कल मतदान का दिन है। मतदान को करीब २४ घंटे बाकी हैं। चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। भोंपू चिल्लाने बंद हो गए हैं। शोरशराबा कम हो गया है। सट्टा बाजार सभी उम्मीदवारों के अलग -अलग भाव लगा रहा है। अफवाहों का बाज़ार गर्म है। अपने अपने अंदाज़ सभी लोग चुनावों के किस्से सुनने सुनाने में मशगूल हैं। कहीं अनाज तो कहीं शराब बांटी जा रही है। कैश बांटने में भी कोई गुरेज़ नहीं किया जा रहा। चुनावों की भाषा में इसे आर पार की लड़ाई का दौर कहा जा रहा है। मोटर गाड़ियों का भरपूर प्रयोग हो रहा है। उम्मीदवार लोगों को लुभाने के नए -नए तरीके अपना रहे हैं।
चुनाव आयोग ने कमर कस ली है ताकि कोई वोटर को खरीद न सके। छापे मारे जा रहे हैं। कई ट्रक शराब के पकडे भी जा चुके हैं। नेताओं ने भी शराब पिलाने के नायाब तरीके निकाल लिए हैं। बैंक से दस दस के नए नोटों की गड्डियां ले ली गई हैं। नोटों के सीरियल नम्बर के हिसाब से नोट बांटे जा रहे हैं। जितने 10 के नोट उतनी शराब की बोतलें। ठेके पर 10 का नोट दो और बोतल लो। ठेके वालों से हिसाब बाद में होता रहेगा। आज खबर छपी है के चुनाव आयोग चुस्त दुरुस्त है।
लोग कह रहे हैं के नेता तो नेता हैं ! आज की रात क़यामत की रात होगी !
चुनाव आयोग ने कमर कस ली है ताकि कोई वोटर को खरीद न सके। छापे मारे जा रहे हैं। कई ट्रक शराब के पकडे भी जा चुके हैं। नेताओं ने भी शराब पिलाने के नायाब तरीके निकाल लिए हैं। बैंक से दस दस के नए नोटों की गड्डियां ले ली गई हैं। नोटों के सीरियल नम्बर के हिसाब से नोट बांटे जा रहे हैं। जितने 10 के नोट उतनी शराब की बोतलें। ठेके पर 10 का नोट दो और बोतल लो। ठेके वालों से हिसाब बाद में होता रहेगा। आज खबर छपी है के चुनाव आयोग चुस्त दुरुस्त है।
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