Monday, 21 July 2014

SEXFUL

डॉक्टर डेंग आज सुबह से ही अपने मोबाइल पर व्यस्त था। नया फ़ोन था ,बेटे ने ऑस्ट्रेलिया से भेजा था। इस लिए फ़ोन के साथ कुश्ती तो होनी ही थी। आज सुरजीत का भी आना बार बार हो रहा था। डॉ डेंग और सुरजीत दोनों कार की खरीद फरोख्त का काम करते हैं। सुरजीत कोई खास पढ़ा लिखा नहीं है। डॉक्टर डेंग कोई एप्लीकेशन डाउनलोड करना चाह रहा था। सुरजीत ने डॉक्टर का फ़ोन लिया और वो भी मोबाइल के साथ कुश्ती करने लगा।जब बहुत देर हो गई तो डॉक्टर डेंग ने सुरजीत से पूछा ,"हाँ भाई क्या बना ?" सुरजीत भी मोबाइल से गर्दन निकाल कर बोला ,"हो तो गया भाई डॉक्टर ,पर सैक्सफुल नहीं हो रहा। "वहां बैठे सभी लोग एक क्षण के लिए तो हतप्रद रह गए और एक दूसरे की और देखने लगे।  जब तक सुरजीत को अपनी गलती  का एहसास होता वहां की फ़िज़ा ठहाकों से गूँज उठी थी।
सुरजीत भी खिसयानी हंसी हंसने लगा। असल में अंग्रेजी में हाथ तंग होने के कारण सुरजीत सक्सेस फुल को सेक्सफुल बोल गया। उस दिन के बाद से ही सुरजीत को सभी सेक्सफुल कह कर ही सम्बोधित करने लगे।

Thursday, 17 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-16

दोस्तों नमस्कार।
आप ने मेरा पहला ख़त तो पढ़ ही लिया होगा। आप से बातचीत का सिलसिला बना रहे सो दोबारा मुखातिब हो रहा हूँ।
कल अचानक मेरे एक पुराने दोस्त धर्मेंदर जोशी का फ़ोन आया। धर्मेंदर इंग्लिश ट्रिब्यून के लिए पानीपत जिला के संवाददाता हैं।धर्मेंदर पंजाब के रहने वाले हैं। धर्मेंदर पानीपत से जालंधर जाते हुए कुछ समय के लिए मेरे पास रुके।उन्होंने करनाल हिंदुस्तान टाइम्स में कार्यरत विशाल जोशी को भी स्कूल में ही बुलवा लिया। धर्मेंदर में कमाल का सेंस ऑफ़ ह्यूमर है। खूब बातें हुई।बातों बातों में कुछ पुराने किस्सों का भी ज़िक्र हुआ। दरअसल मैं भी पानीपत से हरियाणा न्यूज़ के लिए खबरनवीस के तौर पर काम किया करता था। वहीँ उनसे मिलना हुआ था। बातों बातों में जब हिसाब लगाया गया तो पता चला के इन बातों को करीब दस वर्ष हो चुके थे। समय की रफ़्तार कभी -कभी बेशक़ तेज़ लगने लगती है।

पिछले खत में लिखा था के मेरी एक सहयोगी रजनी महेंद्रू ने पुत्र को जन्म दिया है। वो मेरे साथ कर्ण पब्लिक स्कूल में काम करती थी। आज कल स्वीडन में रह रही है। आज ही उसकी बहन रीतू स्कूल में मिठाई लेकर आई। मिठाई के बिना जैसे ख़ुशी अधूरी लगती है। रजनी हर रोज़ अपने बेटे की खास फोटो उस की टाइम लाइन पर पोस्ट कर देती है।जुम्मा जुम्मा चार दिन तो हुए हैं  चुनमुन को अपना फेस बुक अकाउंट भी बना लिया। समय के साथ जीवन की रफ़्तार भी तेज़ हो गई है। 

