कुछ ठीक ही चलता रहा। लेकिन जब भी विकट दौर आया ,किसी अदृश्य शक्ति ने मेरा हाथ पकड़ कर पार लगा दिया। मैं जैसा भी हूँ खुश हूँ और अपने जीवन में सभी को खुश रखने का प्रयास भी किया है। फिर भी यदि कभी जाने अनजाने मेरी वजह से किसी को दुःख पहुंचा हो या कोई आहत हुआ हो तो मैं उसके लिया क्षमा प्रार्थी हूँ।
आधी सदी जी चुका हूँ। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिस ने भी मेरे इस जीवन में साथ दिया है , उन सब का मैं अपने दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।सभी दोस्तों को जनम दिवस की शुभ कामनाओं के लिए धन्यवाद। हाफ सेंचुरी के साथ -साथ आज गोल्डन जुबली भी हो गई। इस का मतलब फिल्म हिट हो गई ।
ये जीवन इसी तरह उमंग , उत्साह और प्रेम से भरा रहे और किसी के काम आ सके।इस मंगल कामना के साथ आपसे विदा लेता हूँ।
जय हो !
दोस्तों नमस्कार।
पिछले दिनों घर में रंगाई पुताई का काम चला तो पुरानी डायरियां ,चिठियां और पर्चियां हाथ लग गई। खोल कर पढ़ना शुरू किया तो अवचेतन में दबी हुई बहुत सारी यादें ज़िंदा हो उठी। यात्रा संस्मरण ,खेलकूद , राजनीति के विविध समाचार , देश विदेश में होने वाली हलचल , कभी घर से भाग कर फिल्म देखने का ज़िक्र , कहीं प्रेमिका के साथ मिलने की बातें , किसी जगह उलटे शब्दों में लिखी किस्से कहानियाँ , टूटी फूटी कवितायेँ, कहीं सिस्टम के विरुद्ध आवाज़ ,नाटक का ज़िक्र , २० साल पुरानी सिनेमा की टिकट , हॉस्टल से भाग कर आवारागर्दी , घर बताये बिना दोस्तों के साथ कहीं दूर निकल जाना , नौकरी के दौरान अलग अलग लोगों के साथ मिलने वाले अनुभव, और न जाने क्या क्या । सब का ज़िक्र करना थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
आज मैं ५० वर्ष का हो गया हूँ। सच कहूँ तो जीवन के ये ५० वर्ष भरपूर जिए। आप हैरान होंगे लेकिन ये सच है के इस आधी सदी के जीवन में छः पीढ़ियों के जीवन को करीब से देख चुका हूँ। जितना कुछ साफ़ या धुँधला याद आता है कहीं कोई गिला शिकवा नहीं है इस ज़िंदगी से। परिवार ,दोस्त ,सहयोगियों और सम्बन्धियों का इतना सहयोग और प्यार मिलता रहा। समय कब फुर्र कर के उड़ गया पता ही नहीं चला। कभी एहसास ही नहीं हुआ के बूढ़ा हो गया हूँ। आज भी अपने आप को बच्चों की तरह बर्ताव करते हुए पाता हूँ। ये करम जले दोस्त कभी कभी याद दिला देते हैं के दाढ़ी सफ़ेद हो गई है। लेकिन मन को संतुष्टि है के ये बाल धूप में सफ़ेद नहीं हुए हैं।
कल नाई के पास दाढ़ी बनवाने चला गया। नया लड़का था। दाढ़ी बनाते हुए बोला ,"आप काले बाल नहीं करते ? " "क्या हो जाएगा बाल काले करने से ? " , मैंने भी उस से पूछ लिया। वो बोला ,"अच्छे लगेंगे।" "अब अच्छे नहीं लग रहे क्या ?",मैंने फिर उससे पूछा। इस बार वो चुप था। शायद कुछ सोच रहा था। दाढ़ी बनवाते हुए मैंने एक आँख खोल कर उसकी ओर देखा तो वो मंद मंद मुस्कुरा रहा था। " बताया नहीं तूने की क्या हो जाएगा बाल काले करने से ।" मैंने दोबारा पूछा। अब की बार वो बोला ,"Personality निकल आएगी आप की , smart लगेंगे आप ! " मैंने फिर धीरे से फिर पूछा ,"क्या अब smart नहीं लग रहा मैं ?" इस बार उसने कोई जवाब नहीं दिया और वो फिर मंद मंद मुस्कुराने लगा।
बेशक दुःख सुख जीवन का हिस्सा हैं लेकिन माया नगरी के जादूगर ने जीवन में कभी कोई कमी नहीं आने दी। जो चाहा वो यदि मिल गया तो ठीक और यदि नहीं भी मिला तो भी ठीक। मुझे याद नहीं के कभी ज़्यादा हासिल करने का लालच किया हो। जो मिल गया उसे मुक़दर समझ लिया।
ऐसा नहीं के जीवन में सब कुछ ठीक ही चलता रहा। लेकिन जब भी विकट दौर आया ,किसी अदृश्य शक्ति ने मेरा हाथ पकड़ कर पार लगा दिया। मैं जैसा भी हूँ खुश हूँ और अपने जीवन में सभी को खुश रखने का प्रयास भी किया है। फिर भी यदि कभी जाने अनजाने मेरी वजह से किसी को दुःख पहुंचा हो या कोई आहत हुआ हो तो मैं उसके लिया क्षमा प्रार्थी हूँ।
आधी सदी जी चुका हूँ। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जिस ने भी मेरे इस जीवन में साथ दिया है , उन सब का मैं अपने दिल की गहराइयों से धन्यवाद करता हूँ।सभी दोस्तों को जनम दिवस की शुभ कामनाओं के लिए धन्यवाद। हाफ सेंचुरी के साथ -साथ आज गोल्डन जुबली भी हो गई। इस का मतलब फिल्म हिट हो गई ।
ये जीवन इसी तरह उमंग , उत्साह और प्रेम से भरा रहे और किसी के काम आ सके।इस मंगल कामना के साथ आपसे विदा लेता हूँ।
जय हो !

