Sunday, 26 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-33)

                                                           जुलाई नामा -2015 

दोस्तों नमस्कार !
आप सब तो जानते ही हैं कि मैं करनाल में कर्ण पब्लिक स्कूल में कार्यरत हूँ। लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे जान में जान आ गई हो। स्कूल में बच्चों के साथ असल मस्ती , दुनिया से बेखबर उनका भोलापन और चुलबुली शरारतें हर पल इक नई सीख दे जाती हैं।  स्कूल का दसवीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है।  इस बार भी आशा के अनुरूप रिजल्ट अच्छा रहा। मोहित ने दसवीं में 100 % marks लेकर एक मिसाल कायम कर दी।   इस के अलावा,मानसी ने 96 % marks हासिल किए। नमन ,करणवीर और रूचि दसवीं का इम्तिहान पास नहीं कर पाए। हार जीत जीवन का हिस्सा है और उम्मीद  है कि सभी बच्चे अपने जीवन के इम्तहान में ज़रूर कामयाब होंगे। यहाँ मैं आप को ये बता देना चाहता हूँ कि हमारे स्कूल में अधिकतर मेहनतकश लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे उन की आँखों में अपने बच्चों को लेकर बुने जाने वाले सपनों को नज़दीक से महसूस करने का मौका मिलता है। मेरी सदा यही कोशिश रहती है की बच्चे पढ़ लिखकर अपनी ज़िन्दगी की किताब खुद लिख सकें और स्कूल के सभी अध्यापक एक टीम की तरह बखूबी मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलते हैं।

 जून में करनाल में राज्य स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कर्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी इस में शिरकत की। जून की छुट्टियों में ही करनाल के निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में जाने का मौका मिला। मेरे गुरु व मेरे दोस्त मोहिन्दर के पिता डॉ मदन गुलाटी ने सभी आगंतुकों का खूब मान -सम्मान किया।
 अपनी इन चिट्ठियों के ज़रिए लगभग दो साल पहले लिखने का सिलसिला शुरू किया था। भला हो भाई मोहिन्दर प्रताप सिंह का जिसने हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहिन्दर ख़ुद एक लेखक है और मुंबई में एडवरटाइजिंग और फिल्म क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।  उसने बताया कि वो उसने एक पंजाबी फिल्म लिखी  र है जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है । अमितोष नागपाल और मोहिन्दर दोनों आज कल मिल कर काम कर रहे हैं और  Big Magic channel के लिए एक serial टेढ़ी मेढ़ी फैमिली लिख रहे हैं ,जिसका प्रसारण शुरू हो चुका है। अमितोष भी मुंबई फ़िल्मी दुनिया में अपना भाग्य आजमा रहा है।
 डॉ अजय शर्मा का ज़िक्र चला है तो बता दूँ कि उनके द्वारा दूरदर्शन( किसान  )के लिए लिखित सीरियल "आधारशिला " प्रसारण शुरू हो चुका है । इस सीरियल में डॉ शर्मा ने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना खाता खोल लिया है। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस सीरियल में मेरा पुराना साथी दलजिंदर सिंह मुख्य पात्र अभिनीत कर रहा है। दलजिंदर ने 1988 में चंडीगढ़ से इंडियन थिएटर किया था। दलजिंदर आजकल एक पंजाबी फिल्म "कप्तान   " की शूटिंग में व्यस्त है। दलजिंदर यह फिल्म Gipy Grewal  के साथ कर रहा है।
 डॉ शर्मा मेरे पुराने मित्र हैं और लेखन क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान है। आजकल दैनिक सवेरा  जालंधर (पंजाब ) में कार्यरत हैं। उनके साथ बातचीत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ के सुबह उठते ही उनसे बातचीत न हो तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ छूट सा गया है। दैनिक सवेरा में मेरी दो कहानियां -"स्कूल फीस " और "गर्म ख़ून " (चार किश्तों में ) के अलावा एक कविता -"उदास चेहरा "प्रकाशित हो गई। इस चिठ्ठी के माध्यम से मेरा डॉ शर्मा को दिली धन्यवाद।
हरियाणा में मानसून शुरू हो चूका है। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले एक हफ्ते से लगातार बरसात के कारण मौसम ख़ुशगवार और सुहाना हो गया है !
हालांकि बीच में humidity के कारण गड़बड़ हो जाती है। सैर का सिलसिला जारी रखने की कोशिश करता हूँ और घूमते -घूमते फोटो खींचने की लत लग गई है। 
पिछले ख़त में आपको बताना भूल गया था कि मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली रेनू सास बन गई है। उसकी बेटी की शादी में शिरकत की। शादी जिस सादगी से हुई वो सच में तारीफे क़ाबिल था। यहाँ उसका ज़िक्र करना इस लिए ज़रूरी क्योंकि आजकल की चमक -धमक वाली शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बहुत होती है। रेनू ने बताया कि लड़के वालों ने शादी में शगुन  के रूप में मात्र एक रुपया लिया। इस के अलावा कुछ भी लेने से लड़के वालों ने साफ़ इंकार कर दिया। लड़के वालों को मेरा सलाम !
  अमेरिका में भतीजे सिकंदर और उसकी पत्नि सुखमन को पुत्र प्राप्ति हुई है। सांगवान परिवार को मेरी ढेरों शुभ कामनाएं।
यहाँ मुझे निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद आ रहा है:
"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
रोते हुए किसी बच्चे को हंसाया जाए " 
 जय हो दोस्तों ! फिर मिलते हैं !