धूप छाँव की तरह जीवन मृत्यु भी सत्य हैं। रिशा के पिता की मृत्यु का समाचार पिछले सप्ताह मिला। रिशा भी मेरे साथ स्कूल में हिसाब की टीचर है। पिता बहुत दारू पीते थे। घर वालों से मनमुटाव रहता था। पिता अपनी पारी खेल कर चले गए हैं। रिशा घर में बड़ी है। घर में माँ और एक छोटी बहन है। रिशा को अब शायद जीवन का हिसाब भी समझना पड़ेगा।
हमारे एक मित्र चाँद बाऊ जी व डब्बू काम्बोज के भाई भी अपनी -अपनी सांसारिक यात्रा पूरी कर के प्रभु चरणों में लीन हो गए हैं।
मेरा फेस बुक परिवार बढ़ता जा रहा है।इस सिस्टम की कोई खास जानकारी न होने कि वजह से हालांकि मैं बहुत संजीदगी और ध्यान से क्लिक करता हूँ। कुछ नए पुराने दोस्तों के बारे में पता चलता रहता है। वक़्त का कमाल है कुछ नए दोस्त पुराने और पुराने नए से लगने हैं। 
14 जुलाई को दलजिंदर का जन्म दिवस था। फ़ोन पर बात हुई। दलजिंदर फिल्म पंजाब 1984 में अपनी परफॉरमेंस को लेकर खुश था। बकौल दलजिंदर ,"बड़े परदे की पहुँच सच में कमाल की है। "
 
अंत में इस चुनौती भरे संसार में आगमन करने वालों को बधाई और शुभकामनायें। इस संसार को छोड़ कर जो चले गए हैं उनकी आत्मा की शान्ति के लिए प्रार्थना।
जल्द ही फिर मिलते हैं। ख़ुदा ख़ैर करे।

Friday, 11 July 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-15

दोस्तों ,
नमस्कार।
कईं दिनों से आप सब से मुखातिब होने की कोशिश करता रहा लेकिन संयोग ही नहीं बना। आज एहसास हुआ के ख़त लिखने के लिए भी माहौल की ज़रुरत होती है।महीने भर की छुटियाँ थी ,लेकिन पूरी छुटियों  में माहौल नहीं बना। खैर आज बमुश्किल अपने आप को तैयार किया के कुछ लिख ही डाला जाए।
आप सब जानते ही हैं के अधिकतर लोगों का जीवन उतार चढ़ाव भरा होता है।जीवन में हम जो चाहते हैं कईं बार उसे हासिल करने में उम्र बीत जाती है।लेकिन देर आये दुरुस्त आए जैसी कहावत भी तो सोच समझ कर लिखी गई होगी।
मेरे दोस्त दलजिंदर सिंह के बारे में मैंने आप सब को पहले भी ज़िक्र किया था। उसने पंजाबी फिल्म "पंजाब 1984 "में  रोल किया था। फिल्म हिट हो गई है। सभी कलकारों ने बहुत बढ़िया अभिनय किया है।दलजिंदर के रोल की भी प्रशंसा की जा रही है। मैं तो उसकी स्मरण शक्ति के साथ -साथ उसके अभिनय का हमेशा से कायल रहा हूँ।शुभकामनायें दलजिंदर।
स्कूलों की छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं। लगभग डेढ़ महीने की छुटियों के बाद भी स्कूल में बच्चों की संख्या अभी तक पूरी नहीं हुई है।माँ -बाप और बच्चे शायद सीबीएसई की शिक्षा प्रणाली को समझने लगे हैं। इस लिए बेफिक्र हैं।
मौसम का मिज़ाज भी कमाल का है ,बिल्कुल शेयर बाजार की तरह। कभी ऊपर तो कभी नीचे। पारा तो कम है लेकिन मौसम में आद्रता अधिक होने के कारण लोग पसीने -पसीने हुए जा रहे हैं। रही सही कसर बिजली विभाग ने पूरी कर दी है। बिजली बाई कुछ इस तरह से आँख मिचोली खेल रही है मानो अपने आशिक़ों का इम्तिहान ले रही हो। लेकिन आशिक़ हैं के अपनी माशूका को भूल कर बुलेट ट्रैन की रफ़्तार की घोषणा से खुश हुए जा रहे हैं।
बरखा ऋतु ने जून के महीने में दस्तक दी थी ,चिलचिलाती गर्मी से कुछ राहत भी मिली थी ,पेड़ पौधों पर पड़ी धूल साफ़ हो गई थी और चारों तरफ हरियाली छाने लगी थी। परन्तु जुलाई महीने में बरखा जैसे रूठ सी गई है। टीवी पर बार बार दिखाया जा रहा है के उत्तर पश्चिम भारत में सुखा पड़ने के आसार हैं।
बातें तो खूब सारी हैं जिन्हें मैं आप सब के साथ शेयर करना चाहता हूँ। हाँ सच बता दूँ मेरा दोस्त समीर नाना हो गया है। बिटिया अमानत और गुड़िआ स्वस्थ हैं। मेरे साथ कर्ण पब्लिक स्कूल में कम्प्यूटर अध्यापिका रजनी महेंद्रू ने भी पुत्र को जन्म दिया है। दोनों तंदुरुस्त हैं।मेरी और से ढुल परिवार व रजनी परिवार के सभी सदस्यों को ढेरों बधाई व शुभकामनायें।
अच्छा दोस्तों विदा लेता हूँ ,जल्द ही आप सब से फिर मुलाकात होगी।
         

