Thursday, 23 October 2014

shame to you

दीपावली के अवसर पर एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला चल रहा था। कोई फ़ोन से तो कोई उपहार का आदान प्रदान कर के दीवाली का त्यौहार मना रहा था।
 कबीर का दोस्त सोनू भी क्यों पीछे रहता। सोनू कभी स्कूल नहीं गया था। लेकिन  अक्षर ज्ञानी था।
 फ़ोन पर मैसेज भेजना हो या फेस बुक पर कोई comment करना हो, सोनू बखूबी कर लेता।
 अंग्रेजी में हाथ तंग होने के कारण कभी कभी अर्थ बदल जाता।
 दीपावली के अवसर पर उसके दोस्तों ने उसके face book पर ढेरों बधाई सन्देश भेजे।
 सोनू खुश था। वो सभी को जवाब देने में मशगूल था।
सोनू को अधिकतर messages थे , " Happy Diwali "
 सोनू सभी को जवाब दे रहा था ................ "shame to you !"

Monday, 13 October 2014

KYAAMAT KI RAAT

कल मतदान का दिन है। मतदान को करीब २४ घंटे बाकी हैं। चुनाव प्रचार समाप्त हो गया है। भोंपू चिल्लाने बंद हो गए हैं। शोरशराबा कम हो गया है। सट्टा बाजार सभी उम्मीदवारों के अलग -अलग भाव लगा रहा है। अफवाहों का बाज़ार गर्म है। अपने अपने अंदाज़ सभी लोग चुनावों के किस्से सुनने सुनाने में मशगूल हैं। कहीं अनाज तो कहीं शराब बांटी जा रही है। कैश बांटने में भी कोई गुरेज़ नहीं किया जा रहा। चुनावों की भाषा में इसे आर पार की लड़ाई का दौर कहा जा रहा है। मोटर गाड़ियों का भरपूर प्रयोग हो रहा है। उम्मीदवार लोगों को लुभाने के नए -नए तरीके अपना रहे हैं।
 चुनाव आयोग ने कमर कस ली है ताकि कोई वोटर को खरीद न सके। छापे  मारे जा रहे हैं। कई ट्रक शराब के पकडे भी जा चुके हैं।  नेताओं ने भी शराब पिलाने के नायाब तरीके निकाल लिए हैं। बैंक से दस दस के नए नोटों की गड्डियां ले ली गई हैं। नोटों के सीरियल नम्बर के हिसाब से नोट बांटे जा रहे हैं। जितने 10 के  नोट उतनी शराब की बोतलें। ठेके पर 10 का नोट दो और बोतल लो। ठेके वालों से हिसाब बाद में होता रहेगा। आज  खबर छपी है के चुनाव आयोग चुस्त दुरुस्त है।
लोग कह रहे हैं के नेता तो नेता हैं ! आज की रात क़यामत की रात होगी !

Tuesday, 7 October 2014

A Letter....Ek Chithee Part-21

                                                         समय चक्र 
 आज सुबह नींद जल्दी खुल गई। उठा तो सोचा सैर पर निकल लेता हूँ ,लेकिन अभी तीन ही बजे थे। मन किया क्यों न कुछ लिख लिया जाए। लिखना तो क्या था। बैठ गया पढ़ने पुरानी चिठियों को। पेन कागज़ की जगह आज कल लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन्स ने ले ली है। जैसे ही लिखने बैठा ,सोचा कुछ पुराना लिखा हुआ पढ़ लिया जाए। मैं आप को अब तक 20 चिठियां लिख चुका हूँ। ये आप को मेरी 21 वीं चिठ्ठी है। पहली चिठ्ठी 30 जनवरी 2014 और पहला ब्लॉग 15 सितम्बर 2013 को लिखा था । लगभग एक साल से चिठियों , कहानियों और ब्लॉग्स के ज़रिए आप से अपने मन की बात करता आ रहा हूँ ।
भला हो धीरेश सैनी का जो सन 2011 में मेरे घर आया और मेरा फेस बुक अकाउंट खोल गया। धीरेश सैनी  लम्बे समय तक करनाल अमर उजाला में पत्रकार के रूप में काम करता रहा। मेरी उससे मुलाक़ात बस यूं ही हो गई थी। कलम पर उस की पकड़ कमाल की है।आज कल फेस बुक के ज़रिये कभी कभी फॉर्मल बातचीत हो जाती है। हर आदमी अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त है। समय के साथ -साथ शायद धीरेश की दुनिया भी बदली है।  ये समय चक्र का ही कमाल है।

पिछले साल सितम्बर-ऑक्टूबर 2013 में एक कॉलेज में नाटक करवाया था। इस बार फिर ठेका मिला है। लेखक और निर्देशक कुछ नया और प्रासंगिक करने के लिए जूझ रहे हैं। इस सोच के साथ के शायद कुछ सृजन हो जाए।  नाटक नया है , कॉलेज वही है , कुछ पात्र बदल गए हैं लेकिन परिस्थितियां और सोच वही है। कॉलेज में नाटक करना भी नाटक हो गया है। यहाँ समय चक्र अपना कमाल कब दिखाएगा कुछ मालूम नहीं।
काजल को छोड़ कर नाटक में एक्टिंग कर रही सभी लड़कियां नई हैं। किसी ने भी इस से पहले कभी नाटक नहीं किया है। काजल ,स्मृति ,प्रीति ,सोनम ,सोनाली ,दीक्षा  रूचि और भारती सभी बढ़िया काम कर रही हैं। नाटक के प्रति सब की लग्न देखते ही बनती है।
ये समय चक्र का ही कमाल है के फेस बुक के ज़रिए लगभग 27 बरस बाद कॉलेज के कुछ साथियों गगन अत्रेजा , रणवीर कुंडू और अतुल शर्मा से मुलाकात हो गई। कॉलेज के दिनों में गगन ग़ज़ल गायिकी का जानामाना नाम था। गगन आजकल किसी दवाइयों की कंपनी में अच्छी पोस्ट पर है। रणवीर कुंडू दिल्ली high court में वकील हो गया है। इन दोनों से फेसबुक पर मिलना तो हुआ लेकिन कोई खास बात नहीं हुई। कितना अजब है के हम जान कर भी अनजान हैं !! अतुल शर्मा करनाल में ही है। अतुल से अक्सर बढ़िया बातचीत हो जाती है।
चलते -चलते आप को बता दूँ आज मेरी जीवन संगिनी हरदीप का जन्म दिवस है। पिछले 32 सालों से हम एक दूसरे के साथ हैं। जीवन में बहुत कुछ बदला है। अगर कुछ नहीं बदला है तो वो है हरदीप का स्वभाव ,विश्वास प्यार , समर्पण और खुद हरदीप। पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो सच में ऐसा लगता है के अगर हरदीप मेरे जीवन में नहीं होती तो ये जीवन अधूरा सा होता।
जन्म दिन मुबारक दीपे !