Sunday, 19 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-32)

                                                                    जून -2015
दोस्तों नमस्कार !
स्कूलों में छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं । गर्मियों की इन छुट्टियों में ज़्यादातर दिनों में मौसम सुहाना ही बना रहा। बच्चों से 6 जुलाई को  मिलना हुआ  , बच्चों से दूर एक महीने भर की छुट्टियां बीताना काफी मुश्किल भरा रहा। स्कूल खुलने के साथ सच में ऐसा लगा मानो बगिया फूलों से खिल उठी हो।


बेटे कशिश ने मैकेनिकल में B.Tech कर लिया है। कईं जगह apply किया लेकिन किसी एक जगह से भी कॉल नहीं आई।  इस बात से पता चलता है की देश में रोज़गार  की कितनी समस्या है। दुनिया से बेखबर कशिश आज कल एक पुरानी गाड़ी को modify करने में मशगूल है।
उसका कहना है कि जीवन में वही काम करना चाहिए जो आप को अच्छा लगता है। कशिश का उत्साह और passion देखते बनता है ,मेरी शुभकामनायें।

लम्बे समय से जिस  इंतज़ार था वो घड़ी भी आ ही गई।  कर्ण पब्लिक स्कूल में भुजंग फिल्म का निर्माण दो साल पहले हुआ था।  इस फिल्म में रोल करने वालों ने अभी तक इस फिल्म को देखा नहीं था।  १४ जून को चंडीगढ़ के ललित कला अकादमी auditorium में इस फिल्म को दिखाया गया। फिल्म में काम करने वाले लोगों से पुनः मिलना हो गया ,अच्छा लगा।  फिल्म देखने के लिए कास्ट डायरेक्टर ज्योतिका , costume designer सुप्रीत चीमा , anchor प्रितमा , सुरेन , प्रोडक्शन इंचार्ज प्रवीन सहित करीब 250 लोगों ने फिल्म को देखा। यही नहीं फिल्म के दो मुख्य बाल कलाकारों यशित और सिद्धांत ने भी अपने -अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिरक़त की। फिल्म में मुख्य भूमिका "शंटी " का क़िरदार  निभाने वाला कलाकार ज़ुबिन गैर हाज़िर रहा।