Monday, 7 July 2014

DUNIYADARI

                                                                    दुनियादारी 
 कबीर ने जैसे ही चंडीगढ़ में प्रवेश किया उसकी ख़ुशी का कोई ठिकाना न रहा। उसको तो जैसे पंख लग गए थे। आज पहली बार वो अपने बाप के बिना लॉन्ग ड्राइव के लिए निकला था। असल में साथ वाली सीट पर बैठ कर उसका बाप ड्राइविंग टिप्स देता रहता था। जो उसे कतई अच्छा नहीं लगता था।कभी- कभी तो कबीर इतना चिढ़ जाता के बीच रास्ते में गाड़ी रोक कर अपने बाप को कहता ,"लो आप ही गाड़ी ड्राइव कर लो और गाड़ी की चाबी अपने बाप को थमा कर पीछे जा कर बैठ जाता। "
 "गाड़ी धीरे चलाओ" ,"अगली गाड़ी से डिस्टेंस बना कर रखो" ,"यहाँ आप को ब्रेक लगानी चाहिए थी", "ये क्या कर रहे हो" ,"इतने नज़दीक से ओवरटेक नहीं करते" और न जाने क्या -क्या सुनना पड़ता था कबीर  को।
ऐसा नहीं के वो अभी -अभी ड्राइविंग सीखा था। जब दसवीं पास की ,तभी से गाड़ी ड्राइव कर रहा था। अब तो वो इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में प्रवेश कर चुका था। वो अपनी इंजीनियरिंग भी मैकेनिकल में कर रहा था। पर बाप तो बाप होता है। इस लिए बार -बार इंस्ट्रक्शंस दे कर वो आत्म संतुष्ट हो जाता और साथ ही बाप होने का फ़र्ज़ भी अदा कर लेता।
हालाँकि अंदर से बाप अच्छी तरह से जानता था के कबीर ड्राइविंग में परफेक्ट हो चुका है ,फिर भी वो कबीर को  बार -बार समझाता ,"ड्राइविंग का एक नियम गांठ बांध लो ,इस में कभी कोई परफेक्ट नहीं होता। तभी तो रोड पर साइन बोर्ड लगे होते हैं - सावधानी हटी ,दुर्घटना घटी।" जब भी कोई साइन बोर्ड आता कबीर का बाप उसकी और इशारा कर के कबीर को कोई न कोई हिदायत दे डालता।
आज उस के साथ माँ व् बहन थी। असल में वो अपनी बहन को एक कॉम्पिटिशन का पेपर दिलवाने के लिए चंडीगढ़ आया था। चंडीगढ़ को "सिटी ब्यूटीफुल" के नाम से जाना जाता है। इस शहर की सरंचना बख़ूबी की गई है। इस शहर की सुंदरता की तारीफ किए बिना कोई नहीं रह सकता।
ट्रिब्यून चौंक ,लेबर चौंक,किसान भवन ,अरोमा होटल ,२२ -२३ चौंक, बस स्टैंड के सामने से निकलते हुए कबीर स्टेडियम चौंक की और से जैसे ही रोज़ गार्डन वाले रोड पर चढ़ा तो आगे रेड लाइट देख कर उसने अपनी कार को रोक लिया। कबीर अपनी माँ व बहन को चंडीगढ़ के बारे में जानकारी देने लगा।कबीर इस से पहले कईं बार चंडीगढ़ आ चुका था।
अभी कबीर चंडीगढ़ के बारे में बता ही रहा था के ट्रैफिक पुलिस के एक जवान ने ड्राइवर साइड में खिड़की पर दस्तक दी। जैसे ही कबीर ने शीशा नीचे उतारा पुलिस वाले ने गाड़ी साइड पर लगाने का निर्देश दिया। गाड़ी के कागजों की जांच पड़ताल के बाद पुलिस वाले ने कबीर के ड्राइविंग लाइसेंस को तीन -चार बार पलट कर कहा ,"तेरा तो लाइसेंस डुप्लीकेट है काका।"डुप्लीकेट !",जैसे ही कबीर ने रियेक्ट किया तो पुलिस वाला बोला ,"मतलब फोटो कॉपी है काका। " इससे पहले कि कबीर कुछ बोलता पुलिस वाले ने गाड़ी के पिछले शीशे की और इशारा करते हुए कहा ,"शीशे पर काली फिल्म लगी है ,इस फिल्म का भी 2000 रूपए जुर्माना लगेगा। " इस से पहले के कबीर पुलिस वाले को कहता,"सर फिल्म तो मैने उतरवा रखी है और मेरा ड्राइविंग लाइसेंस भी ओरिजिनल है "पुलिस वाला चालान बुक निकाल कर किसी लाला के मुनीम की तरह जुर्माने का जोड़ करते करते बोला ,"काका तेरी कार की तो नंबर प्लेट भी ठीक नहीं है ,तेरा कुल जुर्माना बनता है ------4000 रूपए। " 
कबीर को समझते देर न लगी के पुलिस वाला क्या चाहता है। उसको समझ आ गया के पुलिस वाला चालान काटने के बजाए हड्डी का स्वाद चखना चाहता है।कबीर असमंजस में पड़ गया के इस पुलिस वाले को कितनी घूस दे। इस समय ,कबीर को वो पुलिस वाला अपनी गली के उस कुत्ते की तरह लग रहा था जो बिना वजह वहां से निकलने वालों के पीछे दौड़ता और कभी -कभी किसी को काट भी लेता। क्योंकि कबीर जानता था के वो पुलिस वाला बिना वजह तंग कर रहा है। कबीर ने मन ही मन पुलिस वाले को मोटी  मोटी गालियां निकालते हुए साइड में आने का इशारा किया। अपनी जेब से 500 का नोट निकाल कर उसने पुलिस वाले की हथेली पर रख दिया।कार की सभी खामियाँ दूर हो चुकी थी।पुलिस वाले ने तुरंत चालान बुक बंद कर ली और आगे ध्यान से जाने की हिदायत देते हुए वहां से चले जाने का इशारा किया।
कबीर ने घर पहुँचते ही बाप को ये सारा किस्सा सुनाया।न जाने क्यों इस पूरे किस्से को सुनाते हुए कबीर अपने बाप से बिल्कुल ख़ौफ़ज़दा नहीं था। बाप ने कबीर को कुछ नहीं कहा और मंद -मंद मुस्कराने लगा।
बाप खुश था के कबीर ड्राइविंग के साथ साथ दुनियादारी भी सीख गया है।  
     

