Sunday, 26 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-33)

                                                           जुलाई नामा -2015 

दोस्तों नमस्कार !
आप सब तो जानते ही हैं कि मैं करनाल में कर्ण पब्लिक स्कूल में कार्यरत हूँ। लम्बी छुट्टियों के बाद स्कूल खुल चुके हैं। ऐसा महसूस होता है जैसे जान में जान आ गई हो। स्कूल में बच्चों के साथ असल मस्ती , दुनिया से बेखबर उनका भोलापन और चुलबुली शरारतें हर पल इक नई सीख दे जाती हैं।  स्कूल का दसवीं का रिजल्ट घोषित हो चुका है।  इस बार भी आशा के अनुरूप रिजल्ट अच्छा रहा। मोहित ने दसवीं में 100 % marks लेकर एक मिसाल कायम कर दी।   इस के अलावा,मानसी ने 96 % marks हासिल किए। नमन ,करणवीर और रूचि दसवीं का इम्तिहान पास नहीं कर पाए। हार जीत जीवन का हिस्सा है और उम्मीद  है कि सभी बच्चे अपने जीवन के इम्तहान में ज़रूर कामयाब होंगे। यहाँ मैं आप को ये बता देना चाहता हूँ कि हमारे स्कूल में अधिकतर मेहनतकश लोगों के बच्चे पढ़ते हैं। मुझे उन की आँखों में अपने बच्चों को लेकर बुने जाने वाले सपनों को नज़दीक से महसूस करने का मौका मिलता है। मेरी सदा यही कोशिश रहती है की बच्चे पढ़ लिखकर अपनी ज़िन्दगी की किताब खुद लिख सकें और स्कूल के सभी अध्यापक एक टीम की तरह बखूबी मेरे साथ कंधे से कन्धा मिला कर चलते हैं।

 जून में करनाल में राज्य स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। कर्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी इस में शिरकत की। जून की छुट्टियों में ही करनाल के निक्का सिंह पब्लिक स्कूल में जाने का मौका मिला। मेरे गुरु व मेरे दोस्त मोहिन्दर के पिता डॉ मदन गुलाटी ने सभी आगंतुकों का खूब मान -सम्मान किया।
 अपनी इन चिट्ठियों के ज़रिए लगभग दो साल पहले लिखने का सिलसिला शुरू किया था। भला हो भाई मोहिन्दर प्रताप सिंह का जिसने हमेशा मुझे लिखने के लिए प्रोत्साहित किया। मोहिन्दर ख़ुद एक लेखक है और मुंबई में एडवरटाइजिंग और फिल्म क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।  उसने बताया कि वो उसने एक पंजाबी फिल्म लिखी  र है जिसकी शूटिंग शुरू हो चुकी है । अमितोष नागपाल और मोहिन्दर दोनों आज कल मिल कर काम कर रहे हैं और  Big Magic channel के लिए एक serial टेढ़ी मेढ़ी फैमिली लिख रहे हैं ,जिसका प्रसारण शुरू हो चुका है। अमितोष भी मुंबई फ़िल्मी दुनिया में अपना भाग्य आजमा रहा है।
 डॉ अजय शर्मा का ज़िक्र चला है तो बता दूँ कि उनके द्वारा दूरदर्शन( किसान  )के लिए लिखित सीरियल "आधारशिला " प्रसारण शुरू हो चुका है । इस सीरियल में डॉ शर्मा ने एक्टिंग के क्षेत्र में अपना खाता खोल लिया है। इसे संयोग ही कहेंगे कि इस सीरियल में मेरा पुराना साथी दलजिंदर सिंह मुख्य पात्र अभिनीत कर रहा है। दलजिंदर ने 1988 में चंडीगढ़ से इंडियन थिएटर किया था। दलजिंदर आजकल एक पंजाबी फिल्म "कप्तान   " की शूटिंग में व्यस्त है। दलजिंदर यह फिल्म Gipy Grewal  के साथ कर रहा है।
 डॉ शर्मा मेरे पुराने मित्र हैं और लेखन क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान है। आजकल दैनिक सवेरा  जालंधर (पंजाब ) में कार्यरत हैं। उनके साथ बातचीत का सिलसिला ऐसा शुरू हुआ के सुबह उठते ही उनसे बातचीत न हो तो ऐसा लगता है कि जैसे कुछ छूट सा गया है। दैनिक सवेरा में मेरी दो कहानियां -"स्कूल फीस " और "गर्म ख़ून " (चार किश्तों में ) के अलावा एक कविता -"उदास चेहरा "प्रकाशित हो गई। इस चिठ्ठी के माध्यम से मेरा डॉ शर्मा को दिली धन्यवाद।
हरियाणा में मानसून शुरू हो चूका है। बरसात के कारण किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। पिछले एक हफ्ते से लगातार बरसात के कारण मौसम ख़ुशगवार और सुहाना हो गया है !
हालांकि बीच में humidity के कारण गड़बड़ हो जाती है। सैर का सिलसिला जारी रखने की कोशिश करता हूँ और घूमते -घूमते फोटो खींचने की लत लग गई है। 
पिछले ख़त में आपको बताना भूल गया था कि मेरे साथ स्कूल में काम करने वाली रेनू सास बन गई है। उसकी बेटी की शादी में शिरकत की। शादी जिस सादगी से हुई वो सच में तारीफे क़ाबिल था। यहाँ उसका ज़िक्र करना इस लिए ज़रूरी क्योंकि आजकल की चमक -धमक वाली शादियों में फ़िज़ूल खर्ची बहुत होती है। रेनू ने बताया कि लड़के वालों ने शादी में शगुन  के रूप में मात्र एक रुपया लिया। इस के अलावा कुछ भी लेने से लड़के वालों ने साफ़ इंकार कर दिया। लड़के वालों को मेरा सलाम !
  अमेरिका में भतीजे सिकंदर और उसकी पत्नि सुखमन को पुत्र प्राप्ति हुई है। सांगवान परिवार को मेरी ढेरों शुभ कामनाएं।
यहाँ मुझे निदा फ़ाज़ली का एक शेर याद आ रहा है:
"घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
रोते हुए किसी बच्चे को हंसाया जाए " 
 जय हो दोस्तों ! फिर मिलते हैं !