जालंधर से दलजिंदर, मुंबई से फिल्म के लेखक/निर्देशक मोहिंदर प्रताप सिंह ने भी शिरकत की।   दोस्त अनुराग भी मुंबई काम के सिलसिले में चंडीगढ़ आया हुआ था ,रात को मोहाली अनुराग के फ्लैट में ही रुकना हुआ। रात को दलजिंदर के गीत सुनते रहे। ये रात यादगार बन गई।
जून की छुट्टियों में कसौली भी घूम आया। पहाड़ों का खुशनुमा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता मुझे हमेशा सुहाती है। हालाँकि पहाड़ों पर बढ़ता कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक खटकता है लेकिन पहाड़ों की सादगी और हरयावल हमेशा भाती है।
कसौली से २-३ किलोमीटर पहले ही गड़खल में दोस्त अमन सेठ की माता जी से भी मिल आया। कुछ दिनों पहले अमन के पिता की मृत्यु हो  गई थी। अमन के पिता कसौली और आसपास के इलाके में "सेठ साहब" के नाम से मशहूर थे और सरकारी ठेकेदार थे। मैं कईं बार उनसे मिला।  उनकी सादगी ,साफगोही और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा मेरे ज़हन में बसा रहेगा। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि !
धूप -छाँव और दुःख -सुख की तरह जीवन -मृत्यु भी अटल सत्य हैं। जो जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है। मेरे एक पुराने मित्र नवीन की माता जी भी अपनी जीवन यात्रा पूरी कर गईं। पड़ोस में रहने वाले नीटू भाई की माता जी और मन्नू भाई के पिता भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह गए। मेरे मित्र नवीन के पास सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले मेरे अजीज़ रवि के छोटे भाई ने आत्म हत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रवि ने बताया के उसका छोटा भाई कोई स्थाई रोज़गार ना मिलने के कारण परेशान रहता था। सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि !
आज सुबह ही मशहूर रूमानी शायर अहमद फ़राज़ की एक ग़ज़ल पढ़ रहा था। उस ग़ज़ल के दो अलग अलग शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
                                              "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
                                                सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

                                                सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
                                                ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं "

दोस्तों , बातों का सिलसिला इसी तरह चलता रहे। वैसे इस चिठ्ठी में कईं बातें जो छूट गई हैं , अगले ख़त के साथ उनका ज़िक्र ज़रूर करूंगा। अब आप से विदा लेता हूँ।
जय हो !

Wednesday, 17 June 2015

A Letter...Ek Chithee (Part-31)

                                              
                                                                  यादें 
 मैं याद कर रहा हूँ उन दिनों( 1987 -88 ) को जब हम लोग पंजाब यूनिवर्सिटी में इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट में थे। जब भी समय मिलता डिपार्टमेंट के बाहर जमावड़ा जम जाता। अमरजीत ,पुनीत सहगल ,फ़्लोरा , बाठ, अरोड़ा  , कमल मलिक , दलजिंदर और रघवीर ये सभी लोग हमारे से एक बैच सीनियर थे। इस बैच में अधिकतर सभी लोग पंजाब से ही थे। साथ में ही हॉस्टल था लेकिन जब भी मौका मिलता शाम को सभी अपने -अपने घर की ओर रुखसत कर लेते। कौन कितने दिनों के बाद डिपार्टमेंट वापिस आएगा ,कुछ पता नहीं होता था। डिपार्टमेंट तो जैसे आरामगाह था। ऐसा नहीं कि सभी का यही हाल था ,इनमे से कुछ लोग सीरियस भी थे। इनमें दलजिंदर एक था जो कि सभी को कोसता रहता था। जब कभी इनके दर्शन हो जाते ,सभी ऐसे प्रोजेक्ट करते मानो दुनिया में इनसे सीरियस लोग ही न हों।
 डिपार्टमेंट के बग़ल में ही हॉस्टल कैंटीन थी। बड़े -बड़े छायादार पेड़ों के नीचे महफ़िल जम जाती और फिर    शुरू होता बातों का सिलसिला। आज कल की स्टैंडिंग कॉमेडी की तरह ये सभी दूसरों का मज़ाक करने में सिद्धहस्त थे। रघवीर ,पुनीत सहगल  ,बाठ और अमरजीत का अपना अलग ग्रुप था। पुनीत का अपना अलग अंदाज़ था।  जिस से भी मिलता ,  कुछ इस तरह से मिलता के साथ बैठे लोगों का शुगल हो जाता। अमरजीत अपने ग्रुप के सभी लोगों से बिलकुल अलग था। । लेकिन उसका व्यक्तित्व कमाल का था। शांत स्वभाव अमरजीत हमेशा किसी उधेड़ बुन में लगा रहता। शब्दों का वो ज़बरदस्त खिलाडी था। हमेशा कुछ न कुछ लिखता रहता। एक्टर तो वो कमाल का था। पुनीत ने पिछले दिनों सूचना दी कि अमरजीत इस दुनिया को  अलविदा कह कर हमेशा के लिए रुख़सत हो गया है। अमरजीत की आकस्मिक मृत्यु पर अपने फेस बुक पर पुनीत ने कुछ इस तरह लिखा ,
Serial Bhagan Waliya di shooting diya kuj yaadan .
Amarjeet Singh Rode sada sada lyi sanu Chad ke Tur gya . Bhagan Waliya , Eh kehi Rutt Ayi te horv kinne award jetu radio tv de natkan da likhari , kamaal da Director Adaakaar ate meri sajji bahn aj nhi rhi ........            