Tuesday, 10 June 2014

"SOCIAL MEDIA KA LIKE"

कल नरेश  के पिता की मृत्यु हो गई। उसने दोस्तों को इन्फॉर्म करने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया। उसने अपने स्टेटस पर पोस्ट किया ,"पिता की मृत्यु हो गई है ,अंतिम संस्कार कल रविवार को सुबह 11 बजे होगा। अलग से कोई कार्ड नहीं भेजा जा रहा है। " जिस ने भी दोस्त के स्टेटस को देखा "लाइक " कर दिया।नरेश अपने स्टेटस को देख कर खुश था। शाम तक उसके स्टेटस में "550 लाइक" जुड़ चुके थे।   

Saturday, 7 June 2014

A LETTER...... EK CHITHEE PART-14

दोस्तों ,
नमस्कार।
लगभग एक महीना हो गया है आप से रूबरू हुए। पिछला ख़त 7 अप्रैल को लिखा था। लिखने की ज़रुरत नहीं के विश्व के सब से बड़े और महानतम लोकतंत्र हिंदुस्तान में सत्ता परिवर्तन हो चुका  है।नरेंदर दामोदर दास मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपना काम शुरू कर दिया है। अब तक की कार्यवाही से लग रहा है के जल्द ही देश में सार्थक परिवर्तन देखने को मिलेंगे। अपने मंत्री साथियों को पाँव छूने के बजाए काम करने पर बल देने की सलाह की सभी जगह प्रसंशा की जा रही है।

