Sunday, 6 September 2015

A LETTER...EK CHITHEE (PART-36) राहगिरी !

राहगिरी !

दोस्तों चलो थोड़ी राहगिरी हो जाए। 
मेरा शहर करनाल स्मार्ट सिटी हो गया है। हाल ही में देश में कुल 98 शहरों के साथ मेरे शहर को भी स्मार्ट घोषित किया जाना सच में गर्व की बात है। शहर में दूसरे बड़े शहरों की तरह हर संडे को एक कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, कार्यक्रम का नाम है ----"राहगिरी ! "
नाम अच्छा है ! प्रयास अच्छा है ! कमाल तो यह है कि इस आयोजन का प्रारूप पुलिस विभाग और करनाल पुलिस मुखिया पंकज नैन द्वारा किया गया है। इस की शुरुआत 30 अगस्त 2015 को की गई । शहर से बाहर होने के कारण मैं इसकी opening में शिरकत नहीं कर पाया था। आज इस प्रोग्राम में शामिल होने के लिए कल ही भाई समीर और राहुल के साथ तय हो गया था।
घूमते हुए जैसे ही मैं सब्ज़ी मंडी चौंक पर पहुंचा , सुबह - सुबह सड़कों पर लोगों के झुण्ड देख कर अच्छा लगा। बच्चे ,युवा ,महिलाएं व बुज़ुर्ग सभी जगह जगह पर होती activities का भरपूर लुत्फ़ उठा रहे थे। अधिकतर लोग सपरिवार बच्चों के साथ आए हुए थे। मुझे तो ये कार्यक्रम इस लिहाज़ से बहुत अच्छा लगा कि लोग sunday के दिन घर से निकल कर आए और ख़ूब मस्ती करते नज़र आए!
सब्ज़ी मंडी रोड ,कुंजपुरा रोड और Old G T Road  ब्लॉक कर दिए गए और रोज़मर्रा के कामों को बंद कर के मस्ती के लिए खोल दिए गए। कईं स्थानों पर बढ़े -बढ़े मंच बना दिए गए जहाँ डांस और गाने के कार्यक्रम चलते रहे।  सब्ज़ी मंडी के मुख्य चौंक पर गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल के बच्चों द्वारा बैंड बजाया जा रहा था। उभरती प्रतिभाओं के लिए इस तरह के मंच कारगर हो सकते हैं !
करनाल के खेलकूद विभाग का सहयोग इस आयोजन में साफ़ नज़र आ रहा था। सड़क के बीचों बीच कहीं तलवार बाज़ी हो रही थी तो कहीं गतका खेल जा रहा था।
कुछ बच्चों ने तो सड़क के बीच में ही बैडमिंटन का नेट बाँध लिया था। नेहरू प्लेस की पार्किंग में गद्दे बिछाकर कबड्डी खेलते युवा सब को आकर्षित कर रहे थे। कहीं रस्सा कूदा जा रहा था तो कहीं एक बड़े से टेबल पर chess खेलते बच्चे इस बात से बेख़बर नज़र आ रहे थे कि उन्हें भी लोग देख रहे हैं। हाथों में तिरंगा लिए skating करते बच्चे सबके आकर्षण का केंद्र बने हुए थे।  कईं जगहों पर गानों के साथ डांस और कसरत करने का भरपूर फायदा उठाया जा रहा था। योगा class में भी लोगों की भागेदारी कोई कम नहीं थी। निःसंदेह इस से बच्चों का रुझान खेलों की और बढ़ेगा ,जोकि ज़रूरी भी है।
मानव सेवा संघ के संचालक प्रेम मूर्ति जी हमेशा की तरह लोगों को पानी पिलाने के लिए अपनी रेहड़ी पर कायम खड़े थे। मैं उनको काफी देर तक देखता रहा। गर्मी बढ़ चुकी थी लेकिन उनके पास पानी पीने वाला कोई नहीं आया।
शायद शहर के साथ लोग भी स्मार्ट हो गए हैं। सफाई और hygine के मायने समझने लगे हैं। मैं प्रेम मूर्ति जी की कार्यनिष्ठा पर कोई सवाल नहीं खड़ा कर रहा बल्कि बस इतना कहना चाहता हूँ कि समय के
साथ -साथ कार्यप्रणाली और नई टेक्नोलॉजी को adopt कर लेना चाहिए। दूसरी सामाजिक संस्थाएं इस में अपना सहयोग दें तो समस्या का निपटारा हो सकता है !
"राहगिरी" में करनाल के प्रतिष्ठित समाज सेवियों ,राजनीतिज्ञों ,खिलाडियों ,कलाकारों ,रंगकर्मियों और संस्कृति प्रेमियों की भागेदारी देख कर मन गदगद हो गया। बहुत सारे पुराने मित्रों से इस बहाने मिलना भी हो गया। सोच रहा था मौज मस्ती के साथ साथ युवा क्रांति , सांस्कृतिक उत्थान , मेलजोल और सामयिक व गंभीर विषयों पर बहस के लिए भी इस मंच को  बखूबी प्रयोग किया जा सकता है। आखिरकार क्रांति इसी तरह ही तो आती हैं !
चप्पे चप्पे पर पुलिस मुस्तैद नज़र आ रही थी।
खुद करनाल पुलिस प्रमुख ने सपरिवार इस कार्यक्रम में शामिल होकर प्रोग्राम में चार चाँद लगा दिए।
मंच पर बच्चों के साथ नृत्य कर के उन्होंने जनता का मन जीत लिया। पुलिस अफसर ने जनता के बीच जाकर सेल्फ़ी और फोटो भी खिंचवाए। इस तरह जनता के मन से पुलिस का डर और खौफ तो दूर होगा ही बल्कि जनता और पुलिस के बीच की खाई को भी पाटा जा सकेगा !

यहाँ मैं आज ही के एक किस्से का ज़िक्र भी ज़रूर करना चाहूँगा। घर की तरफ वापिस चलने लगा तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति अपने बच्चों के साथ राहगिरी में शामिल होने के लिए अपनी मोटर साइकिल खड़ी कर रहा था। सहसा पीछे से एक आवाज़ आती है ," ओ ,यो आपणी मोटर साइकिल उर्रै न खड़ी कर्रै !" इस कर्कश आवाज़ ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। ये आवाज़ एक पुलिस अफसर की थी जिसकी ड्यूटी बैरियर के तौर पर बांधी  गई रस्सी के एक कोने पर थी। मैं पुलिस वाले इस अफसर के समीप पहुँच चुका था जो एक छोर पर अपने दूसरे सहयोगी के साथ कुर्सी पर बैठा था। बात यहीं तक होती तो शायद मैं इस का ज़िक्र कतई न करता। इससे पहले कि वो आदमी संभल पाता पुलिस वाला किसी गुंडे की तरह अपने एक हवालदार की ओर इशारा करके बोला ,"यो मोटर साइकिल बाहर करवा साले की ! इन्हैं दीखता नहीं एड बड़ी रस्सी बांध कै बेठे हैं हम !" मेरी नज़र साथ खड़ी गाड़ी पर पड़ी जिस पर लिखा था ,"सुरक्षा ,सहयोग और सहायता !" 

पिछले दिनों एक आर्टिकल पढ़  रहा था। उसमें लिखा था की कोई भी शहर या देश तभी स्मार्ट बनता है जब वहां के लोग smart हो जाते हैं। जनता और कार्य पालिका आपसी सहयोग करते हैं , सौहार्द और प्रेमभाव से रहने के साथ एक दूसरे का सम्मान करते हैं !





अंत में आयोजकों को मेरी ओर से इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई व शुभकामनायें !