 जैसे शब्द हमेशा ज़िंदा रहते हैं , उसी तरह कलाकार कभी नहीं मरता। अमरजीत तुम हमेशा हमारे दिलों में बसे रहोगे। मेरे चचेरे भाई राजू की आकस्मिक मृत्यु ने भी अंदर तक हिला कर रख दिया । राजू भाई को नशे की लत थी और इसी कारण अपने आखिरी दिनों में वो मुफलिसी में रहा। वैसे तो जीवन में सफलता की कोई परिभाषा नहीं लेकिन बिना लक्ष्य के जीवन जीने वालों के लिए समाज की नज़रों में कोई इज़्ज़त नहीं होती। राजू जीवन भर संघर्ष करता रहा ,लेकिन भाग्य में कुछ और ही लिखा था। वो अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के पंच तत्व में विलीन हो गया। श्रद्धांजलि !

पिछले तीन  महीने (मार्च /अप्रैल/मई -2015 ) कैसे बीत गए पता ही नहीं चला। पिछले 10 साल से एक स्कूल में कार्यरत हूँ। स्कूल की दूसरी ज़िम्मेदारियों के साथ -साथ इन दिनों में किसी सेल्समेन की तरह स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रहता है।शिक्षा क्षेत्र में निजीकरण के कारण विद्यालयों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की इतनी प्रतिस्पर्धा हो गई है कि शिक्षा के मंदिर अब मार्केटिंग ऑफिस की तरह काम करने लगे हैं। बच्चों और उनके मातापिता को लुभाने के ऐसे हथकंडे अपनाए जाते हैं कि मातापिता के लिए ये समय संकट भरा बन जाता है। महंगी होती शिक्षा , बीमार व दिशाहीन शिक्षा प्रणाली ,शिक्षा का गिरता स्तर ,कमज़ोर सरकारी नीतियां और अपंग सरकारी शिक्षा ढांचा ये कुछ ऐसे कारण हैं ,जिनकी वजह से शिक्षा के मायने बदल गए हैं। यही नहीं एक आम आदमी के लिए अपने बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल हो गया है। खासतौर पर मेहनतकश माँ बाप अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा कर बढ़ने का सपना बुनते हैं ,लेकिन महंगी होती शिक्षा के कारण ऐसे अधिकतर लोगों के सपने बिखर ही जाते हैं।
आज कल गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। कई बार दिन काटना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल में दिन कैसे बीत जाते हैं इस का पता ही नहीं चलता। बच्चों की दुनिया में रहते रहते मेरा मन भी बच्चों जैसा हो गया है। एक अच्छी टीम बन गई है। सभी अपना काम जिम्मेदारी से करने लगें तो काम में आनंद की अनुभूति होना स्वाभाविक। है। नवज्योत ,सुनीता भंडारी ,मंजू , संगीता ,पूनम ,रेनू , मोना ,उमीशा व पूजा जैसे कर्ण परिवार का हिस्सा ही बन गई है।
24 अप्रैल को दिल्ली और 27 को चंडीगढ़ नीशू खन्ना के सगन और विवाह समारोह में शिरकत की। बच्चों संग विवाह समारोह में जाना अच्छा लगा। भांजे नीशू खन्ना ने प्रेम विवाह किया है।
पिछले तीन महीनों में मौसम का मिज़ाज ठंडा रहा। कभी बरसात तो कभी ठंडी हवाओं ने मौसम में ठंडक बनाए रखी। अपने जीवन में अप्रैल और मई के महीनों में इतनी ठंडक पहली बार महसूस की।
अच्छा दोस्तों फिर मिलते हैं ! मेरे अगले खत का इंतज़ार कीजिएगा !

Thursday, 23 April 2015

ख़ामोशी !

ख़ामोशी !