अप्रैल और मई का महीना कैसे बीता कुछ पता ही नहीं चला। याद करने की कोशिश करता हूँ तो लगता है के पिछले दो महीने जैसे बिना कोई सार्थक काम किए बीत गए। कर्ण पब्लिक स्कूल में काम करते करते और बच्चों के बीच रहते हुए समय कैसे उड़न छू हो जाता है ,सच में पता नहीं चलता। ये दो महीने पूरी तरह से स्कूल को समर्पित रहते हैं। एक तरफ बच्चों के एडमिशन का दबाव रहता है तो दूसरी और बच्चों को सही शिक्षा प्रदान करने के लिए सक्षम अध्यापकों के चयन के लिए भी खासी मशक्क़त करनी पड़ती है।शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। इंग्लिश मीडियम की अंधी दौड़ बच्चों के भविष्य के साथ क्या गुल खिलाएगी,भगवान ही जानें।

अमेरिका से आए पारिवारिक दोस्त मंजीत चीमा से मण्ढौर (अम्बाला )में मुलाक़ात हुई। उनकी पत्नि भी साथ थी। फॉर्मल बातचीत के बाद फ़ोटो सैशन हुआ और एक दूसरे से विदा ली। आजकल मोबाइल फ़ोन ही कैमरा बन गए हैं। झटपट फ़ोटो खींचो और डाल दो सोशल साइट पर।मंजीत भाई अमेरिका आने से पहले कभी कभी बात कर लिया करते थे लेकिन इस मुलाक़ात के बाद अभी तक उन से कोई बात नहीं हुई।

पिछले वर्ष शूट हुई फिल्म भुजंग के प्रदर्शन का सभी बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। ख़ासकर कर्ण पब्लिक स्कूल करनाल के बच्चे। यही नहीं चंडीगढ़ से सुरेन भी अक्सर मैसेज कर पूछ लेता है ,"सर जी कब आ रही है। "यही नहीं फिल्म में एक अहम रोल निभाने वाले कलाकार समीर ने तो प्रण कर लिया है के इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद ही वो कोई अगली फिल्म साइन करेगा। फिल्म के डायरेक्टर मोहिन्दर से इस सिलसिले में जब भी बात होती है तो उस का बस यही जवाब होता है ,"यार फिल्म सबमिट करवा दी है और पास भी हो गई है ,आगे पैसे रिलीज़ करें तो पोस्ट प्रोडक्शन का काम शुरू करें। "सरकारी तंत्र में स्टैम्प लगवाने और फाइलों को इधर उधर करवाने के चक्कर में लोगों के सपने कैसे दब कर रह जाते हैं। ये इस का अच्छा उदाहरण है। हालांकि मोहिन्दर पूर्ण रूप से आशान्वित है के फिल्म १००%रिलीज़ होगी। कल उस की डिपार्टमेंट के लोगों से मीटिंग भी है। "शुभकामनायें दोस्त। "

गर्मियों की छुट्टियाँ शुरू हो चुकी हैं। पारा 47*तक पहुँच चुका है। गर्म हवाओं और आग उगलती गर्मी के कारण दोपहरी को बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।आज कल अलसुबह सैर पर निकल जाता हूँ। अपने मोबाइल से कुछ फोटो खींच कर फेस बुक पर अपलोड कर देता हूँ। आजकल तरबूज़ बेचने वाले जगह -जगह नज़र आ जाते हैं। अपनी सेहत को लेकर लोग जागरूक हो गए हैं। हर जगह योग शिविर चल रहे हैं। आप सब भी अपनी सेहत का ध्यान रखें। इस उम्मीद के साथ के फिर मिलेंगे ,अलविदा दोस्तों !



To be continued.............! 

Friday, 30 May 2014

chunav

दुम हिलाते
निकल पड़ा है
कुतों का झुण्ड
ये मत समझना
के
वफादार
हो गए हैं ,
ध्यान रखना
ये
कुते
काटने
वाले हैं !