Wednesday, 21 May 2014

achhe din aane vaale hain.......!

अच्छे दिन आने वाले हैं................. !
लो जी विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र हिंदुस्तान की राजनीति में विश्व रिकॉर्ड बन गया है। स्वतन्त्र देश में जन्म लेने वाला पहला व्यक्ति २६ मई को विश्व के सब से बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहा है।पिछले करीब 65 साल से देश की सत्ता पर काबिज कांग्रेस की ये सब से बढ़ी हार हुई है। 
 नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा के सेंट्रल हॉल में दिए गए भाषण को सुन रहा था। वाह जी वाह मोदी जी !आप तो छा गए। कमाल  का भाषण दिया। तालियां बजीं ,आंसू बहे ,माँ को याद किया गया। अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की फिल्म का डायलाग याद आ गया , "मेरे पास माँ है। " टीवी वाले अलग -अलग ढंग से आप के भाषण को बार -बार दिखा रहे हैं। दिखाएँ भी क्यों ना.……टी आर पी का चक्कर जो है।
यही नहीं संसद में प्रवेश से पहले जिस तरहां से नतमस्तक हो कर सलाम किया गया वो सच में काबीले तारीफ़ है।आडवाणी और वाजपायी को जिस तरह से सम्मान दिया गया उस से भारतीय संस्कृति को बखूबी प्रचारित और प्रसारित करने में आप कामयाब हुए हैं। 
ये बाल धुप में सफ़ेद नहीं किए हैँ ,इस लकोक्ति के मायने समझ आने लगे हैं। समझ में आने लगा है के किला फ़तेह करने के लिए कला और कौशल दोनों की ज़रुरत होती है।जोकि मोदी ने बखूबी किया है। पूरा देश मोदीमय हो गया है। मोदी के बोलने के स्टाइल की वाजपाई के साथ तुलना की जा रही है।
आशावाद ,देशभक्ति ,महिलाओं की सुरक्षा ,गरीबों के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए जिस तरह मोदी ने संसद में बैठे जनप्रतिनिधिओं को सरकार के मायने बताए वो निःसंदेह सराहनीय है।सरकार का मतलब है लोगों की सरकार ,जो लोगों के बारे में सोचे और जो लोगों के सपने ले। वाह जी वाह मोदी जी। आपने संसद में अपने पहले भाषण से अपने साथिओं को जो संकेत दिए हैं ,मैं उस की मुक्त कंठ से  प्रसंशा करता हूँ। राह आसान नहीं है परन्तु यदि होंसले बुलंद हों और नियत में कोई खोट न हो तो मंज़िल नज़दीक नज़र आने लगती है।
मोदी को हिंदुस्तान की जनता ने जिस तरह से बहुमत दिया है उससे मोदी की ज़िम्मेदारी और बढ़ गई है। नुक्कड़ पर चाय की दुकान पर चाय पीता रिक्शा चालक या कॉलेज में पढ़ने वाला कोई बालक ,पान की दुकान पर धुंए के छलै बनाता कोई दिलजला आशिक या फिर कोई दार्शनिक ,बस में सफर करते दो अनजान यात्री हों या फिर किसी वातानुकूलित कमरे में बैठे दो घनिष्ठ मित्र ,दफ्तरों में काम करते बाबू या फिर एकांत में चिलम पीते साधू ,क्या दुकानदार ,हवालदार ,जैलदार या फिर कोई पहरेदार सभी के मुख पर बस एक ही बात है, "ये मोदी ज़रूर कुछ करेगा।"टीवी पर बेशक प्रचार प्रसार रुक गया हो लेकिन अब आम आदमी के ओंठों पर बस एक ही गीत है , "अच्छे दिन आने वाले हैं !"
शुभकामनायें !

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