तेरे सुनहरे बाल,
 धधकती आँखें ,
 चमकते गाल ,
 लरजते औंठ , 
बहकी सी बातें , 
थिरकते हाथों का स्पर्श ,  
 हिरणी जैसी चाल ,
 तितली जैसी अठखेलियां
और 
 जिस्म की रूहानी गंध ,
सब कुछ कह देते हैं ,
बेशक़ तू
खामोश रहे .........!

Monday, 16 March 2015

ये ज़िंदगी के मेले !

ये ज़िंदगी के मेले !
सावधान ! अगर आप ने किसी को उधार दिया है तो वापिस कभी न माँगिएगा। जिस ने आप के पैसे देने हैं उसके आत्म सम्मान को चोट पहुँच सकती है। जो दे दिया सो दे दिया ,अब उसे भूल ही जाएं तो बेहतर होगा। इधर आप ने अपने पैसे की मांग की उधर देने वाला आग बबूला हुआ। झट से वो रिश्ता तोड़ देगा। ख्याल रहे ,अगर आप ने कहीं अपने पैसे के लिए थोड़ा दबाव बनाने की कोशिश की तो लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
 मुझे यहाँ मेरा एक दोस्त बिन्दा उर्फ़ बलविंदर सिंह मठारू  (जो अब इस दुनिया में नहीं है )याद आ गया।   लोहे की ग्रिल बंनाने का काम करता था। उसके हाथों  में हुन्नर था। बहुत अच्छा काम था उसका। जिसको ज़रुरत होती बिन्दे से पैसे ले जाता। क्या मज़ाल के बिंदा किसी से पैसे वापिस मांग ले। वो तो बस यही कहता ,"सर जी वाहेगुरु देता रहे ,ये सब कुछ तो उसका है।" न जाने किस की नज़र लगी बिन्दे को- उसे शराब की लत लग गई। अब बिंदा शराब में टुन रहने लगा था। दोस्तों ने भी ऐश मारी बिंदे के साथ।  क्या दिन ! क्या रात ! मयखाना हमेशा खुला रहता। धीरे धीरे काम कम होने लगा। पैसे की तंगी बढ़ने लगी। बहुत मुफलिसी के दिन देखे थे उसने। काम खत्म हो गया। घर में रोटी के लाले पड़ने लगे। दोस्त कभी कभार मदद कर देते। धीरे धीरे दोस्त भी बिंदे से छिपने लगे थे और बिंदा जहाँ दिखाई दे जाता कन्नी काट लेते। । पैसे की कमी के कारण लोगों से उधार उठाना पड़ता था उसे। देने में देर सवेर हो जाती तो माँ बहन भी सुननी पड़ती उसे। क्या मज़ाल की वो किसी को बुरा कह दे। बिंदा सब से अलग था। 
 बिन्दा अक्सर कहा करता था ,"ये दुनिया बहुत "मास्टर माइंड " (master mind ) है sir जी !  
सोचता हूँ के क्या दुनिया सच में" मास्टर माइंड " है ! 

Saturday, 28 February 2015

राम झूठ न बुलवाए…!(Part-3)

