राम झूठ न बुलवाए (Part -5 )
आज देश में जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। पशु मांस को लेकर जिस तरह आदमी का आदमी दुश्मन हुए जा रहा है। पुरस्कारों को लौटने का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी को लेकर जिस तरह से पंजाब थम सा गया है। विरोध करने के चक्कर में जिस तरह काली होली खेली जा रही है। जिस तरह आम आदमी के लिए रोज़मर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों मुनासिब दाम नहीं मिल रहे। बॉर्डर पर पाकिस्तान जिस तरह गोलाबारी किए जा रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लिए जिस तरह असुरक्षा बढ़ती जा रही है। जिस तरह देश के अलग अलग कोनों से कमज़ोर वर्ग पर उत्पीड़न और अत्याचार के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। पढ़े -लिखे युवा वर्ग को जिस तरह रोज़गार या स्वरोज़गार के लिए दर - ब -दर धूल फांकनी पड़ रही है । जहाँ शिक्षा का स्तर गिरने के समाचार हैं । जिस तरह अख़बार की सुर्खियां हत्याएं और बलात्कार बनती जा रही हैं। हरियाणा में दलित परिवार के दो नन्हें बच्चों को जिस तरह ज़िंदा जला दिया गया है। उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
यहाँ मुझे बेर्टोल्ट ब्रेष्ट द्वारा कही वो पंक्तियाँ याद आ रहीं हैं जिसमें वो कहते हैं कि आज राजनीति को समझने की ज़रुरत है , "सबसे जाहिल व्यक्ति वह है जो राजनीतिक रूप से जाहिल है। वह कुछ सुनता
नहीं, कुछ देखता नहीं, राजनीतिक जीवन में कोई भाग नहीं लेता। लगता है उसे
पता नहीं कि जीने का खर्च, सब्ज़ियों की,
आटे की, दवाओं की क़ीमत, किराया-भाड़ा, सब कुछ राजनीतिक फ़ैसलों पर निर्भर
करता है। वह तो अपने राजनीतिक अज्ञान पर गर्व भी करता है, और सीना फुलाकर
कहता है कि वह राजनीति से नफ़रत करता है। उस मूर्ख को पता नहीं कि राजनीति
में उसकी ग़ैर-भागीदारी का ही नतीजा हैं वेश्या एँ, परित्यक्त बच्चे़,
लुटेरे और इस सबसे बदतर, भ्रष्ट अफ़सर तथा शोषक बहुराष्ट्रींय कंपनियों के
चाकर।" आज देश में जिस तरह धर्म के नाम पर राजनीति हो रही है। पशु मांस को लेकर जिस तरह आदमी का आदमी दुश्मन हुए जा रहा है। पुरस्कारों को लौटने का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है। श्री गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी को लेकर जिस तरह से पंजाब थम सा गया है। विरोध करने के चक्कर में जिस तरह काली होली खेली जा रही है। जिस तरह आम आदमी के लिए रोज़मर्रा की चीजें खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। दूसरी तरफ किसानों को उनकी फसलों मुनासिब दाम नहीं मिल रहे। बॉर्डर पर पाकिस्तान जिस तरह गोलाबारी किए जा रहा है । देश की राजधानी दिल्ली में बच्चों और महिलाओं के लिए जिस तरह असुरक्षा बढ़ती जा रही है। जिस तरह देश के अलग अलग कोनों से कमज़ोर वर्ग पर उत्पीड़न और अत्याचार के समाचार प्रकाशित हो रहे हैं। पढ़े -लिखे युवा वर्ग को जिस तरह रोज़गार या स्वरोज़गार के लिए दर - ब -दर धूल फांकनी पड़ रही है । जहाँ शिक्षा का स्तर गिरने के समाचार हैं । जिस तरह अख़बार की सुर्खियां हत्याएं और बलात्कार बनती जा रही हैं। हरियाणा में दलित परिवार के दो नन्हें बच्चों को जिस तरह ज़िंदा जला दिया गया है। उससे तो ऐसा लगता है कि जैसे सब कुछ ठीक नहीं चल रहा।
यदि आप बेर्टोल्ट पर यकीन नहीं करते तो जल्दी से किसी ऐसे व्यक्ति को पकड़ लाओ जिसे नज़र उतारना या झाड़ फूँक आता हो । हो सकता है मेरे देश को किसी की नज़र लग गई हो ! जल्दी से इस की नज़र उतार लो भाई !













