एक शोक सभा में जाने का अवसर मिला। दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए पाठ चल रहा था। जितने लोग हॉल में थे ,उतने ही बाहर खड़े थे। अलग -अलग झुंडों में अलग -अलग चर्चा चल रही थी। चुनाव नज़दीक होने के कारण अधिकतर लोग चुनावों पर बतिया रहे थे।मृतक का भाई भी बाहर खड़ा था। वो नज़दीकी सम्बन्धियों और मित्रों को मिलने में व्यस्त था।
बाहर खड़े लोगों में अधिकतर नेता और अफसर थे जो अपने -अपने चाटुकारों से घिरे हुए थे। आज कल शोक सभाएं भी शक्ति प्रदर्शन का अखाडा लगने लगी हैं। बाहर खड़ी लाल और नीली बत्ती वाली गाड़ियों से तो कुछ ऐसा ही लग रहा था।
शोक सभा समाप्त होने में अभी देरी थी , मैं भी समय बिताने के लिए एक झुण्ड के समीप हो लिया। इस झुण्ड में मृतक का भाई सुल्तान और कुछ सम्बन्धी आपस में बतिया रहे थे। इधर उधर की बात करने के बाद सुल्तान ताली पीटते हुए ज़ोर से बोला,"कोई ग़म नहीं है भाई के जाने का,मौज कर के गया है।अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। घोड़े जैसा था अब तक !" सुल्तान की बात सुन कर सब ने ज़ोर का ठहाका लगाया।
ठहाकों के बीच एक लाल बत्ती लगी गाड़ी की कूँ कूँ ने शोक स्थल के बाहर खड़े सभी लोगों का ध्यान अपनी और खींच लिया। गाड़ी को देखते ही सुल्तान गाड़ी की तरफ हो लिया। गाड़ी से उतरने वाले व्यक्ति से सभी का परिचय करवाते हुए सुल्तान बोला ,"अपने दामाद के बड़े भाई हैं ,"मलखान सिंह " कमिश्नर हैं आज कल। " पास खड़े लोगों में से कुछ अपनी मुंडी हिलाते हुए एक स्वर में बोले ,"जनाब को कौन नहीं जानता। " अपनी प्रशंसा सुनते ही मलखान सिंह का चेहरा लाल गुलाब की तरह खिल उठा।
मलखान ने सुल्तान को एक तरफ ले जा कर शोक प्रकट किया। लेकिन सुल्तान तो जैसे भाई के चरित्र का सर्टिफिकेट सब को दे देना चाहता था। उसने मलखान का हाथ दबाते हुए फिर दोहराया ,"मौज कर के गया है भाई। अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर ,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। बिल्कुल घोड़े जैसा था अब तक !" मलखान सिंह के चेहरे पर भी एक कमीनी सी मुस्कान दिखाई देने लगी।बाकी सभी लोगों ने इस बार ठहाका तो नहीं लगाया लेकिन एक कटु मुस्कान सब के चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही थी।
बातों बातों में मलखान का भाई जगतार भी मण्डली में शामिल हो गया और सुल्तान दूसरे रिश्तेदारों को मिलने लगा। उसने आते ही भाई को प्रणाम किया और भाभी व बच्चों के बारे में पूछने लगा। मलखान सिंह के चेहरे पर उदासी छा गई। इस से पहले के मलखान सिंह कुछ बोलता , झुण्ड में से ही एक परिचित ने उदासी भरे लहज़े से पूछा ," सब ठीक तो है कमिशनर साब ?"
"हाँ , कल सुबह जब्बर भगवान को प्यारा हो गया ,घर में मातम छाया हुआ था !"भरे हुए गले से मलखान सिंह बोला।
मलखान की बात सुनते ही सारा वातावरण ग़मगीन हो गया। हालांकि बहुत सारे लोग जब्बर से परिचित नहीं थे। भाई को उदास देख जगतार बोला ,"आप ने बताया भी नहीं ,कैसे हुआ ये सब ?"
"कईं दिनों से बीमार चल रहा था," मलखान ने जवाब दिया।
इतने में सुल्तान फिर वहां पहुँच गया। माहौल को उदास देख उसने इशारों इशारों में उदासी का कारण जानने की कोशिश की।जगतार सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए बोला , "भाई साब के कुत्ते की मौत हो गई आज सुबह , बहुत प्यारा और समझदार कुत्ता था।सुल्तान, जगतार की बात सुनते ही अफ़सोस करते हुए बोला ,"ओहो ! पिछली बार ही तो मिला था मैं , बहुत प्यार करते थे बच्चे उससे। घर में तो सभी बहुत उदास होंगे !"इतने में जगतार बोला ,"बिल्कुल घर के मेंबर की तरह था जब्बर। "
इससे पहले के कमिशनर साब कुछ बोलते ,झुण्ड में खड़े सभी लोग शोक प्रकट करने लगे !