बस्ती की ही दो लड़कियों सलोनी और सुहानी के पास साइकिल है। वो दोनों कंचन को साथ नहीं खेलने देती और ऊपर से उसको चिढ़ाती भी हैं। बस्ती में गणेश उत्सव की तैयारियां चल रही हैं। गणेश स्थापित हो चुके हैं। कंचन घर में उदास बैठी टी /वी देख रही है। चॅनेल्स बदलते हुए एक सीरियल पर उसकी आँखें जम जाती हैं। उसमे कुछ युवा किसी साहूकार के बच्चे का अपहरण कर लेते हैं और फिरौती की मांग करते हैं। कंचन के मन में एक आईडिया आता है और वो गणेशा का अपहरण कर लेती है। कंचन गणेश के पिता शिव शंकर से गणेशा के बदले साइकिल की मांग करती है।
शंकर अपने बच्चे को छुड़वाने के लिए पार्वती के साथ प्रकट होते हैं। कंचन से गणेशा को छोड़ने की अपील करते हैं। लेकिन बाल-मन कंचन साइकिल की ज़िद पर अड़ी रहती है। भोले शंकर तब कंचन के माध्यम से सन्देश देते हैं के बाज़ार आम आदमी के घर में घुस गया है। इसीलिए लोगों की इच्छाएं बढ़ती जा रही हैं। यही कारण है के संसार में अराजकता,अशांति,लूट,भय और अपहरण जैसी वारदातें बढ़ी हैं। बच्ची को भगवन की बात समझ आती है तो वो गणेशा को दोबारा से स्थापित कर देती है।
तेज़ाब में अनुराधा नाम की लड़की एक लड़के की बात नहीं मानती और वो उसके चेहरे पर तेज़ाब फेंक देता है। चेहरा जलने के बाद अनुराधा के जीवन की व्यथा और उसकी जीवन के साथ लड़ाई को ये कहानी बखूबी चित्रित करती है।
नाटक और नाटिका में सभी लड़कियों ने बखूबी अभिनय किया।
बिल्कुल एकांत पसंद लड़की ने नाटक में जिस तरह से जीवन की उमंग के मायने को समझा वो कमाल नाटक का ही कर सकता है। पूरी टीम ने उसका नाम छुपा रुस्तम रख दिया।
चुलबुली दीक्षा की नटखट शरारतें मुझे हमेशा याद रहेंगी।
हालांकि भारती शुरूआत में थोड़ी नर्वस रही लेकिन बाद में उसने नाटक का भरपूर आनंद उठाया। बचपन कितना सरल और पाक-साफ़ होता है वो मुझे स्मृति की बच्चों जैसी बातों ने सिखाया। सोनम रोर ने मस्ती ,रुचि ढिल्लों ने परिपक्वता और सोनाली ने अपने आप को प्रूव करने के लिए नाटक और अपने रोल के लिए खूब मेहनत की।
सोनाली ने अपने घर वालों के विरोध और विपरीत परिस्थितिओं के बावजूद हार नहीं मानी।
उसने अपने पात्र को दिल से जिया।
मोहिन्दर मुंबई में लेखन और निर्देशन का काम करता है। मोहिन्दर द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म "भुजंग" बन कर तैयार है और सभी उसके रिलीज़ होने का बेसब्री से इंतज़ार भी कर हैं।
इस वर्कशॉप का पूरी टीम को फायदा हुआ। असल में मोहिन्दर और अमितोष करनाल अपने घर आये हुए थे और जब उन्हें नाटक की रिहर्सल्स के बारे में पता चला तो दोनों ने अपना ज़्यादा समय नाटक मण्डली के साथ ही बिताया।
वैसे मेरा तो हमेशा यही मानना है के कला का कोई मापदंड नहीं होता परन्तु बच्चों के लिए तैयारी का ये एक सशक्त माध्यम है। बच्चों की कला को अनदेखा करके आयोजक जिस तरह ट्रॉफी हासिल करने के लिए घालमेल करते हैं वो वाकये निंदनीय है।नाटक ही नहीं बल्कि सभी विधाओं में निर्णायक मंडल के निर्णयों का अधिकतर प्रतिभागीयों ने विरोध किया।
हालांकि कॉलेज में सांस्कृतिक विभाग की इंचार्ज भंडारी मैडम को इस की permission लेने के लिए बहुत मशक्क़त करनी पड़ी।