राम झूठ न बुलवाए… !
रेलवे बजट और आम बजट का पिटारा खुल चुका है। आप सब इस से वाकिफ होंगे। आम आदमी और मध्यम वर्गीय परिवार के लिए इस में ऐसा कुछ ख़ास नहीं के उस को खुशी  महसूस हो।  दुःखती नस पर हथौड़ा मारने वाली कहावत तो आप ने सुनी ही होगी। जनता अभी आम बजट को समझने की कोशिश ही कर रही थी कि  बजट के अगले ही दिन पेट्रोल और डीज़ल की बढ़ी हुई कीमतों ने जैसे जनता की बची -खुची उम्मीदों पर हथोड़ा नहीं बुलडोज़र चला दिया। सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी ,इनकम टैक्स में स्लैब न बढ़ाया जाना और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए टैक्स में कटौती से ये तो साफ़ हो गया है कि आम आदमी का बोझ अभी जल्दी से कम नहीं होने वाला है।
बजट से एक दिन पूर्व देश के प्रधान मंत्री नरेंदर मोदी जिस तरह दहाड़े  , उससे एक बारगी तो ऐसा लगा था कि इस बार आम बजट सच में आम आदमी के लिए ही होगा। पिछले आठ महीने के कार्यकाल का लेखा जोखा देते हुए अपनी कमाल की संवाद अदायगी से जिस तरह उन्होंने विपक्ष पर हमला बोला वो सच में कर्ण प्रिय था।  उन्होंने जिस तरह पिछली सरकार में फैले भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया और विपक्ष की बखिया उधेड़ी उससे ये तो साफ़ हो गया कि वो ईमानदारी से देश को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते हैं। 
संसद में मनरेगा की विफलता और कोयले की खानों में बंदर बाँट पर मोदी ने जिस तरह चुटकी ली ,वो सच में कबीले तारीफ़ था। अपने  भाषण के दौरान विपक्ष की तो उन्होंने बोलती ही बंद कर दी। भूमि अधिग्रहण बिल पर संशोधन में बदलाव करने पर सहमती जता कर उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ का परिचय दिया या फिर ये अन्ना की दिल्ली में हुंकार का असर था ये आप खुद तय करें। । 
क्रिकेट वर्ल्ड कप अपने पुरे योवन पर है। नित नए रिकार्ड्स बन रहे हैं। वेस्टइंडीज़ के क्रिस गेल का जिम्बावे के खिलाफ व वर्ल्ड कप का पहला दोहरा शतक , इंडिया की लगातार तीसरी जीत ,अफ़ग़ानिस्तान का मैच जीतना,इंग्लैंड की आयरलैंड से पराजय , न्यूज़ीलैंड के हाथों चार बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त लोगों में चर्चा का विषय बने रहे। एक चाय के खोखे पर चाय की चुस्की लेते हुए दो युवाओं की वार्तालाप ने ये सोचने पर मजबूर कर दिया के क्या सच में क्रिकेट के अधिकतर मैच फिक्स होते हैं। अपनी बातो में वो ज़िक्र कर रहे थे कि जिम्बावे और भारत के मैच में भारत की हार फिक्स है। देखते हैं 14 मार्च शनिवार को ऑकलैंड में होने वाले इस मैच का रिजल्ट क्या होता है।
 चलते चलते आप को बता दूँ कि मध्य प्रदेश के गवर्नर राम नरेश यादव के खिलाफ व्यापम घोटाले (वन रक्षक भर्ती ) के अंतर्गत केस दर्ज हो गया है।बिहार के पूर्व मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव की बेटी का विवाह उतर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री मुलायम सिंह के पौत्र तेज प्रताप सिंह से खूब धूमधाम से हो गई है। शादी पर हुए खर्च  का हिसाब किताब तो आप को वही बता सकते हैं।
राम झूठ न बुलवाए " अच्छे दिन आने वाले हैं " के नाम पर देश की सत्ता बीजेपी को सौंपने वाली जनता का मोदी के भाषणों और वायदों से मोह भांग होने लगा है । नुक्कड़ -चौराहों पर बीजेपी के  " अच्छे दिन आने वाले हैं "वाले नारे को आम आदमी जुमले के तौर पर प्रयोग करने लगा है।
मैं यहाँ कवि दुष्यंत की ये पंक्तियाँ ज़रूर  चाहूंगा : 
" मेले में भटके होते तो कोई घर पहुँचा जाता
हम घर में भटके हैं कैसे ठौर-ठिकाने आएँगे|"

Thursday, 26 February 2015

A LETTER...EK CHITHEE(PART-30)