Sunday, 19 July 2015

A LETTER...EK CHITHEE(Part-32)

                                                                    जून -2015
दोस्तों नमस्कार !
स्कूलों में छुटियाँ खत्म हो चुकी हैं । गर्मियों की इन छुट्टियों में ज़्यादातर दिनों में मौसम सुहाना ही बना रहा। बच्चों से 6 जुलाई को  मिलना हुआ  , बच्चों से दूर एक महीने भर की छुट्टियां बीताना काफी मुश्किल भरा रहा। स्कूल खुलने के साथ सच में ऐसा लगा मानो बगिया फूलों से खिल उठी हो।


बेटे कशिश ने मैकेनिकल में B.Tech कर लिया है। कईं जगह apply किया लेकिन किसी एक जगह से भी कॉल नहीं आई।  इस बात से पता चलता है की देश में रोज़गार  की कितनी समस्या है। दुनिया से बेखबर कशिश आज कल एक पुरानी गाड़ी को modify करने में मशगूल है।
उसका कहना है कि जीवन में वही काम करना चाहिए जो आप को अच्छा लगता है। कशिश का उत्साह और passion देखते बनता है ,मेरी शुभकामनायें।

लम्बे समय से जिस  इंतज़ार था वो घड़ी भी आ ही गई।  कर्ण पब्लिक स्कूल में भुजंग फिल्म का निर्माण दो साल पहले हुआ था।  इस फिल्म में रोल करने वालों ने अभी तक इस फिल्म को देखा नहीं था।  १४ जून को चंडीगढ़ के ललित कला अकादमी auditorium में इस फिल्म को दिखाया गया। फिल्म में काम करने वाले लोगों से पुनः मिलना हो गया ,अच्छा लगा।  फिल्म देखने के लिए कास्ट डायरेक्टर ज्योतिका , costume designer सुप्रीत चीमा , anchor प्रितमा , सुरेन , प्रोडक्शन इंचार्ज प्रवीन सहित करीब 250 लोगों ने फिल्म को देखा। यही नहीं फिल्म के दो मुख्य बाल कलाकारों यशित और सिद्धांत ने भी अपने -अपने परिवार के सदस्यों के साथ शिरक़त की। फिल्म में मुख्य भूमिका "शंटी " का क़िरदार  निभाने वाला कलाकार ज़ुबिन गैर हाज़िर रहा।

जालंधर से दलजिंदर, मुंबई से फिल्म के लेखक/निर्देशक मोहिंदर प्रताप सिंह ने भी शिरकत की।   दोस्त अनुराग भी मुंबई काम के सिलसिले में चंडीगढ़ आया हुआ था ,रात को मोहाली अनुराग के फ्लैट में ही रुकना हुआ। रात को दलजिंदर के गीत सुनते रहे। ये रात यादगार बन गई।
जून की छुट्टियों में कसौली भी घूम आया। पहाड़ों का खुशनुमा मौसम और प्राकृतिक सुंदरता मुझे हमेशा सुहाती है। हालाँकि पहाड़ों पर बढ़ता कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक खटकता है लेकिन पहाड़ों की सादगी और हरयावल हमेशा भाती है।
कसौली से २-३ किलोमीटर पहले ही गड़खल में दोस्त अमन सेठ की माता जी से भी मिल आया। कुछ दिनों पहले अमन के पिता की मृत्यु हो  गई थी। अमन के पिता कसौली और आसपास के इलाके में "सेठ साहब" के नाम से मशहूर थे और सरकारी ठेकेदार थे। मैं कईं बार उनसे मिला।  उनकी सादगी ,साफगोही और मिलनसार व्यक्तित्व हमेशा मेरे ज़हन में बसा रहेगा। दिवंगत आत्मा को मेरी श्रद्धांजलि !
धूप -छाँव और दुःख -सुख की तरह जीवन -मृत्यु भी अटल सत्य हैं। जो जीव जन्म लेता है उसकी मृत्यु निश्चित है। मेरे एक पुराने मित्र नवीन की माता जी भी अपनी जीवन यात्रा पूरी कर गईं। पड़ोस में रहने वाले नीटू भाई की माता जी और मन्नू भाई के पिता भी इस मायावी दुनिया को अलविदा कह गए। मेरे मित्र नवीन के पास सुपरवाइजर के तौर पर काम करने वाले मेरे अजीज़ रवि के छोटे भाई ने आत्म हत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। रवि ने बताया के उसका छोटा भाई कोई स्थाई रोज़गार ना मिलने के कारण परेशान रहता था। सभी दिवंगत आत्माओं को मेरी हार्दिक श्रद्धांजलि !
आज सुबह ही मशहूर रूमानी शायर अहमद फ़राज़ की एक ग़ज़ल पढ़ रहा था। उस ग़ज़ल के दो अलग अलग शेर आप की नज़र कर रहा हूँ :
                                              "सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
                                                सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

                                                सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
                                                ये बात है तो चलो बात करके देखते हैं "

दोस्तों , बातों का सिलसिला इसी तरह चलता रहे। वैसे इस चिठ्ठी में कईं बातें जो छूट गई हैं , अगले ख़त के साथ उनका ज़िक्र ज़रूर करूंगा। अब आप से विदा लेता हूँ।
जय हो !