बाहर खड़े लोगों में अधिकतर नेता और अफसर थे जो अपने -अपने चाटुकारों से घिरे हुए थे। आज कल शोक सभाएं भी शक्ति प्रदर्शन का अखाडा लगने लगी हैं। बाहर खड़ी लाल और नीली बत्ती वाली गाड़ियों से तो कुछ ऐसा ही लग रहा था।
शोक सभा समाप्त होने में अभी देरी थी , मैं भी समय बिताने के लिए एक झुण्ड के समीप हो लिया। इस झुण्ड में मृतक का भाई सुल्तान और कुछ सम्बन्धी आपस में बतिया रहे थे। इधर उधर की बात करने के बाद सुल्तान ताली पीटते हुए ज़ोर से बोला,"कोई ग़म नहीं है भाई के जाने का,मौज कर के गया है।अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। घोड़े जैसा था अब तक !" सुल्तान की बात सुन कर सब ने ज़ोर का ठहाका लगाया।
ठहाकों के बीच एक लाल बत्ती लगी गाड़ी की कूँ कूँ ने शोक स्थल के बाहर खड़े सभी लोगों का ध्यान अपनी और खींच लिया। गाड़ी को देखते ही सुल्तान गाड़ी की तरफ हो लिया। गाड़ी से उतरने वाले व्यक्ति से सभी का परिचय करवाते हुए सुल्तान बोला ,"अपने दामाद के बड़े भाई हैं ,"मलखान सिंह " कमिश्नर हैं आज कल। " पास खड़े लोगों में से कुछ अपनी मुंडी हिलाते हुए एक स्वर में बोले ,"जनाब को कौन नहीं जानता। " अपनी प्रशंसा सुनते ही मलखान सिंह का चेहरा लाल गुलाब की तरह खिल उठा।
मलखान ने सुल्तान को एक तरफ ले जा कर शोक प्रकट किया। लेकिन सुल्तान तो जैसे भाई के चरित्र का सर्टिफिकेट सब को दे देना चाहता था। उसने मलखान का हाथ दबाते हुए फिर दोहराया ,"मौज कर के गया है भाई। अभी एक महीना पहले ही सिंगापुर ,थाईलैंड और कईं देश घूम कर आया था। बिल्कुल घोड़े जैसा था अब तक !" मलखान सिंह के चेहरे पर भी एक कमीनी सी मुस्कान दिखाई देने लगी।बाकी सभी लोगों ने इस बार ठहाका तो नहीं लगाया लेकिन एक कटु मुस्कान सब के चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही थी।
बातों बातों में मलखान का भाई जगतार भी मण्डली में शामिल हो गया और सुल्तान दूसरे रिश्तेदारों को मिलने लगा। उसने आते ही भाई को प्रणाम किया और भाभी व बच्चों के बारे में पूछने लगा। मलखान सिंह के चेहरे पर उदासी छा गई। इस से पहले के मलखान सिंह कुछ बोलता , झुण्ड में से ही एक परिचित ने उदासी भरे लहज़े से पूछा ," सब ठीक तो है कमिशनर साब ?"
"हाँ , कल सुबह जब्बर भगवान को प्यारा हो गया ,घर में मातम छाया हुआ था !"भरे हुए गले से मलखान सिंह बोला।
मलखान की बात सुनते ही सारा वातावरण ग़मगीन हो गया। हालांकि बहुत सारे लोग जब्बर से परिचित नहीं थे। भाई को उदास देख जगतार बोला ,"आप ने बताया भी नहीं ,कैसे हुआ ये सब ?"
"कईं दिनों से बीमार चल रहा था," मलखान ने जवाब दिया।
इतने में सुल्तान फिर वहां पहुँच गया। माहौल को उदास देख उसने इशारों इशारों में उदासी का कारण जानने की कोशिश की।जगतार सस्पेंस से पर्दा उठाते हुए बोला , "भाई साब के कुत्ते की मौत हो गई आज सुबह , बहुत प्यारा और समझदार कुत्ता था।सुल्तान, जगतार की बात सुनते ही अफ़सोस करते हुए बोला ,"ओहो ! पिछली बार ही तो मिला था मैं , बहुत प्यार करते थे बच्चे उससे। घर में तो सभी बहुत उदास होंगे !"इतने में जगतार बोला ,"बिल्कुल घर के मेंबर की तरह था जब्बर। "
इससे पहले के कमिशनर साब कुछ बोलते ,झुण्ड में खड़े सभी लोग शोक प्रकट करने लगे !











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to be continued.........................