                                                                    फरवरी नामा
दोस्तों ,
आशा करता हूँ सब कुशल है।
दिल्ली की जनता ने "आप " को प्रचंड बहुमत देकर सच में एक नई राजनीति की शुरूआत कर दी है। साफ़ हो गया है कि जनता अलगवाद या नकारात्मक बातों को समझने लगी है। आज भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की ज़रुरत है। केजरीवाल का इम्तिहान शुरू हो चुका है।
पिछले महीने की तरह इस बार भी शादियों का दौर रहा। मेरे साथ स्कूल में साइंस टीचर पूजा की शादी हो गई है। फिजिकल एजुकेशन टीचर जितेंदर की शादी में भी जाना हुआ।
पड़ौस में मन्नू गर्ग की शादी भी हो गई है। गांव झंझाडी में रवि ने अपने बेटे के जन्म दिवस पर ज़बरदस्त आयोजन किया हुआ था। मैं अपने दोस्त समीर के साथ इस आयोजन में शामिल हुआ।
 मानव कल्याण मंडल की ओर  से आयोजित एक सम्मान समारोह में करनाल के प्रिंसिपलों को सम्मानित किया। इस कार्यक्रम में शामिल होकर मैं गर्वानित महसूस कर रहा हूँ। प्रदेश मुख्य मंत्री के OSD श्री अमरेंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
  भला हो डॉ अजय शर्मा का जिन्होंने मेरी कहानी "गर्म खून " को "दैनिक सवेरा "में किश्तवार छाप दिया।। डॉ अजय दैनिक सवेरा ,जालंधर में कार्यरत हैं ,मैगज़ीन और साहित्य पेज उन्हीं की देखरेख में छपता है। लिंक सलंग्न है :   http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498280, http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498245,http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4498198,http://dainiksaveratimes.epapr.in/c/4539840 / अजय भाई आज कल दूरदर्शन के लिए सीरियल लिखने में व्यस्त हैं।
करनाल से मुंबई में थिएटर की दुनिया में अपना लोहा मनवाने के लिए अमितोष नागपाल  नाटक "पिया बहरूपिया "के शो करने के लिए यूरोप में गया था। इटली से उसने कुछ फोटो भेजी हैं।
फोटो अच्छी खींची हैं।  उनका ग्रुप वापिस मुंबई लोट आया है।
हमारी फिल्म भुजंग के निर्देशक व् लेखक किसी कहानी के सिलसिले में इंग्लैंड पहुँच गए । मोहिन्दर ने वहां से ट्वीट किया के "दुनिया बहुत बड़ी है।"आज जिस तरह लोगों का देश विदेश में आना -जाना हो रहा है और बेतार कम्युनिकेशन का विस्तार हुआ है उससे तो दुनिया बहुत छोटी लगने लगी है।
करनाल में अमितोष के साथ ही नाटक करने वाले डिंपल शर्मा से भी कल बात हुई। वो आजकल ब्रिस्बेन (ऑस्ट्रेलिया ) में है। डिंपल से बात करके अच्छा लगा। मेरे दोस्त समीर के शमदी Mr. Dhull और दामाद मनीष से भी मुलाकात हुई। Mr. Dhull से बात करना अच्छा लगता है।
हर वर्ष की भांति इस साल भी स्कूल में दसवीं के बच्चों के लिए विदाई समारोह का आयोजन किया गया।मोहित और मानसी को  क्रमशः Mr. & मिस फेयरवेल चुना गया।



स्कूल के डायरेक्टर डॉ मदन गुलाटी ने हमेशा की तरह बच्चों का मार्ग दर्शन किया। सुखमनी साहेब का पाठ कर के बच्चों के उज्जवल भविष्य की कामना की गई। नौवीं व दसवीं की इंचार्ज नवज्योत कौर और पूनम ने कार्यक्रम का बखूबी संचालन किया।
22 फरवरी को शादी की 23 वीं सालगिरह मनाई। बच्चों व माता पिता के संग ने इस दिन को यादगार बना दिया। मेरी पत्नी ने मुझे सदा ही सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित किया।
February - 2015
February -1992
मेरी पत्नी ने सदा एक दोस्त की तरह हर दुःख -सुख में मेरा साथ दिया है। मेरा सलाम।
वर्ल्ड कप (क्रिकेट ) की शुरुआत हो चुकी है। इंडिया ने पाकिस्तान को हरा दिया है। इधर युवी के पिता योगराज सिंह अपने बेटे को इंडियन टीम में शामिल न किए जाने से खफ़ा हैं। यही नहीं दक्षिण अफ्रीका पर भी धोनी की टीम ने फतह हासिल कर ली है।
 पेट्रोल महंगा होना शुरू हो गया है। हरियाणा में 5 % वैट बढ़ने से यहाँ के लोगों को ज़्यादा झटका लगा है। इलेक्ट्रिक बिल के दाम भी लगभग 7 रूपए प्रति यूनिट तक पहुँच चुके हैं। घरों के बिलों में कुछ charges ऐसे होते हैं जिनका आम जनता को कतई पता नहीं चलता।
चाय बेचने से विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री पद पर पहुँचने वाले नरेंद्र दामोदर मोदी का सूट 4 करोड़ 31 लाख का बिक गया है। इसे गुजरात के हीरा व्यपारी हिरेन पटेल ने खरीदा है। जनता अच्छे दिन के इंतज़ार में है।
 फिर मिलेंगे अगले ख़त के ज़रिये।