समय चक्र
आज सुबह नींद जल्दी खुल गई। उठा तो सोचा सैर पर निकल लेता हूँ ,लेकिन अभी तीन ही बजे थे। मन किया क्यों न कुछ लिख लिया जाए। लिखना तो क्या था। बैठ गया पढ़ने पुरानी चिठियों को। पेन कागज़ की जगह आज कल लैपटॉप और मोबाइल फ़ोन्स ने ले ली है। जैसे ही लिखने बैठा ,सोचा कुछ पुराना लिखा हुआ पढ़ लिया जाए। मैं आप को अब तक 20 चिठियां लिख चुका हूँ। ये आप को मेरी 21 वीं चिठ्ठी है। पहली चिठ्ठी 30 जनवरी 2014 और पहला ब्लॉग 15 सितम्बर 2013 को
लिखा था । लगभग एक साल से चिठियों , कहानियों और ब्लॉग्स के ज़रिए आप से अपने मन की बात करता
आ रहा हूँ ।
भला हो धीरेश सैनी का जो सन 2011 में मेरे घर आया और मेरा फेस बुक अकाउंट खोल गया। धीरेश सैनी लम्बे समय तक करनाल अमर उजाला में पत्रकार के रूप में काम करता रहा। मेरी उससे मुलाक़ात बस यूं ही हो गई थी। कलम पर उस की पकड़ कमाल की है।आज कल फेस बुक के ज़रिये कभी कभी फॉर्मल बातचीत हो जाती है। हर आदमी अपनी अपनी दुनिया में व्यस्त है। समय के साथ -साथ शायद धीरेश की दुनिया भी बदली है। ये
समय चक्र का ही कमाल है।
पिछले साल सितम्बर-ऑक्टूबर 2013 में एक कॉलेज में नाटक करवाया था। इस बार फिर ठेका मिला है। लेखक और निर्देशक कुछ नया और प्रासंगिक करने के लिए जूझ रहे हैं। इस सोच के
साथ के शायद कुछ सृजन हो जाए। नाटक नया है , कॉलेज वही है , कुछ पात्र बदल गए हैं लेकिन परिस्थितियां और सोच वही है। कॉलेज में नाटक करना भी नाटक हो गया है। यहाँ
समय चक्र अपना कमाल कब दिखाएगा कुछ मालूम नहीं।
काजल को छोड़ कर नाटक में एक्टिंग कर रही सभी लड़कियां नई हैं। किसी ने भी इस से पहले कभी नाटक नहीं किया है। काजल ,स्मृति ,प्रीति ,सोनम ,सोनाली ,दीक्षा रूचि और भारती सभी बढ़िया काम कर रही हैं। नाटक के प्रति सब की लग्न देखते ही बनती है।
ये
समय चक्र का ही कमाल है के फेस बुक के ज़रिए लगभग 27 बरस बाद कॉलेज के कुछ साथियों
गगन अत्रेजा , रणवीर कुंडू और अतुल शर्मा से मुलाकात हो गई। कॉलेज के दिनों में गगन ग़ज़ल गायिकी का जानामाना नाम था। गगन आजकल किसी दवाइयों की कंपनी में अच्छी पोस्ट पर है। रणवीर कुंडू दिल्ली high court में वकील हो गया है। इन दोनों से फेसबुक पर मिलना तो हुआ लेकिन कोई खास बात नहीं हुई।
कितना अजब है के हम जान कर भी अनजान हैं !! अतुल शर्मा करनाल में ही है। अतुल से अक्सर बढ़िया बातचीत हो जाती है।
चलते -चलते आप को बता दूँ आज मेरी जीवन संगिनी हरदीप का जन्म दिवस है। पिछले 32 सालों से हम एक दूसरे के साथ हैं। जीवन में बहुत कुछ बदला है। अगर कुछ नहीं बदला है तो वो है हरदीप का स्वभाव ,विश्वास प्यार , समर्पण और खुद हरदीप। पीछे मुड़ कर देखता हूँ तो सच में ऐसा लगता है के अगर हरदीप मेरे जीवन में नहीं होती तो ये जीवन अधूरा सा होता।
जन्म दिन मुबारक दीपे !